अखिलेश यादव ने पेपर लीक मामले में BJP सरकार को घेरा, कहा- परीक्षा आयोजन बना कमाने का जरिया
अखिलेश यादव ने पेपर लीक के मुद्दे को उठाकर भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि विभिन्न परीक्षाओं का पेपर लीक होना, परीक्षा में सेंटर से लेकर सॉल्वर तक की धांधली, परीक्षा कराने वाली एजेंसी का काम शक के घेरे में आना, यह एक गंभीर समस्या है। उन्होंने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वह अपने चौतरफा भ्रष्टाचार से युवाओं के भविष्य को मुक्त रखे।
By Anurag Mishra
Publish Date: Mon, 17 Jun 2024 09:01:35 PM (IST)
Up to date Date: Mon, 17 Jun 2024 09:01:35 PM (IST)

HighLights
- पेपर लीक होना युवाओं के लिए मानसिक त्रासदी: अखिलेश यादव
- पूरे परिवार को मुश्किल समय से निकाल पाना चुनौती- अखिलेश यादव
- अब परीक्षा में नहीं होगी धांधली इसकी कौन लेगा गारंटी- अखिलेश यादव
डिजिटल डेस्क, इंदौर। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पेपर लीक मामले में भाजपा सरकार को घेरने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि परीक्षा का आयोजन कहीं पैसा कमाने का जरिया ना बन जाए। अब आगे कोई घपला घोटाला नहीं होगा इसकी गारंटी कौन देगा।
अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा कि विभिन्न परीक्षाओं का पेपर लीक होना, परीक्षा में सेंटर से लेकर सॉल्वर तक की धांधली होना, परीक्षा कराने वाली एजेंसी का काम शक के घेरे में आना, रिजल्ट में ग्रेस मॉर्क्स की हेराफेरी होना, मनचाहे सेंटर मिलना, एक ही सेंटर से कई कैंडिडेट का सेलेक्ट होना और 100 प्रतिशत आना केवल एग्जाम मैनेजमेंट की समस्या नहीं है।
इन सबसे बढ़कर ये एक मानसिक त्रासदी है, जिससे न केवल परीक्षा देने वाले युवा बल्कि उनके माता-पिता भी ग्रसित हो रहे हैं।
पैसा कमाने का जरिया ना बने परीक्षा का आयोजन
उन्होंने कहा कि अगर, पुलिस भर्ती, एआरओ, नीट जैसी धांधली की शिकार अन्य परीक्षाएं रद्द होकर दुबारा होती भी हैं, तो इस बात की गारंटी कौन लेगा कि अगली बार परीक्षा आयोजित किए जाने पर ऐसा कुछ भी घपला-घोटाला नहीं होगा। सरकार और उसकी व्यवस्था वही है, तो ये सब धांधलियां फिर से सरकार संरक्षित ‘परीक्षा माफियाओं’ के लिए पैसा कमाने का जरिया न बन जाएं।
भ्रष्टाचार से मुक्त रखें युवाओं का भविष्य
अखिलेश यादव ने आगे कहा कि युवा मानस वैसे ही बहुत नाज़ुक होता है। ऐसे में उनको संभालना माता-पिता के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती होती है। ऐसी घटनाओं से हताश-निराश होकर, जब माता-पिता खुद व्यवस्था पर भरोसा खो देते हैं और उन्हें अपने बच्चों का भविष्य अंधकारमय दिखने लगता है, तो भला वो क्या अपने बच्चों का सहारा बनेंगे।
सरकार इस संकट को एक मनोवैज्ञानिक दृष्टि से भी देखे और कम-से-कम युवाओं के मामलों को अपने चौतरफा भ्रष्टाचार से मुक्त रखे। ये देश के भविष्य का सवाल है।

