अब तो हद हो गई! चलती ट्रेन की छत पर पिकनिक मनाते दिखे लोग- वीडियो देख घूमा यूजर्स का माथा

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भारत हो या कोई और देश हमेशा से रेलवे सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं. लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक ताजा वीडियो तो सुरक्षा व्यवस्था का मजाक उड़ाता हुआ दिखाई देता है. वीडियो में एक तेज रफ्तार ट्रेन अपनी पटरी पर दौड़ रही है और उसकी छत पर यात्री ऐसे आराम फरमा रहे हैं जैसे किसी पार्क या मैदान में पिकनिक मना रहे हों. हालांकि वीडियो बांग्लादेश रेलवे का बताया जा रहा है.

ट्रेन की छत पर बैठ पिकनिक मनाते दिखे लोग

दरअसल, वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि ट्रेन की छत पर बैठे लोग न तो किसी खतरे को महसूस कर रहे हैं और न ही किसी तरह की जल्दबाजी में दिख रहे हैं. बच्चे छत पर इधर-उधर टहलते दिखाई देते हैं. एक भेल-पूरी वाला छत पर बैठे यात्रियों के बीच ठेले जैसी सर्विस देता नजर आता है. लोग उससे आराम से भेलपूरी लेकर खाते दिख रहे हैं. मानो यह चलती ट्रेन न होकर किसी खुले मैदान का पिकनिक स्पॉट हो.

बांग्लादेश से अक्सर सामने आते रहते हैं ऐसे वीडियो

ये पहला वीडियो नहीं है जिसमें रेलवे सुरक्षा और स्वंय सुरक्षा का इस तरह से मजाक उड़ाया गया हो. इससे पहले भी बांग्लादेश रेलवे के ऐसे कई सारे वीडियो सामने आए हैं जिन्हें देखकर लोगों के मुंह खुले रह गए हैं. लोग ट्रेन की छतों, लोको में और डिब्बो के बीच वाले गैप में बैठकर यात्रा करते दिखाई दिए हैं. हालांकि एबीपी इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता है. खबर केवल सोशल मीडिया दावों पर आधारित लिखी गई है.

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यूजर्स ने उठाए सवाल

सोशल मीडिया पर वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और लोग रेलवे प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठा रहे हैं. कमेंट्स में लोग लिख रहे हैं कि “ये लोग अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं” जबकि कुछ इसे उपमहाद्वीप की ‘जुगाड़ संस्कृति’ बता रहे हैं. हालांकि इस तरह छत पर यात्रा करना किसी भी तरह से ठीक नहीं है. इससे जान जाने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है और किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता है.

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कमबैक हो तो ऋषभ पंत जैसा, वनडे में वापसी पर बनेंगे कप्तान; दक्षिण अफ्रीका ODI सीरीज पर अपडेट

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भारतीय क्रिकेट टीम के युवा कप्तान शुभमन गिल चोटिल हैं. गिल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ गुवाहाटी में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट में टीम इंडिया का हिस्सा नहीं हैं. उनकी जगह दूसरे टेस्ट में ऋषभ पंत कप्तानी कर रहे हैं. अब खबर आई है कि ऋषभ पंत दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज में भी टीम इंडिया की कमान संभाल सकते हैं. 

ऋषभ पंत अगस्त 2024 से वनडे टीम से बाहर चल रहे हैं. पर अब खबर आई है कि वह न सिर्फ वनडे टीम में वापसी करने जा रहे हैं, बल्कि उनको कप्तान भी बनाया जाएगा. द वीक की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय टीम मैनेजमेंट शुभमन गिल की वापसी को लेकर जल्दबाजी नहीं करना चाहता है. गिल की गर्दन में इंजरी है. वह दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ कोलकाता में खेले गए पहले टेस्ट की पहली पारी में चोटिल हुए थे. 

