यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों पर अमेरिका में ही सवाल खड़े हो रहे हैं. पहले अमेरिकी संसद (सीनेट) ने प्रस्ताव पारित कर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर रोक लगाई. अब उनको चुनावी नियम बदलने की कोशिशों पर अब कोर्ट से बड़ा झटका लगा है.बोस्टन की एक फेडरल कोर्ट ने उनके उस चुनावी आदेश के बड़े हिस्से पर रोक लगा दी है, जिसमें वोटर रजिस्ट्रेशन के समय नागरिकता का डॉक्यूमेंट दिखाने की अनिवार्य शर्तें शामिल थीं.
एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, फेडरल जज ने बुधवार (24 जून) को यह फैसला सुनाया. यानी अब ट्रंप प्रशासन चुनावों से जुड़े अपने पहले कार्यकारी आदेश के ज्यादातर हिस्सों को लागू नहीं कर पाएगा. इसमें वह नियम भी शामिल है, जिसमें ट्रंप प्रशासन चाहता था कि जब भी कोई नया व्यक्ति वोट डालने के लिए रजिस्ट्रेशन कराए तो वह सरकारी कागजात दिखाकर यह साबित करे कि वह अमेरिका का नागरिक है,लेकिन कोर्ट के इस फैसले के बाद यह नियम लागू नहीं हो पाएगा.
कोर्ट ने लगाई फैसले पर रोक
बोस्टन स्थित अमेरिकी जिला कोर्ट की जज डेनिस कैस्पर का यह फैसला उनके एक साल पुराने आदेश को अब स्थायी बना देता है. एक साल पहले उन्होंने एक प्रारंभिक रोक लगाई थी, जिसके जरिए ट्रंप के चुनाव व्यवस्था को बदलने के कई प्रयासों को अस्थायी रूप से रोका गया था. अब यह रोक हमेशा के लिए लागू हो गई है.
ट्रंप प्रशासन ने तर्क दिया था कि डेमोक्रेटिक राज्य के अटॉर्नी जनरलों की ओर से बदलाव को रोकने के लिए दायर किया गया केस समय से पहले का था, क्योंकि नियमों को अब तक लागू नहीं किया गया था,लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया. जज ने यह भी साफ किया कि चुनाव कैसे होंगे, इसका अधिकार राष्ट्रपति के पास नहीं बल्कि कांग्रेस और राज्यों के पास में है. उन्होंने यह भी कहा कि संविधान ‘राष्ट्रपति को चुनावों पर कोई खास शक्तियां नहीं देता है.’
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सीनेट ने पारित किया ‘वॉर पावर्स रिजॉल्यूशन’
इससे पहले अमेरिकी सीनेट ने ईरान पर ‘वॉर पावर्स रिजॉल्यूशन’ पारित किया था. जिसके तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कांग्रेस की मंजूरी के बिना ईरान में और सैन्य कार्रवाई करने से रोक लगाई गई है.फरवरी में शुरू हुए टकराव के बाद से कांग्रेस के दोनों सदनों की ओर से ऐसा पहली बार हुआ है, जब इस तरह का प्रस्ताव पास किया गया है. यह प्रस्ताव ट्रंप के युद्ध से निपटने के तरीके के खिलाफ बढ़ते विरोध का संकेत के तौर पर भी है.
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