300 अरब डॉलर का निवेश, होर्मुज में स्वतंत्र आवाजाही… US-ईरान सीजफायर के लिए क्या है प्रस्ताव


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  • मध्यस्थों की कोशिशों से शांति समझौते पर पहुँचने की उम्मीद जगी है।

Middle East Conflicts: पश्चिम एशिया में पिछले तीन महीने से जारी संघर्ष और तनाव को पूरी तरह से खत्म करने और स्थायी शांति लागू के लिए अमेरिका और ईरान के बीच लगातार उच्च स्तरीय बातचीत चल रही है. हालांकि, इस वक्त दोनों पक्षों के बीच एक नाजूक सीजफायर लागू है, लेकिन संघर्ष पर पूर्ण रूप से विराम लगना अभी बाकी है. इस बीच अमेरिकी और ईरानी पक्ष के बीच एक संभावित सीजफायर को लेकर वार्ता जारी है, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और करीब 300 अरब डॉलर के निवेश पैकेज का महत्वपूर्ण प्रस्तावित बिंदु भी शामिल है.

प्रस्तावित समझौते के कुछ बिंदुओं पर अभी भी असहमति जारी

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, शांति वार्ता में शामिल अधिकारी एक नए ड्राफ्ट मेमोरैंडम को लेकर भी गंभीर चर्चा कर रहे हैं, जिसके दोनों पक्षों से सहमति मिलने के करीब होने की बात कही जा रही है. हालांकि, इस मामले में कई प्रमुख शर्तों पर अभी तक असहमति बनी हुई है. 

ड्राफ्ट समझौते में कौन-कौन से बिंदु महत्वपूर्ण?

यह प्रस्तावित ड्राफ्ट समझौता ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम, अमेरिकी प्रतिबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा और दुश्मनी को औपचारिक रूप से खत्म करने पर व्यापक और मुश्किल वार्ता के लिए एक शुरुआती रुपरेखा के रूप में काम करेगा. 

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हालांकि, इस समझौते में जिस बात की सबसे ज्यादा चर्चा सुनने को मिली है, उन सबसे बड़े घटनाक्रमों में से एक प्रस्तावित अरबों डॉलर का पुनर्निर्माण और निवेश पैकेज है, जो आखिरी समझौते पर पहुंचने पर ईरान की अर्थव्यवस्था को मौलिक रूप से नया आकार दे सकता है. वहीं, वार्ताकारों का कहना है कि हाल के दिनों में दोनों पक्षों के तरफ से बातचीत में प्रगति हुई है, लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से अभी तक इस ड्राफ्ट समझौते को मंजूरी नहीं दी गई है. 

नए संघर्ष की आशंकाओं के बीच बातचीत शुरू

पिछले कई हफ्तों से पाकिस्तान और कतर सहित कई अन्य क्षेत्रीय मध्यस्थ अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध और संघर्ष को पूरी तरह से खत्म करने के साथ-साथ एक बहुआयामी समझौता कराने की कोशिश में जुटे हैं, जिससे कि मध्य पूर्ण पर तनाव की स्थिति खत्म हो और पूर्ण शांति फिर से बहाल की जा सके. हालांकि, पिछले कुछ समय से दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ने से फिर से संघर्ष की शुरुआत की आशंकाएं गहराने लगी थीं, लेकिन तनाव के बावजूद दोनों पक्षों बातचीत की मेज पर पहुंचे. 

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