- द बैंकर लिस्ट: दुनिया के शीर्ष 10 बैंकों में 7 चीनी.
- सरकारी चीनी बैंक विदेश नीति, ऋण जाल हेतु धन उपयोग करते हैं.
- यह रणनीति युआन को बढ़ावा, डिजिटल बैंकिंग प्रभुत्व, भारत को चुनौती है.
World’s 10 Biggest Banks: ग्लोबल बैंकिंग से जुड़ी मशहूर मैगजीन ‘द बैंकर’ दुनिया के 100 सबसे बड़े बैंकों की एक लिस्ट बनाई है, इनमें टॉप-10 बैंकों में से 7 बैंक अकेले चीन के हैं. इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ चाइना (ICBC), चाइना कंस्ट्रक्शन बैंक, एग्रीकल्चरल बैंक ऑफ चाइना और बैंक ऑफ चाइना टॉप चार पोजीशन पर हैं. ये इस पोजीशन पर साल 2019 से कायम रहे हैं.
पोस्टल सेविंग्स बैंक ऑफ़ चाइना – जो 2007 में पोस्ट ऑफिस के सेविंग्स काउंटर से बनाया गया था – पहली बार टॉप दस में शामिल हुआ है. टॉप 100 में 22 चीनी बैंक है. लिस्ट में जेपी मॉर्गन चेस, बैंक ऑफ अमेरिका और सिटीग्रुप भी हैं, जो चीन के नहीं है. टॉप 100 की लिस्ट में भारतीय बैंकों का कोई अता-पता नहीं है.
चीन का क्या है इरादा?
चीन के सभी बड़े बैंक सरकारी हैं, जो पैसों का इस्तेमाल कारोबार से ज्यादा अपनी विदेश नीति के लिए करते हैं. इन बैंकों के पास इतना पैसा होता है, तो कि यह श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे अपने पड़ोस में स्थित देशों को भारी-भरकम कर्ज देने का दम रखते हैं.
जब ये देश कर्ज नहीं चुका पाते हैं, तो चीन इनके बंदरगाहों या जमीन को कब्जे में ले लेता है. इसे ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ या भारत को घेरने की रणनीति कहते हैं. ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ को आप एक जियोपॉलिटिकल थ्योरी के तौर पर समझ सकते हें, जो यह बताती है कि चीन, भारत को किस तरह से जमीन और समुद्र के रास्ते घेरने की तैयारी कर रहा है.
चीन की तगड़ी है प्लानिंग
चीन का सबसे बड़ा बैंक ICBC है, जो 7.6 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति को संभालता है. भारत की पूरी जीडीपी इसकी आधी है. चीन के टॉप बैंकों के मुकाबले भारत का सबसे बड़ा बैंक- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) काफी छोटा है. चीन इन बैंकों के जरिए अमेरिकी डॉलर का रूतबा खत्म करा चाहता है. चीन चाहता है कि डॉलर की जगह दुनियाभर में कारोबार के लिए युआन का इस्तेमाल हो.
चूंकि इन बैंकों के पास पैसों की कोई कमी नहीं है इसलिए ये आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ब्लाॅकचेन जैसी नई तकनीकों पर भर-भरकर निवेश कर रहे हैं ताकि भविष्य की टेक्नोलॉजी पर इनका कब्जा हो. ऐसे में अगर आने वाले समय में डिजिटल बैंकिंग, इंटरनेशनल पेमेंट गेटवे पर चीनी बैंकों का दबदबा रहेगा, तो ऑनलाइन सुरक्षा के नियम, तकनीक वगैरह येही तय करेंगे, जाे भारत के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होगी.
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