डाक विभाग के बाबू को कितनी मिलती है सैलरी, 8वें वेतन आयोग के बाद कितना होगा इजाफा?

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डाक विभाग की नौकरी सभी सरकारी नौकरियों में काफी चर्चा में रहती है. अब जब 8वें वेतन आयोग की चर्चाएं तेज हैं, तो लोग सबसे ज्यादा यही जानना चाहते हैं कि डाक विभाग के बाबू की तनख्वाह में आखिर कितना इजाफा हो सकता है। आइए जानते हैं डिटेल्स…

रिपोर्ट्स के मुताबिक डाक विभाग का बाबू वेतन मैट्रिक्स के लेवल-2 में आता है। इसका ग्रेड पे 1900 रुपये है। 7वें वेतन आयोग के अनुसार बाबू की बेसिक सैलरी 19,900 रुपये तय है। लेकिन सरकारी नौकरी की खासियत यही है कि बेसिक के साथ कई भत्ते जुड़ते हैं, जिनमें डीए, एचआरए, टीए और विभागीय अलाउंस शामिल हैं. इन सभी भत्तों को जोड़ने पर अब एक बाबू की कुल इन-हैंड सैलरी लगभग 37,120 रुपये से 39,370 रुपये के बीच बैठती है.

फिटमेंट फैक्टर क्या होता है और इसे कैसे तय किया जाता है?

सरकारी कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और भत्तों को तय करने में फिटमेंट फैक्टर बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसे एक तरह का मल्टीप्लायर समझिए, जिसकी मदद से हर वेतन आयोग में नई सैलरी तय की जाती है. नई सैलरी तय करने के लिए यह देखा जाता है कि देश में महंगाई कितनी बढ़ी है, कर्मचारियों की जरूरतें क्या हैं और सरकार उस समय कितना वित्तीय बोझ उठा सकती है. इन सभी बातों को जोड़कर फिटमेंट फैक्टर का आंकड़ा तय होता है.

8वें वेतन आयोग के बाद कितना वेतन?

सरकारी कर्मचारियों को हर दस साल में एक नया वेतन आयोग मिलता है. 7वां वेतन आयोग 2016 में लागू हुआ था, अब 8वां वेतन आयोग 2026 से लागू होगा. हालांकि, सरकारी सैलरी बढ़ने का आधार सिर्फ बेसिक पे नहीं होता. इसका सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा फिटमेंट फैक्टर होता है. 7वें वेतन आयोग में यह फैक्टर 2.57 गुना था. वहीं, उम्मीद लगाई जा रही है कि 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.86 हो सकता है. जिसके बाद इनकी सैलरी 56 हजार रुपये से भी ज्यादा हो सकती है. यानि बेसिक पे में करीब 36 से 37 हजार रुपये तक का उछाल आ सकता है.

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अगर आज आपने सोने में किया 5 लाख रुपये का निवेश, 5 साल बाद कितना मिलेगा रिटर्न

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Gold Investment: सोने की कीमतों में इस साल जबरदस्त तेजी देखने को मिली है. अप्रैल में एक लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर को छूने के बाद सोना कई बार नए ऐतिहासिक स्तर बना चुका है. वर्ष 2025 में सोना किसी भी शेयर या अन्य निवेश साधन की तुलना में सबसे अधिक पसंद किया जाने वाला निवेश बन गया है. सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की चमक लगातार बढ़ती जा रही है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि यदि आज कोई व्यक्ति पाँच लाख रुपये का निवेश करता है, तो अगले पाँच वर्षों में यानी 2030 तक उसे कितना रिटर्न मिल सकता है.

सोने की लगातार बढ़ती चमक

शादी-विवाह के त्योहारी मौसम की बढ़ी हुई मांग के कारण मंगलवार (25 नवंबर) को दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने की कीमतें 3,500 रुपये बढ़कर 1,28,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गईं. पिछले तीन दिनों से जारी गिरावट का रुझान टूट गया और 99.5% शुद्धता वाले सोने की कीमत 3,500 रुपये बढ़कर 1,28,300 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी कर सहित) हो गई.

सोने के साथ-साथ चांदी में भी तेजी देखी गई. इसकी कीमत 5,800 रुपये बढ़कर 1,60,800 रुपये प्रति किलोग्राम (टैक्स सहित) हो गई. व्यापारियों के अनुसार, शादी के मौसम में स्थानीय ज्वेलर्स की मांग बढ़ने से कीमतों में मजबूती आई है.

