पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में फिर की एयरस्ट्राइक, 9 बच्चों समेत 10 की मौत; आखिर दोनों देशों के ब

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पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है. अफगानिस्तान की तालिबान सरकार की तरफ से कहा गया है कि पाकिस्तानी हमलावर सेना ने एक इलाके में भारी बमबारी की है, जिसमें 10 लोग मारे गए हैं. इनमें 9 बच्चे भी शामिल हैं. अफगान अधिकारियों ने कहा है कि वो इस हमले का सही जवाब देंगे. बताया जा रहा है कि पेशावर में एक सुसाइड बम धमाके के बाद से दोनों देशों में फिर से तनाव पैदा हो गया है. 

अफगानिस्तान के प्रवक्ता ने क्या बताया?

अफगानिस्तान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने बताया, ‘पाकिस्तानी हमलावर सेनाओं ने एक लोकल आम नागरिक के घर पर बमबारी की. नतीजा यह हुआ कि खोस्त प्रांत में नौ बच्चे (पांच लड़के और चार लड़कियां) और एक महिला शहीद हो गए.’

उन्होंने कहा, ‘इस्लामिक अमीरात इस उल्लंघन की कड़ी निंदा करता है और दोहराता है कि अपने एयरस्पेस, इलाके और लोगों की रक्षा करना उसका कानूनी अधिकार है. वह सही समय पर सही जवाब देगा.’

इसके अलावा बताया जा रहा है कि पाकिस्तान की तरफ से कुनार और पक्तिका के बॉर्डर इलाके में हवाई हमले किए गए हैं. इनमें चार और आम लोग घायल हुए हैं. खोस्त के गवर्नर के प्रवक्ता मुस्तगफिर गुरबुज ने कहा, ड्रोन और हवाई जहाजों ने हमले किए. AFP न्यूज एजेंसी के एक रिपोर्ट ने बताया कि वहां के लोग एक टूटे हुए घर का मलबा हटा रहे हं. मारे गए लोगों की कब्रें तैयार कर रहे हैं. 

पेशावर हमले के बाद फिर बड़ा तनाव

बताया जा रहा है कि पाकिस्तान की तरफ से ये कथित हमले पेशावर में पैरामिलिट्री फेडरल कांस्टेबुलरी के हेडक्वार्टर को निशाना बनाकर किए गए, आत्मघाती हमले के बाद हुए हैं. इनमें तीन ऑफिसर मारे गए थे और 11 लोग घायल हुए थे. 

पाकिस्तान के सरकारी चैनल पीटीवी का दावा है कि हमलावर अफगान नागरिक थे. राष्ट्रपति आसिफ जरदारी ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को दोषी ठहराया है. इससे पहले इस्लामा बाद में एक कोर्ट के बाहर एक आत्मघाती हमले में 12 लोग मारे गए थे. 

दोनों देशों में तनाव की वजह बॉर्डर है

दरअसल, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में बॉर्डर को लेकर तनाव बना हुआ है. 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता स्थापित हुई थी. इसके बाद से दोनों देशों में सीमा विवाद जारी है. अक्टूबर में जानलेवा झड़पों के बाद बात और बिगड़ गई. इसमें 70 लोगों की मौत हुई थी. झड़पों का पहला दौर 11-12 अक्टूबर के बीच हुआ था. जब अफगानिस्तान ने पाकिस्तान से बदला लेने के लिए हमले किए थे. यह हमला काबुल में हुए एक हमले के बाद किया गया था. 



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गोल्ड डिगर हैं पलाश मुच्छल? सोशल मीडिया पर वायरल चैट को लेकर यूजर्स ने यूं साधा निशाना

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बॉलीवुड म्यूजिक कंपोजर पलाश मुच्छल और भारतीय महिला क्रिकेट टीम की खिलाड़ी स्मृति मंधाना की शादी को लेकर सोशल मीडिया पर तरह तरह के सवाल खड़े किए जा रहे हैं. एक ओर जहां परिवार स्मृति के पिता की तबीयत खराब होने को लेकर शादी पोस्टपोन होने की बात कर रहा है तो वहीं दूसरी ओर पलाश के कथित स्क्रीनशॉट्स इंटरनेट पर वायरल हो रहे हैं जिन्हें लेकर दावा किया जा रहा है कि दोनों के रिश्ते में चीटिंग को लेकर अनबन हुई है. ऐसे में यूजर्स अब वायरल चैट्स को पढ़कर पलाश को गोल्ड डिगर तक कह रहे हैं.

