Indore Information: इंदौर नगर निगम में फर्जी बिल कांड, प्रदेश के अन्य नगरीय निकाय भी जांच के दायरे में

कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने प्रमुख सचिव को दिए जांच के आदेश। पांच वर्षों में किए गए भुगतान की जांच होगी।

By Hemraj Yadav

Publish Date: Mon, 22 Apr 2024 02:30 AM (IST)

Up to date Date: Mon, 22 Apr 2024 02:30 AM (IST)

Indore News: इंदौर नगर निगम में फर्जी बिल कांड, प्रदेश के अन्य नगरीय निकाय भी जांच के दायरे में

HighLights

  1. इन निकायों में पिछले पांच वर्षों में हुए विकास कार्यों और उनके एवज में किए गए भुगतान की जांच की जाएगी।
  2. इंदौर नगर निगम में हाल ही में 28 करोड़ 76 लाख रुपये का फर्जी बिल कांड सामने आया है।
  3. इंदौर में पांच फर्म और उनके संचालकों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया गया है।

Indore Information: कुलदीप भावसार, नईदुनिया इंदौर। इंदौर नगर निगम में 28 करोड़ 76 लाख रुपये के फर्जी बिल कांड के सामने आने के बाद प्रदेश के अन्य नगरीय निकायों में हुए कार्य भी जांच के दायरे में आ गए हैं। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने प्रमुख सचिव को जांच के लिए कहा है। इन निकायों में पिछले पांच वर्षों में विभिन्न प्रोजेक्ट के तहत हुए विकास कार्यों और उनके एवज में किए गए भुगतान की जांच की जाएगी।

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आशंका है कि इंदौर में फर्जीवाड़े को अंजाम देने वाली फर्मों और उनके संचालकों के अलावा अन्य कंपनियों द्वारा प्रदेश के अन्य नगरीय निकायों में भी ऐसा ही फर्जीवाड़ा कर बगैर काम के करोड़ों का भुगतान प्राप्त किया गया है। इंदौर नगर निगम में हाल ही में 28 करोड़ 76 लाख रुपये का फर्जी बिल कांड सामने आया है। इंदौर की पांच फर्मों ने ड्रेनेज विभाग में बगैर काम किए 28 करोड़ 76 लाख रुपये के फर्जी बिल प्रस्तुत किए थे।

फर्जी बिलों का आडिट भी हो गया

चौंकाने वाली बात यह है कि इन बिलों का आडिट भी हो गया। आडिट शाखा ने आंख मूंदकर इन बिलों को लेखा शाखा को भेजा, ताकि भुगतान हो सके। लेखा शाखा में शक होने पर जब ये बिल वापस ड्रेनेज शाखा को भेजे गए तो पता चला कि जिस काम के बिल प्रस्तुत किए गए हैं, वह तो उक्त फर्मों ने कभी किया ही नहीं था।

पांच फर्म और उनके संचालकों पर प्रकरण

फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद नगर निगम ने पांच फर्में नींव कंस्ट्रक्शन, ग्रीन कंस्ट्रक्शन, किंग कंस्ट्रक्शन, क्षितिज इंटरप्राइजेस व जाह्नवी इंटरप्राइजेस और इन फर्मों के संचालक मो. साजिद, मो. सिद्दिकी, मो. जाकिर, रेणु वडेरा और राहुल वडेरा के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया है। इधर निगमायुक्त शिवम वर्मा ने भी जांच समिति गठित की है। अब प्रदेश सरकार ने अन्य नगरीय निकायों में भी जांच का आदेश दिया है। आशंका है कि पूरे प्रदेश में इस तरह का फर्जीवाड़ा हुआ है।

तीन करोड़ 20 लाख रुपये का भुगतान

पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई कि आरोपित फर्मों को इंदौर नगर निगम से उक्त फर्जी बिल के पेटे तीन करोड़ 20 लाख रुपये का भुगतान भी हो गया। फर्जी बिलों पर जिन अधिकारियों के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं, उनका कहना है कि उन्होंने बिल पर कभी हस्ताक्षर किए ही नहीं। ये फर्जी हस्ताक्षर हैं। पुलिस हस्ताक्षर विशेषज्ञ से अधिकारियों के हस्ताक्षर की जांच भी करवा रही है।

पते पर नहीं मिली फर्में

आरोपित पांच फर्मों में से नींव कंस्ट्रक्शन, ग्रीन कंस्ट्रक्शन और किंग कंस्ट्रक्शन का पता मदीना नगर है, लेकिन मौके पर कोई फर्म नहीं है। इसी तरह क्षितिज इंटरप्राइजेस और जाह्नवी इंटरप्राइजेस के आशीष नगर के पते पर एक रहवासी मकान है, जिस पर ताला लगा है।

दोषियों पर होगी कार्रवाई

इंदौर में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद इस बात की आशंका है कि ऐसा ही फर्जीवाड़ा अन्य जगह भी हुआ हो। हमने प्रमुख सचिव को अन्य नगरीय निकायों में हुए कार्यों की बारीकी से जांच करने का आदेश दिया है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी। – कैलाश विजयवर्गीय, नगरीय निकाय एवं आवास मंत्री

सीबीआइ से जांच की मांग

इधर कांग्रेस ने नगर निगम फर्जी बिल कांड की सीबीआइ से जांच कराने की मांग की है। पार्टी ने इस संबंध में डीजीपी को पत्र लिखकर कहा है कि मामले में शामिल अधिकारियों, कर्मचारियों की जान को भी खतरा है। आशंका है कि गड़बड़ी में शामिल अन्य लोग उन्हें जान से मार दें। मामले की सीबीआइ जांच होगी तो सचाई सबके सामने आ सकेगी।