पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आज बगावत के 33 वें दिन पाकिस्तानी रेंजर्स ने एक बार फिर फायरिंग की और आंसू गैस के गोले छोड़े. फायरिंग सुबह 10 बजे हुई जब पीओके के जंडाला से 60-70 प्रदर्शनकारियों का जत्था रावलकोट की तरफ जा रहा था ताकि 15 जुलाई को होने वाले मुजफ्फराबाद तक मार्च में हिस्सा ले सके.
इस जत्थे को जंडाला से थोड़ा सा आगे पहले अरजा क्रॉस पर रोका गया और फिर जत्थे के ऊपर पाकिस्तानी रेंजर्स ने फायरिंग की और आंसू गैस के गोले छोड़े. जिसकी कई वीडियो एबीपी न्यूज़ के पास मौजूद हैं. पाकिस्तानी सेना की इस बर्बर कार्रवाई में 3 युवकों की जान चली गई और अब पाकिस्तानी सेना के हाथो मारने वाले प्रदर्शनकारियों का आकड़ा 65 हो गया है.
पाकिस्तान की बर्बरता पर क्या बोले लोग?
पाकिस्तानी सेना की बर्बरता की दास्तान सुनाते हुए आज प्रदर्शन के प्रमुख आयोजकों में से एक सरदार उमर नज़ीर ने कहा की पाकिस्तान की सेना इतनी बर्बर है कि आज जब उसने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग की और आंसू गैस के गोले छोड़े तो एक व्यक्ति पास बनी मस्जिद में क़ुरान ए पाक लेने चला गया ताकि इस सर्वोच्च धार्मिक पुस्तक को नुक़सान ना हो लेकिन बर्बर पाकिस्तानी सेना मस्जिद में जूते पहन कर घुसी, क़ुरान ए पाक छीन ली, मस्जिद में तोड़फोड़ की और मस्जिद का सामान तक पाकिस्तानी रेंजर्स ने लूट लिया. सरदार उमर नज़ीर ने पाकिस्तानी सेना के इस कृत्य से पाकिस्तानी सेना की इजरायल की सेना से तुलना की और कहा जो काम इजरायल कथित रूप से गाजा की मस्जिदों में करती है वही काम पाकिस्तानी सेना पीओके की मस्जिदों में कर रही है ऐसे में पाकिस्तान की सेना और इजराइल की सेना में क्या अंतर है.
पाकिस्तानी सेना को रोकने के लिए पीओके के लोगों ने पेड़ काटे
15 जुलाई को रावलाकोट से पीओके की राजधानी मुजफ्फराबाद की तरफ प्रदर्शनकारियों के मार्च और मुजफ्फराबाद में प्रदर्शनकारियों के कब्जे को रोकने के लिए पीओके में पाकिस्तानी रेंजर्स और फ्रंटियर कोर (FC) के पीओके में कुल तैनाती बढ़ा कर 17 हज़ार 500 से ज़्यादा कर दी गई है. एबीपी न्यूज़ के पास आई तस्वीरों में दिख रहा है कि पीओके के अलग अलग हिस्सों में शहरों में पाकिस्तानी सेना को घुसने से रोकने के लिए पीओके के लोगों ने सड़कों पर बड़े बड़े पत्थर रख दिए है और पेड़ काट कर डाल दिया है ताकि पाकिस्तानी रेंजर्स और एफसी की अतिरिक्त टुकड़ी रावलाकोट या फिर धीरकोट या फिर बाग में ना घुस पाये.
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पीओके में 33वें दिन भी महिलाओं और पुरुषों का प्रदर्शन जारी रहा, जहां महिलाओं ने “आज़ादी” और “ये जो दहशतगर्दी है इसके पीछे वर्दी है के नारे लगाये” तो पुरुषों ने पीओके में 41 पीओके की सीटों और 12 रिफ्यूजी सीटो के ख़िलाफ़ नारे लगाए और पीओके में पाकिस्तान परस्त लोगों को सहूलत्कार बोल कर चेतावनी दी.
पुलिसकर्मियों की हत्या का आरोप AAC पर लगाया
पीओके में प्रदर्शनकारियों को तोड़ते की नियत से आज पीओके के पुलिस प्रमुख आईजी कैप्टन (रिटायर्ड) लियाकत अली मलिक ने बयान जारी करके कहा की जो भी व्यक्ति अवामी एक्शन कमेटी में किसी के भी भड़काने पर चला गया है वो वापस आये उसे पीओके और पाकिस्तान का प्रशासन इज्जत देगा, इसे साथ ही पीओके के पुलिस प्रमुख कैप्टन (रिटायर्ड) लियाकत अली मलिक ने प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों की हत्या का आरोप अवामी एक्शन कमेटी पर लगाया.
हालांकि फिलहाल पीओके में पाकिस्तान सेना और हुकूमत की तरफ़ से उसका राज कायम करने के लिए लाहौर से प्रमोट करके पिछले साल पीओके भेजे गए कैप्टन (रिटायर्ड) लियाकत अली मलिक की अपील का कोई ख़ास असर प्रदर्शनकारियों पर नहीं हो रहा है और जगह मार्च निकाल कर लोग 15 जुलाई के लिए हुंकार भर रहे हैं, बाज़ार एक महीने से बंद हैं और 15 जुलाई की मुजफ्फराबाद मार्च और मुजफ्फराबाद में कब्जे पर प्रदर्शनकारी अपने उत्साह का प्रदर्शन भी कर रहे हैं. ऐसे में देखना होगा कि 15 जुलाई को पीओके में किस तरह की स्थिति निकाल कर आती है.
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