‘मणिपुर कर रहा शांति का इंतजार’…, मोहन भागवत बोले- इस पर ध्यान देना प्राथमिकता
नागपुर में संघ के कार्यक्रम आरएसएस के सरसंघ चालक मोहन भागवत ने मणिपुर पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि मणिपुर एक साल से जल रहा है। यह शांति के इंतजार में है। इस पर ध्यान देने की जरूरत है।
By Anurag Mishra
Publish Date: Mon, 10 Jun 2024 09:54:36 PM (IST)
Up to date Date: Mon, 10 Jun 2024 09:54:36 PM (IST)

एएनआइ, महाराष्ट्र। नागपुर में संघ के कार्यक्रम आरएसएस के सरसंघ चालक मोहन भागवत ने मणिपुर पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि मणिपुर एक साल से जल रहा है। यह शांति के इंतजार में है। इस पर ध्यान देने की जरूरत है।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि कुछ दिन पहले बहुत गर्मी थी। यह साल किसी भी अन्य साल की तुलना में अधिक गर्म था। हर जगह यही स्थिति थी, यहां तक कि हिल स्टेशनों में भी बहुत गर्मी थी। बेंगलुरु को जल संकट का सामना करना पड़ा। ग्लेशियरों के पिघलने के बारे में समाचार में लेख आ रहे हैं। दुनिया भर में जलवायु संकट है।
हम प्रकृति के हिस्से हैं- मोहन भागवत
उन्होंने कहा कि भारत अपनी संस्कृति के कारण पर्यावरण के अनुकूल काम करता है। भारत को भी इस संकट का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि विकास के रास्ते का दृष्टिकोण अधूरा है। हर किसी को बदलना होगा, लेकिन दुनिया भारत का अनुसरण करने वाली है। हमें विकास के लिए अपना रास्ता खुद बनाना होगा। हम प्रकृति के विजेता नहीं हैं, हम इसका एक हिस्सा हैं। हमें इसके पालन-पोषण का ध्यान रखना होगा। हमें इसके अनुरूप अपने विकास के मापदंड तय करने होंगे।
#WATCH | Nagpur, Maharashtra: RSS chief Mohan Bhagwat says, “Manipur has been awaiting peace for a 12 months now. It was peaceable for 10 years. It appeared that the previous gun tradition had ended. It’s nonetheless burning within the fireplace of the sudden pressure that rose there or that was made to rise… pic.twitter.com/RrviLfF5XL
— ANI (@ANI) June 10, 2024
मणिपुर पर ध्यान में देना कर्तव्य
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि मणिपुर एक साल से शांति का इंतजार कर रहा है। यहां 10 साल से शांति थी। ऐसा लग रहा था कि पुरानी बंदूक संस्कृति खत्म हो गई है। यह अभी भी वहां अचानक बढ़े तनाव की आग में जल रहा है। इसका ध्यान कौन रखेगा? इसे प्राथमिकता देना और इस पर ध्यान देना कर्तव्य है।

