कीचड़ खाने तक तो ठीक था, उसमें मुंह कौन देता है भाई? पुनीत सुपरस्टार ने कर डाला अजीब कारनामा

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पुनीत सुपरस्टार का नाम जब भी आप सुनते होंगे तो आपके जहन में एक ही तस्वीर बनती होगी और वो ये कि कभी वो कीचड़ में डूबोकर घेवर खा रहे हैं तो कभी नाली में डूबी बिरयानी. लेकिन इस बार जो वीडियो वायरल हो रहा है उसने तो सारे रिकॉर्ड ही तोड़ डाले हैं. जहां पुनीत अब तक कीचड़ वाले लड्डू, घेवर और बिरयानी खाते रहे हैं उन्होंने इस बार कैमरे पर एक नाली के पानी से मुंह धो डाला और इतना ही नहीं, इसके बाद उन्होंने जो किया लोगों को घिन्न आ गई.

गंदी नाली के पानी से पुनीत सुपरस्टार ने धोया मुंह

दरअसल, सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें सोशल मीडिया के मशहूर चेहरे पुनीत सुपरस्टार एक गंदी नाली के पास बैठे हैं और उस हरकत को अंजाम दे रहे हैं जिसे कोई कॉपी करना तो दूर सोच भी नहीं सकता. जी हां, नाली केपास बैठे हुए पुनीत अचानक उसी नाली के पानी से अपना मुंह धोने लग जाते हैं. पुनीत मुंह धोते हुए जोर जोर से नाली के उस गंदे पानी को अपने चेहरे पर उछालते दिखाई दे रहे हैं और इसे करते हुए उनके चेहरे पर किसी तरह की कोई घिन्न भी नहीं है. लेकिन बात यहां नहीं रुकती, इसके बाद जो होता है असली खेल तो वो है.


गाढ़ा कीचड़ मुंह पर लपेटा

वीडियो में आगे देखा जा सकता है कि मुंह धोते हुए पुनीत नाली में जमा गाढ़ा कीचड़ निकालकर अपने चेहरे पर ऐसे मल लेते हैं मानों वो कोई क्रीम हो. हाथों में लगा कीचड़ किसी फेसवॉश की तरह पुनीत को दिखाई दे रहा है और नाली का पानी उसे धोने के काम में लिया जाता है. वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है जिसे देखने के बाद यूजर्स तरह तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.

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यूजर्स ने ले लिए मजे

वीडियो को puneetsuperr_star नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट से शेयर किया गया है जिसे अब तक लाखों लोगों ने देखा है तो वहीं कई लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है. ऐसे में सोशल मीडिया यूजर्स वीडियो को लेकर तरह तरह के रिएक्शन दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा…लगता है भाई कमबैक कर ही लेगा. एक और यूजर ने लिखा…अब समझ आया इसे बिग बॉस से क्यों निकाल दिया था. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा…ये काम केवल इसी को सूट करता है.


स्किन पर दिखने वाले ये संकेत हो सकते हैं कोलन कैंसर के इशारे, नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

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कोलन कैंसर यानी कोलोरेक्टल कैंसर दुनिया में तेजी से बढ़ने वाले कैंसरों में से एक है. आमतौर पर लोग इसके लक्षणों को पेट के दर्द, मल त्याग की आदतों में बदलाव और खून आने जैसे पाचन संबंधी संकेतों से जोड़ते हैं. हालांकि, एक्सपर्ट्स कहते हैं कि कई बार यह बीमारी शरीर के सबसे बड़े अंग यानी स्किन पर भी अपने शुरुआती संकेत दिखा सकती है.

अगर स्किन पर रैशेज, गांठ, रंग बदलना या घाव जैसे बदलाव दिखाई दे तो इन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि स्किन पर दिखने वाले कौन से संकेत कोलन कैंसर की तरफ इशारा करते हैं और इन्हें नजरअंदाज करना कितना भारी पड़ सकता है.

स्किन पर कैसे असर डालता है कोलन कैंसर

स्किन अक्सर शरीर के अंदर चल रही कई समस्याओं को बाहर से दिखा देती है. कोलन कैंसर में स्किन पर बदलाव कई कारणों से हो सकते हैं, जिनमें कैंसर कोशिकाओं का फैलाव, शरीर की प्रतिरोधक क्रिया या कैंसर के उपचारों के असर शामिल होते हैं. यह बदलाव शरीर के धड़, हाथ या पैरों पर दिखाई दे सकते हैं और कभी हल्की लाली तो कभी-कड़ी गांठ है या खुले घाव की तरह दिख सकते हैं. एक्सपर्ट मानते हैं कि परिवार में कोलन कैंसर की हिस्ट्री होने पर या लाइफस्टाइल से जुड़े खतरों में आने पर लोगों को इन संकेतों पर और ध्यान देना चाहिए. वहीं समय रहते हैं लक्षणों को पहचान लेना इलाज को आसान बनाता है.

