ललिता सप्तमी कब ? राधा अष्टमी से पहले क्यों होती है इनकी पूजा, जानें महत्व

ललिता सप्तमी कब ? राधा अष्टमी से पहले क्यों होती है इनकी पूजा, जानें महत्व


भाद्रपद शुक्ल सप्तमी को ललिता देवी के प्राकट्य दिवस के रूप में यह पर्व मनाया जाता है. राधा अष्टमी से ठीक एक दिन पहले आने के कारण ब्रज में इसका विशेष धार्मिक महत्व है. देवी ललिता का जन्म बरसाना से थोड़ी दूर ऊंचा गांव में माना जाता है.

भाद्रपद शुक्ल सप्तमी को ललिता देवी के प्राकट्य दिवस के रूप में यह पर्व मनाया जाता है. राधा अष्टमी से ठीक एक दिन पहले आने के कारण ब्रज में इसका विशेष धार्मिक महत्व है. देवी ललिता का जन्म बरसाना से थोड़ी दूर ऊंचा गांव में माना जाता है.

ब्रज भक्ति परंपरा में ललिता सखी को राधा रानी की अत्यंत निकट और अंतरंग सखी माना जाता है. इस दिन ललिता देवी का स्मरण और पूजन किया जाता है। साथ ही राधा-कृष्ण की पूजा भी की जाती है। भक्त पुष्प, फल, भोग, धूप-दीप अर्पित कर राधा-कृष्ण के नाम का जाप करते हैं.

ब्रज भक्ति परंपरा में ललिता सखी को राधा रानी की अत्यंत निकट और अंतरंग सखी माना जाता है. इस दिन ललिता देवी का स्मरण और पूजन किया जाता है। साथ ही राधा-कृष्ण की पूजा भी की जाती है। भक्त पुष्प, फल, भोग, धूप-दीप अर्पित कर राधा-कृष्ण के नाम का जाप करते हैं.

ललिता सखी को राधारानी की प्रमुख सखियों में माना जाता है. राधा-कृष्ण की लीलाओं में उनकी सेवा और सहयोग ने अहम भूमिका निभाई है. यही वजह है कि ललिता सप्तमी के दिन उन्हें याद कर समान्य पूजन किया जाता है. मान्यता है इससे श्रीकृष्ण और राधा रानी की कृपा बरसती है.

ललिता सखी को राधारानी की प्रमुख सखियों में माना जाता है. राधा-कृष्ण की लीलाओं में उनकी सेवा और सहयोग ने अहम भूमिका निभाई है. यही वजह है कि ललिता सप्तमी के दिन उन्हें याद कर समान्य पूजन किया जाता है. मान्यता है इससे श्रीकृष्ण और राधा रानी की कृपा बरसती है.

माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से ललिता सखी की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में मधुरता बनी रहती है और मन की हर इच्छा पूरी होती है.

माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से ललिता सखी की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में मधुरता बनी रहती है और मन की हर इच्छा पूरी होती है.

ललिता सखी का चरित्र भक्तों के लिए निस्वार्थ सेवा और राधा-कृष्ण के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है इसलिए इस दिन केवल पूजा ही नहीं, बल्कि भक्ति और सेवा के भाव को भी महत्व दिया जाता है.

ललिता सखी का चरित्र भक्तों के लिए निस्वार्थ सेवा और राधा-कृष्ण के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है इसलिए इस दिन केवल पूजा ही नहीं, बल्कि भक्ति और सेवा के भाव को भी महत्व दिया जाता है.

Published at : 17 Sep 2026 07:06 PM (IST)

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