स्मृति मंधाना और पलाश मुच्छल की टल गई शादी

आपको बता दें कि इंडियन वुमेन क्रिकेटर स्मृति मंधाना और म्यूजिक कंपोजर पलाश मुच्छल शादी के बंधन में बंधने वाले थे. शादी के फंक्शन भी शुरू हो गए थे. हल्दी सेरेमनी हो गई थी और उसके बाद संगीत सेरेमनी भी हो गई थी. ये कपल 23 नवंबर को शादी के बंधन में बंधने वाला था मगर एक दिन पहले स्मृति के पिता की तबीयत खराब होने की वजह से शादी को पोस्टपोन कर दिया गया था. शादी पोस्टपोन होने के बाद लोग इस वजह से चौंक रहे हैं क्योंकि स्मृति ने शादी के सारे पोस्ट अपने इंस्टाग्राम से डिलीट कर दिए हैं. जिसके बाद से चीटिंग के रूमर्स आ रहे हैं.

Someone on Insta posted ss of Palash DMing her.
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अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही विवादित चैट

लेकिन इन सभी के बीच एक कंट्रोवर्सी ये भी उठ रही है कि पलाश की दूसरी लड़कियो के साथ भी दोस्ती थी जिनके चैट्स अब इंटरनेट पर वायरल हैं. आपको बता दें कि एक इंस्टाग्राम यूजर मैरी डी कोस्टा ने पलाश के साथ चैट के स्क्रीनशॉर्ट शेयर किए हैं. उन्होंने कहा है कि ये चैट उनकी पलाश के साथ है. जिस अकाउंट से स्क्रीनशॉर्ट शेयर हुए हैं उसे डिएक्टिवेट कर दिया गया है लेकिन ये स्क्रीनशॉर्ट अभी भी वायरल हो रहे हैं. इस चैट में पलाश सामने वाली लड़की को स्विमिंग के लिए मनाते दिखाई दे रहे हैं. लेकिन जब लड़की पलाश से प्यार को लेकर बात करती है तो पलाश उस बातचीत को टाल देते हैं.

गोल्ड डिगर हैं पलाश मुच्छल? सोशल मीडिया पर वायरल चैट को लेकर यूजर्स ने यूं साधा निशाना

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यूजर्स बोले गोल्ड डिगर तो नहीं है लड़का?

सोशल मीडिया पर इस चैट को मैरी डी कोस्टा ने शेयर किया है जिसे अब तक लाखों लोगों ने देखा है तो वहीं कई लोगों ने इसे लाइक भी किया है. ऐसे में सोशल मीडिया यूजर्स अब इन वायरल चैट्स को लेकर पलाश को गोल्ड डिगर तक कह रहे हैं. एक यूजर ने लिखा…अच्छी लड़की हाथ आ रही थी अब वो भी गई. एक और यूजर ने लिखा…भारत की बेटी गोल्ड डिगर के चक्कर में पड़ गई थी. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा…शादी टलने की असली वजह सामने आनी चाहिए.

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गुरु नानक देव जी की प्रेरक कहानी, जब गांव वालों ने समझा ‘दुख’ का असली मतलब!

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Guru Nanak Dev Ji Motivational Stories: सिख धर्म के संस्थापक और पहले गुरु, गुरु नानक देव जी थे. आज हम आपको उनसे जुड़ा एक रोचक किस्सा सुनाने जा रहे हैं, जो आपके सोचने समझने के तरीके को बदलकर रख देगा.

एक बार की बात है, जब एक सुबग गुरु नानक देव जी एक गांव में पहुंचे, जहां पहुंचने के बाद उन्होंने देखा कि, गांव का वातावरण शांत था. 

गांव का हर व्यक्ति किसी न किसी समस्या के कारण मन से हारा हुआ था. कोई गुरु नानक देव जी को गरीबी की शिकायत कर रहा था, कोई अपने पारिवारिक रिश्तों को लेकर तनाव में था, कोई बीमारी की समस्या से तो कोई किसी न किसी कमी के कारण अपनी जिंदगी को बेकार बता रहा है.

गांव के सभी लोगों को अपना जीवन काफी दुखदायी लगता था.

गुरु नानक देव जी सभी की समस्याओं को सुन रहे थे और शांति से मुस्कुराए, क्योंकि उन्हें किसी के जीवन में समस्या नहीं, बल्कि नकारात्मक मानसिकता नजर आ रही थी. उन्होंने गांववालों से कहा कि, आज हम आप सभी से एक अभ्यास कराएंगे. हर कोई अपने जीवन की सबसे बड़ी समस्या को कागज पर लिखाकर मेरे पास ले आए.

गांव के सभी लोगों उनकी बातों से हैरान हुए लेकिन उन्होंने नानक साहब की बात मान लीं.
कुछ ही देर बाद उनके पास सौ से अधिक कागज इकट्ठा हो गए. हर कागज पर दुख, दर्द, डर, अपमान, आर्थिक परेशानी,बीमारी, अकेलापन, पारिवारिक समस्या और मन की जड़ता से जुड़ी बातें लिखी हुई थी.

अब गुरु नानक ने कहा,
सभी लोग अपने कागज इस कमरे में रख दो. फिर अंदर आकर अपनी पर्ची छोड़कर दूसरों की पर्ची को पढ़ों.