कोलन कैंसर से जुड़े सबसे आम स्किन लक्षण

  • कटेनियस नोड्यूल्स- कई बार कोलन कैंसर की कोशिकाएं स्किन पर फैलकर सख्त गांठें बना देती है. यह आकार में अलग-अलग हो सकती है और कभी-कभी दर्द भी कर सकती है. यह संकेत बताता है कि कैंसर अपनी मूल जगह से आगे फेल रहा है.

  • एरिथेमा और इन्फ्लेमेटरी रैशेज- एरिथेमा यानी स्किन पर लालिमा और सूजन कोलन कैंसर में शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया के कारण दिख सकता है. यह पैच थोड़ा उभरे हुए, गर्माहट वाले या खुजली जैसे लग सकते हैं और आम रैश की तरह दिखने पर भी लंबे समय तक बने रहते हैं.

  • स्किन अल्सर- कुछ लोगों में स्किन पर ऐसे घाव दिख सकते हैं जो आसानी से नहीं भरते हैं. यह शरीर में चल रही कैंसर संबंधी प्रक्रियाओं का परिणाम हो सकता है. वहीं इनका धीरे-धीरे बढ़ना या लगातार बना रहना चेतावनी भी हो सकती है.

  • हाइपरपिगमेंटेशन और डिस्कलरेशन- कुछ मामलों में स्किन का रंग गहरा हो सकता है. यह शरीर में मेटाबॉलिक बदलाव या कैंसर उपचारों का असर हो सकता है. यह बदलाव धीरे-धीरे धड़, हाथों या चेहरे पर दिखने लगते हैं.

  • एक्ने जैसे दाने या लगातार रहने वाले रैश- कुछ लोगों में मुंहासे जैसे दाने या फैलाव वाले रैश दिख सकते हैं जो सामान्य स्किनकेयर से ठीक नहीं होते हैं. यह भी कैंसर की बीमारी की ओर इशारा कर सकते हैं.

कोलन कैंसर के संभावित कारण जो स्किन पर डालते असर

  • कैंसर कोशिकाओं का स्किन तक फैलना- कई बार कैंसर ब्लड या लिंफ सिस्टम के जरिए स्किन तक पहुंचता है और वहां गांठें बना देता है. यह स्थिति कम होती है लेकिन गंभीर होती है.

  • कैंसर ट्रीटमेंट के साइडइफेक्ट- कीमोथेरेपी या टारगेटेड थेरेपी स्किन में सूखापन, लालिमा, दाने या एक्ने जैसे लक्षण पैदा कर सकते हैं.

  • इम्यून रिएक्शन और पैरानेओप्लास्टिक सिंड्रोम- कैंसर शरीर की प्रतिरोधक क्रिया को बदल देता है, जिससे स्किन पर मोटापा, लाल पैच या असामान्य रैश दिखाई दे सकते हैं. यह लक्षण कई बार पाचन संबंधी लक्षणों से पहले भी दिख जाते हैं.

  • मेटाबॉलिज्म और हार्मोनल बदलाव- कैंसर शरीर के रासायनिक संतुलन को प्रभावित करता है, जिससे स्किन का रंग और टेक्सचर बदल सकता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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पाकिस्तान के लाहौर में 25 साल बाद पतंग उड़ाने की मिली इजाजत, जानें क्यों लगा था बैन

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लगभग ढाई दशक बाद पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में पतंगबाजी की वापसी हो गई है. सरकार ने बसंत उत्सव पर पतंग उड़ाने की अनुमति दे दी है, लेकिन इसके लिए सख्त नियम लागू किए गए हैं. पंजाब के गवर्नर सरदार सलीम हैदर ने इस आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. इस फैसले के बाद पंजाब की सांस्कृतिक पहचान और परंपरा फिर से जीवंत होने की उम्मीद है.

नियमों के साथ मिली अनुमति
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब पतंगबाजी की जा सकती है, लेकिन केवल तय नियमों और सुरक्षा मानकों के तहत. यह कदम संस्कृति को बचाने के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है. अगर कोई व्यक्ति कानून तोड़ता है, तो उसे भारी सजा का सामना करना पड़ेगा. नए कानून के अनुसार नियम तोड़ने वालों को कम से कम तीन साल और अधिकतम पांच साल तक की जेल हो सकती है. इसके साथ ही दो मिलियन रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है. पुलिस को संदिग्ध स्थानों और घरों की तलाशी लेने की अनुमति भी दी गई है और इस कानून में दर्ज मामले जमानती नहीं होंगे.

खतरनाक मांझे पर पूरी तरह रोक
सरकार ने केवल साधारण धागे का इस्तेमाल करने की अनुमति दी है. धातु वाली डोर, केमिकल से लेपित धागा, कांच या ब्लेड जैसी धार वाला मांझा पूरी तरह प्रतिबंधित है. ऐसे धागे का इस्तेमाल करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी.

