
जानकारी के लिए बता दें कि वायरलेस चार्जिंग इंडक्टिव टेक्नोलॉजी पर काम करती है. चार्जर और फोन के अंदर मौजूद कॉइल्स के बीच एक मैग्नेटिक फील्ड के जरिए बिजली ट्रांसफर होती है. इस पूरे प्रोसेस में बिजली कई बार अलग-अलग रूपों में बदलती है जिससे बिजली का कुछ हिस्सा गर्मी के रूप में बेकार हो जाता है.

इसी वजह से वायरलेस चार्जिंग के दौरान फोन अक्सर गर्म होने लगता है. अगर फोन चार्जिंग पैड पर बिल्कुल सही तरीके में न रखा जाए या उसके ऊपर मोटा कवर लगा हो तो चार्जिंग की ताकत और भी कम हो सकती है.

वायरलेस चार्जर हमेशा चार्जिंग के लिए तैयार रहता है. इसलिए जब उस पर कोई डिवाइस न भी रखी हो, तब भी वह थोड़ी-बहुत बिजली लगातार खपत करता रहता है. दूसरी ओर, ज्यादातर वायर्ड चार्जर इस्तेमाल न होने पर लगभग बिजली लेना बंद कर देते हैं.

इसके अलावा वायरलेस चार्जिंग में बिजली की एक हिस्सा खराब हो जाता है. बता दें कि एडवांस Qi2 या MagSafe जैसी टेक्नोलॉजी में भी लगभग 12 से 20 प्रतिशत तक बिजली का नुकसान हो सकता है. वहीं नॉर्मल Qi वायरलेस चार्जिंग में ये नुकसान 25 से 40 प्रतिशत तक पहुंच सकता है.

इसके मुकाबले USB-C जैसी वायर्ड चार्जिंग में आमतौर पर केवल 5 से 10 प्रतिशत बिजली ही बेकार जाती है. ऐसे में अगर घर में कई स्मार्टफोन, ईयरबड्स या स्मार्टवॉच वायरलेस चार्जिंग से चार्ज किए जाते हैं तो समय के साथ बिजली की खपत और बिल दोनों बढ़ सकते हैं.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वायरलेस चार्जिंग की सबसे बड़ी कमी इसकी कम स्पीड होती है. ज्यादातर वायरलेस चार्जर वायर्ड चार्जिंग के मुकाबले धीमे होते हैं. आज कई स्मार्टफोन 30W, 60W, 80W या 100W तक की फास्ट वायर्ड चार्जिंग को सपोर्ट करते हैं जिससे कुछ ही मिनटों में बैटरी का बड़ा हिस्सा चार्ज हो जाता है.

अगर आपको ऑफिस जाने की जल्दी है या फोन की बैटरी अचानक खत्म हो गई है तो वायर्ड चार्जिंग कहीं ज्यादा तेज और सुविधाजनक साबित हो सकती है. हालांकि वायरलेस चार्जिंग पूरी तरह खराब नहीं है. कार में ड्राइव करते समय, ऑफिस डेस्क पर या बेडसाइड टेबल पर इसका इस्तेमाल काफी सुविधाजनक रहता है. मल्टी-डिवाइस वायरलेस चार्जर एक साथ कई गैजेट चार्ज करने में भी मदद करते हैं और केबल का झंझट कम हो जाता है.
Published at : 17 Jul 2026 07:17 PM (IST)
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