पंत ने आखिरी बार अगस्त 2024 में श्रीलंका के खिलाफ वनडे मैच खेला था. तब से उन्हें 50 ओवर और टी20 इंटरनेशनल फॉर्मेट से बाहर रखा गया है, और केएल राहुल को वनडे में विकेटकीपर बल्लेबाज के रूप में पहली पसंद के रूप में चुना गया है. इससे पहले एक रिपोर्ट आई थी, जिसमें कहा गया था कि केएल राहुल भी गिल और अय्यर के न रहने पर कप्तान बनाए जा सकते हैं.

श्रेयस अय्यर भी नहीं खेलेंगे दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि श्रेयस अय्यर वनडे में टीम इंडिया के उपकप्तान बनाए गए थे. ऐसे में गिल की गैरमौजूदगी में अय्यर ही कप्तान बनते, लेकिन वह चोटिल हैं. श्रेयस अय्यर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज में नहीं खेल पाएंगे. इसी कारण पंत को कप्तानी सौंपे जाने की खबर आई है. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज में रोहित शर्मा और केएल राहुल जैसे सीनियर खिलाड़ी भी मौजूद रहेंगे. 

भारत-दक्षिण अफ्रीका वनडे सीरीज का शेड्यूल 

पहला वनडे मैच- 30 नवंबर- रांची 
दूसरा वनडे मैच- 3 दिसंबर- रायपुर
तीसरा वनडे मैच- 6 दिसंबर- विशाखापट्टनम

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Video: चालान से बचने के लिए युवक ने लगाया गजब का दिमाग, वीडियो वायरल

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Shocking Viral Video: सोशल मीडिया पर ऐसे तो कई वीडियोज वायरल होते हैं, लेकिन हाल ही में एक जुगाड़ का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें ट्रैफिक पुलिस की चेकिंग के दौरान एक लड़के ने अपनी बाइक का नंबर प्लेट छिपाने के लिए ऐसा जुगाड़ लगाया की सहर कोई हैरान रह गया. वीडियो वायरल होने के बाद लोगों के तमाम रिएक्शन सामने आने लगे.

पैर से नंबर प्लेट को छुपाया

वीडियो की शुरुआत में देखा जा सकता है कि ट्रैफिक पुलिस सड़क पर यातायात के नियमों का पालन न करने वाले वाहनों को रोककर उनका चालान काट रहे होते हैं. आगे वीडियो में देख सकते हैं कि इसी दौरान बिना हेलमेट पहने एक बाइक पर दो लड़के सवार होकर आते हैं.

दोनों में से किसी ने भी हेलमेट नहीं पहना हुआ है, लेकिन जैसे ही वह दोनों ट्रैफिक पुलिस को देखते हैं तो बाइक सवार तुरंत बाइक को मोड़ने लगता है और वहां से भागने की कोशिश करते हैं और इसी दौरान बाइक के पीछे बैठा लड़का बाइक की नंबर प्लेट को अपने पैर से छुपाने लगता है, ताकि ट्रैफिक पुलिस उसकी बाइक का नंबर नोट न कर सके. 

मजेदार कमेंट्स की यूजर्स ने लगाई लाइन

इस वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों के बड़े ही मजेदार कमेंट्स सामने आने लगे.  लोगों ने कहा कि ऐसा दोस्त सभी को मिले तो वहीं कुछ ने कहा कि इंडिया में टैलेंट की कोई कमी नहीं है. कुछ ने मजाक में कहा कि अब पकड़कर दिखाओ. एक यूजर ने लिखा कि बड़े ही तेज लोग है. इस तरह के मजेदार कमेंट्स की लाइन लग गई है और साथ ही लोग वीडियो को काफी शेयर भी कर रहे हैं.


FD का Smart Upgrade: FMP Explained| Low Risk High Benefits| Paisa Live

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TECH EXPLAINED: AMOLED डिस्प्ले क्या होते हैं और ये बाकी डिस्प्ले से कैसे अलग हैं?