सभी गांववाले कमरे के अंदर गए. 
उन्होंने दूसरों के कागज को पढ़ना शुरू किया.

पहला व्यक्ति जो कर्ज की समस्या से जूझ रहा था और उसे ही सबसे बड़ी विपत्ति मानता था, जब उसने दूसरे के बेटे की मौत, लाइलाज बीमारी और घरेलू हिंसा के बारे में पढ़ा, तो काफी हैरत में पड़ गया. उसे लगा मेरी समस्या इससे तो काफी छोटी है.

दूसरा आदमी, जो अपने व्यापार में घाटे को जिंदगी की सबसे बड़ी हार मान रहा था, जब उसे मालूम हुआ कि, एक परिवार बीते तीन सालों से बिना भोजन और कपड़ों के संघर्ष कर रहा है, उसका दिल सिहर गया.

एक-एक करके सभी लोगों ने एक दूसरे के दुख पढ़ें और हर किसी की आंखें खुलती चली गईं. हर किसी को यही लगा कि, भगवान ने उनके हिस्से में चाहे कितनी ही कठिनाई क्यों न दी हो, पर दूसरों की तुलना में यह कम है.

आखिर में गुरु नानक देव जी बोलें-
दुनिया में ऐसा कोई भी नहीं है, जिसके पास दुख न हो, लेकिन तुम अपनी चिंता को इसलिए बड़ा मानते हो क्योंकि तुम्हें बाकी लोगों के जीवन के दुखों का ज्ञात नहीं है. दूसरों का दुख तुम्हारे दुख की तुलना में काफी कम है.

उस दिन गांव वालों ने सीखा-
समस्याएं बड़ी नहीं, बस नजरिए का फर्क है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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फोन खरीदते ही कर लें ये काम, सालों तक नए जैसा ही रहेगा आपका मोबाइल

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पिछले कुछ समय से महंगे फोन की डिमांड बढ़ी है. अब लोग एक बार पैसे लगाकर महंगा फोन लेते हैं और उसे पहले से ज्यादा समय तक यूज करते हैं. ऐसे में फोन को नए जैसा बनाए रखना जरूरी हो जाता है ताकि इसकी परफॉर्मेंस खराब न हो. इसके लिए आपको फोन खरीदते ही कुछ काम करने पड़ेंगे, जिससे फोन की परफॉर्मेंस लंबे समय तक नए जैसी बनी रहेगी.

अनवांंटेड फीचर्स को कर दें डिसेबल

नए फोन में कंपनियां कई फीचर्स और एनिमेशन देती हैं. इनमें से हर किसी यूजर को हर फीचर और एनिमेशन की जरूरत नहीं होती. इसलिए अपनी जरूरत के फीचर्स और एनिमेशन को छोड़कर बाकी सब को डिसेबल कर दें. इससे फोन की प्रोसेसिंग पावर और बैटरी बचेगी.

अनवांटेड ऐप्स की भी करें छुट्टी

अनवांटेड फीचर्स की तरह फोन से अनवांटेड ऐप्स की भी छुट्टी कर दें. नए फोन में कई ऐसी ऐप्स आती हैं, जिन्हें आपको यूज करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इसी तरह अगर फोन थोड़ा पुराना हो गया है तो उन ऐप्स को भी हटा दें, जिन्हें आपने बाद में इंस्टॉल किया था, लेकिन अब यूज नहीं कर रहे. इससे आपके डेटा भी उन ऐप्स के पास नहीं जाएगा और स्टोरेज स्पेस भी बचा रहेगा.

सॉफ्टवेयर को करते रहें अपडेट

अपने फोन के सॉफ्टवेयर और ऐप्स को हमेशा अपडेटेड रखें. इस तरीके से आप सिक्योरिटी बग्स से भी बचे रहेंगे और आपको नए-नए फीचर्स भी मिलते रहेंगे. आजकल गूगल जैसी कंपनियां अपने फोन पर 7 साल तक सॉफ्टेयर अपग्रेड दे रही हैं, जिससे सालों-साल फोन को नए फीचर्स मिलते रहते हैं. 

नुकसान से बचाएंगे स्क्रीन गार्ड और कवर

कई लोगों को अपने फोन पर स्क्रीन गार्ड और कवर लगाना पसंद नहीं होता. उनका मानना है कि इससे फोन का लुक छिप जाता है या फोन मोटा लगने लगता है. उनकी इस बात में दम है, लेकिन स्क्रीन गार्ड और कवर फोन को गिरने पर होने वाले नुकसान से बचा सकते हैं. इसके अलावा ये फोन की चमक को भी नई जैसी रखने में मदद करते हैं.