क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?

वैश्विक और घरेलू आर्थिक परिस्थितियों में लगातार हो रहे बदलावों के कारण निवेशक फिर से सोने की ओर आकर्षित हो रहे हैं. महंगाई, वैश्विक अस्थिरता और आर्थिक अनिश्चितता सोने की मांग को और बढ़ा रही है. यही वजह है कि 5 लाख रुपये के मौजूदा निवेश पर 2030 तक संभावित रिटर्न को लेकर चर्चा तेज हो गई है.

साल 2000 से 2025 तक सोने का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) लगभग 14% रहा है. इन 25 वर्षों में केवल तीन साल—2013, 2015 और 2021—ऐसे रहे जब कीमतों में गिरावट दर्ज की गई.

नए रिकॉर्ड को छू सकता है सोना

25 साल पहले यानी 2000 में 24 कैरेट सोने की कीमत 4,400 रुपये प्रति 10 ग्राम थी, जो अब बढ़कर लगभग 1.25 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम हो चुकी है. वर्ष 2000 से 2025 के बीच सोने की कीमतों में औसतन 25% से 35% वार्षिक वृद्धि देखने को मिली है. मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में भी सोना मजबूत रिटर्न देता रहेगा. यानी यदि आप आज 5 लाख रुपये का सोना खरीदते हैं, तो 2030 तक आपका पैसा लगभग दोगुना हो सकता है.

कई रिपोर्ट्स का अनुमान है कि यदि मौजूदा तेजी जारी रही तो 2030 तक सोना 2,50,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है. जबकि कुछ रिपोर्ट्स तो यह दावा भी करती हैं कि 2030 तक 10 ग्राम सोने की कीमत 7 लाख से 7.5 लाख रुपये तक जा सकती है. स्पष्ट है कि यदि वैश्विक अनिश्चितता आगे भी बनी रहती है, तो सोने की कीमतें तेज रफ्तार से बढ़ती रहेंगी और निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना और अधिक मजबूत हो जाएगी.

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7 फरवरी से टी20 वर्ल्ड कप का आगाज, 4 ग्रुप में बांटी गई 20 टीमें, भारत के 5 वेन्यू पर होंगे मैच

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इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने 2026 टी20 वर्ल्ड कप के शेड्यूल का एलान कर दिया है. 7 फरवरी से इस मेगा इवेंट की शुरुआत होगी. वहीं 8 मार्च को खिताबी मैच खेला जाएगा. 2026 टी20 वर्ल्ड कप में कुल 20 टीमें हिस्सा लेंगी, जिन्हें 4 ग्रुप में बांटा गया है. भारत के कुल पांच वेन्यू पर टी20 वर्ल्ड कप के मैच खेले जाएंगे. वहीं श्रीलंका के 3 वेन्यू पर भी टूर्नामेंट के मैच आयोजित होंगे. यहां आपको 2026 टी20 वर्ल्ड कप की A टू Z डिटेल्स मिल जाएंगी. 

2026 टी20 वर्ल्ड कप में पहले दिन यानी 7 फरवरी को 3 मुकाबले खेले जाएंगे. पाकिस्तान का मैच नीदरलैंड्स से होगा. भारत का मुकाबला यूएसए से होगा और वेस्टइंडीज की टीम बांग्लादेश से भिड़ेगी. बता दें कि 2026 टी20 वर्ल्ड कप का फाइनल मुकाबला 8 मार्च को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जाएगा. अगर फाइनल में पाकिस्तान की टीम क्वालीफाई करती है तो फिर खिताबी मैच श्रीलंका के कोलंबो में होगा. इसी तरह सेमीफाइनल मैच कोलकाता और मुंबई में खेला जाना है, लेकिन पाकिस्तान की टीम अगर सेमीफाइनल में जाती है तो फिर वो कोलंबो में सेमीफाइनल खेलेगी.

