ईरानी तेल नेटवर्क पर अमेरिका का चला हंटर, भारत की 2 कंपनियों पर भी लगा प्रतिबंध

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US Sanctions India: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने भारत की उन संस्थाओं और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाए हैं, जो ईरान के पेट्रोलियम और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री में शामिल हैं. प्रशासन ने कहा कि, इस व्यापार से मिलने वाली धनराशि तेहरान के क्षेत्रीय आतंकवादी समूहों को समर्थन देने और हथियार प्रणालियां खरीदने में उपयोग की जाती है, जो ‘‘अमेरिका के लिए सीधा खतरा’’ हैं.

इन कंपनियों पर लगा प्रतिबंध

अमेरिका के विदेश और वित्त मंत्रालयों ने उन ‘शिपिंग नेटवर्क’ पर प्रतिबंध लगाए हैं जो ईरानी शासन की ‘‘दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों’’ को अवैध तेल बिक्री के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं. साथ ही उन एयरलाइंस और उनसे जुड़ी कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं, जो ईरान समर्थित आतंकी संगठनों को हथियार और आपूर्ति भेजती हैं.

इस प्रतिबंध सूची में जिन भारतीय नागरिकों और कंपनियों को शामिल किया गया है, उनमें जैर हुसैन इकबाल हुसैन सैय्यद, जुल्फिकार हुसैन रिजवी सैय्यद, महाराष्ट्र स्थित ‘आरएन शिप मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड’ और पुणे स्थित ‘टीआर6 पेट्रो इंडिया एलएलपी’ शामिल हैं.

अमेरिकी विदेश मंत्रालयल का बयान 

विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह भारत, पनामा और सेशेल्स सहित कई देशों में स्थित कुल 17 संस्थाओं, व्यक्तियों और जहाज़ों को नामित कर रहा है. जो ईरान के पेट्रोलियम और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री में शामिल हैं. इसके साथ ही वित्त विभाग 41 संस्थाओं, व्यक्तियों, जहाज़ों और विमानों को नामित कर रहा है.

ताकि ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात पर कार्रवाई को तेज किया जा सके और उन वित्तीय नेटवर्कों को बाधित किया जा सके, जो ईरान की अवैध गतिविधियों को सहायता प्रदान करते हैं. विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि इस तेल व्यापार से उत्पन्न धनराशि का उपयोग ईरान समर्थित क्षेत्रीय आतंकवादी समूहों को सहायता देने और हथियार प्रणालियां खरीदने में किया जाता है, जो अमेरिकी बलों और सहयोगी देशों के लिए सीधा खतरा हैं.

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‘जिसके पास चीन के खिलौने जैसे हथियार…’, तेजस क्रैश पर पाकिस्तानियों ने कसे तंज तो भड़क गई उद्

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दुबई एयरशो के दौरान तेजस फाइटर जेट क्रैश मामले में अब उद्धव ठाकरे की पार्टी ने पाकिस्तानी ट्रोलर्स का मुंह बंद कर दिया है. शिवसेना यूटीबी की नेता और राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी तेजस क्रैश पर पाकिस्तानी ट्रोलर्स की टिप्पणी पर भड़क गईं. उन्होंने ट्रोलर्स को करारा जवाब देते हुए एक्स पर पोस्ट किया है. 

प्रियंका ने कहा, ‘कुछ पाकिस्तानी सोशल मीडिया अकाउंट्स तेजस क्रैश का मजाक उड़ा रहे हैं. सोचिए, एक आतंकवादी दे आतकंवादी देश में रहना, जो सच में वर्ल्ड बैंक और IMF के मदद पर जी रहा हो. जिसके पास दिखाने के लिए सिर्फ मेड इन चाइना के खिलौने हों, ऐसे लोगों स्वदेशी डिफेंस फाइटर जेट्स के बारे में बात करने में सबसे आखिरी में आना चाहिए. यह लोग सिर्फ सुसाइड बॉम्बर स्क्वॉड ही बना सकते हैं.’

बता दें, 21 नवंबर यानि शुक्रवार को दुबई एयर शो में प्रदर्शन के दौरान भारत का एक तेजस लड़ाकू विमान क्रैश हो गया. इस हादसे में पायलट की मौत हो गई. इस हादसे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. जहां एयर शो के आखिरी दिन आसमान में कलाबाजियां करता तेजस विमान अचानक जमीन से टकरा गया. फिर जोरदार ब्लास्ट हुआ, जिसके बाद सिर्फ भीषण आग की लपटें उठती दिखी.

