MP Lok Sabha Election 2024: नरेन्द्र मोदी की राम-राम घरों तक पहुंची, लोकल कनेक्ट से भाजपा जीती

मध्य प्रदेश लोकसभा चुनाव में सात मई को भीषण गर्मी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खरगोन और धार में सभा कर चार संसदीय क्षेत्र पर फोकस किया था।

By PremVijay Patil

Publish Date: Wed, 05 Jun 2024 11:26:05 AM (IST)

Up to date Date: Wed, 05 Jun 2024 11:34:03 AM (IST)

धार में भाजपा प्रत्याशी सावित्री ठाकुर की जीत के बाद भाजपा नेतागत जीत की खुशी मनाते हुए।

HighLights

  1. भाजपा ने समय की नजाकत को ध्यान में रखकर चुनाव के एक सप्ताह पहले प्रधानमंत्री की सभा करवाई।
  2. मोदी ने राष्ट्रीय मुद्दों को जनता के सामने रखा लेकिन वे लोकल कनेक्ट पर ज्याद केंद्रित थे।
  3. धार में भोजशाला शब्द बोलकर ही वे भाजपा के लिए जीत के अंतर का बड़ा सेतु बना गए थे।

MP Lok Sabha Election 2024: प्रेमविजय पाटिल, नईदुनिया, धार। धार-महू लोकसभा के साथ रतलाम-झाबुआ और खरगोन-बड़वानी लोकसभा सीटों में जीत के लिए कांग्रेस और भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी। भीषण गर्मी ने पसीना बहाया। इसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का राष्ट्रीय और लोकल कनेक्ट का जादू चल गया। सात मई को भीषण गर्मी में प्रधानमंत्री ने खरगोन और धार में सभा कर चार संसदीय क्षेत्र पर फोकस किया।

धार में तो उन्होंने भोजशाला और मांडू का जिक्र कर स्थानीय कनेक्ट ऐसा बनाया कि 13 मई तक मोदी की राम-राम घर-घर तक पहुंच गई। खरगोन में आदिवासी मतदाताओं से-वारलूं छे और मां नर्मदा के माध्यम से जुड़े थे, वहीं कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की आदिवासी और आरक्षण की बात असरकारी नहीं रही।

छह माह पहले मालवा-निमाड़ में विधानसभा चुनाव के प्रदर्शन से भाजपा के प्रदेश और राष्ट्रीय नेतृत्व को चिंता थी, इसलिए प्रधानमंत्री फरवरी में जब इलेक्शन मोड में आए तो उन्होंने सबसे पहले आदिवासी वोटरों को साधने के लिए झाबुआ में अपनी सभा की। हालांकि तब चुनावी कार्यक्रम घोषित नहीं हुआ था।

मोदी ने इस जीत की आधारशिला रख दी थी। उसके बाद राहुल गांधी ने भी अपने वोट बैंक को बनाए रखने के लिए धार जिले के बदनावर व रतलाम में भारत जोड़ो अभियान के तहत बड़ी सभा की।

यहां पर अपने सभी कांग्रेसी विधायकों को एक जाजम पर बैठाया और जीत के लिए मंत्र भी दिया। इस तरह से दोनों ही राजनीतिक दल मालवा-निमाड़ के इन लोकसभा क्षेत्रों में चुनाव कार्यक्रम के पहले ही कमर कस चुके थे। आचार संहिता लागू हुई और चुनावी सरगर्मी में दोनों पार्टी को फिर इस क्षेत्र की याद आई। प्रधानमंत्री वैसे तो अप्रैल में ही धार आने वाले थे।

भाजपा ने समय की नजाकत को ध्यान में रखकर चुनाव के एक सप्ताह पहले प्रधानमंत्री की सभा करवाई। सात मई को धार और खरगोन में सभा हुई। इन सभा में मोदी ने राष्ट्रीय मुद्दों को जनता के सामने रखा लेकिन वे लोकल कनेक्ट पर ज्याद केंद्रित थे।

धार में डा. आंबेडकर का जिक्र करना नहीं भूले, वहीं धार में भोजशाला शब्द बोलकर ही वे भाजपा के लिए जीत के अंतर का बड़ा सेतु बना गए थे। निमाड़ में भी मां नर्मदा के माध्यम से स्थानीयता को स्पर्श किया, वहीं घर-घर तक मोदी की राम-राम पहुंचे लगी। 13 मई को यह राम-राम वोट में तब्दील हो गई और आज नतीजा सामने है।

आदिवासी और आरक्षण की बात को नकारा

राहुल गांधी ने खरगोन के सेगांव और आलीराजपुर के जोबट में सभा की। इन सभाओं में उन्होंने आदिवासी और आरक्षण के माध्यम से अपने वोट बैंक को बढ़ाने की जुगत लगाई थी। यह प्रयास सफल नहीं हो पाया। अंचल में आदिवासी और आरक्षण के मुद्दे को तव्वजो नहीं मिली।