4 ग्रुप में बांटी गई 20 टीमें

ग्रुप ए- भारत, पाकिस्तान, यूएसए, नीदरलैंड्स और नामीबिया

ग्रुप बी- ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका, आयरलैंड, जिम्बाब्वे और ओमान

ग्रुप सी- इंग्लैंड, वेस्टइंडीज, बांग्लादेश, नेपाल और इटली

ग्रुप डी- न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, अफगानिस्तान, कनाडा और यूएई

15 फरवरी को भारत-पाक मैच 

2026 टी20 वर्ल्ड कप में 15 फरवरी को भारत और पाकिस्तान के बीच महामुकाबला होगा. दोनों टीमें श्रीलंका के कोलंबो के आर प्रेमदासा स्टेडियम में भिड़ेंगी. टूर्नामेंट का सबसे पहला मैच पाकिस्तान और नीदरलैंड्स के बीच खेला जाएगा. वहीं टीम इंडिया यूएसए के खिलाफ 7 फरवरी को ही अपना पहला मैच खेलेगी.

भारत के 5 और श्रीलंका के 3 वेन्यू पर होंगे मैच

2026 टी20 वर्ल्ड कप का आगाज 7 फरवरी से होगा. वहीं टूर्नामेंट का फाइनल मैच 8 मार्च को खेला जाएगा. गत चैंपियन भारत 7 फरवरी को मुंबई में यूएसए (अमेरिका) के खिलाफ अपना पहला मैच खेलेगा, जिसके बाद नामीबिया, पाकिस्तान और नीदरलैंड के खिलाफ लीग मैच होंगे. 

भारत के कुल पांच वेन्यू पर 2026 टी20 वर्ल्ड कप के मैच खेल जाएंगे, जिसमें दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और अहमदाबाद में शामिल हैं. वहीं श्रीलंका के कोलंबो के आर प्रेमादासा और एस स्पोर्ट्स क्लब व कैंडी के पल्लेकेले इंटरनेशनल स्टेडियम में टूर्नामेंट के मैच आयोजित होंगे.

2026 टी20 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया का शेड्यूल

भारत बनाम अमेरिका, 7 फरवरी, मुंबई
भारत बनाम नामीबिया, 12 फरवरी, दिल्ली
भारत बनाम पाकिस्तान, 15 फरवरी, कोलंबो
भारत बनाम नेदरलैंड्स, 18 फरवरी, अहमदाबाद

रोहित शर्मा बने ब्रांड एम्बेसडर

ICC के चेयरमैन जय शाह ने रोहित शर्मा को 2026 टी20 वर्ल्ड कप का ब्रांड एम्बेसडर घोषित कर दिया है. रोहित शर्मा की ही कप्तानी में भारत ने 2024 टी20 वर्ल्ड कप का खिताब जीता था, जिसके बाद उन्होंने इस फॉर्मेट से संन्यास ले लिया था. जय शाह ने कहा कि एम्बेसडर की जिम्मेदारी के लिए रोहित शर्मा से बेहतर व्यक्ति नहीं हो सकता था. ब्रांड एम्बेसडर होते हुए रोहित शर्मा वैश्विक स्तर पर टी20 वर्ल्ड कप को प्रमोट करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे. 



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‘मिसेज डाउटफायर’ स्कैंडल: बेटे ने मां की लाश छिपाकर तीन साल तक लूटी पेंशन- यूजर्स ने पकड़ा माथा

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इटली में एक अजीबो गरीब मामला पेश आया जहां एक शख्स ने अपनी मरी हुई मां की पेंशन पाने के लिए ऐसा दिमाग लगाया कि लोगों का दिमाग हिल गया. सोशल मीडिया पर जब इसकी चालाकी का पता चला तो यूजर्स अपना माथा पकड़कर बैठ गए. जी हां, इस शख्स ने पेंशन लेने के लिए अपनी मरी हुई मां की वेशभूषा धारण कि और पहुंच गया बैंक. इतना ही नहीं, इस शख्स ने तीन साल पहले मरी अपनी मां की लाश को ममी बनाकर घर में रखा हुआ था.

मृत मां की वेशभूषा धारण करके पेंशन लेता रहा शख्स

रिपोर्ट के अनुसार, ये शख्स मां की तरह कपड़े पहनकर, मेकअप करके और आवाज बदलकर सरकारी दफ्तरों में भी जाता रहा. इतना ही नहीं, उसने अपनी मां का पहचान पत्र भी उनकी मौत के बाद नवीनीकरण करवा लिया, मां की पेंशन और तीन मकानों की संपत्ति के सहारे वह सालाना करीब 61,000 डॉलर कमा रहा था. पूरी चाल तब पकड़ी गई, जब एक सरकारी कर्मचारी को उसकी आवाज और गर्दन देखकर शक हुआ. शिकायत के बाद जांच की गई, जिसमें बेटा और असली मां की तस्वीरों की तुलना करते ही सच सामने आ गया.

