दिल्ली MCD के वार्ड मेंबर को कितनी मिलती है सैलरी? जानें क्या होता है काम

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दिल्ली में 12 वार्डों के उपचुनाव के लिए रविवार को वोटिंग हुई थी. मतदान शांतिपूर्ण रहा और कहीं भी किसी प्रकार की अव्यवस्था या मशीनों में तकनीकी खराबी की कोई खबर नहीं मिली. सुबह 7:30 बजे शुरू हुई वोटिंग शाम 5:30 बजे खत्म हुई, जिसके बाद अब 26 महिलाओं समेत कुल 51 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला ईवीएम में बंद हो चुका है. नतीजे 3 दिसंबर को आने वाले हैं, जिन पर पूरे दिल्ली की नजर टिकी हुई है.

उपचुनाव की चर्चा के साथ-साथ दिल्ली में वार्ड मेंबर यानी एमसीडी पार्षद की सैलरी और सुविधाएं भी चर्चा में हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली नगर निगम के एक पार्षद को करीब 4.9 लाख रुपये सालाना का पैकेज मिलता है, यानी हर महीने लगभग 41,000 रुपये की सैलरी. इसके अलावा पार्षदों को कई भत्ते भी दिए जाते हैं, जिसमें मीटिंग अलाउंस, ट्रैवल से जुड़ी सुविधाएं और ऑफिस संबंधी खर्च शामिल हैं.

कितना मिलता है फंड?

सबसे दिलचस्प बात यह है कि हर पार्षद को अपने वार्ड के विकास के लिए 1 करोड़ रुपये तक का फंड मिलता है. यह फंड सड़कों की मरम्मत, नालियों की सफाई, पार्कों के रखरखाव और अन्य स्थानीय कामों में खर्च किया जाता है. हालांकि, कई बार पार्षद यह फंड समय पर इस्तेमाल नहीं कर पाते क्योंकि फंड तभी जारी होता है जब वे किसी प्रोजेक्ट की शुरुआत करते हैं.

ये हैं नियम?

अब बात करते हैं पार्षद बनने के नियमों की. किसी भी उम्मीदवार का अपने वार्ड की वोटर लिस्ट में नाम होना जरूरी है. उम्र कम से कम 21 साल होनी चाहिए और शिक्षा न्यूनतम 10वीं पास. इसके साथ ही वह दिल्ली का मान्य मतदाता होना चाहिए. एमसीडी पार्षद का काम काफी जिम्मेदारी वाला होता है. उन्हें सफाई व्यवस्था से लेकर सड़क, नाली, पार्क और सार्वजनिक संपत्तियों की देखरेख तक हर छोटे-बड़े मुद्दे पर नजर रखनी होती है.

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Fridge Vastu Tips: फ्रिज के ऊपर न रखें ये चीजें, होगा भयंकर वास्तु दोष, रुक जाएगी बरकत

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Fridge Vastu Tips: घर की ऊर्जा को सकारात्मक और संतुलित बनाए रखने के लिए वास्तु शास्त्र के नियमों और सिद्धांतों का पालन करना जरूरी होता है. वास्तु शास्त्र का संबंध केवल भूमि-भवन के निर्माण तक ही सीमित नहीं होता, बल्कि घर के प्रत्येक वस्तु के रख-रखाव व दिशा के लिए भी वास्तु शास्त्र की महत्वपूर्ण भूमिका होती है.

सभी के घरों में कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक अप्लायसेंस (electronic appliances) होते हैं, जिसमें फ्रिज (Refrigerator) भी एक है, जोकि मॉर्डन समय में हर घर की जरूरत बन गया है. वास्तु शास्त्र में फ्रिज को लेकर भी कुछ नियम बताए गए हैं.

