होम लोन के लिए तरस गई 10000 करोड़ की कंपनी, 800 से ज्यादा CIBIL स्कोर से भी नहीं बनी बात

होम लोन के लिए तरस गई 10000 करोड़ की कंपनी, 800 से ज्यादा CIBIL स्कोर से भी नहीं बनी बात


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  • फिनटेक सीईओ प्रवीण जाधव का होम लोन आवेदन अस्वीकृत हुआ.
  • बैंक ने उन्हें फाउंडर के रूप में ‘उच्च जोखिम’ माना.
  • उच्च सिबिल स्कोर, गहरे बैंक संबंध के बावजूद आवेदन खारिज.
  • बैंक फाउंडर्स को अस्थिर आय के कारण जोखिम भरा मानते हैं.

Home Loan: आज के समय में होम लोन का मिलना कोई बड़ी बात नहीं है. अगर बैंक में आपकी अच्छी जान-पहचान है और क्रेडिट हिस्ट्री भी बेहतर तो काम और भी आसान हो जाता है. लेकिन हर किसी के लिए बात एक समान नहीं है. कई बार CIBIL स्कोर शानदार होते हुए भी बैंक आपको लोन देने से मना कर सकता है. कुछ ऐसा ही हुआ फिनटेक कंपनी रेज फाइनेंशियल सर्विसेज (Raise Financial Services) के सीईओ प्रवीण जाधव (Pravin Jadhav) के साथ. उनका CIBIL स्कोर 800 के ऊपर है, कंपनी की वैल्यूएशन भी 10000 करोड़ रुपये के बराबर है. बावजूद इसके उनका लोन एप्लीकेशन रिजेक्ट होना वाकई में चौंकानेवाली है. CEO ने X पर एक पोस्ट शेयर करते हुए इस पर अपना दर्द भी बांटा है. 

सोशल मीडिया पर CEO का छलका दर्द

बुधवार को X पर एक पोस्ट में जाधव ने लिखा कि एक बड़े प्राइवेट बैंक ने उनका होम लोन एप्लीकेशन सिर्फ इसलिए रिजेक्ट कर दिया क्योंकि वह एक फाउंडर है. उन्होंने यह भी बताया कि ये वही बैंक है, जो उन्हें देश के टॉप फिनटेक इनोवेटर्स में से एक के तौर पर सम्मानित भी कर चुका है. CEO ने आगे कहा, “वो हमारी कंपनी में काम करने वाले लोगों को तो लोन दे सकते हैं, लेकिन मुझे नहीं – क्योंकि एक फाउंडर के तौर पर मैं ‘हाई रिस्क’ कैटेगरी में आता हूं.” उन्होंने आगे यह भी बताया कि वह 25 साल से ज्यादा समय से उस बैंक के साथ जुड़े हुए हैं और उनका मानना ​​है कि एसेट्स (संपत्ति) के मामले में वे बैंक के टॉप 0.1% ग्राहकों में से एक हैं. बतौर प्रवीण बैंक के साथ उनका रिश्ता लोन की वैल्यू से 5-6 गुना ज्यादा का है. इतना ही नहीं, उनका सिबिल स्कोर भी 800 से ज्यादा है, जो कि काफी अच्छा माना जाता है.

फाउंडर्स को क्यों ‘हाई रिस्क’ मानते हैं बैंक?

बैंक स्टार्टअप फाउंडर्स और एंटरप्रेन्योर्स को लोन देना जोखिम भरा मानते हैं क्योंकि इनकी कोई फिक्स्ड या गारंटीड सैलरी नहीं होती है. ऊपर से इनकी इनकम भी ऊपर-नीचे होती रहती है. ऐसे में बैंक को डर रहता है कि कहीं इनकी ईएमआई न डूब जाए इसलिए बैंक अमूमन इन्हें लोन देने से कतराते हैं. 

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