घर में मिली तीन साल पुरानी मां की लाश

इटली में मृत मां का भेस बनाकर पेंशन लेने वाले इस बेटे का मामला और भी गंभीर हो गया है. जांच आगे बढ़ने पर बेटे ने अधिकारियों को अपने घर की तलाशी लेने की अनुमति दे दी जिसके बाद तलाशी के दौरान पुलिस को घर के लॉन्ड्री रूम से ग्रेजिएला डाल’ओग्लियो का ममीकृत शव मिला. अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल मौत में किसी तरह की संदिग्ध बात नहीं दिख रही. प्राथमिक अंदाजा है कि महिला की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई होगी, हालांकि इसकी पुष्टि पोस्टमॉर्टम के बाद ही होगी.

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अधिकारियों ने फेमस फिल्म से जोड़ा मामला, यूजर्स ने भी निकाली भड़ास

इटली के अधिकारियों ने इस मामले को “मिसेज डाउटफायर-स्टाइल स्कैंडल” का नाम दिया है, क्योंकि यह कहानी 1993 की उस फिल्म से मिलती-जुलती है जिसमें एक व्यक्ति बच्चों से मिलने के लिए महिला का भेस धारण करता है. जैसे ही ये मामला इंटरनेट पर वायरल हुआ लोगों ने इसे लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं. एक यूजर ने लिखा…सच कभी नहीं छिपता, सामने आकर ही रहता है. एक और यूजर ने लिखा…थोड़े से लालच के लिए पूरी जिंदगी भर पछताना पड़ेगा. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा…मां की मौत को सहारा बनाकर शख्स ने ममता का मजाक उड़ाया है.

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इथियोपिया के ज्वालामुखी ने बढ़ाई चीन की मुश्किलें! भारत में विमानों का संचालन नॉर्मल

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इथियोपिया का हेली गुब्बी ज्वालामुखी करीब 10 हजार साल बाद रविवार (23 नवंबर 2025) को फट गया. इस बीच आशंका जताई जा रही है कि ज्वालामुखी फटने के बाद उठा राख का गुबार क्षेत्र में प्रदूषण को और बढ़ा सकता है. राख का गुबार करीब 14 किलोमीटर (45,000 फुट) की ऊंचाई तक गया और लाल सागर की ओर पूर्व दिशा में फैलने लगा.

अब तक के बड़े अपडेट्स

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार ये राख के गुबार चीन की ओर बढ़ रहे हैं और मंगलवार (25 नवंबर 2025) शाम साढ़े बजे तक भारत से दूर चले जाएंगे. न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक मौसम वैज्ञानिक राधेश्याम शर्मा ने कहा कि इथियोपियाई ज्वालामुखी विस्फोट से उठे राख के बादल का राजस्थान में कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा कि इसका प्रभाव पिछले 10 से 15 घंटों में इस विशेष क्षेत्र पर देखा गया है.

IMD वैज्ञानिक ने बताया कि इथियोपियाई ज्वालामुखी विस्फोट से उठा राख पूर्वी भारत के क्षेत्रों को पार कर रहा है. उन्होंने कहा, “चूंकि इन राख के बादलों की ऊंचाई 8 से 15 किलोमीटर है, इसलिए सतह पर इनका कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं देखा गया. ये राख वर्तमान में पूर्व-उत्तर-पूर्व दिशा में आगे बढ़ रहा है.”

नागरिक उड्डयन मंत्रालय, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां, एटीसी, मौसम विभाग और एयरलाइंस लगातार हालात पर आपस में तालमेल बनाए हुए हैं. एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने इसे लेकर जरूरी NOTAM जारी कर दिया है, जिन उड़ानों पर इसका असर पड़ सकता है उसे पूरी जानकारी दी जा रही है. एविएशन मिनिस्ट्री ने बताया, “फिलहाल हवाई संचालन सामान्य है. केवल कुछ विमानों का रूट डायवर्ट किया गया या एहतियात के तौर पर उन्हें वापस उतारा गया है. इस समय चिंता की कोई बात नहीं है.”