फ्रिज का उपयोग आमतौर पर फल-सब्जियों या खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक ताजा और सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है. लेकिन कई लोग फ्रिज के ऊपर भी कई तरह की चीजें रखते हैं, जिसे वास्तु शास्त्र में बहुत ही गलत बताया गया है. फ्रिज के ऊपर रखी गई कुछ चीजों से नकारात्मकता तेजी से बढ़ती है जोकि वास्तु दोष का कारण बन सकती है. इसलिए ये जान लीजिए कि फ्रिज के ऊपर किन चीजों को रखने से हमें बचना चाहिए.

फ्रिज के ऊपर न रखें ये सामान (These things not kept over Fridge)

जल तत्व वाली चीजें- वास्तु शास्त्र और ज्योतिष के अनुसार फ्रिज अग्नि तत्व का प्रतीक है. ऐसे में इसके ऊपर जल तत्व से जुड़ी चीजें रखना आर्थिक नुकसान, कलह-क्लेश, पारिवारिक तनाव आदि का कारण बन सकती है. इसलिए फ्रिज के ऊपर फिश एक्वेरियम, पानी में रखे जाने प्लांट्स जैसे मनी प्लांट आदि को रखने से बचें.

दवाइयां- वास्तु के अनुसार फ्रिज के ऊपरी सतह पर दवाइयां नहीं रखनी चाहिए. इससे सेहत संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ती हैं. साथ ही ऐसी कई दवाएं भी होती हैं, जिन्हें गर्म वातावरण में रखने से बचना चाहिए. फ्रिज की ऊपरी सतह गर्म होती है, जिससे कि दवाइयां खराब हो सकती है. इसलिए आप फ्रिज के ऊपर दवा आदि न रखें. कुछ दवाइयों को कम तापमान पर रखने की सलाह दी जाती है. ऐसे में आप इन्हें फ्रिज के भीतर रख सकते है.

कबाड़ के सामान- कई घरों में छोटी-बड़ी बेकार चीजों को लोग सीधे फ्रिज के ऊपर रख देते हैं. लेकिन वास्तु शास्त्र में इसे बहुत ही गलत तरीका माना जाता है. पुराने, खराब या बेकार पड़े सामान को फ्रिज के ऊपर रखने से नकारात्मक ऊर्जा तेजी से बढ़ती है और घर की सुख-समृद्धि में बाधा उत्पन्न हो सकती है.

इसके साथ ही फ्रिज के ऊपर भगवान की मूर्ति या तस्वीर, बांस का पौधा, रुपये-पैसे, भारी सामान, ओवन, मोबाइल चार्जर, अनाज के डिब्बे, ट्रॉफी, अवार्ड्स जैसी चीजों को भी नहीं रखना चाहिए. घर पर शांति और सकारात्मकता बनाए रखने के लिए आप फ्रिज के ऊपर सजावट के लिए हल्के सामान का ही इस्तेमाल करें.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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भारतीय मूल के Amar Subramanya को ऐप्पल में बड़ी जिम्मेदारी, संभालेंगे यह पद

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ऐप्पल में मशीन लर्निंग और एआई स्ट्रैटजी के सीनियस वाइस प्रेसिडेंट John Giannandrea ने अपना पद छोड़ दिया है. वो अगले साल रिटायर हो रहे हैं और तब तक एडवाइजर की भूमिका में रहेंगे. ऐप्पल ने उनकी जगह Amar Subramanya को नियुक्त किया है, जो कंपनी में एआई स्ट्रैटजी से जुड़ा कामकाज देखेंगे. भारतीय मूल के अमर पहले माइक्रोसॉफ्ट और गूगल डीपमाइंड में काम कर चुके हैं. बता दें कि 2024 में ऐप्पल इंटेलीजेंस डिवीजन की शुरुआत के बाद लीडरशिप लेवल पर यह पहला बड़ा चेंज है. 

