- 19 अप्रैल को जत्था भारत वापस लौटेगा।
बैसाखी 2026 (खालसा स्थापना दिवस) मनाने के लिए भारत से करीब 2,238 सिख तीर्थयात्री शुक्रवार को अटारी वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान में दाखिल हुए. मई 2025 में शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद से पाकिस्तान का दौरा करने वाला यह दूसरा सिख जत्था है, और भारत द्वारा बॉर्डर पार यात्रा पर लगाए गए प्रतिबंधों के बीच अबतक का सबसे बड़ा सिख जत्था है.
इससे पहले सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक जी की जयंती के मौके पर नवंबर 2025 में 1,932 तीर्थयात्री पाकिस्तान की यात्रा कर चुके थे.
दरअसल पाकिस्तान उच्चायोग ने 10 दिवसीय तीर्थयात्रा के लिए भारतीय सिख तीर्थयात्रियों को 2,800 से ज्यादा वीजा इश्यू किए थे, जिसके दौरान श्रद्धालु प्रमुख सिख मंदिर का दौरा करेंगे.
- इसमें हसन अब्दाल में गुरुद्वारा पंजा साहिब, गुरुद्वारा ननकाना साहिब (गुरु नानक जी का जन्मस्थान)
- गुरुद्वारा करतारपुर साहिब (गुरु नानक का अंतिम विश्राम स्थल)
- फारूकाबाद में गुरुद्वारा सच्चा सौदा साहिब
- लाहौर में गुरुद्वारा डेहरा साहिब
- एमिनाबाद में गुरुद्वारा रोरी साहिब शामिल हैं.
19 अप्रैल को भारत वापस लौटेगे सिख जत्था
नानकाना साहिब में 2 दिन बिताने के बाद वे लाहौर से करीब 400 किलोमीटर दूर हसन अब्दाल स्थित गुरुद्वारा पंजा साहिब के लिए रवाना होंगे, जहां 14 अप्रैल को बैसाखी का मुख्य समारोह आयोजित किया जाएगा. इसके बाद 19 अप्रैल को समूह भारत लौट जाएगा.
पंजाब से शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में स्थित अपने कार्यालय से करीब 1763 तीर्थयात्रिों का एक जत्था भेजा है. इस जत्थे का नेतृत्व एसजीपीसी कार्यकारी समिति के सदस्य सुरजीत तुगलावाल ने महाप्रबंधक हरभजन सिंह के साथ मिलकर किया.
इस मौके पर SGPC के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मन्नान ने भारत और पाकिस्तान दोनों सरकारों से 2019 में गुरु नानक की 550वीं जयंती समारोह के दौरान खोले गए करतारपुर कॉरिडोर को फिर से खोलने का आग्रह किया है.
यह कॉरिडोर 7 मई 2025 से बंद है, जब भारतीय सशस्त्र बलों ने 22 अप्रैल को हुए पहलगाम हमले के जवाब में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया था, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी.
बॉर्डर के दूसरी ओर पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और सरकारी अधिकारियों जिनमें इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड भी शामिल है, उन्होंने तीर्थयात्रियों का गर्मजोशी से स्वागत किया और उनके लिए लंगर सेवा के साथ परिवहन सुविधाओं की व्यवस्था भी की.
Delhi: On the occasion of the festival of Baisakhi, a delegation of devotees departed today from Gurdwara Rakab Ganj Sahib in Delhi. This delegation will travel to Pakistan via the Wagah Border, passing through Amritsar pic.twitter.com/7GbcfI0lqs
— IANS (@ians_india) April 9, 2026
70 तीर्थयात्रियों को भारत पार जाने से रोका
भारतीय सरकार से जरूरी अनुमित न मिलने की वजह से करीब 70 तीर्थयात्रियों को सीमा पार करन से अधिकारियों ने रोक दिया. इससे नाराज होकर उन्होंने सरकार के खिलाफ नारे भी लगाए.
बैसाखी जिसे सिख समुदाय में खालसा सजना दिवस के रूप में मनाया जाता है, दुनियाभर के सिखों के लिए अपार धार्मिक महत्व रखती है, क्योंकि यह 1699 में गुरु गोविंद सिंह द्वारा खालसा पंथ की स्थापना की स्मृति में मनाई जाती है.
1950 के नेहरू-लियाकत समझौते के अंतर्गत सिख तीर्थयात्रियों को 4 धार्मिक अवसर पाकिस्तान के गुरुद्वारों में जाने की अनुमति दी, जिसमें खालसा पंथ की स्थापना दिवस (बैसाखी), पांचवें सिख गुरु, गुरु अर्जन की शहादत की वर्षगांठ, महाराजा रणजीत सिंह की पुण्य तिथि और सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी की जंयती.
लेकिन पिछले साल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार ने अटारी-वाघा सीमा चौकी के रास्ते भारतीय नागरिकों के पाकिस्तान जाने पर प्रतिबंध लगा दिया. इसके जवाब में पाकिस्तान ने सिख तीर्थयात्रियों को छोड़कर भारतीय नागरिकों के लिए सार्क वीजा छूट योजना के तहत जारी वीजा निलंबित कर दिए.
पहलगाम हमले से कुछ दिन पहले बैसाकी के मौके पर 5 हजार से ज्यादा भारतीय सिख तीर्थयात्री पाकिस्तान के गुरुद्वारों में गए थे. यह अब तक पाकिस्तान जाने वाले सिख तीर्थयात्रियों की सबसे बड़ी संख्या थी.
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