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अगर आप मोबाइल के शौकीन हैं तो आपने AMOLED नाम सुना होगा. आजकल कई शानदार स्मार्टफोन में AMOLED डिस्प्ले मिलता है. विजुअल टेक्नोलॉजी के मामले में इसे गेमचेंजर माना जाता है. मोबाइल से लेकर लैपटॉप तक में यह डिस्प्ले देखने को मिल जाता है. यह टेक्नोलॉजी वाइब्रेंट कलर के साथ शानदार कॉन्ट्रास्ट रेशो ऑफर करती है. ये पतले और फ्लेक्सिबल होते हैं, जिससे फोल्डेबल डिवाइसेस में भी इनका यूज करना आसान हो जाता है. आज के एक्सप्लेनर में हम आपको AMOLED डिस्प्ले से जुड़े सवालों के जवाब और इसके फायदे-नुकसान बताने जा रहे हैं.

AMOLED डिस्प्ले क्या होता है?

AMOLED का पूरा नाम एक्टिव मैट्रिक्स ऑर्गेनिक लाइट एमिटिंग डायोड होता है. यह ऐसा डिस्प्ले होता है, जो छोटी LED की मदद से वाइब्रेंट इमेज क्रिएट करता है. ये LED बहुत छोटी होती हैं और इन्हें रेड, ग्रीन और ब्लू के सब-पिक्सल में ग्रुप किया जाता है, जो मिलकर एक पिक्सल बनाते हैं. यह पिक्सल अलग-अलग कलर और व्हाइट लाइट प्रोड्यूस कर सकता है. इसकी एक्टिव मैट्रिक टेक्नोलॉजी प्रीसीजन और स्पीड को बढ़ाती है. 

AMOLED डिस्प्ले कैसे काम करते हैं?

AMOLED डिस्प्ले TFT बैकप्लेन का यूज कर हर पिक्सल को कंट्रोल करता है. इससे हर पिक्सल अपने स्तर पर लाइट एमिट कर सकता है. यानी यह जरूरत के हिसाब से ऑन-ऑफ हो सकता है. जब ब्लैक कलर की जरूरत होती है, तो सारे सब-पिक्सल डिएक्टिवेट हो जाते हैं, जबकि व्हाइट कलर की जरूरत होने पर रोशन हो उठते हैं. रेड, ग्रीन और ब्लू सब-पिक्सल्स की ब्राइटनेस को एडजस्ट कर लाखों कलर डिस्प्ले किए जा सकते हैं. इसी टेक्नोलॉजी की मदद से AMOLED डिस्प्ले वाइब्रेंट कलर दिखा पाते हैं.

बाकी डिस्प्ले से कैसे है अलग?

AMOLED vs OLED

AMOLED डिस्प्ले एक्टिव मैट्रिक्स TFT लेयर के साथ OLED टेक्नोलॉजी का अपग्रेडेड वर्जन है. इस लेयर से पिक्सल कंट्रोल बढ़ जाता है, जिससे बेहतर परफॉर्मेंस, फास्टर रिफ्रेश रेट और एनर्जी एफिशिएंसी मिलती है.

AMOLED vs LCD

LCD डिस्प्ले इमेज प्रोड्यूस करने के लिए लिक्विड क्रिस्टल पर निर्भर होते हैं. इसकी तुलना में AMOLED एक सेल्फ-इमिसिव टेक्नोलॉजी है. LCD स्क्रीन बनाने की लागत AMOLED स्क्रीन से कम होती है, लेकिन इनकी लाइफ ज्यादा होती है. 

AMOLED डिस्प्ले के फायदे

कलर रेंज- AMOLED स्क्रीन के ऑर्गेनिक कंपाउंड ज्यादा कलर रेंज देते हैं, जिससे LCD की तुलना में ज्यादा वाइब्रेंट और लाइव कलर देखने को मिलते हैं.

डायनामिक विजुअल-  AMOLED डिस्प्ले में ज्यादा कंट्रास्ट रेशो और मिलता है. इससे शानदार क्लैरिटी और एकदम असली जैसी दिखने वाले विजुअल स्क्रीन पर नजर आते हैं. 