बच्चों के लिए भी नियम
18 साल से कम उम्र के बच्चों को पतंग उड़ाने की अनुमति नहीं होगी. अगर कोई नाबालिग पहली बार पतंग उड़ाता पकड़ा गया, तो उस पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और दूसरी बार नियम तोड़ने पर जुर्माना बढ़कर 1 लाख रुपये हो जाएगा. अगर भुगतान नहीं किया गया तो बच्चे के अभिभावक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

QR कोड से होगी निगरानी
सरकार ने पतंगबाजी को नियंत्रित तरीके से करने के लिए पंजीकरण प्रणाली लागू की है. पतंग बेचने वाले और मांझा बनाने वाले सभी दुकानदारों को सरकार के साथ रजिस्टर्ड होना पड़ेगा. हर पतंग और संबंधित दुकान पर QR कोड होगा ताकि नियमों की निगरानी की जा सके. इसके अलावा, पतंग उड़ाने वाले क्लबों को भी डिप्टी कमिश्नर के ऑफिस में पंजीकरण कराना होगा.सरकार ने यह भी कहा है कि नियम तोड़ने वालों की शिकायत करने वालों को प्रोत्साहन देने की व्यवस्था भी की जाएगी.

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2 लाख की बाइक लेकर पहुंचा रैपिडो राइडर, देखकर लड़की का खुला रह गया मुंह- वीडियो वायरल

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रैपिडो राइड बुक करते वक्त आपने अक्सर देखा होगा कि राइड के लिए ऐसी बाइक्स आती हैं जो काफी सस्ती होती हैं और उनका माइलेज ऐसा होता है मानों वो पेट्रोल पीती नहीं केवल सूंघकर चलती है. सही भी है, माइलेज ज्यादा होगा तभी राइडर और कंपनी को भी फायदा होगा. लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने लोगों को हैरान कर दिया है जिसमें एक लड़की ने जब अपने लिए ऑनलाइन बाइक टैक्सी बुक की तो सामने आई गाड़ी को देखकर उसके होश फाख्ता हो गए. वीडियो खूब शेयर किया जा रहा है और लोग इसे लेकर तरह तरह के रिएक्शन दे रहे हैं.

2 लाख की बाइक लेकर पहुंचा रैपिडो राइडर

दरअसल, सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें एक लड़की अपने लिए ऑनलाइन बाइक टैक्सी बुक करती है और फिर उसके आने का इंतजार करने लगती है. इसके बाद जब राइडर बाइक लेकर आता है तो लड़की एक दम चौंक जाती है क्योंकि राइड के लिए जो बाइक आती है वो R15 है जिसकी भारत में ऑन रोड कीमत करीब 2 लाख रुपये है. राइडर बाइक को रोकता है और लड़की चेहरे पर चमक लिए बाइक की ओर बढ़ती है.


बाइक देखते ही हैरान रह गई लड़की

बाइक के नजदीक आकर लड़की राइडर से पूछती है कि आप ही हो? इसके बाद राइडर जवाब देता है कि मैम मैं ही हूं. अब लड़की और ज्यादा खुश हो जाती है. हैरानी तो तब होती है जब लड़की बाइक पर बैठने से पहले कई बार बाइक को निहारती है और उसे हाथ लगाकर देखती है. इसके बाद राइडर लड़की को हेलमेट पहनने को देता है, और दोनों बाइक पर बैठकर रवाना हो जाते हैं.

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यूजर्स ने पूछा, भाई बचता है भी है कुछ या नहीं

वीडियो को gojo_rider नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट से शेयर किया गया है जिसे अब तक लाखों लोगों ने देखा है तो वहीं कई लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है. ऐसे में सोशल मीडिया यूजर्स वीडियो को लेकर तरह तरह के रिएक्शन दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा…भाई ने तो भौकाल मचा दिया. एक और यूजर ने लिखा…अरे भाई, गजब कर दिए यार तुम तो. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा…भाई बचता क्या होगा आपको? कितना माइलेज दे देती है ये.

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स्मार्ट प्लग कैसे बचाता है बिजली, जानिए एक छोटा सा डिवाइस क्यों है कारगर

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स्मार्ट प्लग दिखने में तो सामान्य प्लग जैसा लगता है लेकिन इनके अंदर वाई-फाई कंट्रोल, पावर मॉनिटरिंग और टाइमर जैसी स्मार्ट सुविधाएं होती हैं. इन्हें किसी भी सॉकेट में लगाकर नॉर्मल उपकरणों को स्मार्ट बनाया जा सकता है. यानी आप मोबाइल से उन्हें ऑन या ऑफ कर सकते हैं उनके बिजली खर्च का डेटा देख सकते हैं और जरूरत होने पर टाइम-शेड्यूल भी सेट कर सकते हैं. इससे बिजली की अनावश्यक बर्बादी रुकती है.

स्मार्ट प्लग दिखने में तो सामान्य प्लग जैसा लगता है लेकिन इनके अंदर वाई-फाई कंट्रोल, पावर मॉनिटरिंग और टाइमर जैसी स्मार्ट सुविधाएं होती हैं. इन्हें किसी भी सॉकेट में लगाकर नॉर्मल उपकरणों को स्मार्ट बनाया जा सकता है. यानी आप मोबाइल से उन्हें ऑन या ऑफ कर सकते हैं उनके बिजली खर्च का डेटा देख सकते हैं और जरूरत होने पर टाइम-शेड्यूल भी सेट कर सकते हैं. इससे बिजली की अनावश्यक बर्बादी रुकती है.

