MP Tourism Place: खंडवा में बैक वाटर के टापुओं से प्रदेश में पर्यटन का नया अध्याय, सी प्लेन से पहुंच सकेंगे पर्यटक
बोरियामाल, धारीकोटला और गुजरीमाल टापू चारों और जल संपदा से घिरे हैं। टापू पर वनक्षेत्र भी है। इन टापुओं को पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने को लेकर मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने तीन वर्ष पहले कार्य शुरू किया था। दो दर्जन से अधिक टापुओं के नैसर्गिक सौंदर्य का आनंद ले सकेंगे।
By Manish Kare
Publish Date: Solar, 16 Jun 2024 01:00:35 AM (IST)
Up to date Date: Solar, 16 Jun 2024 01:00:35 AM (IST)

HighLights
- बैक वाटर के टापुओं पर हर्बल पार्क, ईको पर्यटन केंद्र हो रहे तैयार
- पर्यटकों को मिलेगी सौगात, सी प्लेन से उठा सकेंगे पर्यटन का लुफ्त
- हट कैंपिंग टेंट, बोटिंग एडवेंचर एक्टिविटी शुरू करने की तैयारी
मनीष करे, नईदुनिया : खंडवा : श्री महाकाल महालोक और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए आने वाले देश-दुनिया के पर्यटकों को अब खंडवा जिले की बांध परियोजनाओं के बैक वाटर में उभरे दो दर्जन टापुओं पर पर्यटन की नई सौगात मिलेगी। दरअसल, जगद्गुरु शंकराचार्य की दीक्षास्थली वाले इस क्षेत्र में इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बांध परियोजनाओं के बैक वाटर में उभरे टापुओं का नैसर्गिक सौंदर्य और प्राकृतिक नजारे पर्यटकों को रास आने लगे हैं।
यहां के बोरियामाल, धारीकोटला और गुजरीमाल टापू चारों और जल संपदा से घिरे हैं। टापू पर वनक्षेत्र भी है। इन टापुओं को पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने को लेकर मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने तीन वर्ष पहले कार्य शुरू किया था। ज्यादातर जगहों पर कार्य पूर्ण होने की ओर है। कुछ जगहों पर उत्तराखंड की एक कंपनी के साथ मिलकर स्पोटर्स और वाटर एडवेंचर एक्टिविटी शुरू की जा रही है। नागरबेड़ा आइलैंड पर पर्यटक सी-प्लेन के जरिए पहुंचेंगे और पूरे क्षेत्र में एक के बाद एक दो दर्जन से अधिक टापुओं के नैसर्गिक सौंदर्य का आनंद ले सकेंगे।
ओंकारेश्वर और उज्जैन आने वाले पर्यटक सैलानी, हनुवंतिया के साथ अब प्राकृतिक पुरा संपदा से घिरे इन टापुओं पर भी ठहर सकेंगे। बोरियामाल, धारीकोटला और गुंजारीमाल टापू बनेंगे ईको पर्यटन केंद्र हनुवंतिया और नागरबेड़ा के अलावा बोरियामाल, धारीकोटला और गुंजारीमाल टापू को वन विभाग ईको पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बना रहा है। इसके लिए विभाग ने शासन को प्रस्ताव भी बनाकर भेजा हुआ है।
बोरियामाल और धारीकोटला चारों ओर पानी से घिरे हुए टापू हैं। यहां तक पहुंचने के लिए मोटरबोट का सहारा लेना पड़ता है। नागरबेड़ा आईलैंड को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का काम शुरू किया गया है। पर्यटन विकास निगम ने उत्तराखंड की राजेश एरो स्पोर्ट्स एडवेंचर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से पर्यटन केंद्र और आयुर्वेदिक हर्बल पार्क के रूप में विकसित करने का करार किया है। इंदिरा सागर बांध के बैकवाटर में 400 एकड़ के नागरबेडा टापू पर करीब 30 हेक्टेयर में पर्यटन स्थल आकार लेगा। एडवेंचर स्पोर्ट्स और सी प्लेन की सुविधा भी पर्यटकों को मिल सकेगी।
सात करोड़ का तितली पार्क कुछ ही दिनों में होगा तैयार
हरसूद तहसील में चारखेड़ा स्थित बैक वाटर में तितलियों का संसार बसाया जा रहा है। वन विभाग द्वारा यहां 150 से अधिक प्रजाति की तितलियां रखी जाएंगी। ये पार्क बनकर तैयार हो चुका है। विभाग 10 हेक्टेयर में ईको टूरिज्म के अंतर्गत हट कैंपिंग टेंट, बोटिंग एडवेंचर एक्टिविटी शुरू करने की तैयारी कर रहा है। 14 हेक्टेयर में फैले बटर फ्लाई पार्क में पर्यटकों को ठहरने के लिए रिसोर्ट भी प्रस्तावित है। इसका संचालन ईको टूरिज्म बोर्ड भोपाल करेगा।
हनुवंतिया टापू
हनुवंतिया और सैलानी की सफलता के बाद नए क्षेत्र हो रहे विकसित पर्यटन विभाग ने बैक वाटर में सबसे पहले हनुवंतिया वाटर स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स तैयार किया था। मध्य प्रदेश में जल पर्यटन स्थल के रूप में राष्ट्रीय ही नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अब यह अपनी पहचान बना चुका है। इसे मिनी गोवा और मध्यप्रदेश का स्विट्जरलैंड कहा जाता है। हर साल नवंबर-दिसंबर में यहां दो माह का जल महोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस दौरान डेढ़ से दो लाख पर्यटक यहां आते है।
इसी तरह सैलानी टापू ओंकारेश्वर के नजदीक होने से तीर्थयात्रियों और सैलानियों के लिए बेहतर प्राकृतिक पर्यटन स्थल बन गया है। बैकवाटर में टापू पर स्थित इस द्वीप में पर्यटकों को ठहरने के लिए काटेज, सुइट, रेस्टारेंट और मनोरजंन के लिए के स्पीड बोटिंग, स्कर्फिंग, पैडल बोटिंग जैसी जल पर्यटन गतिविधियों का आनंद ले सकते हैं।
महाकाल लोक बनने के बाद बढ़ गई दर्शनार्थियों और पर्यटकों की संख्या
खंडवा जिले में 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिलिंग स्थित है। यहां देशभर से प्रतिदिन 30 से 40 हजार श्रद्धालु दर्शनों के लिए पहुंचते थे, लेकिन उज्जैन में महाकाल लोक बनने के बाद यहां दर्शनार्थियों की संख्या बढ़ गई है। अध्यात्म और आस्था के केंद्र ओंकारेश्वर से सनातन का संदेश देने वाले आदिगुरु शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची प्रतिमा स्टेच्यू आफ वननेस के साथ शंकराचार्य प्रकल्प के अंतर्गत संग्रहालय एवं विश्वविद्यालय प्रस्तावित है। यहां से एकात्मता और अद्वैत का संदेश विश्व को मिलेगा।

