होर्मुज और परमाणु कार्यक्रम की तरह लेबनान भी अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली डील में एक बड़ा पेंच होने जा रहा है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कर दिया है कि युद्ध का अंत तब तक पूरा नहीं होगा जब तक इजरायली सेनाएं लेबनान में कब्जे वाले क्षेत्रों से वापस नहीं हट जातीं.
अराघची ने यहां तक कह दिया है कि अब से लेबनान पर इजरायल का कोई भी हमला और लेबनानी क्षेत्रों पर कब्जा जारी रखना समझौता ज्ञापन (एमओयू) का उल्लंघन है.
लेबनान को लेकर अराघची के ये मुखर स्वर, मंगलवार को तेहरान में अलग-अलग देशों के राजनयिकों और राजदूतों के साथ बैठक में सामने आई. बैठक में अराघची ने अमेरिका से युद्ध और जिनेवा में होने वाली संभावित डील को लेकर जानकारी राजनयिकों को ईरान का पक्ष सामने रखा.
इजरायल ने डील से खुद को किया अलग
लेबनान को लेकर भले ईरान पेंच फंसाने के चक्कर में है, लेकिन हकीकत ये है कि इजरायल ने अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले एमओयू (या डील) से खुद को अलग कर लिया है. किसी भी कीमत पर इजरायल, दक्षिणी लेबनान पर अपना कब्जा खत्म नहीं करने जा रहा है. इजरायल ने साफ कर दिया है कि दक्षिणी लेबनान में कब्जा किए क्षेत्र को बफर (या सिक्योरिटी) जोन बनाया जाएगा, ताकि ईरान समर्थित हिजबुल्लाह मिलिशिया के हमले से उत्तरी इजरायल को सुरक्षित रखा जा सके.
अराघची के मुताबिक, 19 जून को जिनेवा में एमओयू साइन होने के बाद युद्ध लेबनान सहित सभी मोर्चों पर स्थायी तौर से समाप्त हो जाएगा. राजनयिकों से बात करते हुए अराघची ने कहा कि हमारे नजरिए से अमेरिका और इजरायल एक सिक्के के दो पहलू हैं. ऐसे ही ईरान और हिजबुल्लाह हैं. जबकि, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान समर्थत हमास और हिजबुल्लाह के पूरी तरह खात्मे की कसम खा रखी है. ऐसे में इस बात की संभावना कम लग रही है कि लेबनान से ऑपरेट होने वाले हिजबुल्लाह पर इजरायली डिफेंस फोर्सेज के हमले थम जाएंगे.
इजरायल पहले भी साफ कर चुका है कि हिजबुल्लाह पर हमलों को लेबनान पर हमला ना माना जाए. ऐसे में ईरान जरूर बिलबिला सकता है और डील में अड़ंगा लग सकता है.
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दो चरणों में होगी डील, जानें अराघची ने क्या बताया है?
अराघची ने ये भी बताया कि अमेरिका के साथ डील, 02 चरणों में होगी, पहले चरण में एमओयू की घोषणा शामिल है (14 जून). इस दौरान, दोनों देशों के बीच युद्ध रूक जाएगा और ईरान के खिलाफ नेवल ब्लॉकेड हो जाएगा समाप्त. अराघची ने होर्मुज को लेकर साफ-साफ कुछ नहीं कहा. ईरानी विदेश मंत्री के मुताबिक, पहले होर्मुज को सुरक्षित रखने की कोशिश की जा रही है. ये होने के बाद 19 जून को जिनेवा में एमओयू पर हस्ताक्षर होंगे.
ईरानी विदेश मंत्री के मुताबिक, दूसरा चरण 60 दिन का होगा. इस दौरान ईरान के न्यूक्लियर कार्यक्रम और ईरान पर प्रतिबंध खत्म करने पर चर्चा होगी.
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