Disruption in International Oil and Gas Supply: मिडिल ईस्ट में चल रहे भीषण युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस सप्लाई में रुकावट आई है, जिसके चलते भारत अप्रैल में दक्षिण अमेरिका के वेनेज़ुएला से लगभग 10-12 मिलियन बैरल कच्चा तेल (क्रूड) मंगा सकता है. कमोडिटी मार्केट एनालिटिक्स फर्म Kpler के डेटा के मुताबिक, यह पिछले छह साल में सबसे ज़्यादा होगा. डेटा से यह भी पता चलता है कि पिछले साल मई के बाद अप्रैल पहला ऐसा महीना होगा जब वेनेज़ुएला का कच्चा तेल भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचेगा.
ये बैरल, हालांकि भारत के कुल कच्चे तेल आयात का सिर्फ़ एक छोटा सा हिस्सा हैं. फिर भी इनसे देश को कुछ राहत मिलने और उसकी कच्चे तेल के स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति को मज़बूती मिलने की उम्मीद है. भारत अपनी 88 प्रतिशत से ज़्यादा ज़रूरतें आयात से पूरी करता है और हर दिन 5 मिलियन बैरल से ज़्यादा कच्चे तेल की प्रोसेसिंग करता है. आयात का 40% से ज़्यादा हिस्सा पश्चिम एशिया से होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते आता है, जहां मार्च की शुरुआत से ही जहाज़ों की आवाजाही लगभग पूरी तरह से रुक गई है.
भारत में तेल की सप्लाई सुरक्षित
हालांकि, यह ध्यान देने वाली बात है कि भारत आने वाले वेनेज़ुएला के तेल के जहाज़ (कार्गो) शायद पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने से पहले ही खरीदे गए थे. यह इस बात को दिखाता है कि वैश्विक संकट के समय कच्चे तेल की सप्लाई के स्रोतों में विविधता लाना कितना फ़ायदेमंद साबित हो रहा है. भारत पिछले कुछ सालों में 41 से ज्यादा देशों से तेल आयात कर रहा है, जिससे पश्चिम एशिया पर निर्भरता कम हुई है और देश में कच्चे तेल, पेट्रोल और डीज़ल का स्टॉक पर्याप्त बना हुआ है.
Kpler के मैनेजर सुमित रितोलिया का कहना है कि भारतीय रिफाइनर पहले से ही अपने कच्चे तेल स्रोतों में विविधता ला रहे हैं, खासकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य की अनिश्चितताओं के कारण. अप्रैल में आने वाले जहाज़ किसी तात्कालिक उपाय नहीं बल्कि दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा हैं, जो वैश्विक ऊर्जा बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त का संकेत देते हैं.
वेनेज़ुएला तेल से भारत की रिफाइनिंग मजबूत
2019 में रिलायंस इंडस्ट्रीज़ (RIL) वेनेज़ुएला के प्रमुख खरीदार थे, लेकिन अमेरिका के प्रतिबंधों के कारण आयात रुक गया. अक्टूबर 2023 में प्रतिबंधों में ढील मिलने के बाद RIL और अन्य भारतीय रिफाइनर ने आयात फिर से शुरू किया. वेनेज़ुएला के भारी कच्चे तेल से डिस्टिलेट जैसे डीज़ल और जेट फ्यूल उत्पादन में मदद मिलती है, जिससे भारत की डिस्टिलेट उत्पादन क्षमता मजबूत होती है.
आज के माहौल में वेनेज़ुएला से तेल आयात से कच्चे तेल की सोर्सिंग में विविधता आती है और भारतीय रिफाइनरियों की उत्पादन क्षमता भी बढ़ती है. RIL, नायरा एनर्जी और कुछ सरकारी रिफाइनरियां वेनेज़ुएला का भारी कच्चा तेल प्रोसेस करती हैं. HPCL-Mittal Energy और इंडियन ऑयल की रिफाइनरियाँ भी सीमित मात्रा में इसे प्रोसेस करती हैं. इससे भारत की कच्चे तेल की प्रोसेसिंग क्षमता धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है.



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