TRAI का नया नियम! अब ऐसी कॉल पर लगेगा 5 पैसे प्रति मिनट तक चार्ज, जानें क्या बदलेगा

TRAI का नया नियम! अब ऐसी कॉल पर लगेगा 5 पैसे प्रति मिनट तक चार्ज, जानें क्या बदलेगा


टेलीकॉम यूजर्स को लगातार परेशान करने वाली अनचाही और स्पैम कॉल्स पर लगाम लगाने के लिए TRAI ने एक अहम कदम उठाया है. TRAI ने Application-to-Person यानी A2P कॉल्स के लिए मैक्सिमम 5 पैसे प्रति मिनट तक टर्मिनेशन चार्ज तय किया है. इसका मकसद ऐसे कॉल्स के जरिए होने वाले अनचाहे कमर्शियल कम्युनिकेशन को कंट्रोल करना है.

क्या होती हैं A2P कॉल्स?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि A2P कॉल्स नॉर्मल व्यक्ति द्वारा सीधे डायल की गई कॉल से अलग होती हैं. इन्हें ऐप, सॉफ्टवेयर या ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए बड़ी संख्या में किया जा सकता है. ऑटो-डायल कॉल्स, रोबोकॉल्स और पहले से रिकॉर्ड की गई या आर्टिफिशियल वॉयस वाली कॉल्स इसके उदाहरण माने जाते हैं.

नए नियमों के तहत A2P कॉल करने वाली संस्थाओं को पहले अपने टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर को इसकी जानकारी देनी होगी. साथ ही, कॉल के लिए इस्तेमाल होने वाली Calling Line Identities यानी CLIs की जानकारी भी देनी होगी. बिना जरूरी घोषणा के की गई A2P कॉल्स को UCC यानी अनचाही कमर्शियल कम्युनिकेशन माना जाएगा.

कौन देगा यह चार्ज?

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, TRAI के नए नियम के तहत टर्मिनेशन चार्ज उस एक्सेस प्रोवाइडर की ओर से दिया जाएगा जिसके नेटवर्क से A2P कॉल शुरू हुई है. यह भुगतान उस टेलीकॉम प्रोवाइडर को किया जाएगा जिसके नेटवर्क पर कॉल खत्म होती है.

हालांकि, हर कॉल पर 5 पैसे प्रति मिनट की पेमेंट अनिवार्य नहीं होगी. टेलीकॉम कंपनियां आपसी कॉमर्शियल बातचीत के बेस पर असली चार्ज तय कर सकेंगी. 5 पैसे प्रति मिनट को मैक्सिमम लिमिट के तौर पर रखा गया है.

SMS से जुड़ी व्यवस्था को बनाया आधार

TRAI चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी के मुताबिक, इस चार्ज की मैक्सिमम लिमिट तय करने के पीछे कमर्शियल SMS के लिए पहले से मौजूद टर्मिनेशन चार्ज को आधार बनाया गया है. उन्होंने साफ कर दिया है कि असली रकम टर्मिनेटिंग और ओरिजिनेटिंग एक्सेस प्रोवाइडर्स के बीच होने वाली बातचीत से तय होगी.

यह भी पढ़ें: 140 और 1600 नंबरों को Spam समझकर ब्लॉक किया तो हो सकता है नुकसान! TRAI ने जारी की नई सफाई

कुछ कॉल्स को मिलेगी छूट

TRAI द्वारा रेगुलेटेड कमर्शियल कम्युनिकेशन के लिए विशेष रूप से तय नंबरिंग सीरीज से की जाने वाली कॉल्स पर यह टर्मिनेशन चार्ज लागू नहीं होगा. इसके अलावा, अथॉरिटी की ओर से रजिस्टर्ड कॉल्स को भी इस शुल्क से बाहर रखा गया है.

AI से होगी स्पैम कॉल्स की पहचान

TRAI सिर्फ आर्थिक दंड के जरिए ही स्पैम कॉल्स पर कंट्रोल करने की कोशिश नहीं कर रहा है. ट्राई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल संदिग्ध UCC की पहचान के लिए भी कर रहा है. टेलीकॉम कंपनियां ऐसे CLIs की पहचान करेंगी जिनसे स्पैम कम्युनिकेशन किए जाने की आशंका ज्यादा हो. संबंधित जानकारी दूसरे टेलीकॉम प्रोवाइडर्स के साथ शेयर करके आगे जांच की जा सकेगी.

मार्च 2026 से चल रही थी प्रक्रिया

आपको बता दें कि इन बदलावों का प्रोसेस मार्च 2026 में जारी किए गए ड्राफ्ट थर्ड अमेंडमेंट रेगुलेशंस के साथ शुरू हुई थी. इसके बाद TRAI ने स्टेकहोल्डर्स से सुझाव और जवाबी टिप्पणियां मांगीं है. जून में ओपन हाउस डिस्कशन भी आयोजित किया गया था जिसके बाद फाइनल संशोधनों को मंजूरी दी गई थी.

यह भी पढ़ें:

क्या है Bluetooth Tethering? जानें कब करना चाहिए इसका इस्तेमाल