फॉर्म 17C डेटा: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की सभी दलीलें, याचिकाकर्ता से कहा- ‘यह आ बैल मुझे मार जैसा’

चुनाव आयोग का मानना है कि फॉर्म 17सी के हर मतदान केंद्र पर डाले गए वोटों का रिकॉर्ड ऑनलाइन जारी करने से मतदाताओं के बीच भ्रम पैदा होगा।

By Arvind Dubey

Publish Date: Fri, 24 Might 2024 07:43:30 AM (IST)

Up to date Date: Fri, 24 Might 2024 12:41:20 PM (IST)

फॉर्म 17C डेटा: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की सभी दलीलें, याचिकाकर्ता से कहा- ‘यह आ बैल मुझे मार जैसा’
Lok Sabha Election 2024: फॉर्म 17सी के तहत हर मतदान केंद्र पर डाले गए वोटों का रिकॉर्ड जारी किया जाता है।

HighLights

  1. NGO एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने दायर की थी याचिका
  2. फॉर्म 17सी डेटा अपलोड करने की मांग पर EC साफ कर चुका था अपना रुख
  3. चुनाव आयोग पर लगे हैं वोटिंग पर्सेंट देर से जारी करने के आरोप

एजेंसी, नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान वोटिंग प्रतिशत पर शुरू से सभी की नजर रही। मतदान प्रतिशत में कमी की चिंता के बीच चुनाव आयोग द्वारा कथित रूप से मतदान प्रतिशत का फाइनल आंकड़ा देरी से जारी करने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। इस पर शुक्रवार को भी अहम सुनवाई हुई।

चुनाव आयोग को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की सभी दलीलो को सीरे से खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म 17सी पर आधारित डेटा को सार्वजनिक करने की याचिकाकर्ताओं की सभी दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया।

सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग के वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने अदालत का ध्यान ईसीआई सीए के पैरा 58 की ओर आकर्षित किया, ताकि यह दिखाया जा सके कि कैसे याचिकाकर्ता ने पूर्व सीईसी के बयान में हेरफेर किया है।

इसके साथ ही स्पष्ट हो गया कि मतदान डेटा साझा करने के लिए ईसीआई की कोई वैधानिक आवश्यकता नहीं है। इस पर जज ने कहा, ‘अब हमें खुली अदालत में कहना होगा कि यह -आ बैल मुझे मार’ जैसा है। अदालत ने आधारहीन आशंकाओं और संदेहों के बारे में चुनाव आयोग की चिंताओं के सहमति व्यक्त की।

बता दें, याचिका गैर-सरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने दायर की थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की वेकेशन बेंच ने सुनवाई की।

इस मुद्दे पर चुनाव आयोग को आड़े हाथ लेते हुए छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने कहा, जब लोग बैलेट पेपर के जरिए वोट करते थे, तो चुनाव आयोग 24 घंटे के भीतर मतदान प्रतिशत का डेटा जारी कर देता था। आज डिजिटल युग में चुनाव आयोग 8-10 दिन तक डेटा नहीं देता है। और जब देता है तो प्रतिशत 6-8% बढ़ जाता है। इसका मतलब है कि चुनाव आयोग पक्षपाती है।’

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फॉर्म 17सी पर चुनाव आयोग स्पष्ट कर चुका अपना रुख

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पिछली सुनवाई के दौरान फॉर्म 17सी डेटा अपलोड करने का मुद्दा भी उठा था। इस पर चुनाव आयोग ने हलफनामा देकर अपना रुख साफ कर दिया है। चुनाव आयोग का मानना है कि फॉर्म 17सी के हर मतदान केंद्र पर डाले गए वोटों का रिकॉर्ड ऑनलाइन जारी करने से मतदाताओं के बीच भ्रम पैदा होगा।

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    करियर की शुरुआत 2006 में मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के हिंदी सांध्य दैनिक ‘प्रभात किरण’ से की। इसके बाद न्यूज टुडे और हिंदी डेली पत्रिका (राजस्थान पत्रिका समूह) में सेवाएं दीं। 2014 में naidunia.com से डिजिटल की