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Video: कहां से आते हैं ऐसे छपरी आइडिया? झांकी में लड़की को बड़ी बॉल पर चढ़ाया, धड़ाम से गिरी

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Viral Funny Video: पहले के टाइम में जागरण का मतलब शांति, भजन और साथ ही ‘जय माता दी’ के जयकारे से जागरण की शुरुआत होती थी. लोग बड़ी ही भक्ति के साथ जागरण में शामिल होने आते थे, लेकिन अब सब कुछ सिर्फ एक मनोरंजन का जरिया बन गया है. जागरण में झांकी देखना किसे पसंद नहीं होता है? लेकिन आजकल तो झांकी के नाम पर ऐसा मनोरंजन होने लगा है कि लोग सोचने पर मजबूर हो गए है कि हम सही में जागरण में बैठे हैं? हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें झांकी के डांस के दौरान कुछ ऐसा होता है, जिसे देखकर वहां मौजूद सभी लोग जोर-जोर से हंसने लगते हैं.

बॉल पर चढ़ते ही गिर गई लड़की

वीडियो में देखा जा सकता है कि जागरण हो रहा है. पीछे मां दुर्गा की मूर्ति रखी नजर आ रही है. काफी सारे लोग झांकी का डांस देखने नीचे बैठे नजर आ रहे हैं. इस दौरान एक लड़की, जो राधा बनी हुई है. वीडियो में देख सकते हैं कि एक बॉल नजर आ रही है, जिसके अंदर एक लड़का, जो कृष्णा बना हुआ नजर आ रहा है.

वह बॉल के अंदर दिखाई दे रहा है और राधा बनी लड़की उस पर बॉल के ऊपर चढ़ने की कोशिश करती है. वह बॉल पर चढ़ती है और बैलेंस बनाने की कोशिश करती है, लेकिन अचानक ही उसका बैलेंस बिगड़ जाता है और वह बुरी तरह नीचे गिर जाती है.

वीडियो देख यूजर्स ने लिए मजे

जागरण में मौजूद लोग हंसने लगते हैं और साथ ही कुछ लोग तो इसका वीडियो मोबाइल में रिकॉर्ड करने लगते हैं. इस वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों के बड़े ही मजेदार कमेंट्स सामने आने लगे.

कुछ लोगों ने कहा कि डांस के बीच बॉल पर चढ़ने की क्या जरूरत थी? तो वहीं कुछ लोगों ने कहा कि पता नहीं लोग जागरण के नाम पर क्या-क्या कर रहे हैं. वहीं कुछ ने कहा कि ऐसी झांकी तो पहली बार देखी. लोगों के लगातार मजेदार और फनी कमेंट्स वीडियो पर देखने को मिल रहे हैं.


धर्मेंद्र ने इस शख्स के कहने पर ली थी राजनीति में एंट्री, फिर छात्रों के लिए किया था ये खास काम

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दो दिन पहले ही दुनिया को अलविदा कहने वाले चर्चित फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र के राजनीति में कदम रखने, लोकसभा का चुनाव लड़ने और फिर सियासत से तौबा करने के बारे में तो सभी को पता है, लेकिन किस राजनेता के ऑफर और दोस्त के दबाव डालने पर वह बीजेपी में शामिल हुए और लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए राजी हुए, इस बारे में बहुत कम लोगों को ही जानकारी होगी. धर्मेंद्र को चुनाव लड़ने का ऑफर देने वाली राजनेता ने इस बारे में फैसला 6 महीने पहले साल 2003 में तभी कर लिया था, जब वह अपने एक करीबी दोस्त की पत्नी के चुनाव प्रचार के लिए राजस्थान आए हुए थे. धर्मेंद्र के प्रचार करने से ही दोस्त की पत्नी विधानसभा में फंसे हुए चुनाव में भी जीत हासिल करने में कामयाब हुई थी.

कैसे हुई थी धर्मेंद्र की राजनीति में एंट्री?

दरअसल धर्मेंद्र साल 1977 में एक फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में जयपुर आए हुए थे. यहां उनकी मुलाकात शहर के बड़े बिजनेसमैन और सियासी परिवार से जुड़े हुए विजय पूनिया से हुई. यह मुलाकात इतनी गहरी दोस्ती में बदल गई कि धर्मेंद्र और विजय पूनिया में घरेलू संबंध कायम हो गए. विजय पूनिया से दोस्ती का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि धर्मेंद्र उनकी बेटी की शादी में न सिर्फ शामिल हुए बल्कि कन्यादान खुद अपने हाथों किया और साथ ही विदाई के वक्त भावुक होकर रो भी पड़े.धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की बेटियां अक्सर विजय पूनिया के घर ही रहती थी. धर्मेंद्र जब भी जयपुर आते विजय पूनिया के बंगले पर ही रुकते थे और वह भी मुंबई में उन्हीं के यहां जाते थे.