घटना दोपहर 2:10 के आसपास हुई है. जहां हजारों की संख्या में दर्शक करतब दिखा रहे थे. हवा में मोड़ लेते वक्त अचानक पायलट ने अपना कंट्रोल खो दिया, और विमान जमीन पर जा टकराया. इस हादसे के बाद शो को अस्थाई तौर पर रोका गया. ऐसा पहली बार हुआ है कि पायलट एयरक्राफ्ट से बाहर नहीं निकल पाए और अपनी जान गंवा बैठे. तेजस विमान से जुड़ी यह दूसरी घटना है. इससे पहले साल 2024 में जैसलमेर में तेजस हादसे का शिकार हो गया था. बता दें, तेजस एक 4.5 जेनरेशन का मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है. इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) एयर डिफेंस मिशन जैसे मिशन के लिए तैयार किया है. 



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वेद-गीता और कंप्यूटर साइंस का समन्वय, भारतीय शिक्षा बोर्ड ने शिक्षा के नए मॉडल पर डाला प्रकाश

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भारतीय शिक्षा बोर्ड (BSB) ने शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय संस्कृति और आधुनिक विज्ञान के बीच सामंजस्य स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है. BSB के चेयरमैन डॉ एनपी सिंह ने हाल ही में अलीगढ़ में आयोजित मंडल स्तरीय संगोष्ठी में जोर देकर कहा कि बच्चों को केवल भौतिकतावादी शिक्षा तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उन्हें वेद, गीता, उपनिषद जैसी आध्यात्मिक शिक्षाओं के साथ-साथ आधुनिक कंप्यूटर साइंस जैसे विषयों का ज्ञान भी देना चाहिए.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एनपी सिंह ने कहा, ”यह नया मॉडल संस्कारयुक्त, चरित्रवान और वैज्ञानिक रूप से जागरूक पीढ़ी तैयार करने पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य छात्रों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हुए उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है.

शिक्षा में आई भारतीय संस्कृति और संस्कारों की कमी- एनपी सिंह

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ एन पी सिंह ने मंडल भर से आए 300 से ज्यादा स्कूलों के प्रबंधकों और प्राचार्यों और प्रतिनिधियों से विस्तार से बातचीत की. उन्होंने चिंता व्यक्त की कि आधुनिक पाश्चात्य शिक्षा के प्रभाव में छात्रों का नैतिक पतन हो रहा है और शिक्षा में भारतीय संस्कृति और संस्कारों की कमी आ गई है.

अपने विद्यालयों को भारतीय शिक्षा बोर्ड से जोड़ें- एनपी सिंह की अपील

उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय शिक्षा बोर्ड का मूल लक्ष्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और संस्कारयुक्त बनाना है. यह बोर्ड भारतीय संस्कृति, वेद, शास्त्र, उपनिषद, गीता जैसी आध्यात्मिक शिक्षाओं को आधुनिक कंप्यूटर साइंस और प्रकृति के मूल से जोड़कर चरित्रवान नागरिक तैयार करना चाहता है. डॉ. सिंह ने सभी से अनुरोध किया कि भारत को सशक्त और विश्व गुरु बनाने के लिए अपने विद्यालयों को भारतीय शिक्षा बोर्ड से जोड़ें.

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि मंडलायुक्त संगीता सिंह ने अपने संबोधन में माता-पिता और आदर्श शिक्षकों को बच्चों को संस्कार देने में सबसे महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा, ”हमें केवल बड़ी-बड़ी सुविधाओं वाली इमारतों के विद्यालयों की ओर ही आकर्षित नहीं होना चाहिए, बल्कि प्राचीन वैदिक संस्कृति की ओर लौटना चाहिए.” उन्होंने अभिभावकों से भारतीय शिक्षा बोर्ड से जुड़े विद्यालयों में बच्चों का प्रवेश दिलाने की अपील की.

