श्रेयस अय्यर की कप्तानी में भारतीय क्रिकेट टीम इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज 0-4 से हार गई. शनिवार को खेले गए पांचवें टी20 में भी गेंदबाजों, बल्लेबाजों ने निराश किया, फील्डिंग भी घटिया दर्जे की रही, जैसा हमने इस पूरी सीरीज में देखा है. सीरीज का पहला मैच रद्द हुआ था, उसके बाद चारों मैच इंग्लैंड ने जीते. अय्यर की कप्तानी में भारत लगातार 6 मैच हार चुका है. जानिए इस सीरीज में मिली हार के 5 बड़े कारण.
बल्लेबाजों का गलत अप्रोच
इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के पहले मैच में संजू सैमसन खेले, लेकिन अगले में उन्हें ड्राप कर दिया गया और वैभव सूर्यवंशी का डेब्यू करवाया गया. जबकि कई दिग्गजों का कहना था कि इंग्लैंड के सामने उतारने से पहले आयरलैंड में वैभव का डेब्यू करवा देना चाहिए था. इससे टॉप बल्लेबाजों में इनसिक्योरिटी भी आई कि जो तेज नहीं खेलेगा, वैभव उसकी जगह खेलेगा. तेज खेलने की कोशिश में हमने देखा कि भारतीय बल्लेबाजों की क्या हालत हुई.
संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा हो या ईशान किशन, सभी ने पहली गेंद से हावी होने की कोशिश की. ये उन्हीं पिच पर फ्लॉप हुए, जिस पर इंग्लैंड के बल्लेबाज खूब रन बना रहे थे. भारतीय बल्लेबाजों ने मौसम को ध्यान में रखा ही नहीं, बस एक ही अप्रोच से खेले कि हर गेंद पर प्रहार करना है. जबकि कंडीशन के हिसाब से साझेदारी करना महत्वपूर्ण था. भारतीय बल्लेबाज ग्राउंडेड शॉट्स की बजाय मैक्सिमम के लिए गए, पूरी सीरीज में टॉप बल्लेबाज ज्यादातर कैच ही आउट हुए.
बल्लेबाजी क्रम में बदलाव
बल्लेबाजों के क्रम में भी लगातार बदलाव देखे गए. पहले मैच में संजू-अभिषेक ने ओपन किया. फिर 3 मैचों में वैभव-अभिषेक ने और अंतिम में वैभव को ड्राप कर दिया गया. चलो यहां तो फिर भी समझ आता है, लेकिन मिडिल ओवरों में बेवजह बदलाव करना भारी पड़ गया. तिलक वर्मा ने इस फॉर्मेट में तीसरे नंबर पर खेलते हुए 2 शतक लगाए, लेकिन उन्हें निचले क्रम में भेज दिया गया. तब भी उनका स्थान पक्का नहीं रहा, कभी वह पांचवें तो कभी छठे नंबर पर बल्लेबाजी करने आए.
शिवम दुबे को कभी ऊपर भेजा गया, तो कभी नीचे. मध्य क्रम के बल्लेबाज भी इंग्लैंड के गेंदबाजों के जाल में फंसते हुए नजर आए. हमारे ऑलराउंडर इस सीरीज में पूरी तरह फ्लॉप रहे, वह न गेंद और न ही बल्ले से कमाल दिखा सके.
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हर मैच के बाद गेंदबाजी में बदलाव
जब एक टीम प्लेइंग 11 में हर मैच के बाद बदलाव करती है तो दिखता है कि उस पर कितना दबाव है. लगभग हर मैच के बाद गेंदबाजी इकाई में बदलाव होते रहे. प्रिंस यादव, जिन्होंने आयरलैंड में डेब्यू मैच में 3 विकेट लिए उन्हें इंग्लैंड में पहले मैच में बेवजह ड्राप कर दिया गया. वाशिंगटन सुंदर ड्राप हुए, फिर आए और फिर ड्राप कर दिए गए. ऐसा लगा कि कोच, कप्तान और मैनेजमेंट पूरी तरह से कन्फ्यूज है. जबकि कई दिग्गजों का मानना है कि हमें 5 प्रॉपर गेंदबाजों के साथ उतरना चाहिए था, उन पर भरोसा करना चाहिए था.
स्पिनर्स पूरी तरह फ्लॉप
ऐसा नहीं था कि इंग्लैंड में खेली गई इस सीरीज में स्पिनर्स के लिए मदद नहीं थी. इंग्लैंड के स्पिनर्स ने जहां इस सीरीज में कुल 10 विकेट लिए, वहां भारत के स्पिनर्स सिर्फ 3 ही विकेट ले पाए. अक्षर पटेल ने पांचवें टी20 में 4 ओवरों में 63 रन लुटाए, कोई विकेट नहीं ले सके. वाशिंगटन सुंदर भी फ्लॉप रहे.
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घटिया दर्जे की फील्डिंग
दुनिया की नंबर-1 टीम से आप ऐसी फील्डिंग की उम्मीद नहीं करते, जैसा हमने इंग्लैंड के खिलाफ हुई इस सीरीज में देखा. कई मिसफील्ड, कैच ड्राप ने निराश किया, मैदान पर वो चुस्ती-फुर्ती भी नजर नहीं आई. बॉडी लैंग्वेज भी ऐसी नजर आई कि हमने पहले ही हार मान ली थी.



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