एआई में पिछड़ रही है ऐप्पल

ऐप्पल लीडरशिप में यह बदलाव ऐसे समय पर हुआ है, जब कंपनी एआई एडवांसमेंट को लेकर बाकी कंपनियों से काफी पीछे है. कंपनी न तो अपने डिवाइस में बड़े एआई फीचर दे पाई है और वह सिरी को भी एआई से लैस करने में संघर्ष कर रही है. अब अमर पर यह बड़ी जिम्मेदारी आई है. अपने पद पर रहते हुए अमर ऐप्पल के सॉफ्टवेयर चीफ Craig Federighi को रिपोर्ट करेंगे. Craig भी ऐप्पल में एआई को लेकर अहम भूमिका निभा रहे हैं. ऐप्पल में फाउंडेशन मॉडल, एआई रिसर्च और सेफ्टी पर काम कर रही टीमें अब अमर को रिपोर्ट करेंगी.

कौन हैं Amar Subramanya?

एआई एक्सपर्ट अमर माइक्रोसॉफ्ट से ऐप्पल में आ रहे हैं. माइक्रोसॉफ्ट में वो एआई के कॉर्पोरेट वाइस प्रेसिडेंट की भूमिका निभा रहे थे. इससे पहले उन्होंने 16 साल तक गूगल में काम किया था. गूगल में वो जेमिनी असिस्टेंट की इंजीनियरिंग के हेड थे. उनकी नियुक्ति को लेकर ऐप्पल का कहना है कि एआई और मशीन लर्निंग और रिसर्च को प्रोडक्ट और फीचर में इंटीग्रेट करने की उनकी एक्सपर्टीज ऐप्पल के इनोवेशन और ऐप्पल इंटेलीजेंस के आने वाले फीचर्स में अहम भूमिका निभाएगी. कंपनी ने कहा कि अमर की एक्सपर्टीज से एआई टेक्नोलॉजी की नेक्स्ट जनरेशन को गाइडेंस मिलेगी.

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Ravelcare Ltd IPO Full Analysis | Price Band, Financials, GMP, Allotment & Should You Invest?|

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Ravelcare Ltd. अपना IPO लेकर बाजार में आ रही है, जिसका Issue Size 24.10 करोड़ रुपये है. यह IPO 1 दिसंबर 2025 से 3 दिसंबर 2025 तक निवेश के लिए खुला रहेगा. Price Band 123 से 130 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है और एक लॉट में 1,000 शेयर शामिल हैं. रिटेल इनवेस्टर्स के लिए न्यूनतम निवेश 2,60,000 रुपये और HNI या bNII इनवेस्टर्स के लिए न्यूनतम निवेश 3,90,000 रुपये है. इस इश्यू का Book Running Lead Manager Marwadi Chandarana Intermediaries Brokers Pvt. Ltd. है, Registrar Kfin Technologies Ltd. है और Market Maker SS Corporate Securities Ltd. होगा. मामले में QIB के लिए 47.25 प्रतिशत, रिटेल इनवेस्टर्स के लिए 33.44 प्रतिशत, NII के लिए 14.24 प्रतिशत और मार्केट मेकर्स के लिए 5.07 प्रतिशत शेयर रिज़र्व हैं. कंपनी ने लिस्टिंग से पहले 6.83 करोड़ रुपये anchor investors से जुटाए हैं. 2018 में शुरू हुई Ravelcare एक digital-first beauty and personal care brand है जो haircare, skincare, bodycare और scalp care में personalized products प्रदान करती है. कंपनी अपनी वेबसाइट और विभिन्न quick-commerce platforms पर operate करती है. वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो Ravelcare की आय 31 मार्च 2023 को 3.49 करोड़ रुपये थी, जो 31 मार्च 2024 को बढ़कर 22.28 करोड़ रुपये हो गई और 31 मार्च 2025 को 25.30 करोड़ रुपये पर रही. लाभ के स्तर पर भी कंपनी ने मजबूत सुधार दिखाया है. उसका Profit After Tax 31 मार्च 2023 को 0.41 करोड़ रुपये था, जो 2024 में 5.02 करोड़ रुपये तक पहुंच गया और 2025 में 5.26 करोड़ रुपये रहा. मार्च 2024 से मार्च 2025 के बीच कंपनी का राजस्व लगभग 14 प्रतिशत बढ़ा है और PAT में लगभग 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. GMP फिलहाल 16 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहा है और कंपनी की लिस्टिंग 8 दिसंबर 2025, बुधवार को निर्धारित है. यह वीडियो Ravelcare के बिजनेस मॉडल, फाइनेंशियल्स, IPO संरचना, ग्रोथ क्षमता और निवेश जोखिमों पर विस्तृत विश्लेषण पेश करता है, ताकि आप तय कर सकें कि यह IPO आपके पोर्टफोलियो में जगह बनाना चाहिए या नहीं.