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विजय पूनिया की पत्नी के लिए एक्टर ने किया प्रचार

राजस्थान में साल 2003 में हुए विधानसभा चुनाव में विजय पूनिया की पत्नी ऊषा नागौर जिले से बीजेपी के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ रही थीं. चुनाव फंसा हुआ था. ऐसे में विजय पूनिया को अपने दोस्त धर्मेंद्र की याद आई. उन्होंने धर्मेंद्र से प्रचार करने की अपील की तो वह तुरंत तैयार हो गए. धर्मेंद्र ने यहां शोले फिल्म का डायलॉग सुनाते हुए जो माहौल बनाया, उससे ऊषा पूनिया चुनाव जीत गई.

वसुंधरा राजे के कहने पर बीजेपी में शामिल हुए थे एक्टर

विजय पूनिया की पत्नी ऊषा के धर्मेंद्र की वजह से चुनाव जीतने की कहानी 2004 में तत्कालीन सीएम वसुंधरा राजे को पता थी. उन्हें धर्मेंद्र और विजय पूनिया की दोस्ती के बारे में भी जानकारी थी. बीकानेर की लोकसभा सीट बीजेपी के लिए हमेशा चुनौती होती थी. वहां उसका प्रदर्शन आमतौर पर बहुत अच्छा नहीं होता था.

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साल 2004 के लोकसभा चुनाव के वक्त वसुंधरा राजे ने विजय पूनिया को बुलाकर धर्मेंद्र को चुनाव लड़ने के लिए तैयार करने को कहा. विजय पूनिया ने धर्मेंद्र से बात की तो उन्होंने साफ मना कर दिया. बाद में विजय पूनिया ने अपने रिश्तों की दुहाई देकर उनसे वसुंधरा राजे से दिल्ली में मुलाकात करने को कहा है. वसुंधरा राजे के कहने पर धर्मेंद्र न सिर्फ बीजेपी में शामिल हुए, बल्कि चुनाव लड़ने को भी तैयार हो गए.

मुश्किल हालातों में सांसद बने थे धर्मेंद्र

विजय पूनिया के मुताबिक धर्मेंद्र जब बीकानेर से चुनाव लड़ रहे थे तो बीजेपी के ही तमाम लोग उनके साथ नहीं दे रहे थे. मुश्किल हालात में वह सांसद चुने गए. उन्होंने चुनाव में कांग्रेस के जिस दिग्गज नेता रामेश्वर डूडी को हराया था, बाद में उनसे मुलाकात भी की थी. चुनाव प्रचार के दौरान सनी देओल की सभा ने धर्मेंद्र के पक्ष में एकदम माहौल बना दिया था. सांसद चुने जाने के बाद धर्मेंद्र कुछ दिनों तो बहुत एक्टिव रहे.

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धर्मेंद्र ने कम करवाई थी यूनिवर्सिटी की फीस

बीकानेर के लिए बहुत कुछ करना चाहते थे. काफी कुछ उन्होंने किया भी लेकिन राजनीति का माहिर खिलाड़ी नहीं होने की वजह से उनके काम का क्रेडिट दूसरे लोग ले जाते थे. धर्मेंद्र को यह बात अखरती थी. धीरे-धीरे उन्होंने दूरियां बनानी शुरू कर दीं. सियासत उनको रास नहीं आई. हालांकि वह बीकानेर के बाहर के लोगों के भी काम करते थे. राजस्थान की तत्कालीन गवर्नर प्रतिभा देवी सिंह पाटिल से बातचीत कर उन्होंने यूनिवर्सिटी की फीस कम कराई थी और छात्रों के आंदोलन को खत्म कराया था.

विजय पूनिया के मुताबिक वो बेहद मिलनसार स्वभाव के इंसान थे. बड़ा स्टार होने के बावजूद वह बेहद सादगी के साथ रहते थे और लोगों से बड़ा अपनापन रखते थे. सियासत से उनका मोह इस कदर भंग हुआ था कि मथुरा में पत्नी हेमा मालिनी के चुनाव प्रचार में भी वह आखिरी वक्त ही गए थे.

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दुबई में ट्रक ड्राइवर को कितनी मिलती है सैलरी, वहां नौकरी करने जा रहे तो जान लें ये नियम

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दुबई में काम करने का सपना कई लोगों के मन में होता है. खासकर ट्रक ड्राइवर की नौकरी वहां काफी लोकप्रिय है, क्योंकि सैलरी अच्छी मिलती है और काम का सिस्टम भी काफी प्रोफेशनल है. अगर आप भी दुबई में ट्रक ड्राइवर की नौकरी करने की सोच रहे हैं, तो पहले यह जानना जरूरी है कि वहां कितनी कमाई होती है, कौन-कौन सी सुविधाएं मिलती हैं और कौन से नियम मानना जरूरी है.