एनर्जी एफिशिएंसी- डार्क मोड में यह शानदार एनर्जी एफिशिएंसी देते हैं. इसकी वजह है कि ब्लैक पिक्सल पूरी तरह बंद हो जाते हैं, जिससे एनर्जी बचती है. 

स्पीड- एक्टिव मैट्रिक्स टेक्नोलॉजी के कारण फोन और दूसरे डिवाइसेस में यह डिस्प्ले बेहतर रिफ्रेश रेट और रिस्पॉन्स टाइम को सपोर्ट करता है. इसलिए गेमिंग से लेकर एक्शन-पैक्ड वीडियो देखने के लिए यह डिस्प्ले शानदार च्वॉइस है. 

फ्लेक्सिबिलिटी- AMOLED डिस्प्ले बहुत पतले और फ्लेक्सिबल होते हैं. इनके कारण ही स्मार्टफोन में कर्व स्क्रीन देना संभव हो पाया है. साथ ही फोल्डेबल फोन के लिए भी यह एक सूटेबल डिस्प्ले टेक्नोलॉजी है. 

कई नुकसान भी हैं

लागत- AMOLED स्क्रीन बनाने में मैन्युफैक्चरर को ज्यादा लागत आती है. इसकी कॉम्प्लेक्स मैन्युफैक्चरिंग के कारण लागत बढ़ जाती है और ये LCD की तुलना में महंगे होते हैं. दूसरी तरफ LCD की तुलना में इनकी लाइफ भी कम होती है. 

स्क्रीन बर्न-इन का खतरा- AMOLED डिस्प्ले पर स्टेटिक इमेज को अगर लंबे समय तक दिखाया जाए तो यह परमानेंट मार्क छोड़ देती है. इस बर्न-इन इफेक्ट के कारण कई यूजर AMOLED डिस्प्ले को पसंद नहीं करते.

ब्राइट कंटेट के लिए ज्यादा पावर- AMOLED डिस्प्ले डार्क मोड और थीम्स के लिए एनर्जी एफिशिएंट है, लेकिन ब्राइट कंटेट दिखाने के लिए ये ज्यादा पावर की खपत करते हैं. 

लिमिटेड लाइफ- AMOLED स्क्रीन में लगा ऑर्गेनिक कंपोनेंट यूज के साथ खराब होते जाते हैं, जिससे लंबे समय तक इस्तेमाल के बाद डिवाइस में कलर एक्युरेसी खराब होने के साथ-साथ ब्राइटनेस भी कम रह जाती है.

धूप में विजिबिलिटी इश्यू- भारत जैसे देशों में जहां गर्मियों के दौरान तेज धूप पड़ती है, वहां इस डिस्प्ले में विजिबिलिटी का इश्यू आता है. ज्यादा धूप के कारण स्क्रीन पर चल रहे कंटेट को पढ़ पाना बहुत मुश्किल हो जाता है.

कहां-कहां यूज होते हैं AMOLED डिस्प्ले?

AMOLED डिस्प्ले केवल एक प्रकार के डिवाइस में यूज नहीं होते. स्मार्टफोन के अलावा हाई-एंड लैपटॉप, टैबलेट, स्मार्टवॉच और टीवी में भी इस डिस्प्ले टेक्नोलॉजी का यूज किया जा रहा है. इनके अलावा डिजिटल कैमरा और वर्चुअल रिएलिटी हेडसेट में भी इसका खूब यूज किया जाता है. यानी स्मार्टवॉच जैसे छोटे डिस्प्ले वाले डिवाइस से लेकर टीवी जैसी बड़ी स्क्रीन और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी वाले VR हेडसेट तक में इस डिस्प्ले टेक्नोलॉजी को यूज किया जा रहा है.

