- गीजर नहाते समय चालू न रखें, पानी गर्म होते ही बंद करें.
- गैस गीजर हमेशा उचित वेंटिलेशन वाले स्थान पर ही लगाएं.
- सर्दियों की शुरुआत में गीजर की सर्विसिंग अवश्य कराएं, जांच करवाएं.
- कमजोर प्लग के बजाय मजबूत MCB लगाएं और ISI मार्क गीजर खरीदें.
हल्की ठंड की दस्तक के साथ ही घरों के बाथरूम में महीनों से बंद पड़े गीजर एक बार फिर से चालू होने लगे हैं. सुबह के वक्त ठंडे पानी से बचने के लिए गीजरों का इस्तेमार शुरू हो चुका है. सर्दियों में सुबह-सुबह लोग बाथरूम में घुसते ही गीजर का स्विच दबा देते हैं. लेकिन यही जल्दबाजी बड़ी मुसीबत का सबब बन जाती है. हर साल सर्दियों के मौसम में गीजर फटने, शॉर्ट सर्किट होने और गैस गीजर से दम घुटने जैसी कई डरावनी खबरें सामने आती हैं.
दरअसल में महीनों तक बंद रहने की वजह से गीजर के अंदरूनी पार्ट्स में नमी और कचरा जमा हो जाता है. जिसे लोग नजरअंदाज कर देते हैं. इसके अलावा रोजाना इस्तेमाल के दौरान भी हम जाने-अनजाने में कुछ ऐसी छोटी गलतियां दोहराते हैं. जो किसी बड़े हादसे को दावत दे सकती हैं. ऐसे में अपनी और अपने परिवार की सलामती के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि ठंड में गीजर चलाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
नहाते समय गीजर ऑन न रखें और लगातार न चलाएं
ज्यादातर लोगों की आदत होती है कि वे बाथरूम में जाने से थोड़ा पहले गीजर चालू करते हैं और नहाते वक्त भी स्विच को ऑन ही छोड़ देते हैं. यह आदत सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है. अगर गीजर के हीटिंग एलिमेंट में जरा सी भी खराबी आई या फिर अंदर की वायरिंग में कहीं लीकेज हुआ तो पानी के जरिए सीधा करंट फैलने का डर रहता है. इसलिए पानी गर्म होने के बाद नहाने जाने से पहले गीजर का मेन स्विच पूरी तरह बंद कर दें.
इसके अलावा कई घरों में सुबह से लेकर दोपहर तक गीजर लगातार ऑन रहता है जिससे बारी-बारी से सब नहा सकें. लगातार कई घंटों तक चालू रहने से गीजर का थर्मोस्टेट खराब हो सकता है और अंदर जरूरत से ज्यादा प्रेशर बनने से टैंक फटने तक की नौबत आ जाती है. हमेशा जरूरत के हिसाब से 15 से 20 मिनट पहले गीजर ऑन करें और काम होते ही उसे तुरंत बंद कर दें.

गैस गीजर और वेंटिलेशन के मामले में न बरतें ढिलाई
आजकल बिजली का बिल बचाने के चक्कर में बहुत से घरों में LPG से चलने वाले गैस गीजर लगाए जाते हैं, लेकिन इनके साथ सावधानी और भी ज्यादा रखनी पड़ती है. गैस गीजर जब चलता है तो वह आग जलाने के लिए बाथरूम के अंदर मौजूद ऑक्सीजन को तेजी से खींचता है और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैस बाहर छोड़ता है. इस गैस में न तो कोई गंध होती है और न ही यह दिखाई देती है.
अगर आपका बाथरूम छोटा है और उसमें हवा बाहर निकलने के लिए एग्जॉस्ट फैन या खुली खिड़की नहीं है. तो नहाते समय कुछ ही मिनटों में इंसान का दम घुट सकता है और वह बेहोश हो सकता है. कोशिश करें कि गैस गीजर की मेन यूनिट को बाथरूम के बाहर किसी खुली जगह पर लगवाएं और अंदर सिर्फ पानी की पाइपलाइन लाएं. साथ ही बाथरूम में नहाते समय हमेशा एग्जॉस्ट फैन चालू रखें जिससे ताजी हवा का आना-जाना बना रहे.

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सीजन की शुरुआत में सर्विसिंग
सर्दियों की शुरुआत में पहली बार गीजर ऑन करने से पहले किसी अच्छे टेक्नीशियन को बुलाकर उसकी सर्विसिंग जरूर करानी चाहिए. पूरे साल पानी जमा रहने से गीजर की रॉड और टैंक के अंदर सफेद रंग की खारे पानी की परत जम जाती है जिसे स्केलिंग कहते हैं. यह परत न सिर्फ पानी को देर से गर्म करती है. बल्कि हीटिंग कॉइल पर दबाव भी बढ़ाती है जिससे बिजली की खपत बढ़ जाती है और ब्लास्ट का खतरा रहता है.
सर्विसिंग के दौरान टेक्नीशियन से गीजर का प्रेशर रिलीज वाल्व और ऑटो-कट फीचर जरूर चेक करवाएं. क्योंकि पानी तय तापमान पर गर्म होने के बाद यही फीचर गीजर को अपने आप बंद करता है. इसके साथ ही गीजर के लिए कभी भी हल्के प्लग या नॉर्मल स्विच का इस्तेमाल न करें बल्कि हमेशा हैवी लोड झेलने वाले पावर प्लग और एमसीबी लगवाएं. गीजर खरीदते वक्त भी सस्ते के चक्कर में न पड़ें और हमेशा ISI मार्क वाला ब्रांडेड गीजर ही चुनें.
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