US-ईरान के बीच 80% तक हुई थी बात, ऐसा क्या हुआ तमतमाए अराघची? पीस टॉक फेल होने की असली कहानी


पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान के बीच हुई बातचीत फेल होने की बड़ी वजह सामने आई है. इस्लामाबाद टॉक में अमेरिका ने ईरान के सामने यूरेनियम संवर्धन पर 20 साल तक रोक लगाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन तेहरान ने कहा कि वह केवल पांच साल तक के लिए इस पर सहमत हो सकता है. अमेरिका के न्यूयॉर्क टाइम्स और वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है. 

न्यूयॉर्क टाइम्स ने ईरान के दो सीनियर अधिकारियों और एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि तेहरान ने पांच साल तक यूरेनियम संवर्धन को निलंबित करने का प्रस्ताव रखा है, जिसे ट्रंप प्रशासन ने 20 साल की अवधि पर जोर देते हुए खारिज कर दिया. अमेरिका की ओर से की गई इस डिमांड से साफ हो गया कि ट्रंप प्रशासन ने पहले की उन मांगों में बड़ा बदलाव किया है, जिसमें तेहरान से न्यूक्लियर इनरिचमेंट को स्थायी रूप से बंद करने की मांग की गई थी. यूएस की चिंता ये थी कि इससे ईरान परमाणु हथियार बनाने की क्षमता हासिल कर सकता है. 

ईरान-अमेरिका के बीच इस बात पर लग सकती है मुहर

विदेश मामलों के जानकार इयान ब्रेमर ने कहा कि अमेरिका और ईरान यूरेनियम संवर्धन पर 12.5 साल के निलंबन के समझौते को अंतिम रूप दे सकते हैं. अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में बड़ी बैठक हुई थी, जो ईरान में 1979 में हुई इस्लामिक क्रांति के बाद सीनियर लेवल की मीटिंग थी.
 
अमेरिका और ईरान की ओर से बार-बार ऐसे संदेश मिल रहे हैं कि दोनों देशों के बीच बैक चैनल बातचीत चल रही है और शांति समझौते को लेकर डील हो सकती है. भले ही अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी है. अधिकारियों ने वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया कि वे आमने-सामने की बातचीत के दूसरे दौर पर चर्चा कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने कोई डिटेल नहीं दी.

यूरेनियम के अलावा होर्मुज पर भी फंसा थे पेच

इस्लामाबाद टॉक के दौरान यूरेनियम इनरिचमेंट के अलावा जिस प्रमुख बात की चर्चा हुई थी, उसमें होर्मुज स्ट्रेट शामिल था, जिसे ईरान ने बंद रखा हुआ है, लेकिन अमेरिका ने इसे फिर से खोलने का वादा किया है. 

रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि जहां दोनों देशों के डेलीगेशन के बीच मीटिंग हुई थी, वहां फोन ले जाने की अनुमति नहीं थी. इसकी वजह से जब ब्रेक हुआ तो जेडी वेंस और गालिबाफ ने अपने-अपने देश में मैसेज भेजा. पाकिस्तान के सरकारी सूत्र ने कहा, ‘हमें बातचीत के दौरान उम्मीद थी कि कोई सफलता जरूर मलेगी और दोनों पक्ष किसी समझौते पर पहुंच जाएंगे. हालांकि हालात बदल गए.’

मीटिंग में अराघची के तेवर हुए गरम

खबरों के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री जो अकसर शांत देखे जाते हैं, उनका लहजा भी मीटिंग के दौरान तीखा हो गया था. उन्होंने मीटिंग के दौरान यूएस डेलीगेशन से कहा था, ‘हम आप पर कैसे भरोसा कर सकते हैं, जबकि पिछली जिनेवा बैठक में आपने कहा था कि कूटनीति जारी रहने के दौरान अमेरिका हमला नहीं करेगा?’

80% तक बन गई थी समझौते की बात 

पाकिस्तान में मीटिंग के दौरान जहां वाशिंगटन का ध्यान परमाणु मुद्दे और होर्मुज पर केंद्रित था, जबकि तेहरान एक व्यापक सहमति चाहता था. सरकारी सूत्र ने बताया कि जब मीटिंग में माहौल तनावपूर्ण हो गया तो आसिम मुनीर और इशाक डार ने टी ब्रेक के लिए कहा. इससे पहले कमरे के बाहर तक ऊंची-ऊंची आवाजें सुनी जा सकती थीं. बातचीत में शामिल एक और सूत्र ने बताया कि दोनों पक्ष समझौते के बहुत करीब यानी 80 फीसदी तक पहुंच गए थे, लेकिन फिर कुछ ऐसे प्रस्ताव सामने आए, जिन पर बात बिगड़ गई. हालांकि पाकिस्तान की ओर से माहौल को नरम करने की कोशिश की गई, लेकिन दोनों पक्षों की ओर से किसी ने भी तनाव कम करने की इच्छा नहीं दिखाई. 

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