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सिर्फ गांठ नहीं, ये 5 सिग्नल भी बताते हैं बेस्ट कैंसर का पता, गलती से भी न करें इग्नोर

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कई महिलाओं में त्वचा संतरा के छिलके जैसी दिखने लगती है. त्वचा रफ हो जाती है, लालपन आता है या दबा हुआ सा हिस्सा दिखाई देता है. यह बदलाव तब होता है जब कैंसर सेल्स त्वचा के नीचे की छोटी नलियों को रोक देती हैं. यह इंफेक्शन जैसा लग सकता है, लेकिन यह एक गंभीर रूप का संकेत भी हो सकता है, इसलिए डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है.

कई महिलाओं में त्वचा संतरा के छिलके जैसी दिखने लगती है. त्वचा रफ हो जाती है, लालपन आता है या दबा हुआ सा हिस्सा दिखाई देता है. यह बदलाव तब होता है जब कैंसर सेल्स त्वचा के नीचे की छोटी नलियों को रोक देती हैं. यह इंफेक्शन जैसा लग सकता है, लेकिन यह एक गंभीर रूप का संकेत भी हो सकता है, इसलिए डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है.

निप्पल में बदलाव भी एक शुरुआती संकेत है. निप्पल अचानक अंदर की ओर मुड़ जाए, उसका रंग या आकार बदल जाए या उस जगह पर रैश और परत उतरने लगे, तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए. अगर निप्पल से दूध जैसा न दिखने वाला कोई तरल निकले, जैसे साफ पानी, खून या पस, तो यह मिल्क डक्ट्स में समस्या का संकेत हो सकता है और तुरंत जांच की जरूरत होती है.

निप्पल में बदलाव भी एक शुरुआती संकेत है. निप्पल अचानक अंदर की ओर मुड़ जाए, उसका रंग या आकार बदल जाए या उस जगह पर रैश और परत उतरने लगे, तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए. अगर निप्पल से दूध जैसा न दिखने वाला कोई तरल निकले, जैसे साफ पानी, खून या पस, तो यह मिल्क डक्ट्स में समस्या का संकेत हो सकता है और तुरंत जांच की जरूरत होती है.

ऐसा दर्द जो पीरियड्स से जुड़ा न हो, उसे भी गंभीरता से लेना चाहिए. कुछ महिलाओं को लगातार रहने वाला तेज या चुभन वाला दर्द होता है. केवल दर्द से बीमारी की पुष्टि नहीं होती, लेकिन दर्द के साथ सूजन, निप्पल बदलाव या त्वचा में परिवर्तन दिखाई दें तो डॉक्टर से मिलना जरूरी है.

ऐसा दर्द जो पीरियड्स से जुड़ा न हो, उसे भी गंभीरता से लेना चाहिए. कुछ महिलाओं को लगातार रहने वाला तेज या चुभन वाला दर्द होता है. केवल दर्द से बीमारी की पुष्टि नहीं होती, लेकिन दर्द के साथ सूजन, निप्पल बदलाव या त्वचा में परिवर्तन दिखाई दें तो डॉक्टर से मिलना जरूरी है.

ब्रेस्ट या बगल में सूजन दिखना भी अक्सर शुरुआती लक्षण होता है. कई बार बिना किसी गांठ के भी बगल या कॉलर बोन के पास लिंफ नोड्स सूज जाते हैं. यह सूजन बताती है कि सेल्स लिंफ नलियों तक पहुँच चुकी हैं, इसलिए जांच तुरंत करानी चाहिए.

ब्रेस्ट या बगल में सूजन दिखना भी अक्सर शुरुआती लक्षण होता है. कई बार बिना किसी गांठ के भी बगल या कॉलर बोन के पास लिंफ नोड्स सूज जाते हैं. यह सूजन बताती है कि सेल्स लिंफ नलियों तक पहुँच चुकी हैं, इसलिए जांच तुरंत करानी चाहिए.

ब्रेस्ट के आकार या रूप में हल्का सा भी बदलाव नजर आए तो इसे हल्के में न लें. एक ब्रेस्ट अचानक बड़ा दिखना, अनियमित आकार, त्वचा में खिंचाव या गड्ढा बनना, नई छाया दिखना, ये सभी संकेत शुरुआत में ही दिखाई दे सकते हैं. अलग-अलग हाथ की पोजिशन में ब्रेस्ट को देखना इन बदलावों को पहचानने में मदद करता है.

