सोने के फंड में पैसा लगाने पर रोक, आपकी SIP पर क्या होगा असर?

सोने के फंड में पैसा लगाने पर रोक, आपकी SIP पर क्या होगा असर?


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  • 17 फंड हाउसों ने गोल्ड फंड में नया निवेश रोका.
  • सेबी निर्देश पर त्योहारों में मांग बढ़ने से उठाया कदम.
  • इसका मुख्य मकसद रुपये को सहारा देना, आयात रोकना है.
  • पुरानी SIP जारी रहेगी, ETF की खरीद-बिक्री संभव.

म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने बड़ा कदम उठाया है. आज से HDFC म्यूचुअल फंड, ICICI प्रूडेंशियल और टाटा म्यूचुअल फंड जैसे देश के 17 से अधिक बड़े फंड हाउसों ने सभी गोल्ड फंड-ऑफ-फंड्स (FoFs) में नया निवेश लेना बंद कर है. त्योहारी सीजन से पहले डिजिटल गोल्ड में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए उठाया गया कदम किसी झटके से कम नहीं है. बता दें कि म्यूचुअल फंड कंपनियों ने मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) के निर्देशों के बाद यह फैसला लिया है.

सेबी ने क्यों किया ऐसा?

धनतेरस, दीवाली जैसे फेस्टिव सीजन के दौरान लोग सोने पर जमकर दांव लगाते हैं, जिससे इसकी मांग अचानक से बढ़ जाती है. त्योहारी सीजन में इस भारी इनफ्लो से बचने के लिए यह कदम उठाया गया है. साथ ही सोने की कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव भी इस फैसले के पीछे की एक वजह है. हाल के दिनों में अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू दोनों बाजारों में सोने की कीमतों में तेज गिरावट देखी गई. भारत में पिछले दिनों सोने की कीमतें टूटकर 1,49,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई है.

म्यूचुअल फंड्स के लिए नियम है कि वे जितना पैसा डिजिटल गोल्ड में लेंगे, उतने का ही 100% फिजिकल गोल्ड उन्हें अपने पास सुरक्षित रखना होगा. इस क्रम में अगर फेस्टिव सीजन में डिमांड काफी ज्यादा बढ़ जाए, तो म्यूचुअल फंड्स के लिए बाजार से बड़े पैमाने पर सोना खरीदना मुश्किल हो जाएगा. ऐसे में कंपनी और ग्राहक दोनों को नुकसान होगा. ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि इन पाबंदियों का मकसद त्योहारी सीजन की मांग के बीच आयात में होने वाली संभावित भारी बढ़ोतरी को रोकना और रुपये को सहारा देना है. इसे एक तरह से जोखिम प्रबंधन के तौर पर देख सकते हैं.

ग्राहकों के लिए राहत की बात

नए लगाए गए प्रतिबंधों के तहत 16 अक्टूबर से गोल्ड ईटीएफ FoF में नए और अतिरिक्त एकमुश्त निवेश, स्विच-इन, टॉप-अप और नई सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) तथा सिस्टेमेटिक ट्रांसफर प्लान (STP) के रजिस्ट्रेशन पर अस्थायी रूप से रोक रहेगी.

हालांकि, 16 अक्टूबर से पहले से रजिस्टर्ड SIP या STP की मासिक किस्तें बिना किसी रुकावट के कटती रहेंगी, जो बाजार में चल रहे मौजूदा नेट एसेट वैल्यू (NAV) पर प्रोसेस होंगी. साथ ही  रिडेम्पशन और स्विच-आउट की सुविधा भी जारी रहेगी. 

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