रिपोर्ट्स के अनुसार, दुबई में ट्रक ड्राइवर की मासिक सैलरी AED 2700 से AED 6000 के बीच होती है. भारतीय रुपए में यह रकम लगभग 75,000 से 1.65 लाख रुपये तक बैठती है. शुरुआती अनुभव वाले ड्राइवरों को आमतौर पर कम सैलरी मिलती है, लेकिन जैसे-जैसे अनुभव बढ़ता है और ड्राइवर भारी व बड़े वाहन चलाने लगता है, उसकी कमाई भी तेजी से बढ़ जाती है.

दुबई में कंटेनर ट्रक, ट्रेलर, टैंकर, ऑयल टैंकर या भारी लोड वाले ट्रकों के ड्राइवरों की सैलरी और ज्यादा होती है. ऐसे ड्राइवरों को AED 5000 से AED 8000, यानी 1.10 लाख से 1.80 लाख रुपये तक मिल सकते हैं. कई कंपनियां ड्राइवरों को बेसिक सैलरी के साथ ओवरटाइम, रहने-खाने की सुविधा, मेडिकल इंश्योरेंस, टिकट भत्ता, और कंपनी की तरफ से रूम जैसी सुविधाएं भी देती हैं.

सैलरी क्यों होती है ज्यादा? जानें वजह

दुबई में ट्रांसपोर्ट सेक्टर लगातार बढ़ रहा है. कंपनियां कुशल ड्राइवरों को ज्यादा वेतन देती हैं. ओवरटाइम का भुगतान सही तरीके से होता है. सुरक्षा मानकों के कारण ड्राइवर को प्रशिक्षित होना जरूरी है.

दुबई में ट्रक ड्राइविंग के नियम

  • दुबई में हेवी ट्रक लाइसेंस लेने के लिए आपकी उम्र कम से कम 20 साल होनी चाहिए.
  • जो भी व्यक्ति ट्रक चलाना चाहता है, उसे पहले किसी मान्यता प्राप्त ड्राइविंग इंस्टीट्यूट से ट्रेनिंग कोर्स पूरा करना होता है. इसमें भारी वाहन चलाने की तकनीक, सुरक्षा
  • नियम और रोड टेस्ट शामिल होते हैं.
  • दुबई में ट्रक चलाते समय वाहन के आगे कम से कम 6 सेकंड की दूरी रखना अनिवार्य है. इस नियम का सख्ती से पालन न करने पर भारी जुर्माना लग सकता है.
  • सभी ड्राइवरों को स्पीड लिमिट का पालन करना जरूरी है. दुबई में हर सड़क पर अलग स्पीड लिमिट होती है और ट्रक के लिए विशेष सीमा तय हैं.
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खैबर पख्तूनख्वा में TTP के 22 आतंकियों को मार गिराया, पाकिस्तान की मुनीर सेना का बड़ा दावा

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पाकिस्तान के उत्तर पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक खुफिया सूचना के आधार पर चलाए गए अभियान में सुरक्षा बलों ने प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के 22 आतंकवादियों को मार गिराया है. सेना ने मंगलवार को यह जानकारी दी. पाकिस्तानी सेना की मीडिया इकाई ‘इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस’ (आईएसपीआर) द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि सुरक्षा बलों ने सोमवार को उत्तर वजीरिस्तान की सीमा से लगते बन्नू जिले में अभियान चलाया, जहां आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी.

पाकिस्तानी सेना ने क्या बताया?

बयान में कहा गया है, ‘‘अभियान के दौरान सैनिकों ने ख्वारिजों के ठिकाने को निशाना बनाया और भीषण मुठभेड़ के बाद 22 ख्वारिज मारे गए.’’

‘फितना अल-ख्वारिज’ शब्द का इस्तेमाल पाकिस्तान सरकार टीटीपी के आतंकवादियों के लिए करती है.

आईएसपीआर ने बताया कि क्षेत्र में सभी आतंकियों का खात्मा सुनिश्चित करने के लिए तलाश अभियान जारी है.

आंतकवाद के खतरे को कम करने चला रहे ऑपरेशन 

सेना ने कहा कि देश से आतंकवाद के खतरे को खत्म करने के लिए सुरक्षा बलों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा आतंकवाद विरोधी अभियान पूरी ताकत से जारी रहेगा. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस सफल अभियान के लिए सुरक्षा बलों की सराहना की और कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में वे ‘‘बड़ी सफलताएं’’ हासिल कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘पूरी कौम आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में पाकिस्तान की सेना के साथ खड़ी है. हम देश से हर तरह के आतंकवाद को पूरी तरह खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.’’

TTP ने संघर्ष विराम समझौते को किया था रद्द

टीटीपी ने नवंबर 2022 में सरकार के साथ हुए संघर्ष विराम समझौते को रद्द कर दिया था. इसके बाद से पाकिस्तान में, विशेष रूप से खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों में, आतंकवादी गतिविधियों में वृद्धि देखी गई है. आतंकवादी घटनाओं की शृंखला में नवीनतम घटना सोमवार सुबह पेशावर में ‘फेडरल कांस्टेबुलरी’ (एफसी) मुख्यालय पर हुआ आत्मघाती हमला है, जिसमें एफसी के तीन जवान मारे गए और 12 घायल हो गए.