कई घरेलू उपकरण जैसे टीवी, सेट-टॉप बॉक्स, चार्जर, कंप्यूटर, माइक्रोवेव और गेमिंग कंसोल बंद होने के बाद भी स्टैंडबाय मोड में बिजली खाते रहते हैं. इन्हें वैंपायर पावर कहा जाता है. इलेक्ट्रिशियन बताते हैं कि परिवार के घरों में करीब 10–15% बिजली इसी अनजाने में होने वाली खपत पर खर्च हो जाती है.

कई घरेलू उपकरण जैसे टीवी, सेट-टॉप बॉक्स, चार्जर, कंप्यूटर, माइक्रोवेव और गेमिंग कंसोल बंद होने के बाद भी स्टैंडबाय मोड में बिजली खाते रहते हैं. इन्हें वैंपायर पावर कहा जाता है. इलेक्ट्रिशियन बताते हैं कि परिवार के घरों में करीब 10–15% बिजली इसी अनजाने में होने वाली खपत पर खर्च हो जाती है.

स्मार्ट प्लग इन उपकरणों को पूरी तरह से ऑफ कर देते हैं. आप टाइमर सेट कर सकते हैं कि रात में 12 बजे टीवी या गेमिंग कंसोल पूरी तरह बंद हो जाए. इसके अलावा, स्मार्ट प्लग पावर मॉनिटरिंग दिखाकर यह समझने में मदद करते हैं कि किन उपकरणों की बिजली खपत ज्यादा है जिससे आप उपयोग कम कर सकते हैं.

स्मार्ट प्लग इन उपकरणों को पूरी तरह से ऑफ कर देते हैं. आप टाइमर सेट कर सकते हैं कि रात में 12 बजे टीवी या गेमिंग कंसोल पूरी तरह बंद हो जाए. इसके अलावा, स्मार्ट प्लग पावर मॉनिटरिंग दिखाकर यह समझने में मदद करते हैं कि किन उपकरणों की बिजली खपत ज्यादा है जिससे आप उपयोग कम कर सकते हैं.

यदि घर में कई ऐसे उपकरण हैं जिन्हें इस्तेमाल के बाद बंद करना भूल जाते हैं तो स्मार्ट प्लग बेहद उपयोगी है. जिन घरों में एयर प्यूरीफायर, डीह्यूमिडिफायर, मोटर, राउटर, लैम्प या हीटर चलते रहते हैं, स्मार्ट प्लग उन्हें ऑटो-ऑफ कर बिजली बचा सकता है. ऑफिस डेस्क सेटअप, मॉनिटर, स्पीकर और पीसी जैसे गैजेट्स के लिए भी यह शानदार विकल्प है.

यदि घर में कई ऐसे उपकरण हैं जिन्हें इस्तेमाल के बाद बंद करना भूल जाते हैं तो स्मार्ट प्लग बेहद उपयोगी है. जिन घरों में एयर प्यूरीफायर, डीह्यूमिडिफायर, मोटर, राउटर, लैम्प या हीटर चलते रहते हैं, स्मार्ट प्लग उन्हें ऑटो-ऑफ कर बिजली बचा सकता है. ऑफिस डेस्क सेटअप, मॉनिटर, स्पीकर और पीसी जैसे गैजेट्स के लिए भी यह शानदार विकल्प है.

अगर स्मार्ट प्लग को सोच-समझकर इस्तेमाल किया जाए तो बिल में 15% तक की कमी देखी जा सकती है. यह आपके घर के कई गैजेट्स को कंट्रोल में रखता है और फालतू बिजली को खत्म करता है. यही वजह है कि इलेक्ट्रिशियन इसे छोटा सा डिवाइस, बड़ा फायदा बताते हैं. स्मार्ट प्लग का इस्तेमाल आसान है और इससे ऊर्जा बचत भी.

अगर स्मार्ट प्लग को सोच-समझकर इस्तेमाल किया जाए तो बिल में 15% तक की कमी देखी जा सकती है. यह आपके घर के कई गैजेट्स को कंट्रोल में रखता है और फालतू बिजली को खत्म करता है. यही वजह है कि इलेक्ट्रिशियन इसे छोटा सा डिवाइस, बड़ा फायदा बताते हैं. स्मार्ट प्लग का इस्तेमाल आसान है और इससे ऊर्जा बचत भी.

Published at : 03 Dec 2025 02:58 PM (IST)

Gadgets फोटो गैलरी

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सिंह राशि के छात्रों को साल 2026 में मिलेगा नया मौका, शिक्षा के क्षेत्र में मिलेगी अप्रत्याशित सफलता!

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सिंह राशि के विद्यार्थियों के लिए वर्ष 2026 में बहुत कुछ नया होने वाला है. यह साल उनके सीखने, समझने और खुद को निखारने का समय रहेगा. इस वर्ष शिक्षा और करियर दोनों ही क्षेत्रों में उतार-चढ़ाव आएंगे, लेकिन यह बदलाव किसी न किसी रूप में आपको आगे बढ़ाने के लिए ही होंगे. यह समय आपको सिखाएगा कि जल्दबाज़ी से निर्णय लेना सही नहीं है.

