US Iran War: ईरान वॉर को लेकर शांति की कोशिशों के बीच शुक्रवार को इस्लामाबाद में एक अहम बैठक होने जा रही है. इस बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, पाकस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के शामिल होने से मिडिल ईस्ट में स्थायी शांति की उम्मीद जगी है.
इस बीच, इजरायल की तरफ से लेबनान पर जारी हमलों को लेकर रूस ने दो टूक रुख अपनाया है. रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अपने ईरानी समकक्ष से फोन पर बातचीत में कहा कि किसी भी सीजफायर समझौते में लेबनान को भी शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए यह जरूरी है.
रूस की दो टूक
एक अलग बयान में रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता Maria Zakharova ने लेबनान में इजरायल के हमलों की कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि इस तरह के आक्रामक कदम शांति वार्ता की दिशा में हो रही प्रगति को पटरी से उतार सकते हैं. रूस के विदेश मंत्रालय की ओर से आया यह बयान साफ संकेत देता है कि रूस क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर चिंतित है और चाहता है कि सभी पक्ष संयम बरतें, ताकि कूटनीतिक प्रयासों के जरिए समाधान की दिशा में बढ़ा जा सके.
उधर, इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से बात की और लेबनान में इजरायली हमलों को कम करने की सलाह दी, ताकि ईरान के साथ सीजफायर को आगे बढ़ाया जा सके.
इस्लामाबाद में बैठक से उम्मीदें
गौरतलब है कि बुधवार को Washington, D.C. और Tehran के बीच सीजफायर के ऐलान के बावजूद हालात काबू में नहीं रह सके. ईरान के एक रिफाइनरी प्लांट पर हमला किया गया, जिसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत और बहरीन को निशाना बनाया. वहीं इजराइल ने भी बड़ा सैन्य एक्शन लेते हुए बेहद कम समय में 100 से ज्यादा मिसाइलें दाग दीं, जिससे साफ है कि सीजफायर के बावजूद संघर्ष थमता नजर नहीं आ रहा है.
एक ओर कूटनीतिक स्तर पर शांति की कोशिशें तेज हो रही हैं, तो दूसरी ओर जमीनी स्तर पर जारी हमले इस प्रक्रिया को चुनौती दे रहे हैं, जिससे यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
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