- AI प्रशिक्षण हेतु पहले डेटा को एकत्रित कर, उसे स्वच्छ किया जाता है।
- मॉडल गलतियों से सीखकर, अपने पैरामीटर्स को लगातार बेहतर करता है।
- न्यूरल नेटवर्क और उच्च कंप्यूटिंग शक्ति प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- प्रशिक्षित AI मॉडल का नए डेटा पर सटीकता से परीक्षण किया जाता है।
How AI is Trained: आज AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारी डेली की जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है. Chatbot से सवाल पूछने से लेकर फोटो पहचानने, लैंग्वेज समझने से लेकर कंटेंट बनाने तक, आज के समय में एआई लोगों के कई सारे काम चुटकियों में कर रहा है. लेकिन इसी के साथ ये सवाल भी कई बार आता है कि आखिर इन सब चीजों को करने के लिए एआई को ट्रेनिंग कैसे मिलती है. आइए जानते हैं क्या होता है इसका पूरा प्रोसेस.
सबसे पहले जुटाया जाता है डेटा
जानकारी के अनुसार, AI को ट्रेन करने के लिए सबसे पहले डेटा की जरूरत पड़ती है. इसीलिए सबसे पहले कंपनी डेटा इकट्ठा करती है. डेटा टेक्स्ट, फोटो, वीडियो, ऑडियो या किसी भी डिजिटल जानकारी के रूप में हो सकता है. जैसे अगर किसी AI मॉडल को फोटो में मौजूद चीजों की पहचान करना सिखाना है तो उसे बड़ी संख्या में अलग-अलग फोटोज उपलब्ध कराई जाती हैं.
इसके साथ ही डेटा जितना अलग-अलग होता है एआई को उतनी ही अच्छी ट्रेनिंग मिल पाती है. हालांकि, ट्रेनिंग से पहले डेटा की क्वालिटी और उसके इस्तेमाल से जुड़े अधिकारों को भी अच्छे से चेक किया जाता है.
डेटा की होती है सफाई
आपको बता दें कि इकट्ठा किया गया डेटा सीधे AI मॉडल को नहीं दिया जाता है. दरअसल, पहले डेटा को अच्छे से साफ किया जाता है यानी डेटा में मौजूद गलतियां, गलत फैक्ट या दूसरी चीजों को ठीक किया जाता है और इसके बाद ही एआई को डेटा उपलब्ध कराया जाता है.
कई मामलों में इंसान डेटा को लेबल भी करते हैं. जैसे किसी फोटो में बिल्ली है या कुत्ता, ये बताना है. इस प्रोसेस को डेटा लेबलिंग कहा जाता है और इससे AI को अलग-अलग चीजों के बीच अंतर समझने में मदद मिलती है.
AI मॉडल कैसे सीखता है?
डेटा की सफाई के बाद इसे मशीन लर्निंग मॉडल में डाला जाता है. मॉडल दिए गए उदाहरण में पैटर्न सर्च करने की कोशिश करता है. शुरुआत में एआई के रिजल्ट्स गलत होते हैं लेकिन एआई के हर गलती के बाद मॉडल के अंदर मौजूद पैरामीटर को थोड़ा बदला जाता है.
यही प्रोसेस बार-बार दोहराई जाती है. धीरे-धीरे मॉडल अपने जवाब को बेहतर बनाने लगता है. बता दें कि बड़े AI मॉडल में करोड़ों या अरबों पैरामीटर होते हैं जिन्हें ट्रेनिंग के दौरान लगातार एडजस्ट किया जाता है.
न्यूरल नेटवर्क की होती है अहम भूमिका
जानकारी के अनुसार, आज के कई एडवांस AI सिस्टम न्यूरल नेटवर्क पर बेस्ड हैं. इन्हें इंसानी दिमाग से प्रेरित कंप्यूटेशनल सिस्टम माना जाता है. इनमें कई लेयर होती हैं जो डेटा की अलग-अलग क्वालिटी को समझने में मदद करती हैं.
इसके अलावा आपको बता दें कि AI की ट्रेनिंग के लिए बहुत ज्यादा कंप्यूटिंग पावर की जरूरत पड़ती है. बड़े मॉडल को ट्रेन करने के लिए पावरफुल GPU या AI एक्सेलेरेटर का इस्तेमाल किया जाता है. इतना ही नहीं, इसके बाद मॉडल को बहुत बड़े डेटा पर कई बार चलाया जाता है, इसलिए एआई की ट्रेनिंग में काफी समय, एनर्जी और रिसोर्सेज का भी इस्तेमाल होता है.
ट्रेनिंग के बाद होती है टेस्टिंग
बताते चलें कि एआई मॉडल की ट्रेनिंग के बाद उसकी टेस्टिंग भी की जाती है. दरअसल, मॉडल को ऐसे डेटा पर टेस्ट किया जाता है जिसे उसने ट्रेनिंग के दौरान नहीं देखा होता है. इससे पता चलता है कि AI ने असल में पैटर्न को अच्छे से सीखा है या फिर सिर्फ पुराने डेटा को याद रखा है. अगर मॉडल बार-बार गलत जवाब देता है तो डेटा, मॉडल या ट्रेनिंग प्रोसेस में बदलाव करके उसे दोबारा टेस्ट किया जाता है.
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