पाकिस्तान के सरकारी अस्पताल में दूषित इंजेक्शन से 300 से ज्यादा बच्चों में फैला HIV


Child HIV Outbreak in Pakistan: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के तौंसा में एक सरकारी अस्पताल में रियूज  सिरींज के इस्तेमाल से 331 बच्चे जानलेवा बीमारी HIV की चपेट में आ गए. इस बीमारी ने महामारी का रूप ले लिया. इसके फैलने का पता तब चला, जब साल 2024 में अचानक से वहीं के एक डॉक्टर गुल केसरानी ने बच्चों में HIV के मामले में बढ़ोतरी देखी. इनमें एक मामला भाई-बहन से जुड़ा था. इसमें आठ साल के मोहम्मद अमीन की HIV पीड़ित पाए जाने के कुछ वक्त बाद मौत हो गई थी. इसके बाद उसकी बहन भी HIV पॉजिटिव पाई गई. 

बीबीसी की इन्वेस्टिगेशन रिपोर्टिंग में इसका खुलासा हुआ है. रिपोर्ट्स की मानें तो तौंसा के तहसील मुख्यालय अस्पताल में बुनियादी चिकित्सा स्वच्छता (Basic Medical Hygiene) का गंभीर रूप से उल्लंघन किया गया. ऐसे में पाकिस्तान के हेल्थ सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े हो गए.

इन पीड़ित बच्चों के परिवार की मानें तो उन दोनों को एक सरकारी अस्पताल में चेकअप के दौरान दूषित इंजेक्शन दिया गया. इससे HIV हुआ. इसके अलावा जब और जानकारी जुटाई गई तो कई बच्चे इसी अस्पताल में इलाज के बाद HIV की चपेट में आए.

सीक्रेट कैमरे में कैद हुई अस्पताल की लापरवाही 
इस अस्पताल में  कई जगह सीक्रेट कैमरे लगाए गए. इन कैमरों में साफ सफाई से जुड़े बेसिक मेडिकल नियमों के उल्लंघन की बात का खुलासा हुआ. कैमरों में जो कुछ भी कैद हुआ, उसमें यही जानकारी सामने आई कि कई डोज वाली दवा की शिशियों पर एक ही सिरींज का इस्तेमाल हुआ है. एक डॉक्टर डॉ. अल्ताफ अहमद ने बयान दिया कि भले ही उन्होंने नई सुईं लगाई हो, लेकिन उसका पिछला हिस्सा जिसे हम सिररिंज बॉडी कहते हैं, उसमें वायरस मौजूद होता है. इसलिए नई सुई लगाने पर भी वायरस फैल जाएगा. 

बीबीसी की मानें तो डॉक्टर समेत वहां के स्टाफ ने 66 बार से ज्यादा बिना स्टेराइल दस्तानों के इंजेक्शन लगाए. इसके अलावा एक फुटेज में नर्स बिना ग्लबस पहने मेडिकल कचरे को साफ कर रही थी.  जांच के दौरान सामने आए अन्य दृश्यों से अस्पताल के भीतर खराब साफ-सफाई का पता चला, जहां दवा की शीशियां खुली पड़ी थीं, इस्तेमाल की हुई सुइयां काउंटरों पर ही छोड़ दी गई थीं, और मेडिकल कचरे का निपटान ठीक से नहीं किया जा रहा था।

बच्चों के माता पिता ने भी अस्पताल की लापरवाही की पुष्टी की
पीड़ित बच्चों के माता पिता ने भी दावा किया कि उन्होंने अपनी आंखों से असुरक्षित तरीके से मेडिकल फैसिलिटी का इस्तेमाल करते हुए देखा. इनमें कई मरीज पर एक ही सिरींज का बार-बार इस्तेमाल करना भी शामिल है. इधर, अस्पताल इस लापरवाही से इनकार कर रहा है. बीबीसी ने फुटेज भी रखे, लेकिन अस्पताल प्रबंधन अपनी गलती मानने को तैयार नहीं है. 

अस्पताल के इंचार्ज डॉक्टर ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया
अस्पताल के इंचार्ज डॉ. कासिम बुजदार ने कहा है कि उस फुटेजा का भरोसा नहीं किया जा सकता है. यह पुराना हो सकता है. उनके हेड बनने से पहले का हो सकता है, फेक भी हो सकता है. उन्होंने अस्पताल का बचाव भी किया. साथ ही कहा कि यह मरीजों को लिए सुरक्षितहै. वहां साफ-सफाई और इन्फेक्शन कंट्रोल बनाए रखना अभी सबसे बड़ी प्राथमिकता है. 

इसके अलावा कराची के कुलसूम बाई वालिका सरकारी अस्पताल में भी इसी तरह का मामला रिपोर्ट किया गया है. यहां एक दो साल की बच्ची के परिवार के सदस्यों ने बताया कि उन्होंने एक ही सिरिंज में दवा भरी और एक बच्चे को लगा दी. उसे दोबारा भरा. दूसरे बच्चे को लगा दी. उस बच्ची को भी HIV हुआ है. 

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