सिंह राशि के विद्यार्थियों के लिए वर्ष 2026 में बहुत कुछ नया होने वाला है. यह साल उनके सीखने, समझने और खुद को निखारने का समय रहेगा. इस वर्ष शिक्षा और करियर दोनों ही क्षेत्रों में उतार-चढ़ाव आएंगे, लेकिन यह बदलाव किसी न किसी रूप में आपको आगे बढ़ाने के लिए ही होंगे. यह समय आपको सिखाएगा कि जल्दबाज़ी से निर्णय लेना सही नहीं है.

सिंह राशि के जातक छात्र-छात्राओं के लिए जनवरी से जून तक का समय पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी में जुटे छात्रों के लिए बेहद अनुकूल रहेगा. बृहस्पति लाभ भाव में होने से आपके विचारों में स्पष्टता आएगी और ज्ञान को ग्रहण करने की क्षमता भी बढ़ेगी. प्रतियोगी परीक्षा वाले छात्रों को लाभ मिलेगा, जबकि उच्च शिक्षा की इच्छा रखने वालों के लिए भी यह समय सुनहरा रहेगा.

सिंह राशि के जातक छात्र-छात्राओं के लिए जनवरी से जून तक का समय पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी में जुटे छात्रों के लिए बेहद अनुकूल रहेगा. बृहस्पति लाभ भाव में होने से आपके विचारों में स्पष्टता आएगी और ज्ञान को ग्रहण करने की क्षमता भी बढ़ेगी. प्रतियोगी परीक्षा वाले छात्रों को लाभ मिलेगा, जबकि उच्च शिक्षा की इच्छा रखने वालों के लिए भी यह समय सुनहरा रहेगा.

अप्रैल से जून के बीच शिक्षा से जुड़ी कुछ उलझने सामने आएंगी. बृहस्पति के द्वादश भाव में उच्च होने से मन में हल्की बेचैनी, पढ़ाई में अरुचि या असमंजस हो सकता है. कुछ योजनाएँ अधूरी रह सकती है.  इसी समय शोध कार्य, गहन अध्ययन या किसी विशेष विषय पर ध्यान देने वाले विद्यार्थियों को अच्छा परिणाम मिल सकता है.

अप्रैल से जून के बीच शिक्षा से जुड़ी कुछ उलझने सामने आएंगी. बृहस्पति के द्वादश भाव में उच्च होने से मन में हल्की बेचैनी, पढ़ाई में अरुचि या असमंजस हो सकता है. कुछ योजनाएँ अधूरी रह सकती है. इसी समय शोध कार्य, गहन अध्ययन या किसी विशेष विषय पर ध्यान देने वाले विद्यार्थियों को अच्छा परिणाम मिल सकता है.

जुलाई से सितंबर के बीच पढ़ाई में एकाग्रता बनाए रखना थोड़ा चुनौतीपूर्ण होगा. इस अवधि में ग्रहों की स्थिति आपकी मेहनत और आपके परिणामों के बीच एक दूरी पैदा कर सकती है. अगर मेहनत के अनुकूल आपको परिणाम नहीं मिले तो निराश होने की जरूरत नहीं है. अनुशासन और धैर्य बनाए रखें. सफलता जरूर मिलेगी.

जुलाई से सितंबर के बीच पढ़ाई में एकाग्रता बनाए रखना थोड़ा चुनौतीपूर्ण होगा. इस अवधि में ग्रहों की स्थिति आपकी मेहनत और आपके परिणामों के बीच एक दूरी पैदा कर सकती है. अगर मेहनत के अनुकूल आपको परिणाम नहीं मिले तो निराश होने की जरूरत नहीं है. अनुशासन और धैर्य बनाए रखें. सफलता जरूर मिलेगी.

अक्तूबर से दिसंबर विद्यार्थियों के लिए मानसिक दबाव बढ़ा सकता है. बृहस्पति का कमज़ोर प्रभाव और साथ में शनि–राहु का असर शिक्षा पर पड़ सकता है. इससे घबराने की जरूरत नहीं है. बस आपको अपनी तैयारी को और मजबूत करनी है. कोई रूकावट आएगी लेकिन वह भी दूर हो जाएगी. यह समय उन छात्रों के लिए बेहद फलदायी होगा.

अक्तूबर से दिसंबर विद्यार्थियों के लिए मानसिक दबाव बढ़ा सकता है. बृहस्पति का कमज़ोर प्रभाव और साथ में शनि–राहु का असर शिक्षा पर पड़ सकता है. इससे घबराने की जरूरत नहीं है. बस आपको अपनी तैयारी को और मजबूत करनी है. कोई रूकावट आएगी लेकिन वह भी दूर हो जाएगी. यह समय उन छात्रों के लिए बेहद फलदायी होगा.