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’30 घंटे झेला लेबर पेन’, पत्नी को देख बेहाल हो गए थे विक्रांत मैसी, बोले- ‘मर्द सोच भी नहीं सकत

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विक्रांत मैसी छोटे पर्दे से लेकर बड़े पर्दे तक उन्होंने अपने अभिनय का जलवा बिखेरा है. एक्टर बीते साल 2024 में अपनी पत्नी संग शीतल ठाकुर अपने बेटे वरदान का स्वागत किया. अब बेटे के जन्म के इतने दिनों बाद विक्रांत ने उस वक्त को याद किया जब उनकी वाइफ अपने बच्चे को जन्म देने वाली थीं. ये पल उनकी जिंदगी का सबसे खास पल था, लेकिन वो दर्द में तड़प रही अपनी पत्नी को देख अंदर से डर गए थे.  

रणवीर इलाहाबादिया को दिए एक इंटरव्यू में विक्रांत मैसी ने अपने पिता बनने के सफर के बारे में खुलकर बात की. उन्होंने ये भी कहा कि एक पिता के मुकाबले मां का योगदान ज्यादा अहम होता है. उन्होंने याद किया कि कैसे उनकी वाइफ 30 घंटे तक लेबर पेन से तड़पती रही.  

हमेशा परिवार बनाना चाहते थे विक्रांत 
आगे अपनी पत्नी के के बारे में बात करते हुए विक्रांत ने कहा- टशादी एक लगातार चलने वाला काम है, जिसमें हर मुमकिन तरीके से एनर्जी डाली जाती है.ट उन्होंने बताया कि पहले वो लंबे रिश्ते में बंधने से झिझकते थे, लेकिन वो हमेशा एक परिवार बनाना चाहते थे.


30 घंटे तक लेबर पेन में रही वाइफ
आगे विक्रांत ने खुलासा किया कि बेटे के जन्म देते वक्त उनकी वाइफ शीतल 30 घंटे तक लेबर पेन में रहीं. वो तड़प रही थी लेकिन वो कुछ नहीं कर सकते थे.  विक्रांत ने कहा- ‘प्रेग्नेंसी के नौ महीनों के दौरान शीतल को देखना एक अलग ही एक्सपीरियंस था. जबकि मैं उसे दस साल से जानता हूं. उस नन्ही बच्ची को देखना, उसका पेट दिन-ब-दिन बढ़ता देखना. मुझे लगता है कि उसने 30 घंटे तक लेबर पेन झेला होगा. मेरा मतलब है कि औरतें बहुत कुछ सहती हैं. उन्होंने कहा आगे कहा कि मर्द जो भी कर लें, लेकिन औरतों के आगे कम है. 



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पाकिस्तान में HIV का अटैक! 15 साल में 200 प्रतिशत बढ़ोतरी, WHO ने दी गंभीर चेतावनी

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पाकिस्तान इन दिनों HIV संक्रमण की ऐसी लहर से जूझ रहा है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरी को उजागर कर दिया है. विश्व एड्स दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में WHO और UNAIDS की तरफ से साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, देश में HIV के नए मामलों में पिछले एक दशक में असामान्य बढ़ोतरी हुई है. वर्ष 2010 में जहां लगभग 16 हजार नए मामले सामने आए थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 38 तक पहुंच गई. यह वृद्धि पाकिस्तान के लिए एक बड़ी चेतावनी मानी जा रही है.

पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी माना है कि HIV संक्रमण को अब केवल सरकारी प्रयासों से नियंत्रित नहीं किया जा सकता. मंत्रालय की महानिदेशक डॉ. आयशा इसानी ने कहा कि समुदाय, डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और सभी स्वास्थ्य संस्थानों को मिलकर सुरक्षित चिकित्सा पद्धतियों को अपनाने की जरूरत है. उन्होंने यह भी बताया कि इंजेक्शन और रक्त आधान में लापरवाही संक्रमण फैलाने का सबसे बड़ा कारण है और जनता को बीमारी और उसकी रोकथाम के बारे में जागरूक करना बेहद जरूरी है.

संक्रमितों की बड़ी संख्या को बीमारी का पता ही नहीं

देश में लगभग 3.5 लाख लोग HIV से संक्रमित हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनमें से एक बड़ी आबादी को अपनी बीमारी की जानकारी तक नहीं है. बच्चों में हालात और चिंताजनक हैं. वर्ष 2010 में जहां छोटे बच्चों में करीब 530 मामलों की पहचान हुई थी, वहीं 2023 में यह संख्या बढ़कर 1800 तक पहुंच गई. इसका मतलब है कि संक्रमण घरों और समुदायों के भीतर तेजी से फैल रहा है.

इलाज के इंतज़ाम बढ़े पर जरूरत के मुकाबले बेहद कम

पाकिस्तान में एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी यानी ART उपचार लेने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है, लेकिन यह अब भी आवश्यकता के अनुपात में काफी कम है. 2013 में जहां केवल 6000 से थोड़ा अधिक मरीज इलाज पर थे, वहीं 2024 में यह संख्या 55000 के करीब पहुंची है. ART केंद्रों की संख्या भी अब लगभग 95 तक पहुंच गई है. इसके बावजूद बहुत कम लोग अपनी बीमारी की जांच करवाते हैं और इलाज लेने वालों का अनुपात भी काफी कम है. वायरल लोड नियंत्रण वाले मरीजों का आंकड़ा तो और भी कमजोर है.

असुरक्षित चिकित्सा पद्धतियां

देश के कई क्षेत्रों में हुई जांचों से पता चलता है कि संक्रमण फैलने का सबसे बड़ा स्रोत असुरक्षित इंजेक्शन, बार-बार उपयोग की गई सिरिंज और बिना जांच के रक्त आधान हैं. खासकर लरकाना, तौंसा, जैकोबाबाद, शिकारपुर, नौशहरो फिरोज और मीरपुर खास जैसे जिलों में कई बार HIV के प्रकोप सामने आए और इनमें अधिकांश संक्रमित बच्चे थे. इन घटनाओं ने पाकिस्तान की चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

महिलाओं और बच्चों के इलाज में भारी कमी

HIV से संक्रमित गर्भवती महिलाओं को पर्याप्त उपचार न मिल पाने से नवजात बच्चों में भी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. पाकिस्तान में अभी भी केवल एक छोटी संख्या ही गर्भावस्था के दौरान चिकित्सकीय निगरानी में आती है. यही स्थिति उन बच्चों की है जो पहले से संक्रमित हैं. इनमें से बहुत कम बच्चों को ही नियमित इलाज मिलता है.

WHO की चेतावनी

WHO के पाकिस्तान प्रतिनिधि डॉ. लुओ दापेंग ने कहा कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संसाधन बढ़ाने होंगे और रोकथाम व इलाज से जुड़े कार्यक्रमों को मजबूत बनाना होगा, ताकि कोई भी वयस्क या बच्चा इलाज से वंचित न रहे.

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बारिश में धुल जाएगा भारत-दक्षिण अफ्रीका का दूसरा वनडे? रायपुर के मौसम को लेकर आया बड़ा अपडेट

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भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका दूसरा वनडे रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह क्रिकेट स्टेडियम में बुधवार को खेला जाएगा. इस दिन रायपुर में बारिश की संभावना है. क्या मैच रद्द होने का भी खतरा है? पढ़िए रायपुर में बुधवार को मौसम कैसा रहेगा?

