- वैज्ञानिकों ने पानी-आधारित जिंक-आयन बैटरी विकसित की है।
- यह बैटरी 900 बार चार्ज होने पर भी दमदार प्रदर्शन करती है।
- नई तकनीक डेंड्राइट समस्या को हल कर सुरक्षा बढ़ाती है।
- बड़े ऊर्जा भंडारण के लिए यह एक बेहतर विकल्प है।
New Battery Technology: आज की बैटरियों को लेकर सबसे बड़ी चिंता उनकी सुरक्षा और लागत को लेकर होती है. कई बार ये बैटरियां ज्यादा गर्म होकर आग पकड़ लेती हैं साथ ही इन्हें बनाने में महंगे और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों का इस्तेमाल होता है. इसी समस्या का हल निकालते हुए Florida State University के वैज्ञानिकों ने एक नई तरह की जिंक-आयन बैटरी विकसित की है जो पानी आधारित तकनीक पर काम करती है और ज्यादा सुरक्षित मानी जा रही है.
900 बार चार्ज होने के बाद भी दमदार प्रदर्शन
Interesting Engineering की रिपोर्ट के अनुसार, इस नई बैटरी की सबसे खास बात यह है कि यह करीब 900 बार तेजी से चार्ज होने के बाद भी अपनी क्षमता लगभग बरकरार रखती है. आमतौर पर बैटरियां बार-बार चार्ज होने के बाद कमजोर हो जाती हैं लेकिन यह नई तकनीक लंबे समय तक स्थिर प्रदर्शन देने में सक्षम दिखाई देती है.
लिथियम-आयन बैटरी का बेहतर विकल्प
आज के समय में Lithium-ion battery का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है लेकिन इसके साथ ओवरहीटिंग और आग लगने का खतरा भी जुड़ा रहता है. यही कारण है कि दुनिया भर में सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प खोजने की कोशिश तेज हो गई है.
डेंड्राइट की समस्या का समाधान
जिंक-आयन बैटरियों को पहले भी एक अच्छा विकल्प माना गया था लेकिन इनमें “डेंड्राइट” नाम की समस्या सामने आती थी. चार्जिंग के दौरान बैटरी के अंदर सूई जैसी धातु संरचनाएं बनने लगती हैं जो अंत में बैटरी को शॉर्ट सर्किट करके खराब कर देती हैं.
इस चुनौती को हल करने के लिए वैज्ञानिकों ने एक खास डिजाइन तैयार किया है जिसमें मैंगनीज डाइऑक्साइड इलेक्ट्रोड खुद बैटरी के अंदर ही बनता है. इसके साथ एक पानी-आधारित हाइड्रोजेल का इस्तेमाल किया गया है जिसे केव्लर फाइबर से मजबूत किया गया है. यह वही मजबूत पदार्थ है जिसका इस्तेमाल बुलेटप्रूफ जैकेट में होता है.
मजबूत और सुरक्षित डिजाइन
इस बैटरी को इस तरह से तैयार किया गया है कि ये अंदर एक सुरक्षात्मक परत की तरह काम करती है. यह न सिर्फ इलेक्ट्रोलाइट को स्थिर रखती है बल्कि खतरनाक धातु संरचनाओं को बढ़ने से भी रोकती है जिससे शॉर्ट सर्किट का खतरा कम हो जाता है. पुराने जमाले की बैटरी बनाने के प्रोसेस काफी जटिल और महंगी होते हैं जिसमें केमिकल पेस्ट तैयार करके उसे मेटल पर चढ़ाया जाता है और फिर सुखाया जाता है. लेकिन इस नई तकनीक में पूरी प्रक्रिया पानी पर आधारित है जिससे बैटरी को तैयार करना आसान और सस्ता हो सकता है.
बड़े स्तर पर ऊर्जा स्टोरेज के लिए बेहतर विकल्प
हालांकि यह बैटरी फिलहाल स्मार्टफोन जैसे हल्के डिवाइसों के लिए उपयुक्त नहीं है क्योंकि जिंक बैटरियां थोड़ी भारी होती हैं. लेकिन जहां वजन ज्यादा मायने नहीं रखता जैसे बड़े ऊर्जा स्टोरेज सिस्टम या घरों के बैकअप में वहां यह तकनीक बेहद उपयोगी साबित हो सकती है.
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