फ्लाइटराडार24 के अनुसार ज्वालामुखी विस्फोट से उठा राख वर्तमान में उत्तरी भारत के ऊपर देखा गया और यह तेजी से चीन की ओर बढ़ रहा है. अब खतरा चीन के लिए ज्यादा माना जा रहा है. भारतीय मौसम विज्ञान एजेंसी इंडियामेटस्काई के अनुसार आने वाले कुछ दिनों में यह महीन धूल सबट्रॉपिकल जेट स्ट्रीम के साथ प्रशांत महासागर की ओर बढ़ जाएगी.  सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि सतह पर कहीं भी कोई खतरा नहीं है.

IMD के अनुसार इसका एक्यूआई पर कोई असर नहीं पड़ा और न पड़ेगा. हिमालयी तराई, नेपाल की पहाड़ियों या उत्तर भारत के मैदानों में एसओ2 का स्तर भी सामान्य हो चुका है. 40,000 फीट से ऊपर सिर्फ एसओ 2 का हल्का निशान बचा है, जो तेजी से फैलकर निष्क्रिय हो जाएगा. इंडियामेटस्काई ने बताया कि जहां-जहां यह महीन धूल ऊपरी वायुमंडल में रहेगी, वहां सूर्योदय और सूर्यास्त बेहद रंगीन और शानदार दिखाई देंगे. लाल, बैंगनी और नारंगी रंगों की छटा आसमान में छा जाएगी, ठीक वैसे ही जैसे बड़े ज्वालामुखी विस्फोट के बाद पूरी दुनिया में देखने को मिलता है.



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क्या 120W चार्जिंग आपकी बैटरी की दुश्मन? जानिए फास्ट चार्जर से क्यों फोन जल्दी हो जाता है खराब

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Video: लड़की ने दिखाया 40 सेंटीमीटर का कमरा, किराया 1 डॉलर, लोग बोले- रूम नहीं ये ताबूत है

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Viral Shocking Video: दुनिया में रहने की जगह मिलना आसान नहीं, लेकिन चीन में तो अब घर जैसा कमरा भी पैकेट में मिलने लगा है. हाल ही में सोशल मीडिया पर एक लड़की का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह दिखाती है कि उसने सिर्फ 1 डॉलर यानी 85 रुपये में एक ऐसा कमरा किराए पर लिया है, जिसकी चौड़ाई सिर्फ 40 सेंटीमीटर है. वीडियो में साफ दिखाई देता है कि कमरे में बस एक छोटा सा बिस्तर, एक पावर सॉकेट और दीवार पर टीवी है बस इसके अलावा कुछ भी नहीं. 

नौकरी वाले लोगों के लिए बनाए गए मिनी-एंड यूनिट

वीडियो में लड़की बताती है कि चीन के कई शहरों में ऐसे mini-end units किराए पर दिए जा रहे हैं, खासकर उन लोगों के लिए जो नौकरी या पढ़ाई के चलते ज्यादा समय बाहर रहते हैं और सिर्फ सोने की जगह चाहते हैं. ये कमरा इतना छोटा है कि उसमें खड़े होना भी मुश्किल है. वीडियो में दिखाया गया बेड दीवारों के बीच बिल्कुल फिट है और उसके आसपास हिलने-डुलने की जगह भी नहीं है. 

लड़की कमरे का दरवाजा खोलकर दिखाती है, पूरा कमरा एक ही फ्रेम में आ जाता है यानी कमरा इतना छोटा है कि उसे दिखाने के लिए कैमरा घुमाने की भी जरूरत नहीं पड़ती. वीडियो में देखा जा सकता है कि लड़की सीधे कमरे के अंदर घुस भी नहीं पा रही थी. लड़की बताती है कि यहां उसे बस सोने की जगह मिलती है और फोन चार्ज करने के लिए एक पावर आउटलेट. कमरे में न खिड़की है, न अलमारी, न बाथरूम. बाथरूम और वॉशरूम सब बाहर शेयर किए जाते हैं.

ये कमरा है या ताबूत- यूजर्स बोले

इस वीडियो के सामने आने के बाद लोग हैरान रह गए और कमेंट्स में पूछने लगे कि ये कमरा है या ताबूत. किसी ने लिखा कि यह तो इंसानों के लिए नहीं, बैग रखने के लिए भी छोटा है. एक दूसरे ने मजाक में लिखा कि इसमें सो भी गए तो करवट कैसे लोगे. हालांकि कुछ लोगों का कहना था कि चीन जैसे महंगे शहरों में बजट कम हो तो यह ऑप्शन बेहतर है, क्योंकि यहां लोग सिर्फ रात में कुछ घंटों के लिए सोते हैं, और दिन भर बाहर रहते हैं.