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IFFI GOA 2025 में Vintage Camera का खास Collection | Ft. Sarvesh S. Deorukhakar

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हाल ही में IFFI Goa 2025 में Vintage Cameras का शानदार Collection दिखा जिसमें 250 Camera collections है सबसे पुराना Camera 1870 का stereo camera है, जो एक समय पर दो Image लेता है और process के बाद 3D Image दिखा सकता है ये सभी camera Made in India हैं. कुछ camera करीब 145 साल पुराने हैं, इसके साथ  Sarvesh S. Deorukhakar, Kolhapur, Maharashtra से है उनके पास कुल 1200 Camera हैं, जिनमें से 250 उन्होंने IFFI में लाए हैं उनके Collection में Nikon का पहला model F भी शामिल है, जो पूरी तरह काम करता है उनकी “collecting journey में उनके  पिता 1968 से camera इकट्ठे कर रहे थे , और Sarvesh खुद पिछले 20 सालों से Collection बढ़ा रहे हैं.

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तेजस फाइटर जेट क्रैश में पायलट की मौत पर आया PAK का पहला रिएक

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दुबई एयरशो के आखिरी दिन भारत का स्वदेशी फाइटर जेट तेजस क्रैश हो गया था, जिसमें पायलट की भी मौत हो गई थी. अब इस हादसे पर पाकिस्तान की ओर से बयान सामने आया है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हादसे में जान गंवाने वाले पायलट के परिवार और भारतीय वायुसेना के प्रति संवेदना जताई. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश के साथ प्रतिस्पर्धा केवल आकाश में है. 

ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट कर लिखा, ‘पाकिस्तान स्ट्रेटेजिक फोरम पूरे देश की तरफ से भारतीय वायुसेना और भारतीय वायुसेना के उस LAH LCA तेजस के पायलट के परिवार के प्रति गहरी संवेदना जताता है, जो आज दुबई एयर शो 2025 में दुर्घटनाग्रस्त हो गया.’

फोरम के ‘X’ अकाउंट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, ‘पाकिस्तान स्ट्रेटेजिक फोरम’, पाकिस्तान और सहयोगी देशों के रक्षा विश्लेषकों की एक एजेंसी है, जो सामरिक और सैन्य अंतर्दृष्टि प्रदान करती है. मंत्री ने फोरम का संदेश साझा करते हुए कहा कि ‘बदकिस्मती से वायुसेना पायलट विमान से बाहर नहीं निकल पाया और दुर्घटना में बच नहीं पाया.’

पाकिस्तान के रक्षामंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत की वायुसेना के साथ मुकाबला सिर्फ़ आसमान तक ही सीमित है. ‘पाकिस्तान स्ट्रेटेजिक फोरम’ ने भी अपने एक्स पोस्ट में शोक जताया.

हादसे में गई थी पायलट की जान

UAE में आयोजित दुबई एयर शो के आखिरी दिन 21 नवंबर को भारतीय वायुसेना का स्वदेशी फाइटर जेट LCA-तेजस क्रैश हो गया. इस हादसे में वायुसेना के पायलट की मौत हो गई. दुबई एयर शो में लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस ने भारत की तरफ से प्रतिनिधित्व किया था. दुबई के स्थानीय समय अनुसार, शुक्रवार दोपहर 2.10 बजे आसमान में करतब करते वक्त, तेजस विमान अचानक लो-फ्लाइंग करते वक्त जमीन पर गिर गया. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. इसमें पायलट विंग कमांडर नमांश स्याल की मौत हो गई थी. 

IAF ने तेजस क्रैश की जांच के लिए बनाई जांच कमेटी

इंडियन एयरफोर्स ने लड़ाकू विमान क्रैश होने कारणों का पता लगाने के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी बैठा दी है. शहीद हुए विंग कमांडर नमन स्याल का परिवार पहले भी एयरफोर्स से जुड़ा रहा है. उनके पिता भारतीय सेना के मेडिकल कोर में रह चुके हैं. नमन की पत्नी भारतीय वायुसेना में अधिकारी पद पर हैं. 

क्या है तेजस फाइटर जेट की खासियत?