इस साल में शिक्षा के क्षेत्र में कई उतार-चढ़ाव आएंगे, लेकिन हर बार आपको कुछ नया सीखने को मिलेगा. यह साल आपको परिपक्व बनाएगा. आपकी क्षमताओं को उजागर करेगा और अंत में आपको आपकी मेहनत के अनुरूप सम्मान दिलाएगा.

इस साल में शिक्षा के क्षेत्र में कई उतार-चढ़ाव आएंगे, लेकिन हर बार आपको कुछ नया सीखने को मिलेगा. यह साल आपको परिपक्व बनाएगा. आपकी क्षमताओं को उजागर करेगा और अंत में आपको आपकी मेहनत के अनुरूप सम्मान दिलाएगा.

Published at : 03 Dec 2025 02:50 PM (IST)

राशिफल फोटो गैलरी

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DRDO में होगी 700 से ज्यादा पदों पर भर्ती, जानें कब से कर सकेंगे अप्लाई; ये हैं आसान स्टेप्स

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भारत के सबसे प्रमुख रक्षा अनुसंधान DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) का हिस्सा बनने का सुनहरा मौका है. दरअसल DRDO ने CEPTAM 11 Recruitment 2025 के लिए एक नोटिस जारी किया है, जिसमें सीनियर टेक्निकल असिस्टेंट-B (STA-B) और टेक्नीशियन-A (TECH-A) के पदों के लिए 764 वैकेंसी मौजूद हैं, जिसके ऑनलाइन आवेदन 9 दिसंबर 2025 से शुरू हो रहे हैं.

कुल कितने पदों पर भर्ती है?

DRDO ने कुल 764 पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन निकाला है, जिसमें टेक्नीशियन-A (TECH-A) के लिए 203 पद और टेक्निकल असिस्टेंट-B (STA-B) के लिए 561 पद शामिल हैं. ध्यान देने वाली बात है कि योग्य उम्मीदवार इन पदों के लिए सिर्फ ऑनलाइन आवेदन ही कर सकते हैं. ऑनलाइन आवेदन 9 दिसंबर 2025 से शुरू हो रहे हैं.

Age कितनी होनी चाहिए?

DRDO CEPTAM 11 भर्ती के लिए उम्मीदवारों की आयु न्यूनतम 18 साल और अधिकतम 28 साल होनी चाहिए. भारत सरकार के नियमों के अनुसार, आयु सीमा में छूट लागू होगी.

  यह भी पढ़ें: UPPSC पॉलिटेक्निक लेक्चरर भर्ती शुरू, 513 पदों पर मौका; मिलेगी तगड़ी सैलरी

आवेदन प्रक्रिया क्या है?

स्टेप 1: DRDO की ऑफिसियल वेबसाइट पर जाएँ: drdo.gov.in
स्टेप 2: “Recruitment / Notifications / CEPTAM 11” सेक्शन खोलें
स्टेप 3: CEPTAM 11 पोस्ट के लिंक पर जाकर Registration पूरा करें
स्टेप 4: Registration के बाद लॉगिन करके पूरा फॉर्म भरें. नाम, पता, शिक्षा, उम्र, लिंग, श्रेणी और Technician-A या STA-B के लिए संबंधित ट्रेड की जानकारी दें
स्टेप 5: मांगे गए डॉक्यूमेंट स्कैन करके अपलोड करें
स्टेप 6: आवेदन शुल्क UPI या कार्ड के माध्यम से जमा करें

फॉर्म का आवेदन शुल्क कितना है?

  • जनरल, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क ₹100 है.
  • SC, ST और दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए कोई शुल्क नहीं है.

  यह भी पढ़ें: क्या है कैट? इसका एग्जाम देने से पहले भूलकर भी नहीं करनी चाहिए ये गलतियां

Education Loan Information:
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19 Minutes Viral Video: क्या वीडियो में दिख रही लड़की ने कर लिया सुसाइड? जनिए क्या है सच

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Couple Viral MMS Video: सोशल मीडिया पर एक वीडियो बहुत वायरल हो रहा है. 19 मिनट 34 सेकंड का यह MMS वीडियो है. यह वीडियो सच है या झूठ, इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है, लेकिन इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर कई दावे किए जा रहे हैं. जानिए क्या है सच.

क्या दावा किया जा रहा है?

सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि एक युवक के साथ 19 मिनट 34 सेकंड का आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने के बाद उसमें दिख रही लड़की ने अपनी जिंदगी खत्म कर ली. वायरल हो रहा वीडियो सच है या झूठ, इस बारे में अभी तक कोई जानकारी सामने नहीं आई है. 

क्या है लड़की के सुसाइड का सच?

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक लड़की का शव जमीन पर पड़ा हुआ है और पुलिस घटनास्थल पर जांच कर रही है. इस वीडियो के कैप्शन में लिखा है, ”19 मिनट 34 सेकंड का आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने के बाद संबंधित लड़की ने अपनी जिंदगी खत्म कर ली.” लेकिन तथ्य जांच में यह दावा पूरी तरह से झूठा साबित हुआ. जिस महिला की मौत का वीडियो घूम रहा है, उसका MMS की महिला से कोई संबंध नहीं है. दोनों घटनाएं पूरी तरह से अलग हैं. 

