
युधिष्ठिर की आज्ञा का पालन करते हुए अर्जुन ने वनवास स्वीकार किया. उन्होंने अपने भाइयों और राजसुख को छोड़ धर्म का मार्ग चुना. मन में पीड़ा होने के बावजूद उन्होंने कर्तव्य को सर्वोपरि माना और तीर्थयात्रा के लिए निकल पड़े.

वनवास के समय अर्जुन ने अनेक पवित्र तीर्थों का दर्शन किया. वे नदियों, आश्रमों और ऋषियों के पावन स्थलों पर पहुंचे. इस यात्रा ने उन्हें आध्यात्मिक शक्ति और जीवन के गहरे अनुभव प्रदान किए.
Published at : 26 Jun 2026 06:02 AM (IST)



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