भारतीय फाइटर जेट में तेजस एक बड़ी ताकत है. उसकी डिजाइन और लो कॉस्ट ऑपरेसन उसकी मुख्य खासियते हैं. यह बेहद ही हल्का और फुर्ती से हवा में घूमने में सक्षम है. इसके एवियोनिक्स सिस्टम में लेटेस्ट क्लाउट-बेस्ड टेक और प्लाई बाय वायर कंट्रोल है. इसे पायलट को हैंडल करने में काफी आसानी होती है. साथ ही यह मिसाइल, स्मार्ट बम और एडवांस हथियार रखने की क्षमता रखता है. यह आसानी से दुश्मन की पकड़ में नहीं आता है. 

(पीटीआई के इनपुट के साथ)

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“पब्लिक नल से भरकर बेची जा रही रेल नीर की बोतलें! वीडियो देख खौल उठेगा खून- यूजर्स का हिल गया माथा

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रेलवे प्लेटफॉर्म पर बिकने वाली महंगी रेल नीर की बोतलों के पीछे का सच एक बार फिर सोशल मीडिया पर लोगों का खून खौला रहा है. इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो में कुछ लोग खुलेआम स्टेशन के पब्लिक वॉटर पॉइंट से रेल नीर की खाली बोतलों में पानी भरते दिखते हैं. वीडियो में साफ दिख रहा है कि स्टेशन पर लगे नल से साधारण पानी भरा जा रहा है और फिर वही बोतलें नए जैसी दिखाकर यात्रियों को बेची जा रही हैं. यह पूरा खेल पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेलवे स्टेशन का बताया जा रहा है और वीडियो सामने आते ही लोग गुस्से से आगबबूला हो गए हैं.

रेल नीर की बोतलों में नल का पानी भर बेचने का वीडियो आया सामने!

वीडियो में एक युवक रेल नीर की खाली बोतलों को इकट्ठा करते नजर आते हैं. इसके बाद वो सीधे पब्लिक वॉटर प्वॉइंट की ओर बढ़ता है और बिना किसी झिझक के एक-एक बोतल में नल का पानी भरना शुरू कर देता है. फिर बोतल का ढक्कन ऐसे लगाया जाता है कि देखकर किसी को अंदाजा भी नहीं लगेगा कि यह पहले से खोला हुआ है. वायरल क्लिप में यह भी दिख रहा है कि इन्हीं बोतलों को युवक बेचने के लिए ट्रेन की बोगी में यात्रियों को ₹15–₹20 में बेचने के लिए ले जा रहा है. आपको बता दें कि पहले भी ऐसी कई शिकायतें आ चुकी हैं लेकिन रेलवे के कई बार चेतावनी देने के बाद भी ऐसे लोग अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं.

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यूजर्स हुए आग बबूला

घटना के सामने आने के बाद यात्री यह भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या जो लोग ट्रेन में चढ़कर पानी बेचते हैं, उनके पास असली लाइसेंस होता भी है या नहीं. वायरल वीडियो ने यह शक और मजबूत कर दिया है कि बिना चेकिंग और बिना निगरानी वाले वेंडर किस तरह आसानी से स्टेशन पर घूमते रहते हैं. कुछ यूजर्स ने लिखा कि “रेल नीर की ब्रांडिंग देखकर हम भरोसा करते हैं, लेकिन असल में नल का पानी पी रहे हैं.” वहीं कुछ ने मांग की है कि ऐसे मामलों में रेलवे को फौरन FIR दर्ज कर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए. वीडियो को  Miya Bhai Miya Bhai नाम के फेसबुक अकाउंट से शेयर किया गया है जिसे अब तक लाखों लोगों ने देखा है.