असल में मामला क्या है?

दरअसल सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से 19 मिनट 34 सेकंड का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक जोड़ा आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहा है. यह वीडियो सोशल मीडिया पर कैसे पहुंचा, यह अभी तक सामने नहीं आया है. प्रसिद्धि पाने के लिए इस जोड़े ने जानबूझकर यह वीडियो पोस्ट किया है या कोई और कारण है, इस बारे में भी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. 

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4 करोड़ का बीमा करवाकर कर दी भाई की हत्या, कर्ज और शेयर बाजार के नुकसान ने बनाया हैवान

कौन है आज ईस्ट इंडिया कंपनी का मालिक, जिसने कभी दिलाई थी अंग्रेजों को भारत में एंट्री?

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East India Company: एक दौर था जब भारत पर ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company) का दबदबा था. यही वह कंपनी थी, जिसने अंग्रेजों के लिए भारत पर करीब  200 साल तक राज करने का रास्ता तैयार किया. 31 दिसंबर, 1600 में इंग्लैंड में इस कंपनी की स्थापना भारत से यूरोप में मसाले, चाय और अनोखी चीजें इम्पोर्ट करने के लिए हुई थी. सबसे पहले 24 अगस्त 1608 में विलियम हॉकिन्स ईस्ट इंडिया कंपनी का जहाज लेकर भारत आया.

भारत के मसालों पर थी अंग्रेजों की नजर

अंग्रेजों के भारत आने का मकसद ही था यहां कारोबार करने की इजाजत लेना क्योंकि उनकी नजर यहां के मसालों और कच्चे माल पर थी. यूरोप में कड़ाके की ठंड में मांस को सुरक्षित रखने और उसकी उपयोगिता को बढ़ाने के लिए मसालों की जरूरत पड़ती थी. साल 1613 में मुगल बादशाह जहांगीर ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को कारोबार करने के लिए सूरत में एक कारखाना लगाने की इजाजत दे दी. 1690 तक कंपनी ने कलकत्ता (जिसे अब कोलकाता के नाम से जाना जाता है) में भी अपनी फैक्ट्री लगा ली थी.

फूट डलवाकर की राजनीति

धीरे-धीरे कंपनी ने भारत में अपना पैर जमाना शुरू कर दिया. भारत में राजाओं के बीच आपस में फूट डलवाकर यहां की राजनीति में भी हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया. एक वक्त ऐसा आया, जब भारतीयों को अपने देश में ही छोटे-छोटे कामों के लिए अंग्रेजों से इजाजत लेनी पड़ी. वह दौर था जब ब्रिटिश साम्राज्य के लिए कहा जाता था कि सूरज कभी ढलता नहीं है, लेकिन यह बात भी सच है कि वक्त बदलते देर नहीं लगती. करीब 200 साल तक हुकूमत चलाने के बाद आखिरकार अंग्रेजों को भी भारत छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा.

क्रांतिकारियों के आगे पस्त अंग्रेज

हालांकि, इस बीच 1857 में मेरठ में ब्रिटिश सेना में तैनात भारतीय सिपाहियों ने अंग्रेजी सरकार के खिलाफ विद्रोह छेड़ दिया. क्रांतिकारियों के विद्रोह का धीरे-धीरे कुछ ऐसा असर हुआ कि ईस्ट इंडिया कंपनी का कारोबार धीरे-धीरे कम होने लगा. विद्रोह के चलते कंपनी का भारत में काम करना मुश्किल हो रहा था और कंपनी भारत से मसालों का यूरोप में नियात नहीं कर पा रही थी.

1857 की बगावत का ही असर था कि 1874 में कंपनी को बंद कर दिया गया. इसके बाद दशकों तक करीब 131 साल तक यह कंपनी बंद पड़ी रही, जिसे साल 2005 में संजीव मेहता ने खरीद लिया. यह देखना दिलचस्प था कि जिस कंपनी की बदौलत अंग्रेजों ने भारत पर सालों तक जुल्म किया, आज उसी की बागडोर एक हिंदुस्तानी के हाथों है. 

कौन हैं संजीव आनंद?

संजीव मेहता का जन्म अक्टूबर 1961 में गुजराती जैन परिवार में हुआ. कारोबार को लेकर सूझबूझ उन्हें विरासत में मिली क्योंकि 1920 के दशक में उनके दादा गफूरचंद मेहता का बेल्जियम में हीरे का कारोबार था. 1938 में उनका परिवार भारत लौट आया. संजीव की शुरुआती पढ़ाई मुंबई के सिडेनहैम कॉलेज से हुई. इसके बाद उन्होंने IIM अहमदाबाद में अपनी आगे की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने अमेरिका के लॉस एंजेलिस में जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट में दाखिला ले लिया. 1980 के दशक तक मेहता ने अपने घर से एक्सपोर्ट बिजनेस शुरू कर दिया था. इनमें से ‘हगी’ हॉट वॉटर बॉटल ने उन्हें पहली कामयाबी दिलाई. 