केएल राहुल की कप्तानी में टीम इंडिया पहला वनडे 27 रनों से जीतकर आ रही है. अच्छी बात ये हैं कि सबसे अनुभवी बल्लेबाज विराट कोहली और रोहित शर्मा फॉर्म में हैं, दोनों ने पिछले मैच में शतकीय साझेदारी की थी. कोहली ने 83वां इंटरनेशनल शतक जड़ा था. रायपुर में बुधवार को बारिश की संभावना जताई गई है, हालांकि ये इतनी नहीं है कि मैच रद्द होने का खतरा रहे.

3 दिसंबर को रायपुर में कैसा रहेगा मौसम?

भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका दूसरा वनडे बुधवार, 3 दिसंबर को शहीद वीर नारायण सिंह स्टेडियम में खेला जाएगा. मुकाबला आदर्श परिस्थितियों में खेला जाएगा. दिन का अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस रहेगा. बुधवार को रायपुर में बारिश की संभावना बहुत कम है, यानी मैच में रुकावट नहीं आएगी और अगर आई भी तो जल्दी ही मैच दोबारा भी शुरू हो जाने की संभावना होगी. 

हालांकि शाम को शहीद वीर नारायण सिंह स्टेडियम में ओस ज्यादा गिर सकती है, इस वजह से दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने वाली टीम को फायदा होगा.

भारतीय स्क्वाड

रोहित शर्मा, ऋतुराज गायकवाड़, तिलक वर्मा, विराट कोहली, यशस्वी जायसवाल, नितीश कुमार रेड्डी, रवींद्र जडेजा, वाशिंगटन सुंदर, ध्रुव जुरेल (विकेट कीपर), केएल राहुल (कप्तान और विकेट कीपर), ऋषभ पंत (विकेट कीपर), अर्शदीप सिंह, हर्षित राणा, कुलदीप यादव, प्रसिद्ध कृष्णा.

दक्षिण अफ्रीका का स्क्वाड

एडन मार्क्रम, क्विंटन डी कॉक (विकेट कीपर), टेम्बा बावुमा (कप्तान), मैथ्यू ब्रीट्ज़के, डेवाल्ड ब्रेविस, रुबिन हरमन, मार्को यानसेन, कॉर्बिन बॉश, केशव महाराज, नंद्रे बर्गर, लुंगी एनगिडी, रयान रिकेल्टन, ओटनील बार्टमैन, टोनी डी ज़ोरज़ी, प्रेनेलन सुब्रायन.

कब-कहां देखें भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका दूसरा वनडे लाइव?

भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका दूसरा वनडे 3 दिसंबर को दोपहर 1:30 बजे शुरू होगा. टॉस 1 बजे होगा. मैच का लाइव प्रसारण स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर होगा. जियोहॉटस्टार एप और वेबसाइट पर लाइव स्ट्रीमिंग होगी.

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iPhone Air की कीमत में बड़ी गिरावट! अब तक का सबसे पतला iPhone सबसे सस्ते दाम पर

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iPhone Air: अगर आप लंबे समय से iPhone Air खरीदने का प्लान बना रहे थे तो यह मौका आपके लिए बिल्कुल परफेक्ट है. साल 2025 के सितंबर में लॉन्च हुआ यह अब तक का सबसे पतला और हल्का iPhone अब बड़ी कीमत कटौती के साथ उपलब्ध है. ब्लैक फ्राइडे सेल के चलते फोन की कीमतों में भारी गिरावट आई है जिससे यह प्रीमियम iPhone अब पहले से कहीं ज्यादा किफायती हो गया है.

iPhone Air के दामों में भारी कटौती कहाँ मिल रही है?

