इजरायल और अमेरिका के बीच शनिवार 11 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में वार्ता विफल होने के बाद रूस के राष्ट्रपति ने मध्यस्थता की पेशकश की है. रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति से मध्यस्थता की पेशकश की है. उन्हें कॉल कर पुतिन ने यह प्रस्ताव दिया है. अब ऐसे में ईरान और अमेरिका रूस के मध्यस्थता की पेशकश को स्वीकारते हैं, या नहीं देखना दिलचस्प होगा.
मध्यस्थता विफल होने के बाद से दुनिया के कई देशों में युद्ध फिर से शुरू होने का खतरा मंडराने लगा है. इनकी चिंताएं बढ़ा दी है. ऐसे में सभी मध्यस्थता को लेकर अपनी-अपनी तरफ से पेशकश कर रहे हैं.
स्काई न्यूज को दिए इंटरव्यू में यूके के हेल्थ मिनिस्टर वेस स्ट्रीटलिंग ने बताया कि यह जाहिर तौर पर निराशाजनक है. हमें अभी तक बातचीत में कोई सफलता नहीं मिली है. ईरान में इस युद्ध का ऐसा कोई अंत नहीं हुआ है, जो स्थिर और टिकाऊ हो. उन्होंने कहा किअब प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि संघर्ष-विराम जारी रहे और बातचीत फिर से शुरू हो.
ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने भी एक बयान जारी किया है. उन्होंने कहाहै कि यह निराशाजनक है कि अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई.
21 घंटे चली वार्ता बेनतीजा रही थी
इधर इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच करीब 21 घंटे बातचीत चली. यह बिना किसी समझौते के खत्म हो गई. दोनों देशों में किसी भी तरह की सहमति नहीं बन सकी. हालांकि, संकेत दिया गया है कि बातचीत को आगे जारी रखा जा सकता है. दोनों देशों में इस मध्यस्थता वार्ता के बीच परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय नियंत्रण जैसे मुद्दे पर काफी असहमति देखी गई है.
इस बातचीत का जो सबसे बड़ा मुद्दा रहा वो परमाणु कार्यक्रम ही रहा. अमेरिका चाह रहा था कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की क्षमता को पूरी तरह खत्म करने की गारंटी दे और यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम पर सख्त रोक लगाए. इधर, ईरान संप्रभुता की रक्षा के अधिकारों का तर्क देकर प्रतिबंध मानने से इनकार कर दिया.
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