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प्राचीन भारत में भी था डेटिंग कल्चर! 2500 साल पहले ऐसे होता था प्यार का इजहार!

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क्या आपको भी यही लगता है कि, डेटिंग एक मॉर्डन कॉनसेप्ट है? ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. दरअसल आज से 2500 साल पहले से ही डेटिंग की अवधारणा चली आ रही है. कादंबरी, कामसूत्र और कथासरित सागर जैसे प्राचीन ग्रथों में उल्लेख है कि, शादी से पहले जोड़े साथ रहते थे और अपनी अनुकूलता (Compatibility) टेस्ट करते थे.

क्या आपको भी यही लगता है कि, डेटिंग एक मॉर्डन कॉनसेप्ट है? ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. दरअसल आज से 2500 साल पहले से ही डेटिंग की अवधारणा चली आ रही है. कादंबरी, कामसूत्र और कथासरित सागर जैसे प्राचीन ग्रथों में उल्लेख है कि, शादी से पहले जोड़े साथ रहते थे और अपनी अनुकूलता (Compatibility) टेस्ट करते थे.

इस दौरान आदमी और औरतें पार्क, बगीचों, बाजारों या त्योहारों के दौरान मिला करते थे. वे एक दूसरे को तोहफे देते थे, और दोस्ती काफी बढ़ जाती थी. ताड़ के पत्तों पर हल्दी की स्याही से छुप छुपाकर प्रेम का इजहार करते थे, जो गर्म होने तक दिखाई नहीं देते थे.

इस दौरान आदमी और औरतें पार्क, बगीचों, बाजारों या त्योहारों के दौरान मिला करते थे. वे एक दूसरे को तोहफे देते थे, और दोस्ती काफी बढ़ जाती थी. ताड़ के पत्तों पर हल्दी की स्याही से छुप छुपाकर प्रेम का इजहार करते थे, जो गर्म होने तक दिखाई नहीं देते थे.

लंबी दूरी के रिश्ते में बंधे प्रेमी-प्रेमिका एक दूसरे के लिए कविताएं लिखते थे और उन्हें मैसेंजर या पक्षी के द्वारा भेजते थे. ये सभी प्राचीन भारत में डेटिंग ऐप्स का काम करते थे.  पुराने भारतीय रोमांस से डरने की बजाए इसका सम्मान करते थे, इसके सेलिब्रेट करते थे.

लंबी दूरी के रिश्ते में बंधे प्रेमी-प्रेमिका एक दूसरे के लिए कविताएं लिखते थे और उन्हें मैसेंजर या पक्षी के द्वारा भेजते थे. ये सभी प्राचीन भारत में डेटिंग ऐप्स का काम करते थे. पुराने भारतीय रोमांस से डरने की बजाए इसका सम्मान करते थे, इसके सेलिब्रेट करते थे.

कामसूत्र के 70 प्रतिशत हिस्से में शारीरक की बजाए सामाजिक-मानसिक संबंधों पर बल जोर दिया गया है. इसमें कहा गया है कि, युवा को कैसे बात करनी चाहिए, कैसे अपने प्रेम को समझने और उसे विकसित करना चाहिए? यह ग्रंथ इस बात को साफ करता है कि, प्राचीन भारतीय सामाजिक और मानसिक विकास को समझता था.

कामसूत्र के 70 प्रतिशत हिस्से में शारीरक की बजाए सामाजिक-मानसिक संबंधों पर बल जोर दिया गया है. इसमें कहा गया है कि, युवा को कैसे बात करनी चाहिए, कैसे अपने प्रेम को समझने और उसे विकसित करना चाहिए? यह ग्रंथ इस बात को साफ करता है कि, प्राचीन भारतीय सामाजिक और मानसिक विकास को समझता था.

हिंदू महाकाव्यों में भी प्यार की साफ झलक देखने को मिलती है. शंकुतला-दुष्यन्त, कृष्ण-रुक्मिणी, अर्जुन-उर्वशी, सुभद्रा-अभिमन्यु इन सभी के प्रेम संवाद पर कायम थे, न कि पारिवारिक फैसलों पर.