ब्रेस्ट के आकार या रूप में हल्का सा भी बदलाव नजर आए तो इसे हल्के में न लें. एक ब्रेस्ट अचानक बड़ा दिखना, अनियमित आकार, त्वचा में खिंचाव या गड्ढा बनना, नई छाया दिखना, ये सभी संकेत शुरुआत में ही दिखाई दे सकते हैं. अलग-अलग हाथ की पोजिशन में ब्रेस्ट को देखना इन बदलावों को पहचानने में मदद करता है.

इन संकेतों को पहचानना बेहद जरूरी है क्योंकि इलाज की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि बीमारी किस स्टेज में पकड़ी गई. सिर्फ गांठ ढूंढना काफी नहीं है. दर्द, सूजन, त्वचा में परिवर्तन या निप्पल बदलाव भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं.

इन संकेतों को पहचानना बेहद जरूरी है क्योंकि इलाज की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि बीमारी किस स्टेज में पकड़ी गई. सिर्फ गांठ ढूंढना काफी नहीं है. दर्द, सूजन, त्वचा में परिवर्तन या निप्पल बदलाव भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं.

खुद को सुरक्षित रखने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप अपने ब्रेस्ट के सामान्य रूप को जानें और किसी भी नए बदलाव को गंभीरता से लें. निप्पल से तरल आना, त्वचा में बदलाव, लगातार दर्द, सूजन या आकार में फर्क दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. शुरुआती पहचान ही सबसे बड़ा बचाव है.

खुद को सुरक्षित रखने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप अपने ब्रेस्ट के सामान्य रूप को जानें और किसी भी नए बदलाव को गंभीरता से लें. निप्पल से तरल आना, त्वचा में बदलाव, लगातार दर्द, सूजन या आकार में फर्क दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. शुरुआती पहचान ही सबसे बड़ा बचाव है.

Published at : 21 Nov 2025 06:52 PM (IST)

हेल्थ फोटो गैलरी

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Video: नया ट्रेंड आ गया! शादी में झाग से नहाते लोगों का वीडियो वायरल, लोग बोले- यमुना से लाए है

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Funny Viral Video: शादियों के दौरान आपने मस्ती-मजाक होते तो देखा ही होगा, लेकिन कभी-कभी यहीं मस्ती मजाक इतना उफान मार जाती है कि देखने वालों का हंस-हंसकर बुरा हाल हो जाता है. कुछ ऐसा ही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें शादी समारोह के दौरान कुछ अलग ही दृश्य देखने को मिला है. वायरल हो रहे वीडियो में देखा गया है कि शादी समारोह में झागों की मशीन से निकलते सफेद बुलबुले मेहमानों पर बरस रहे हैं. इसे देखकर यह लग रहा है कि यहां शादी नहीं, बल्कि फोम पार्टी चल रही हो.

झाग से लथपथ हो गए मेहमान

वीडियो की शुरुआत में देखा जा सकता है कि कई सारे लोग डांस करते नजर आ रहे हैं और वहीं पास में एक बड़ा झाग मशीन(फोम जनरेटर) खड़ा है, जिसमें से लगातर सफेद झाग निकलता दिखाई दे रहा है. वह सभी लोगों को भिगो रहा है और सभी झाग से भिगते हुए डांस कर रहे हैं.

वीडियो में कई सारे लोग दिखाई दे रहे हैं, जो झागों के बीच नाच-गान कर रहे हैं. सभी पूरी तरह से झाग से लथपथ नजर आ रहे हैं, लेकिन उन्हें बड़ा मजा आ रहा है. वह हंसते-खेलते हुए एक-दूसरे पर झाग फेंकते हुए दिखाई दे रहे हैं. पहर तरफ झाग फैला हुआ नजर आ रहा है, मानो स्टेज पूरा बादलों से ढक गया हो.

यूजर्स ने फनी कमेंट्स की लगा दी लाइन

मेहमान बड़े ही मजे से झाग में डांस करने का आनंद ले रहे हैं. अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिस पर लोगों के तमाम मजेदार और फनी कमेंट्स सामने आ रहे है. कुछ लोगों ने कहा कि ये झाग देखकर लग रहा है, जैसे किसी ने पूरी वाशिंग मशीन ही उलट दी हो. वहीं कुछ ने मजाक में कहा कि सभी को यमुना में जाकर डुबकी लगा लेनी चाहिए. एक यूजर ने कहा कि चलो रोजाना तो पानी से नहाते हैं, आज झाग से नहा लिया. इस तरह के मजेदार कमेंट्स वीडियो पर लगातार आ रहे हैं.


