Chaitra Navratri 2024: महाष्टमी आज, भक्त चढ़ाएंगे अढ़वाई, देवी मंदिरों में हवन व पूर्णाहुति

चैत्र नवरात्र की नवमी तिथि पर 17 अप्रैल की सुबह छह बजे मां महामाया का राजसी शृंगार होगा। इस अवसर पर मंदिर प्रबंधन द्वारा मां महामाया को सोने से हार, कुंडल, नथनी, मुकुट, छत्र सहित कई किलो आभूषण से सजाया जाएगा।

By Dhirendra Kumar Sinha

Publish Date: Tue, 16 Apr 2024 08:17 AM (IST)

Up to date Date: Tue, 16 Apr 2024 08:17 AM (IST)

Chaitra Navratri 2024: महाष्टमी आज, भक्त चढ़ाएंगे अढ़वाई, देवी मंदिरों में हवन व पूर्णाहुति
आदिशक्ति मां महामाया के कालरात्रि स्वरूप में दर्शन, छत्‍तीसगढ़ का एकमात्र लक्ष्मी मंदिर दर्शन मां लखनी का

HighLights

  1. महासप्तमी पर उमड़ी भीड़,पदयात्रा में भक्तों ने लगाए जयकारे
  2. मां महामाया को छप्पन भोग व राजसी शृंगार कल

नईदुनिया प्रतिनिधि बिलासपुर। चैत्र नवरात्र की महाष्टमी तिथि पर मंगलवार को देवी मंदिरों में महागौरी स्वरूप की पूजा होगी। भक्त मातारानी को प्रसन्न करने श्रीफल व अढ़वाई चढ़ाएंगे। देवी मंदिरों में हवन व पूर्णाहुति दी जाएगी। श्रद्धालु भक्त माता के दर्शन कर सुख समृद्धि की कामना करेंगे।

सोमवार को श्रद्धालु भक्तों ने रतनपुर में आदिशक्ति मां महामाया के कालरात्रि स्वरूप के दर्शन करने पदयात्रा की। सुबह से मंदिर में भीड़ रही। सूर्यास्त के साथ पदयात्री निकलने लगे। रात जैसे-जैसे बढ़ती गई भक्तों की संख्या भी बढ़ती गई। बच्चों से लेकर हर उम्र के लोग नजर आए। कोनी रोड पर भक्तों का रेला देखते बन रही थी। माता के प्रति अपनी श्रद्धा भक्ति का प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़ते गए। युवाओं में पदयात्रा को लेकर उत्साह अधिक दिखा। महामाया चौक से लेकर कोनी तक भक्तों का रेला था। इधर महामाया मंदिर में सुबह तक दर्शन करने भक्तों का तांता लगा रहा। मंदिर ट्रस्ट द्वारा श्रद्धालुओं के लिए विशेष बस की व्यवस्था की गई थी। यहां तक प्रशासन ने कई रूट को डायवर्ट भी कर दिया था। रतनपुर मार्ग में एक भी भारी वाहन प्रवेश प्रतिबंधित रहा। ट्रक से लेकर अन्य सभी बड़ी गाड़ियों के पहिए महासप्तमी पर थम रहे। अब मंगलवार को महाष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। देवी मंदिरों में सुबह से उत्सव का माहौल रहेगा।

मां महामाया को छप्पन भोग व राजसी शृंगार कल

चैत्र नवरात्र की नवमी तिथि पर 17 अप्रैल की सुबह छह बजे मां महामाया का राजसी शृंगार होगा। इस अवसर पर मंदिर प्रबंधन द्वारा मां महामाया को सोने से हार, कुंडल, नथनी, मुकुट, छत्र सहित कई किलो आभूषण से सजाया जाएगा। विशेष पूजन व आरती के बाद सुबह 10 बजे छप्पन प्रकार का नैवेद्य लगाया जाएगा। सुबह 11 बजे कन्या पूजन व प्रसाद वितरण के बाद जवारा कलशों का विसर्जन होगा। राजसी शृंगार के बाद माता का स्वरूप देखने भक्तों में भारी उत्साह है।

देवी मंदिरों में आज दिनभर लगा रहेगा तांता

मां महामाया मंदिर रतनपुर सहित मां काली मंदिर तिफरा, मां दुर्गा मंदिर दयालबंद, जरहाभाठा, संतोषी मंदिर लिंक रोड, दुर्गा मंदिर सरकंडा, मां बगलामुखी, दुर्गा मंदिर तेलीपारा सहित अन्य सभी देवी मंदिरों में दर्शन के लिए अष्टमी तिथि पर दिनभर तांता लगा रहेगा। इधर मंदिर आकर्षक लाइट से जगमग है। ज्योतिकलश और जवारा के बीच जसगीत के माध्यम से मातारानी की सेवा जारी है।

गुडहल फूल की माता 100 रुपये

आमतौर पर गुडहल के फूलों की छोटी माला 20 रुपये में मिलती थी। सोमवार को महासप्तमी पर एक माला की कीमत 100 रुपये पहुंच गई। फूल विक्रेताओं का कहना था कि गुडहल के फूलों की आवक कम होने के कारण हर साल नवरात्र में यही स्थिति रहती है। अष्टमी तिथि के बाद दाम वापस आ जाता है। बड़ी माला का रेट 400 से 600 रुपये के बीच होता है।

कन्या का देवी रूप में होगा पूजन

महाष्टमी पर कन्या पूजन होगा। मंदिरों व घरों में कन्या का देवी रूप में पूजन कर भक्त आशीष लेंगे। कन्याओं का पैर पखारकर उन्हें आमंत्रण दिया जाएगा। उन्हें आसन में विराजित कर उनके पैरों को महावर से सजाया जाएगा और चुनरी ओढाएंगे। इसके बाद उन्हें पूड़ी, हलवा, खीर, छोले व आलू की सब्जी समेत विभिन्न प्रकार के भोग से प्रसन्न किया जाएगा। कन्याओं को विभिन्न प्रकार के उपहार भी देंगे।