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घर के अंदर की हवा भी खतरनाक! बीआईटीएस पिलानी, आईआईटी जोधपुर और एनआईटी वारंगल की स्टडी में चौंका

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आजकल प्रदूषण की समस्या इतनी बढ़ गई है कि लोग अक्सर सोचते हैं घर के अंदर तो हवा सुरक्षित होगी. लेकिन हाल ही में बीआईटीएस पिलानी, आईआईटी जोधपुर और एनआईटी वारंगल के वैज्ञानिकों ने एक शोध में बताया है कि घर के अंदर की हवा अक्सर बाहर की हवा से दो से पांच गुना ज्यादा प्रदूषित होती है. शोध के अनुसार, यह स्थिति खासकर शहरों में अधिक खतरनाक हो सकती है, जहां घर छोटे और वेंटिलेशन कम होता है.

वैज्ञानिकों ने भारत का पहला इंडोर एयर क्वालिटी (IAQ) इंडेक्स विकसित किया है. इसका मकसद घर के अंदर हवा में मौजूद हानिकारक प्रदूषकों का सही अंदाजा लगाना है. पहले लोग सोचते थे कि घर में रहकर हम जहरीली हवा से बच सकते हैं, लेकिन शोध में पाया गया कि घर के अंदर हवा में PM2.5 और PM10 जैसे पार्टिकुलेट्स की मात्रा बहुत ज्यादा हो सकती है.

किचन, सफाई और घरेलू कामों से बढ़ता प्रदूषण

शोध में यह पाया गया कि रोज़मर्रा की गतिविधियां जैसे खाना बनाना, झाड़ू पोछा लगाना, गंदे कचरे को संभालना या बिना छांटे हुए कचरे का निपटान, हवा में प्रदूषकों की मात्रा बढ़ा देता है. छोटे घर, खराब वेंटिलेशन और एग्जॉस्ट सिस्टम की कमी इन प्रदूषकों को जल्दी जमा कर देती है, जिससे घर के अंदर का प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है.

मौसमी और बाहरी कारण भी हैं जिम्मेदार

सर्दियों में धुंध और स्मॉग, त्योहारों में पटाखों का धुआं, पास के कूड़ेदान या पराली जलाने के धुएं से भी घर के अंदर की हवा खराब होती है. शोध के प्रमुख अतुल रॉय चौधरी कहते हैं हमारा अध्ययन दिखाता है कि हम घर के अंदर लगभग 90% समय बिताते हैं, इसलिए अंदर की हवा की गुणवत्ता पर ध्यान देना बेहद जरूरी है.

पश्चिमी मानक भारत के लिए काम नहीं आते

शोधकर्ताओं का कहना है कि भारत में घर और जीवनशैली की खासियत के कारण पश्चिमी देशों के IAQ मानक काम नहीं आते. बीआईटीएस पिलानी के प्रोफेसर शंकर गणेश कहते हैं हमारे घर, हमारी खाना बनाने की आदतें, हमारे त्योहार और जलवायु सब अलग हैं. इसलिए हमें भारत के लिए खास इंडोर एयर क्वालिटी स्केल की जरूरत है.

डेटा कैसे जुटाया गया

टीम ने भारतीय शहरों के घरों से रियल-लाइफ एयर डेटा एकत्र किया, खासकर निर्माण और मरम्मत वाले इलाकों में. फिर उन्होंने विश्लेषण करके प्रदूषकों को अलग-अलग महत्व दिया और एक साधारण IAQ स्केल बनाया, जिसे घर वाले आसानी से समझ सकें. इस स्केल की मदद से परिवार अपने घर के अंदर हवा की गुणवत्ता जान सकते हैं और सुधार के उपाय अपना सकते हैं.

बाहरी प्रदूषण का असर

शोध में यह भी बताया गया कि बाहरी प्रदूषण जैसे पराली जलाना, कूड़ा डंप से निकलने वाले धुएं, और कचरे का सही निपटान न होना घर के अंदर हवा की गुणवत्ता पर बड़ा असर डालता है. बिना छांटे हुए कचरे से निकलने वाला मीथेन न केवल घर की हवा खराब करता है, बल्कि जलवायु परिवर्तन के लिए भी खतरा है.

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