खैबर पख्तूनख्वा के पुलिस महानिरीक्षक जुल्फिकार हमीद ने मंगलवार को कहा कि अधिकारियों ने उस स्थान की पहचान कर ली है जहां आतंकवादियों ने आत्मघाती हमले से पहले रात बिताई थी.

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शीतकाल के लिए बंद हुआ बद्रीनाथ का कपाट, 51 लाख श्रद्धालुओं ने बनाए नए रिकॉर्ड

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बदरीनाथ मंदिर का कपाट शीतकाल के लिए मंगलवार दोपहर 2:56 बजे  बंद कर दिए गए. बड़ी संख्या में मौजूद भक्तों के बीच रावल अमरनाथ नंबूदरी ने सभी पारंपरिक विधियां पूरी कीं और मंदिर के द्वार औपचारिक रूप से बंद किए गए. इस दौरान पूरे धाम में जय बदरीविशाल की गूंज सुनाई देती रही.

बदरीनाथ मंदिर का कपाट शीतकाल के लिए मंगलवार दोपहर 2:56 बजे बंद कर दिए गए. बड़ी संख्या में मौजूद भक्तों के बीच रावल अमरनाथ नंबूदरी ने सभी पारंपरिक विधियां पूरी कीं और मंदिर के द्वार औपचारिक रूप से बंद किए गए. इस दौरान पूरे धाम में जय बदरीविशाल की गूंज सुनाई देती रही.

बदरीनाथ के कपाट बंद करने से पहले माता लक्ष्मी को रावल द्वारा मंदिर के गर्भ गृह में स्थापित किया गया. इसके लिए रावल ने स्त्री भेष धारण किया. लक्ष्मी की सहेली का रूप धारण कर रावल की ओर से लक्ष्मी मां को गर्भ गृह में नारायण भगवान के साथ स्थापित कर उन्हें घृतकंबल (घी से लिपटा एक खास कंबल) से ओढ़ाया गया.

बदरीनाथ के कपाट बंद करने से पहले माता लक्ष्मी को रावल द्वारा मंदिर के गर्भ गृह में स्थापित किया गया. इसके लिए रावल ने स्त्री भेष धारण किया. लक्ष्मी की सहेली का रूप धारण कर रावल की ओर से लक्ष्मी मां को गर्भ गृह में नारायण भगवान के साथ स्थापित कर उन्हें घृतकंबल (घी से लिपटा एक खास कंबल) से ओढ़ाया गया.

सोमवार को माता लक्ष्मी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई. कढ़ाई भोग' उत्सव कपाट बंद करने की प्रक्रिया का यह एक महत्वपूर्ण चरण होता है, जिसमें माता लक्ष्मी को भगवान नारायण के साथ गर्भगृह में विराजमान होने का निमंत्रण देने के लिए विशेष भोग अर्पित किया जाता है.

सोमवार को माता लक्ष्मी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई. कढ़ाई भोग’ उत्सव कपाट बंद करने की प्रक्रिया का यह एक महत्वपूर्ण चरण होता है, जिसमें माता लक्ष्मी को भगवान नारायण के साथ गर्भगृह में विराजमान होने का निमंत्रण देने के लिए विशेष भोग अर्पित किया जाता है.

इस अवसर को पंच पूजा के चौथे दिन के रूप में भी मनाया जाता है, जो माता लक्ष्मी को समर्पित होता है. इसी चरण के बाद मंदिर के कपाट बंद करने की अंतिम तैयारियाँ शुरू की जाती हैं.

इस अवसर को पंच पूजा के चौथे दिन के रूप में भी मनाया जाता है, जो माता लक्ष्मी को समर्पित होता है. इसी चरण के बाद मंदिर के कपाट बंद करने की अंतिम तैयारियाँ शुरू की जाती हैं.

कपाट बंद होने से पहले मंदिर को 12 कुंतल फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था. परंपरा के अनुसार उद्धव और कुबेर की मूर्तियों को गर्भगृह से बाहर लाया गया, जबकि देवी लक्ष्मी को गर्भगृह में स्थापित किया गया.

कपाट बंद होने से पहले मंदिर को 12 कुंतल फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था. परंपरा के अनुसार उद्धव और कुबेर की मूर्तियों को गर्भगृह से बाहर लाया गया, जबकि देवी लक्ष्मी को गर्भगृह में स्थापित किया गया.