Vastu Tips: घर में शांति और तरक्की लाते हैं ये धार्मिक प्रतीक, जानें किन चिन्हों का होता है सबस

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घर में सुख-समृद्धि का राज़:  वास्तु के शुभ चिन्ह जो बदल सकते हैं किस्मत, हर व्यक्ति चाहता है कि उसके घर में धन की कमी न हो, परिवार में शांति बनी रहे और उन्नति के रास्ते खुलते रहें. कर्म, मेहनत और अनुशासन के साथ-साथ घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह भी बहुत महत्वपूर्ण होता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार कुछ पवित्र प्रतीक और चिन्ह ऐसे हैं, जिन्हें घर में उचित दिशा में स्थापित करने से सुख, शांति और समृद्धि स्वतः आकर्षित होती है.

ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास बताते हैं, “यदि घर में कुछ प्रभावशाली चिन्ह और प्रतीकों को सही दिशा में रखा जाए तो घर में सुख-समृद्धि वास करती है और बरकत बढ़ती है. ये चिन्ह सकारात्मक ऊर्जा को सक्रिय करते हैं और नकारात्मकता को रोकते हैं.”

मुख्य द्वार — सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश द्वार

वास्तु शास्त्र के अनुसार मुख्य द्वार ही घर में आने वाली ऊर्जा का केंद्र माना जाता है. नियम इस प्रकार हैं:

  • उत्तर या पूर्व दिशा का मुख्य द्वार सबसे शुभ माना जाता है
  • दक्षिण दिशा में द्वार अशुभ माना गया है, इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है
  • द्वार और उसके आस-पास की साफ-सफाई आवश्यक है, क्योंकि मां लक्ष्मी स्वच्छता पसंद करती हैं
  • मुख्य द्वार पर पंचसूलक, स्वास्तिक या नमस्ते का संकेत लगाने से शुभता और सौहार्द बढ़ता है

घर की सही दिशा और ऊर्जा — क्या रखें और क्या न रखें:

उत्तर दिशा

  • धन और अवसर का केंद्र
  • मनी प्लांट हरे गमले में रखना शुभ
  • झाड़ू, वॉशिंग मशीन, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं और डस्टबिन न रखें

ईशान कोण (उत्तर–पूर्व)

  • सबसे पवित्र दिशा
  • पूजा स्थल और गंगाजल रखें
  • भारी सामान जमा न करें

दक्षिण–पश्चिम

  • स्थिरता और धन-संचय की दिशा
  • इस दिशा में मिट्टी की गुल्लक रखना अत्यंत शुभ

पश्चिम दिशा

  • धन संरक्षण का संकेत
  • यहां लक्ष्मी–नारायण की फोटो लगाना शुभ माना गया है

ध्यान रखें: घर या बाहर गूलर, पाकड़, बेर, पीपल, केला और अनार के पेड़ लगाने से वास्तु के अनुसार बरकत कम होती है.

घर में रखने योग्य शुभ प्रतीक और उनके लाभ:

  • लाभ: मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनाता है
  • रखने का स्थान: पूजा स्थल

पंचसूलक

  • लाभ: नकारात्मक ऊर्जा को घर में प्रवेश करने से रोकता है
  • रखने का स्थान: मुख्य द्वार

स्वास्तिक

  • लाभ: शुभता, सफलता और धन वृद्धि के संकेत देता है
  • रखने का स्थान: दिशा के अनुसार सही रंग में बनाएं/लगाएं

कमल

  • लाभ: ज्ञान, ऐश्वर्य और सौभाग्य का प्रतीक
  • रखने का स्थान: मंदिर या ड्रॉइंग रूम

त्रिशूल

  • लाभ: भय, बाधा और कष्टों से रक्षा करता है
  • रखने का स्थान: प्रवेश क्षेत्र

कलश

  • लाभ: सुख, समृद्धि और शुभता बढ़ाता है
  • रखने का स्थान: पूजा स्थल

नमस्ते चिन्ह

  • लाभ: स्वागत भाव और सद्भाव का संदेश देता है
  • रखने का स्थान: मुख्य द्वार के दोनों ओर

