बारिश हो रही थी, सड़कें भीग रही थीं और आसमान से लगातार पानी बरस रहा था. लेकिन इसी बीच एक ऐसा वीडियो सामने आया जिसने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी. वीडियो में एक पानी का टैंकर तेज बारिश के बीच सड़क के डिवाइडर पर लगे पौधों को पानी देता नजर आया. लोगों ने इसे पानी की बर्बादी बताया और देखते ही देखते वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया. हालांकि, बाद में जो सच्चाई सामने आई, उसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया.
बारिश के बीच पौधों को पानी देता दिखा टैंकर
यह मामला महाराष्ट्र के पुणे के पौड रोड का है. वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि तेज बारिश के बावजूद एक पानी का टैंकर सड़क के बीच बने डिवाइडर पर लगे पौधों में पानी डाल रहा है. वीडियो सामने आते ही लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए. कई लोगों ने कहा कि एक तरफ शहर के कई इलाकों में पानी की कमी है, वहीं दूसरी तरफ बारिश में भी पौधों को पानी देना समझ से परे है.
पुणे में बारिश हो रही है और पौधों को पानी डाला जा रहा है. एक तरफ जहां मुंबई और पुणे जैसे महानगरों में पानी की किल्लत है वहीं दूसरी ओर इस तरह का काम समझ कम ही आ रहा है….हालांकि वीडियो की सच्चाई कुछ और बताई जा रही है. pic.twitter.com/uqWgOzBRqR
— आजाद भारत का आजाद नागरिक (@AnathNagrik) July 4, 2026
वीडियो वायरल होते ही PMC को देना पड़ा जवाब
वीडियो पर बढ़ते विवाद के बाद पुणे नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त ओमप्रकाश दिवाटे ने पूरे मामले की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि जिस डिवाइडर पर पौधे लगे हैं, उसकी देखरेख पुणे नगर निगम नहीं बल्कि पुणे मेट्रो करती है. उनके मुताबिक डिवाइडर के ठीक ऊपर एलिवेटेड मेट्रो का पुल बना हुआ है, जिसकी वजह से बारिश का पानी पौधों तक पहुंच ही नहीं पाता. इसी वजह से पौधों को बचाने के लिए टैंकर से पानी देना जरूरी था.
Common sense on holiday.
It’s raining. Nature is watering the trees.Meanwhile, PMC sends a municipal water tanker to water the same trees.
When common sense takes a holiday, taxpayers pick up the bill.
This isn’t irrigation. It’s a masterclass in bureaucratic efficiency.… pic.twitter.com/AHrj87AVPh
— Vijay Kumbhar (@VijayKumbhar62) July 4, 2026
जांच में सामने आई पूरी कहानी
मामले ने तूल पकड़ा तो बीजेपी नेता संदीप खरडेकर ने भी इसकी जांच की. उन्होंने टैंकर मालिक और उसे किराए पर लेने वाली एजेंसी से बात की. जांच में पता चला कि पुणे मेट्रो से विज्ञापन का अधिकार लेने वाली एक एजेंसी डिवाइडर की देखरेख और पौधों की जिम्मेदारी भी संभालती है. एजेंसी का कहना था कि करीब 10 दिनों से पौधों को पानी नहीं मिला था, इसलिए उन्हें सूखने से बचाने के लिए टैंकर बुलाया गया. यह भी बताया गया कि टैंकर में इस्तेमाल हुआ पानी नगर निगम की पेयजल सप्लाई का नहीं, बल्कि वारजे इलाके के एक बोरवेल से लिया गया था.
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सोशल मीडिया पर लोगों ने जमकर दी प्रतिक्रिया
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग राय देखने को मिली. एक यूजर ने लिखा, “पहले वीडियो देखकर लगा कि पानी की बर्बादी हो रही है, लेकिन पूरी सच्चाई जानने के बाद मामला समझ आया.” दूसरे यूजर ने कहा, “किसी भी वीडियो पर राय बनाने से पहले उसकी पूरी जानकारी जरूर लेनी चाहिए.” वहीं कुछ लोगों ने लिखा कि ऐसे कामों की जानकारी पहले से सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि गलतफहमियां न फैलें. हालांकि कई यूजर्स ने यह भी कहा कि पहली नजर में यह दृश्य किसी को भी हैरान कर सकता था और इसी वजह से वीडियो इतनी तेजी से वायरल हो गया.
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