21 नवंबर से बदरीनाथ धाम में पंच पूजाओं की शुरुआत हो गई थी. गणेश मंदिर, आदि केदारेश्वर और आदि गुरु शंकराचार्य गद्दी स्थल के कपाट बंद होने के साथ ही वहां वेद ऋचाओं का पाठ भी समाप्त हो गया.

21 नवंबर से बदरीनाथ धाम में पंच पूजाओं की शुरुआत हो गई थी. गणेश मंदिर, आदि केदारेश्वर और आदि गुरु शंकराचार्य गद्दी स्थल के कपाट बंद होने के साथ ही वहां वेद ऋचाओं का पाठ भी समाप्त हो गया.

कपाट बंद होते ही आज से चारधाम यात्रा छह महीनों के लिए स्थगित हो गई है. इस बार यात्रा में आए श्रद्धालुओं ने नया रिकॉर्ड बनाया है. चारों धामों में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 51 लाख तक पहुँच गई. पिछले वर्ष यह आंकड़ा 48 लाख था.

कपाट बंद होते ही आज से चारधाम यात्रा छह महीनों के लिए स्थगित हो गई है. इस बार यात्रा में आए श्रद्धालुओं ने नया रिकॉर्ड बनाया है. चारों धामों में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 51 लाख तक पहुँच गई. पिछले वर्ष यह आंकड़ा 48 लाख था.

Published at : 25 Nov 2025 09:28 PM (IST)

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लगता है भाई ने जेसीबी कोरोना ऑनलाइन सीखी है! मजदूरों के साथ गहरे गड्ढे में पलटी मशीन- वीडियो

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सोशल मीडिया पर ऐसे-ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं जिन्हें देखकर लोग सिर्फ दंग ही नहीं, बल्कि हैरान और परेशान भी रह जाते हैं. ऐसे ही एक वीडियो ने इन दिनों इंटरनेट पर हलचल मचा दी है. वीडियो सड़क किनारे हुए एक खतरनाक हादसे का है, जिसे देखकर साफ पता चलता है कि लापरवाही किस हद तक जानलेवा साबित हो सकती है. काम के दौरान सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए कुछ मजदूर जेसीबी की आगे वाली ट्रे में चढ़े हुए थे और मशीन उन्हें ऊपर खंभे की ऊंचाई तक ले जा रही थी. ऊपर से देखने पर यह सीन किसी जुगाड़ की परफेक्ट मिसाल लगता है, लेकिन अगले ही पल जो हुआ उसने लोगों को सन्न कर दिया.

जेसीबी पर खड़े होकर पोल कर रहे थे ठीक

सड़क किनारे बिजली या नेटवर्क के पोल पर काम करते हुए मजदूरों को अक्सर लोग देखते हैं, लेकिन इस बार मामला अलग था. वीडियो में दिख रहा है कि एक जेसीबी मशीन सड़क के एक किनारे खड़ी है. उसकी आगे वाली ट्रे (बकेट) में कुछ मजदूर चढ़े हुए हैं जिन्हें ऊपर खंभे की ऊंचाई पर ले जाया जा रहा है. मजदूर ऊपर एक तकनीकी समस्या ठीक करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन जिस तरह से यह काम किया जा रहा था वह सुरक्षा के हर नियम का मजाक बनाता हुआ नजर आया.

अचानक पलट गई जेसीबी और फिर…

जेसीबी का बकेट आमतौर पर मिट्टी उठाने, खुदाई करने या सामान ढोने के लिए इस्तेमाल होता है, न कि लोगों को हवा में ऊपर उठाने के लिए. लेकिन वीडियो में मजदूर उसी पर चढ़कर ऊंचाई पर काम कर रहे थे. ऊपर से यह पूरा सीन लापरवाही की मिसाल लग रहा था. कुछ सेकंड तक सब ठीक चलता है. लेकिन तभी अचानक जेसीबी की बैलेंसिंग बिगड़ जाती है. मशीन धीरे-धीरे एक तरफ झुकने लगती है और इससे पहले कि ड्राइवर कुछ समझ पाता, पूरी जेसीबी जोरदार आवाज के साथ सड़क किनारे पड़े गड्ढे में पलट जाती है. बकेट में खड़े मजदूर हवा में उछलते नजर आते हैं और आसपास खड़े लोग घबराकर उनकी तरफ दौड़ते हैं.

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यूजर्स ने लिए मजे, बोले कोरोना में सीखा था क्या

वीडियो को @MdZeyaullah20 नाम के एक्स अकाउंट से शेयर किया गया है जिसे अब तक लाखों लोगों ने देखा है तो वहीं कई लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है. ऐसे में सोशल मीडिया यूजर्स वीडियो को लेकर तरह तरह के रिएक्शन दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा…लगता है भाई ने ऑनलाइन मशीन चलाना सीखा है. एक और यूजर ने लिखा…भाई कोरोना में मशीन चलाना सीखा था क्या. कहीं रील बनाने के लिए तो जेसीबी नहीं गिरा दी.

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