शंख

  • लाभ: पवित्रता, सौभाग्य और धन आकर्षण
  • रखने का स्थान: मंदिर

दीपक

  • लाभ: संपन्नता और प्रकाश ऊर्जा का प्रतीक
  • रखने का समय/स्थान: पूजा करते समय जलाना

मछली प्रतीक

  • लाभ: आर्थिक उन्नति, अच्छे स्वास्थ्य और सफलता के योग बनाता है
  • रखने का स्थान: उत्तर–पूर्व या पूर्व दिशा

आर्थिक स्थिरता के लिए विशेष उपाय:

  • लॉकर को पश्चिम दिशा में रखें
  • लाल कपड़े में थोड़ी पीली सरसों बांधकर लॉकर में रखें, इससे नजर और नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है
  • दक्षिण–पश्चिम दिशा में मिट्टी की गुल्लक रखें और समय-समय पर बच्चे के हाथ से सिक्के डलवाएं
  • पूजा स्थल के ईशान कोण में गंगाजल की शीशी रखें और समय-समय पर नया गंगाजल डालें

वास्तु शास्त्र मानना कोई बाध्यता नहीं, लेकिन वर्षों से परखे हुए सिद्धांत घर में अपनाए जाएं तो जीवन में शांति, संतुलन, स्थिरता और समृद्धि बढ़ती है.
ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास का मानना है कि — “वास्तु का उद्देश्य सिर्फ सौन्दर्य या सजावट नहीं, बल्कि ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित करके जीवन को बेहतर बनाना है.”

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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कोलकाता में 3 दिन भी नहीं चला था मैच, गुवाहाटी में कितने रन बनेंगे? दूसरे टेस्ट की पिच रिपोर्ट

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भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका पहला टेस्ट मैच कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेला गया था. वह मुकाबला पूरे 3 दिन भी नहीं चल पाया, जिसमें टीम इंडिया 30 रनों से हार गई थी. अब दूसरा मैच 22 नवंबर से गुवाहाटी में खेला जाएगा. ईडन गार्डन्स की पिच की जमकर आलोचना हुई थी, लेकिन अब बारासपारा स्टेडियम की पिच से कैसी उम्मीद रखनी चाहिए, जो इतिहास में पहली बार किसी टेस्ट मैच की मेजबानी करने जा रहा है.

कैसा बर्ताव करेगी पिच?

गुवाहाटी के बारासपारा स्टेडियम की पिच लाल मिट्टी से बनी है, जिस पर हल्की घास छोड़ी गई है. इस तरह की पिच पर आमतौर पर बल्ले और गेंद के बीच जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है. ठंड के मौसम में सुबह पिच में नमी रह सकती है, जिससे तेज गेंदबाजों को पहले सेशन में स्विंग मिल सकती है.

आमतौर पर इस मैदान की पिच बल्लेबाजी के अनुरूप रहती है, जहां खूब सारे रन बनने का अनुमान रहता है. मगर तीसरे दिन या उसके बाद स्पिनरों को मदद मिलने लगती है. लाल मिट्टी का मतलब, इस पिच में तेज गेंदबाजों के लिए भी मदद रहेगी. फास्ट बॉलर्स को अच्छा बाउंस भी मिल सकता है. अगर पिच कोलकाता की तरह खराब बर्ताव नहीं करती है, तो पहली पारी में यहां 350-400 रन का स्कोर काफी अच्छा साबित हो सकता है.

ऋषभ पंत करेंगे कप्तानी

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दूसरे टेस्ट में ऋषभ पंत भारतीय टीम की कप्तानी कर रहे होंगे. नियमित कप्तान शुभमन गिल अभी चोटिल हैं, उन्हें पहले टेस्ट के दौरान गर्दन में खिंचाव की समस्या थी. वो अभी पूरी तरह रिकवर नहीं कर पाए हैं. ऐसे में ऋषभ पंत गुवाहाटी टेस्ट में टीम इंडिया की कप्तानी कर रहे होंगे.