20 मिनट में खरीदे 21 परसेंट शेयर

जब 2005 में ईस्ट इंडिया कंपनी के शेयरहोल्डर्स ने इसे फिर से शुरू करने की कोशिश की, तो मेहता ने इस मौके का फायदा उठाया. उन्होंने 20 मिनट में कंपनी के  21 परसेंट शेयर खरीद डाले. 2016 में ET को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था, मैंने ईस्ट इंडिया कंपनी के पहले 21 परसेंट शेयर 20 मिनट में खरीदे. एक भारतीय को 400 साल पुरानी इंग्लिश कंपनी खरीदने का प्रोसेस शुरू करने में बस इतना ही समय लगा.

हालांकि, इससे पहले जब इसके लिए बोली लगाने का 18 महीने लंबा प्रॉसेस शुरू हुआ था उस दौरान ब्रिटिश लाइब्रेरी और विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम में इसके इतिहास को खूब खंगाला. मेहता ने द टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में बताया था, ब्रांड को मैंने नहीं बनाया, इसे इतिहास ने बनाया है. मैं इसका ट्रस्टी और अगली पीढ़ी के लिए इसका कस्टोडियन हूं. खास बात यह है कि मैं एक हिंदुस्तानी हूं और उसी कंपनी को वापस खरीद रहा हूं, जिसका कभी भारत पर राज हुआ करता था. 

 

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जब देवानंद ने मज़ाक में खुद को शम्मी कपूर बता दिया, जानें क्या हुआ

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हिंदी सिनेमा में कई सितारे आए और गए, लेकिन देवानंद वह नाम हैं जो कभी दिलों से उतरते नहीं. धर्मदव पिशोरीमल आनंद, जिन्हें ‘सिनेमा का देव’ भी कहा जाता है. आज 3 दिसंबर उनकी पुण्यतिथि पर एक बार फिर यादों के बीच हैं. उनका अंदाज, उनकी कहानियां और उनकी मुस्कान, आज भी हम सब के दिलों में मौजूद हैं.
 
‘जब देव साहब को समझ लिया शम्मी कपूर’
एक्ट्रेस शायरा बानो ने देव आनंद के लाइफ से रिलेटेड एक बेहद दिलचस्प स्टोरी शेयर की थी. लेबनान के बालबेक में खंडहरों के बीच गाने की शूटिंग हो रही थी. माहौल खूबसूरत था और भीड़ में एक्साइटमेंट भरपूर थीं. अचानक वहां खड़े फॉरेन फैन्स ने ‘शम्मी कपूर, शम्मी कपूर’ चिल्लाने लगे. उन्हें लगा कि स्क्रीन पर छाया रहने वाला उनका फेवरेट स्टार सामने खड़ा है. एक्ट्रेस ने बताया कि अगर कोई और होता तो शायद सोच में पड़ जाता या थोड़ा नाराज हो जाता. लेकिन देव साहब ने हल्की मुस्कुराहट के साथ हाथ हिलाते हुए कहा, हां, ‘मैं ही शम्मी कपूर हूं’. उन्हें उस पल समझ आया कि देव साहब का दिल सच में कितना बड़ा हैं.

‘हमेशा स्माइल, हमेशा स्टाईल-देवानंद का तरीका’
देवानंद कभी भी अपनी परेशानियां दुनिया को नहीं दिखाते थे. उनका मानना था कि इंसान को दुनिया के सामने खुश, कॉन्फिडेंट और पॉजिटिव दिखना चाहिए. यही वजह है कि उनका प्रेजेंस अपने में एक फील गुड मोमेंट बन जाता था.

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‘माय फैंस कैन्ट सी मी विक’- देवानंद
अपनी ऑटोबायोग्राफी रोमांसिंग विद लाइफ में उन्होंने एक बात लिखी थी कि एक छोटी-सी बीमारी के लिए वे लंदन गए और चुपचाप ऑपरेशन करवा लिया. और किसी को भी इसकी खबर तक नहीं लगने दी.फैंस के लिए उनका प्यार ही अलग था.

एक छोटा-सा लेटर और बदल गई पूरी लाइफ
गुरदासपुर में जन्मे देवानंद फिल्मों में आने से पहले बॉम्बे के एक ऑफिस में जॉब करते थे. वहां वो अफसरों के लव लेटर्स टाइप करते थे. उन्हीं लेटर्स की रोमांटिक लाइनों ने उनके अंदर का आर्टिस जगा दिया. बात कुछ ये है कि एक दिन एक लेटर में बस दो शब्द लिखे थे. ‘बस करो’, देव साहब ने मानो इसे इशारा समझा और नौकरी छोड़ कर फिल्मी दुनिया में कदम रख दिया.

देवानंद का जादू, उनकी कहानियां और उनका अंदाज. ये सब आज भी उतने ही ताज़ा है. उनकी पुण्यतिथि पर उनका जीवन एक बार फिर याद दिलाता है कि वे सिर्फ एक्टर नहीं थे. बल्कि एक लेजेंडरी फीलिंग्स थे.

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