Alimony rules in India: भारत में एलिमनी या गुजारा भत्ता को लेकर कानून इसलिए बनाए गए हैं ताकि पति से कानूनन अलग होने के बाद तलाकशुदा पत्नी को उसके भरण पोषण के लिए आर्थिक मदद मिल सके. अब सवाल यह उठता है कि कई बार जब पत्नी अपने पहले पति से अलग होने के बाद दोबारा शादी कर लेती है, तो क्या तब पहले पति पर उसकी जिम्मेदारी रहती है? आइए जानते हैं कानून इस बारे में क्या कहता है.
पत्नी कब तक है एलिमनी की हकदार?
भारत के कानून के मुताबिक, तलाक के बाद एक महिला को तब तक ही गुजारा-भत्ता पाने का हक है जब तक वह दूसरी शादी नहीं कर लेती है. जैसे ही वह किसी और से कानूनी तौर पर शादी करती है, उसका पुराना भत्ता पाने का अधिकार खत्म हो जाता है. इसकी वजह साफ है कि एक बार जब वह दोबारा शादी कर लेती है, तो आर्थिक तौर पर उसकी जिम्मेदारी नए जीवनसाथी पर आ जाती है.
क्या कहता है कानून?
हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25 के तहत अगर कोर्ट ने किसी महिला को हर महीने एलिमनी देने का आदेश दिया है, तो पत्नी के दोबारा शादी करने की स्थिति में पूर्व पति कोर्ट जाकर इसे बदलवा या पूरी तरह बंद करवा सकता है. कानून कहता है कि महिला के दोबारा शादी करते ही पूर्व पति भत्ता देने की जिम्मेदारी से मुक्त हो जाता है.
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS-धारा 144) के अनुसार भी यह एक सामान्य (सेक्युलर) कानून है, जो सभी धर्मों पर लागू होता है. इसके मुताबिक, एक तलाकशुदा महिला को सिर्फ तब तक ही भत्ता मिल सकता है, जब तक वह बिना शादी के रहती है. दूसरी शादी करते ही यह हक तुरंत खत्म हो जाता है.
मुस्लिम पर्सनल लॉ भी यही कहता है किअगर कोई तलाकशुदा मुस्लिम महिला दूसरी शादी कर लेती है, तो वह अपने पहले पति से गुजारा-भत्ता पाने का हक खो देती है.
क्या बच्चे का खर्च भी नहीं उठाना पड़ेगा?
यहां एक ध्यान रखने वाली बात यह है कि अगर पत्नी दूसरी शादी कर भी लेती है और अगर पहले पति से उसके बच्चे हैं, तो बच्चों के पालन-पोषण से लेकर उसकी पढ़ाई-लिखाई का खर्च कानूनन उसके सगे पिता को ही देना होगा.
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