क्या आपका बैंक सुरक्षित है? सरकारी बैंकों के मुकाबले प्राइवेट पर ज्यादा ‘बैड लोन’

क्या आपका बैंक सुरक्षित है? सरकारी बैंकों के मुकाबले प्राइवेट पर ज्यादा ‘बैड लोन’


Bank NPA Rise: बैंक में खाता होना आजकल आम बात है, बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक हर किसी का एक ना एक खाता बैंक में होता ही है. अब ये सरकारी बैंक होगा या प्राइवेट बैंक ये पूरी तरह से उपभोक्ता और उसकी जरूरत पर निर्भर करता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपका बैंक सुरक्षित है या नहीं? अगर नहीं जानते हैं तो ये रिपोर्ट पढ़ने के बाद आपको होश उड़ने वाले हैं.

प्राइवेट बैंकों पर ‘बैड लोन’ की मार
रेटिंग एजेंसी ICRA (Investment Information and Credit Rating Agency of India Limited) की रिपोर्ट के मुताबिक प्राइवेट बैंकों में ‘बैड लोन’ (NPA) बढ़ने की रफ्तार सरकारी बैंकों से कहीं ज्यादा है. FY27 (वित्त वर्ष 2027) में प्राइवेट बैंकों के नए बैड लोन लगभग 2.0% तक पहुंच सकते हैं, जो वित्त वर्ष 2026 में 1.8% था. तो वहीं सरकारी बैंकों में ये करीब 1.2% रहने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 2026 में 0.9% था. यानी सरकारी बैंक से प्राइवेट बैंकों से ज्यादा सुरक्षित हैं.

क्या है ‘बैड लोन’
जो लोग नहीं जानते उन्हें बता दें कि ‘बैड लोन’ को NPA (Non Performing Assset) भी कहते हैं. ये वो लोन है जिसमें बैंक उपभोक्ता को लोन तो देता है, लेकिन उसे वसूल नहीं पाता है. लोन देने के बाद बैंक एक निश्चित किश्त बांध देता है, जो हर महीने में उपभोक्ता को अदा करना होती है. लेकिन जब ये किश्त चुकाने में उपभोक्ता समर्थ नहीं होता तब ये लोन ‘बैड लोन’ की श्रेणी में आ जाता है. हालांकि इसके लिए ग्राहक को 90 दिन (तीन महीने) का समय मिलता है.

प्राइवेट बैंक देते हैं बिना गारंटी वाले लोन
आपको बता दें कि प्राइवेट बैंक बिना गारंटी वाला और MSME लोन देते हैं. इस वजह से उनके ‘बैड लोन’ में तब्दील होने का खतरा बढ़ जाता है. खासतौर से जब ये लोन छोटे व्यापारियों और पर्सनल लोन के तौर पर दिया जाता है तब इसके डूबने का खतरा ज्यादा बना रहता है. कोई व्यवसाय डूब गया या कारोबार पर कोई भी छोटी सी भी आंच आई तो व्यापारी इसे चुका नहीं पाते हैं.