रिलायंस डिजिटल पर iPhone Air के सभी स्टोरेज वेरिएंट अभी लॉन्च कीमत से कम दाम पर बेचे जा रहे हैं. 256GB मॉडल की कीमत 1,19,900 रुपये से घटकर 1,09,900 रुपये हो गई है. 512GB वेरिएंट अब 1,39,900 रुपये की जगह 1,28,900 रुपये में उपलब्ध है. वहीं 1TB मॉडल सबसे ज्यादा सस्ता हुआ है जिसकी कीमत 1,59,900 रुपये से गिरकर 1,46,900 रुपये हो गई है.

इसके अलावा, कई बैंक ऑफर, एक्सचेंज बोनस और नो-कॉस्ट EMI विकल्प भी उपलब्ध हैं जिससे फोन और भी कम दाम में खरीदा जा सकता है. यह फिलहाल बाजार में उपलब्ध सबसे आकर्षक प्रीमियम iPhone डील्स में से एक है.

iPhone Air

सिर्फ 5.6mm की मोटाई के साथ iPhone Air, Apple द्वारा बनाया गया सबसे पतला iPhone है.

iPhone 17 सीरीज से भी स्लिम होने के बावजूद यह फोन मजबूत Ceramic Shield बॉडी के साथ आता है, जिसे आम ग्लास से चार गुना ज्यादा मजबूत बताया गया है. फोन में 6.5-इंच Super Retina XDR OLED डिस्प्ले, 120Hz रिफ्रेश रेट और 3000 निट्स पीक ब्राइटनेस मिलती है. यह Cloud White, Light Gold, Sky Blue और Space Black जैसे प्रीमियम रंग विकल्पों में उपलब्ध है.

Samsung Galaxy S24 में भी हुआ बड़ा प्राइस ड्रॉप

सिर्फ iPhone ही नहीं, Samsung Galaxy S24 (Snapdragon मॉडल) की कीमत में भी 38,000 रुपये की भारी कटौती की गई है. Flipkart पर 8GB + 128GB वेरिएंट 47,999 रुपये में लिस्टेड है जो बैंक ऑफर के साथ घटकर 40,999 रुपये तक पहुंच जाता है. SBI क्रेडिट कार्ड उपयोग करने पर अतिरिक्त 4,000 रुपये कैशबैक भी मिल रहा है.

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प्राचीन भारत में सास के 6 प्रकार! कहीं आपकी सास भी तो नहीं हैं इनमें से एक? जानें रिश्तों का सच

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प्राचीन भारतीय सभ्यताओं ने रिश्तों की व्यवहारिकता को लेकर काफी स्पष्ट विश्लेषण किया है. मनुस्मृति, महाभारत, याज्ञवल्क्य स्मृति और  अर्थशास्त्र जैसे धार्मिक ग्रंथों में सासों के व्यवहार के आधार पर 6 श्रेणी में बांटा गया है. आइए जानते हैं इसके बारे में.

प्राचीन भारतीय सभ्यताओं ने रिश्तों की व्यवहारिकता को लेकर काफी स्पष्ट विश्लेषण किया है. मनुस्मृति, महाभारत, याज्ञवल्क्य स्मृति और अर्थशास्त्र जैसे धार्मिक ग्रंथों में सासों के व्यवहार के आधार पर 6 श्रेणी में बांटा गया है. आइए जानते हैं इसके बारे में.

प्राचीन भारतीय सभ्यता के मुताबिक पहली श्रेणी में ऐसी सास आती है, जो घर की शक्ति, मान-सम्मान, और परिवार में नियंत्रण शक्ति को लेकर जुनूनी होती है. इस तरह की व्यवहार करने वाली सास बहु को प्रतियोगी के रूप में देखती है, और बेटे पर अपना अधिकार जमाए रखने के लिए भावनात्मक दबाव के साथ-साथ मानसिक नियंत्रण की भी सहायता लेती है. इन्हें घर की सत्ता हाथ से जाने का भय सताता है.

