भोपाल में शुरू होगी मप्र की पहली जीआइएस लैब, सैटेलाइट कैमरे से रखी जाएगी अतिक्रमण पर नजर

अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार लैब के आरंभ होने से मध्य प्रदेश के विभिन्न शहरों में होने वाले नए निर्माणों पर भोपाल से नजर रखा जाना संभव होगा। इसके माध्‍यम से नए निर्माण की जानकारी संबंधित शहर के निगमायुक्‍त को मोबाइल के माध्‍यम से मिल जाएगी। इसे जांच के बार कार्रवाई में भी आसानी हो जाएगी।

By Hemant Kumar Upadhyay

Publish Date: Wed, 19 Jun 2024 06:36:06 AM (IST)

Up to date Date: Wed, 19 Jun 2024 06:36:06 AM (IST)

लैब के शुरू होते ही नए निर्माणों पर भोपाल से नजर रखी जाएगी। – सांकेतिक चित्र।

HighLights

  1. जीआइएस लैब के लिए टेंडर हुए जारी, जल्द शुरू होगा काम।
  2. नगरीय निकायों में जीआइएस संपत्तियों की मैपिंग करवाई जा रही।
  3. इसमें पंजीयन और राजस्व विभाग के अधिकारी मदद करेंगे।

मदनमोहन मालवीय, भोपाल। मध्‍य प्रदेश की पहली जीआइएस लैब भोपाल में शुरू होगी। इसके लिए सभी तरह की प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा टेंडर भी जारी कर दिए गए हैं। अब काम शुरू किया जाना है।

इस लैब के शुरू होते ही मध्य प्रदेश के विभिन्न शहरों में होने वाले नए निर्माणों पर भोपाल से नजर रखी जाएगी। दरअसल, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा राजस्व और पंजीयन विभाग की मदद से नगरीय निकायों में जियोग्राफिकल इंफार्मेशन सिस्टम (जीआइएस) संपत्तियों की मैपिंग करवाई जा रही है।

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इस मैपिंग के बाद शहरों में जहां भी नया निर्माण होगा, उसकी जानकारी भोपाल में बनाई जा रही लैब से संबंधित शहर के निगमायुक्त के मोबाइल पर पहुंच जाएगी। इसके आधार पर वह जांच करवाकर कार्रवाई कर सकेंगे।

इसमें पंजीयन और राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा मदद की जाएगी। अब तक भोपाल, इंदौर, सागर, मुरैना, ग्वालियर सहित अन्य शहरों में संपत्तियों की जीआइएस मैपिंग की जा चुकी है जबकि शेष जिलों में अभी जारी है।

इस तरह काम करेगी जीआइएस लैब

सैटेलाइट के साथ-साथ रिमोट सेंसिंग एजेंसी से मैप डाटा और लाइव फीड लेंगे। इसके लिए एजेंसी से टाइअप होगा। यहां 15 एक्सपर्ट की टीम होगी। लैब शुरू होने पर रिमोट सेंसिंग एजेंसी जैसे ही डाटा देगी, उस आधार पर संबंधित नगर निगम को सूचना भेजकर कार्रवाई करवाई जाएगी। लैब द्वारा ली गई फोटो प्रत्येक 15 से 30 दिन में अपडेट होगी। इस दौरान यदि अवैध निर्माण होता दिखा, तो निगम की टीम मौके पर पहुंचेगी। इसके बाद भी यदि लापरवाही की गई तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।

अभी खाली प्लाट पर दिखते हैं निर्माण

भोपाल में वर्ष 2016-17 में प्राॅपर्टी टैक्स के लिए जीआइएस सर्वे शुरू हुआ था, जो अब भी आधा-अधूरा है। सर्वे के बाद मकानों बिल्डिंगों का क्षेत्र बढ़ा हुआ दिखाई देता है और खाली भूखंड पर भी निर्माण नजर आते हैं। वर्ष 2016-17 के बाद से कई इमारतें बनी हैं, ऐसे में दोबारा से सर्वे किया जाना जरूरी है।

करवाई जा रही है मैपिंग

नगरीय प्रशासन एवं विकस विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रथम चरण में डेढ़ दर्जन नगर निगमों के भवनों की जीआइएस मैपिंग कराई गई है। भोपाल, इंदौर, मुरैना, सागर सहित कुछ जिलों में काम पूरा हो चुका है। इस लैब से यह पता चल सकेगा कि निर्माण अवैध या वैध। इसके बाद आगे की कार्रवाई करने में आसानी होगी ।

इनका कहना है

जीआइएस लैब शुरू करने को लेकर प्रक्रिया जारी है। जिलों में मैपिंग का काम भी कराया जा रहा है। इसके लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। जल्द ही काम शुरू कर दिया जाएगा।

– भरत यादव, आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग