अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर प्रस्तावित प्रतिबंधों और शुल्कों में छूट दिए जाने के बाद भी भारत अपनी मौजूदा रणनीति में बड़ा बदलाव करने के मूड में नहीं है. यानी ट्रम्प की छूट के बावजूद भारत रूस से पहले की तरह बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात मौजूदा स्तर के आसपास कायम रख सकता है. इसकी सबसे बड़ी वजह रूसी तेल पर मिलने वाली छूट और इसकी उपलब्धता है.
दरअसल, ट्रंप ने शुक्रवार देर रात एक कार्यकारी आदेश जारी करके रूस और ईरान से जुड़े नए अमेरिकी कानून के तहत प्रस्तावित कुछ प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों में छूट दी. यह फैसला कानून में तय 30 दिन की समय सीमा समाप्त होने से ठीक एक दिन पहले आया. इस कानून के तहत रूस से कच्चा तेल और गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े देशों से आने वाले सामान पर 100% तक शुल्क लगाने का प्रावधान था. हालांकि, दी गई यह छूट सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे चीन जैसे दूसरे देशों को भी फायदा मिल सकता है.
रूस से कितना तेल खरीद रहा है भारत?
भारत समुद्री रास्ते से रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल है. जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाली एजेंसियों के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में भारत ने रूस से प्रतिदिन करीब 18.2 लाख बैरल तेल खरीदा, जबकि चीन का आयात करीब 14.9 लाख बैरल प्रतिदिन रहा. अक्टूबर में भारत का आयात 18 से 19 लाख बैरल प्रतिदिन रहने का अनुमान है.
हालांकि, रूसी तेल की खरीद में जून और जुलाई के मुकाबले कुछ कमी आई है. जून में भारत का आयात बढ़कर लगभग 26 लाख बैरल प्रतिदिन और जुलाई में करीब 25.7 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था.
भारत के लिए क्यों फायदेमंद है रूसी कच्चा तेल?
फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पश्चिम देशों ने रूसी तेल पर कई प्रतिबंध लगाए थे. इसके बाद रूस ने एशियाई देशों को कम कीमत पर तेल बेचना शुरू कर दिया. भारत ने इस मौके का फायदा उठाया और रूसी तेल की खरीद बढ़ा दी.
रूस से तेल खरीदने के कारण भारत को पश्चिम एशिया और दूसरे तेल उत्पादक देशों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ता. इसके अलावा सस्ते तेल से भारतीय रिफाइनरियों को लागत कम रखने में मदद मिली.
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