Abhijeet Dipke Typhoid : बारिश के मौसम में टाइफाइड के मामले तेजी से बढ़ने लगते हैं. यह एक ऐसी बीमारी है, जिसे अक्सर लोग सामान्य बुखार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर यह गंभीर रूप ले सकती है. हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर और अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर बताया कि उन्हें टाइफाइड हो गया है और उनका इलाज चल रहा है.
उन्होंने कहा कि उनकी ब्लड रिपोर्ट में टाइफाइड की पुष्टि हुई है और उन्हें रोज सुबह-शाम IV (इंट्रावेनस) के जरिए इलाज दिया जा रहा है. ऐसे में आइए जानते हैं कि टाइफाइड कैसे फैलता है, इसके लक्षण क्या हैं और कब यह बीमारी खतरनाक हो जाती है.
टाइफाइड क्या है और कैसे फैलता है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, टाइफाइड एक गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण है, जो साल्मोनेला टाइफी (Salmonella Typhi) बैक्टीरिया के कारण होता है. यह बैक्टीरिया दूषित खाना और गंदा पानी पीने से शरीर में पहुंचता है. शरीर में प्रवेश करने के बाद यह तेजी से खून में फैलने लगता है और संक्रमण बढ़ाता है. हर साल दुनिया भर में करीब 1.1 करोड़ से 2.1 करोड़ लोग टाइफाइड से संक्रमित होते हैं और लगभग 2 लाख लोगों की मौत इस बीमारी के कारण हो जाती है. वहीं पैराटाइफाइड के करीब 50 लाख मामले भी हर साल सामने आते हैं, जिनमें बड़ी संख्या दक्षिण एशिया की होती है.
टाइफाइड के लक्षण क्या हैं?
टाइफाइड के शुरुआती लक्षण आमतौर पर बैक्टीरिया के संपर्क में आने के 10 से 14 दिन बाद दिखाई देने लगते हैं. इस बीमारी में मरीज को धीरे-धीरे तेज बुखार आने लगता है. इसके अलावा सिरदर्द, थकान, कमजोरी, पेट दर्द, जी मिचलाना, उल्टी, भूख कम लगना, कब्ज या डायरिया, मांसपेशियों में दर्द और शरीर पर रैशेज भी हो सकते हैं. अगर इलाज न कराया जाए, तो यह बीमारी 3 से 4 हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक बनी रह सकती है.
कब खतरनाक हो जाती है यह बीमारी?
अगर समय पर इलाज न मिले, तो टाइफाइड गंभीर रूप ले सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार, बीमारी के अलग-अलग स्टेज में मरीज को तेज बुखार, पेट फूलना, तेजी से वजन घटना, डिहाइड्रेशन, डिलीरियम, आंतों में गंभीर चोट, अंदरूनी ब्लीडिंग, दिमाग में सूजन, किडनी फेल होना, निमोनिया, पैंक्रियाज में सूजन और मेनिन्जाइटिस जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए लगातार तेज बुखार या अन्य गंभीर लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
टाइफाइड में IV क्यों लगाया जाता है?
टाइफाइड के गंभीर मामलों में मरीज के शरीर में पानी की कमी हो सकती है. ऐसे में IV के जरिए शरीर में तरल पदार्थ और जरूरी दवाएं दी जाती हैं. IV से दवाएं सीधे ब्लड स्ट्रीम में पहुंचती हैं, इसलिए उनका असर जल्दी होता है. इसी वजह से कई मरीजों के इलाज में IV थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है.
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टाइफाइड का पता कैसे लगाया जाता है?
अगर किसी व्यक्ति में टाइफाइड जैसे लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर जांच की सलाह देते हैं. इसके लिए ब्लड टेस्ट, ब्लड कल्चर, स्टूल और यूरिन टेस्ट, विडाल टेस्ट और टाइफी डॉट टेस्ट जैसे परीक्षण किए जा सकते हैं. कुछ गंभीर मामलों में, जब एंटीबायोटिक दवाओं के बाद भी सुधार नहीं होता, तब बोन मैरो कल्चर कराने की सलाह भी दी जा सकती है.
टाइफाइड से बचाव कैसे करें?
टाइफाइड से बचने के लिए साफ और सुरक्षित पानी पीना, ताजा और अच्छी तरह पका हुआ खाना, खाना खाने और बनाने से पहले साबुन से हाथ धोना, सड़क किनारे खुले में मिलने वाला खाना खाने से बचना और घर के आसपास साफ-सफाई बनाए रखना जरूरी है. जिन इलाकों में टाइफाइड के मामले ज्यादा होते हैं, वहां जाने से पहले डॉक्टर की सलाह पर टाइफाइड वैक्सीन भी लगवाई जा सकती है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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