हिंदू महाकाव्यों में भी प्यार की साफ झलक देखने को मिलती है. शंकुतला-दुष्यन्त, कृष्ण-रुक्मिणी, अर्जुन-उर्वशी, सुभद्रा-अभिमन्यु इन सभी के प्रेम संवाद पर कायम थे, न कि पारिवारिक फैसलों पर.

अगर डेटिंग को आधुनिक दौर में मिलने, बातचीत करने, आकर्षण बनाने और प्यार चुनने की प्रक्रिया माना जाए, तो भारत में यह परंपरा हजारों साल से चली आ रही है.गंधर्व विवाह, कामसूत्र, स्वयंवर इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं.

अगर डेटिंग को आधुनिक दौर में मिलने, बातचीत करने, आकर्षण बनाने और प्यार चुनने की प्रक्रिया माना जाए, तो भारत में यह परंपरा हजारों साल से चली आ रही है.गंधर्व विवाह, कामसूत्र, स्वयंवर इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं.

Published at : 25 Nov 2025 05:53 PM (IST)

धर्म फोटो गैलरी

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Video: शादी में ‘हैंगओवर ठीक करने’ के लिए मेहमानों को दी गई IV ड्रिप, वीडियो वायरल, हुई आलोचना

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Viral Shocking Video: शादियों में अक्सर मेहमानों के लिए जूस, कॉफी और हैंगओवर मिटाने के घरेलू नुस्खे रखे जाते हैं, लेकिन इस बार मामला बिल्कुल अलग था. सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने लोगों को चौंका दिया है, जिसमें डेस्टिनेशन वेडिंग में मेहमान सोफों पर आराम से बैठे हुए हैं और उनके हाथों में विटामिन-इन्फ्यूज्ड IV ड्रिप लगी हुई है. वीडियो में दिख रहा है कि पूलसाइड के पास IV बार लगाया गया था, जहां पार्टी के बाद मेहमानों को एनर्जी बूस्ट और हैंगओवर रिलीफ के नाम पर ड्रिप दी जा रही थी.

मेहमानों ने वेडिंग में लगवाई IV ड्रिप

पूरी घटना इंस्टाग्राम पर शेयर की गई रील में कैद है, जिसमें मजाकिया अंदाज में कैप्शन लिखा कि आप एक डेस्टिनेशन वेडिंग में हैं… और नींबू पानी की जगह पूल के पास IV बार लगा है. रील के सामने आते ही सोशल मीडिया पर चर्चा की बाढ़ आ गई. वीडियो में दिखाई दे रहा है कि मेहमान आराम से बैठकर ड्रिप ले रहे हैं और स्टाफ लाइनें लगाकर एक-एक कर IV लगा रहा है.


रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐसा दावा किया जा रहा है कि ये IV ड्रिप्स विटामिंस, मिनरल्स और एंटीऑक्सिडेंट्स से भरी होती हैं, जो हैंगओवर के बाद तुरंत ऊर्जा देने और स्किन को ग्लो देने के लिए मार्केट की जाती हैं. 19 नवंबर को यह शेयर किया गया था, जिसके बाद इस क्लिप को 6 मिलियन से ज्यादा बार देखा जा चुका है.

IV ड्रिप में स्टेराइल, सिंगल-यूज नीडल का किया गया इस्तेमाल

वीडियो पर आलोचनाओं के बढ़ने के बाद पोस्ट करने वाले अकाउंट ने सफाई भी दी. उनका कहना है कि हमारे पास पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट की वैध हेल्थ ट्रेड लाइसेंस है. हर IV ड्रिप ट्रेंड मेडिकल स्टाफ के जरिए लगाई जाती है और स्टेराइल, सिंगल-यूज नीडल का ही इस्तेमाल किया जाता है.

इसके बावजूद रिएक्शनों का सिलसिला जारी रहा. एक यूजर ने लिखा कि कितना भी ग्लैमराइज कर लो, ये कूल नहीं है. शरीर को नुकसान है. दूसरे ने मजाक किया कि अब अगले लेवल पर क्या ओपन सर्जरी. कई लोगों ने शरीर जोखिम और कानूनी पहलू पर भी सवाल उठाए कि ऐसा करना हेल्थ के लिए खतरनाक है किसी मेडिकल बॉडी ने इसे अप्रूव किया है. जबकि कुछ ने शादी की परंपराओं पर भी टिप्पणी की कि विवाह तो पूजा और रस्मों के लिए होते थे. यहां से शराब और अब IV ड्रिप तक कैसे पहुंच गए.