‘वेस्ट बैंक को बांट देगा E1 सेटलमेंट’, इजराइल के फैसले पर भड़के यूरोपीय देश


इजराइल की बेंजामिन नेतन्याहू सरकार ने वेस्ट बैंक में लगभग 1200 घर वाली बस्तियां बनाने के लिए एक टेंडर निकाला है. वेस्ट बैंक में इजराइल के कब्जे वाले इस इलाके को लेकर पश्चिमी देशों ने कड़ा ऐतराज जताया है. ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स और नॉर्वे के अलावा कनाडा के नेताओं ने मिलकर एक संयुक्त बयान जारी किया है.

इजराइल ने कई दशकों तक E1 इलाके में निर्माण की योजनाओं को रोक रखा था. हालांकि अब यहां 1200 घर बनाए जाने की योजना है. अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत सभी बस्तियां गैर-कानूनी हैं. इसके अलावा फिलिस्तीनियों का तर्क है कि इस कदम से टू-स्टेट सॉल्यूशन की उम्मीदों को भी झटका लगेगा, क्योंकि इससे न सिर्फ वेस्ट बैंक 2 हिस्सों में बंट जाएगा बल्कि पूर्वी यरूशलेम भी काफी अलग-थलग पड़ जाएगा.

E1 सेटलमेंट प्रोजेक्ट को लेकर क्या बोले यूरोपीय देश
पश्चिमी देशों के संयुक्त बयान में कहा गया है कि इजराइली सरकार का E1 सेटलमेंट प्रोजेक्ट (बस्ती परियोजना) के लिए टेंडर जारी करने का फैसला अस्वीकार्य है. संयुक्त बयान में सातों देशों ने कहा है कि E1 में बस्तियों का विस्तार वेस्ट बैंक को कई टुकड़ों में बांट सकता है और फिलिस्तीनी क्षेत्रों की क्षेत्रीय निरंतरता को भी नुकसान पहुंचा सकता है.

यूरोपीय सहयोगियों और कनाडा की तरफ से गुरुवार को जारी बयान में कहा गया कि वेस्ट बैंक में भारी अस्थिरता है. वहां बसने वालों की ओर से नागरिकों के खिलाफ हिंसा की जा रही है. इसके साथ ही बताया गया कि फिलिस्तीनी अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रतिबंध के चलते ये फैसला और भी चिंताजनक हो जाता है. बयान में आगे कहा गया कि ये योजनाएं न केवल हमें शांति से दूर ले जाएंगी, बल्कि इजराइल की अंतर्राष्ट्रीय छवि को भी कमजोर करेंगी.

UN ने भी जताई आपत्ति
संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव ने भी कहा है कि E1 योजना फिलिस्तीन के लिए अस्तित्व का खतरा पैदा करती है. बेल्जियम के विदेश मंत्री ने भी यही बात दोहराई है. इससे पहले गुरुवार को ब्रिटेन के विदेश मंत्री की आलोचना को इजराइल के विदेश मंत्री ने सिरे से खारिज कर दिया.

क्या है पूरा माजरा
1967 में मिडिल ईस्ट जंग के दौरान वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम पर कब्जा करने के बाद से इजराइल ने लगभग 160 बस्तियां बसाई हैं, जिनमें 7 लाख यहूदी रहते हैं. फिलिस्तीनी लोग गाजा के साथ-साथ इन इलाकों को भी अपने भविष्य के राज्य का हिस्सा बनाना चाहते हैं. इनके साथ ही लगभग 33 लाख फिलिस्तीनी भी रहते हैं. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विरोध के बावजूद इजराइल की अलग-अलग सरकारों ने इन बस्तियों के विस्तार की इजाजत दी है.

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