अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होने वाली ईरान के साथ शांति वार्ता से पहले साफ कर दिया है कि उनका सबसे बड़ा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान के पास परमाणु हथियार न हों. उन्होंने कहा कि किसी भी समझौते की सबसे अहम शर्त यही होगी कि ईरान पूरी तरह से परमाणु हथियार बनाने से दूर रहे. ट्रंप के शब्दों में, “नो न्यूक्लियर वेपन, यही 99 प्रतिशत मुद्दा है.”
ट्रंप ने एक बार फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी कड़ा रुख दिखाया. उन्होंने कहा कि यह अहम समुद्री रास्ता खुला रहेगा, चाहे ईरान सहयोग करे या नहीं. यह रास्ता दुनिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां से करीब पांचवां हिस्सा कच्चे तेल का गुजरता है. ट्रंप ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका अपने दम पर भी इसे खुलवाएगा.
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पहुंचे इस्लामाबाद
इस बीच अमेरिका ने अपनी तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को इस्लामाबाद भेजा है, जो ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत का नेतृत्व करेंगे. उनके साथ ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद जारेड कुशनर भी इस टीम का हिस्सा हैं. यह टीम पेरिस में रुकने के बाद पाकिस्तान पहुंची है. दूसरी तरफ ईरान की ओर से संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर ग़ालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची बातचीत में हिस्सा लेने के लिए इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं. वेंस ने यात्रा के दौरान कहा कि उन्हें बातचीत से सकारात्मक नतीजे की उम्मीद है, लेकिन अगर ईरान चालाकी दिखाने की कोशिश करता है तो अमेरिकी टीम सख्त रुख अपनाएगी.
अमेरिका पर भरोसा करना मुश्किल- ईरान
ईरान ने भी साफ कर दिया है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन उसे अमेरिका पर भरोसा नहीं है. ग़ालिबाफ ने कहा कि ईरान की नीयत ठीक है, लेकिन पिछले अनुभवों के कारण अमेरिका पर भरोसा करना मुश्किल है, क्योंकि पहले भी बातचीत के दौरान वादे टूटे हैं. ईरान ने कुछ शर्तें भी रखी हैं. उसका कहना है कि बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब लेबनान में युद्धविराम लागू हो और विदेशों में जमा ईरान की संपत्ति को जारी किया जाए. वहीं अमेरिका और इज़रायल का कहना है कि लेबनान इस सीजफायर का हिस्सा नहीं है, जिससे यह मुद्दा और उलझ गया है.
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