प्राचीन भारतीय सभ्यता के मुताबिक पहली श्रेणी में ऐसी सास आती है, जो घर की शक्ति, मान-सम्मान, और परिवार में नियंत्रण शक्ति को लेकर जुनूनी होती है. इस तरह की व्यवहार करने वाली सास बहु को प्रतियोगी के रूप में देखती है, और बेटे पर अपना अधिकार जमाए रखने के लिए भावनात्मक दबाव के साथ-साथ मानसिक नियंत्रण की भी सहायता लेती है. इन्हें घर की सत्ता हाथ से जाने का भय सताता है.

दूसरी श्रेणी में वो सासें आती हैं, जो अपनी बहु को परिवार में काफी मान-सम्मान और नई बेटी की तरह स्वीकार करती है. ऐसी सासें बहुओं का मार्गदर्शन करने के साथ उनके साथ दोस्ताना बर्ताव करती हैं. ये रिश्तों में स्थिरता बनाए रखने के लिए रीढ़ की हड्डी मानी जाती है.

दूसरी श्रेणी में वो सासें आती हैं, जो अपनी बहु को परिवार में काफी मान-सम्मान और नई बेटी की तरह स्वीकार करती है. ऐसी सासें बहुओं का मार्गदर्शन करने के साथ उनके साथ दोस्ताना बर्ताव करती हैं. ये रिश्तों में स्थिरता बनाए रखने के लिए रीढ़ की हड्डी मानी जाती है.

पांचवी श्रेणी की सासें इससे बिल्कुल उलट होती है, बाहर से जितनी शांत अंदर उतनी ही राजनीति चल रही होती है. ऐसी सास कभी भी बहु से सीधा टकराव करने के बजाए चीजों को अपने हिसाब से चलाने की कोशिश करती हैं, जो कहीं न कहीं रिश्तों में दूरियों और खटास का कारण बनता है.

पांचवी श्रेणी की सासें इससे बिल्कुल उलट होती है, बाहर से जितनी शांत अंदर उतनी ही राजनीति चल रही होती है. ऐसी सास कभी भी बहु से सीधा टकराव करने के बजाए चीजों को अपने हिसाब से चलाने की कोशिश करती हैं, जो कहीं न कहीं रिश्तों में दूरियों और खटास का कारण बनता है.

चौथी श्रेणी की सासें अपनी समय के साथ बहु के प्रति अच्छे बदलाव अपनाती हैं. घर में बहु को भी बराबरी का स्थान देती हैं. ऐसी सासें बहुओं के साथ दोस्ताना व्यवहार अपनाते हुए घरेलू मामलों में उनका समर्थन करती है.

चौथी श्रेणी की सासें अपनी समय के साथ बहु के प्रति अच्छे बदलाव अपनाती हैं. घर में बहु को भी बराबरी का स्थान देती हैं. ऐसी सासें बहुओं के साथ दोस्ताना व्यवहार अपनाते हुए घरेलू मामलों में उनका समर्थन करती है.

छठीं और अंतिम श्रेणी में वो सासें आती हैं, जो बहु के आते ही घर की राजनीति से खुद को अलग कर लेती हैं. यह इनकी कमजोरी नहीं, बल्कि एक परिपक्व समझदारी होती है, जो परिवार पर काबू रखने की बजाए उन्हें साथ लेकर चलने पर अमल करती हैं. उनका शांत और प्रेमपूर्वक रवैया बहु को हमेशा खुश रखता है.

छठीं और अंतिम श्रेणी में वो सासें आती हैं, जो बहु के आते ही घर की राजनीति से खुद को अलग कर लेती हैं. यह इनकी कमजोरी नहीं, बल्कि एक परिपक्व समझदारी होती है, जो परिवार पर काबू रखने की बजाए उन्हें साथ लेकर चलने पर अमल करती हैं. उनका शांत और प्रेमपूर्वक रवैया बहु को हमेशा खुश रखता है.

Published at : 02 Dec 2025 05:46 PM (IST)

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