
यूनिवर्सिटी में प्रदर्शनों के ताजा मामलों में पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी शामिल है. यहां एक छात्रा को लेकर सोशल मीडिया पर अस्पष्ट दावे सामने आने के बाद छात्रों का विरोध बढ़ गया. पुलिस और यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इन दावों को खारिज किया, लेकिन प्रदर्शन तेज हो गया. इस दौरान यूनिवर्सिटी की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और दिल्ली-अमृतसर नेशनल हाईवे को जाम करने जैसी घटनाएं भी सामने आई. ऐसी स्थिति को देखते हुए यूनिवर्सिटी ने 28 सितंबर से नियमित कक्षा 10 दिनों के लिए स्थगित कर दी. वहीं मिड टर्म परीक्षाएं भी अगले आदेश तक टाल दी गई.

इसके अलावा एलपीयू से एक दिन पहले पंजाब की चितकारा यूनिवर्सिटी में भी सोशल मीडिया पर ऐसी ही स्थिति बनी. छात्र व्हाट्सएप ग्रुप और सोशल मीडिया पर दो छात्रों के लापता होने या मौत से जुड़े अस्पष्ट दावे तेजी से फैलने लगे. वहीं कुछ पोस्ट में यूनिवर्सिटी पर घटना छुपाने का आरोप भी लगाया गया. इसके बाद सैकड़ों छात्र जवाब मांगने के लिए कैंपस में जाम हो गए. वहीं प्रदर्शनों के दौरान पुलिस से टकराव, कैंपस में तोड़फोड़ और पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाएं सामने आई.

पंजाब यूनिवर्सिटी के अलावा आईआईटी बॉम्बे में मामला सोशल मीडिया अफवाहों से अलग था. यहां दूसरे वर्ष के छात्र साहिल की 18 सितंबर 2026 को मौत के बाद छात्रों ने संस्थान की जवाबदेही, छात्र कल्याण और शिकायत निवारण व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया. साहिल की मौत के बाद साहिल के परिवार की ओर से यूनिवर्सिटी पर जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न के आरोप भी लगाए गए. इन आरोपों के बीच आईआईटी बॉम्बे ने 26 और 27 सितंबर को होने वाले मीड सेमेस्टर परीक्षा 10 और 11 अक्टूबर तक स्थगित कर दी.

असम की तेजपुर यूनिवर्सिटी में 2025 के अंत में छात्र-शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मचारी कुलपति शंभू नाथ सिंह के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे. प्रदर्शनकारी में वित्तीय और अकेडमिक अनियमितता से जुड़े आरोप लगाए और कुलपति को हटाने की मांग की. यह आंदोलन लंबा खींचने के बाद यूनिवर्सिटी की एकेडमी और प्रशासनिक गतिविधियां प्रभावित हुई. इसके बाद सेमेस्टर परीक्षा स्थगित करनी पड़ी थी.

सितंबर 2024 में मणिपुर यूनिवर्सिटी में सुरक्षा बलों के साथ टकराव के बाद छात्र आंदोलन बढ़ गया था. इसके बाद यूनिवर्सिटी ने सभी यूजी और पीजी परीक्षाओं को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया था. उस समय मणिपुर में कर्फ्यू और इंटरनेट बंदी जैसी परिस्थितियों भी थी. वहीं दिल्ली यूनिवर्सिटी में दिसंबर 2024 में लॉ छात्रों ने सिलेबस पूरा नहीं होने, फैकल्टी में बदलाव, कोर्स आवंटन में देरी और अचानक सिलेबस अपडेट किए जाने को लेकर विरोध प्रदर्शन किया. इसके बाद लॉ परीक्षा स्थगित करने की बात कही गई.

इनके अलावा मैसूर यूनिवर्सिटी में अक्टूबर 2024 में छात्रों ने परीक्षा टालने, फीस बढ़ाने और पर्याप्त शिक्षकों की कमी को लेकर प्रदर्शन किया. छात्रों का कहना था कि वह गेस्ट फैकल्टी की कमी के कारण सिलेबस पूरा नहीं कर पाए और उसके बावजूद परीक्षा कराना सही नहीं है. वहीं इन हालिया घटनाओं में एक बात खास तौर पर सामने आई है कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग ग्रुप के जरिए कोई अस्पष्ट जानकारी बहुत तेजी से बड़ी संख्या में छात्रों तक पहुंच सकती है.
Published at : 29 Sep 2026 07:24 PM (IST)
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