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जिंदगी ने दिए बहुत दुख लेकिन डांस बना सबसे बड़ी ताकत, जानें सरोज खान की कहानी

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बॉलीवुड में डांस की बात हो और सरोज खान का नाम न आए, ऐसा मुमकिन ही नहीं. सरोज खान ऐसी कलाकार थीं, जिन्होंने हिंदी सिनेमा को डांस की असली परिभाषा सिखाई. उनकी कोरियोग्राफी ने न जाने कितनी अभिनेत्रियों को पहचान दिलाई और कितने ही गानों को आइकॉनिक बना दिया.

आर्थिक तंगी के वजह से शुरू किया काम 
वैसे अगर आपको न पता हो तो हम बताते हैं कि सरोज खान का बचपन का नाम निर्मला नागपाल था. उनका जन्म 22 नवंबर 1948 को हुआ था. बाद में उन्होंने इस्लाम स्वीकार कर लिया था और बॉलीवुड में उन्हें सरोज खान के नाम से पहचान मिली.उनके माता-पिता भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद भारत आ गए थे.

घर की हालत अच्छी नहीं थी, इसलिए निर्मला को बचपन से ही काम करना पड़ा. सिर्फ तीन साल की उम्र में उन्होंने फिल्म ‘नजराना’ में बेबी श्यामा के रूप में काम किया. धीरे-धीरे उन्हें डांस का शौक होने लगा, लेकिन यह शौक इतने अनोखे अंदाज में सामने आया कि घरवालों को भी समझ नहीं आया कि यह क्या हो रहा है.

अपनी ही परछाई देख कर घंटो नाचती थीं 
निर्मला नागपाल (सरोज खान) जब बहुत छोटी थीं, तब वह अपनी ही परछाई को देखकर घंटों नाचती रहती थीं. उन्हें लगता था कि परछाई उनका साथ दे रही है और उसी के साथ वह कदम मिलाती रहती थीं. वह जब कमरे में अकेली होतीं तो वह घंटों तक अपने डांस में खोई रहती थीं.

उनकी मां को यह देख चिंता होने लगी. उन्हें लगा कि बच्ची किसी मानसिक परेशानी है. इसी डर में घर वाले उन्हें डॉक्टर के पास ले गए, लेकिन डॉक्टर जो बोले, वह सुनकर पूरा परिवार दंग रह गया. डॉक्टर ने कहा कि बच्ची बिल्कुल ठीक है.

बस, यह डांस करना चाहती है. इसे रोकना नहीं, बल्कि आगे बढ़ने देना चाहिए.घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, इसलिए परिवार ने डॉक्टर की बात मान ली और निर्मला को फिल्म इंडस्ट्री में ही काम करने की खुली छूट दे दी. इसका जिक्र सरोज खान ने खुद एक इंटरव्यू में किया था.
Birth Anniversary: जिंदगी ने दिए बहुत दुख लेकिन डांस बना सबसे बड़ी ताकत, जानें सरोज खान की कहानी

पर्सनल लाइफ में झेले बहुत दुख 
1950 के दशक में वह बैकग्राउंड डांसर के तौर पर दिखने लगीं. इसी दौरान उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर डांस मास्टर बी. सोहनलाल से डांस सीखा, जो उनकी जिंदगी का बड़ा मोड़ साबित हुआ. यह रिश्ता सिर्फ गुरु-शिष्य तक नहीं रहा. सरोज की उम्र जब सिर्फ 13 साल थी, तभी उन्होंने सोहनलाल से शादी कर ली, जबकि सोहनलाल उनसे 30 साल बड़े थे. शादी के समय सरोज को यह भी नहीं पता था कि सोहनलाल पहले से शादीशुदा थे और चार बच्चों के पिता थे.

यह सच उन्हें तब पता चला जब 1963 में उन्होंने बेटे राजू को जन्म दिया. बाद में उन्होंने दूसरा बच्चे को भी जन्म दिया, जो कुछ महीनों बाद गुजर गया. इस दौरान सोहनलाल ने उनके बच्चों को अपना नाम देने से मना कर दिया, जिससे सरोज का दिल टूट गया और यह शादी भी टूट गई.

पति से अलग होने के बाद आया जिन्दगी में नया मोड़ 
सरोज खान की जिंदगी का सफर आसान नहीं था, लेकिन डांस उनके लिए हमेशा ताकत बना रहा. पति से अलग होने के बाद उन्होंने अपना पूरा ध्यान कोरियोग्राफी पर लगा दिया. शुरुआती संघर्षों के बावजूद उन्होंने अपना स्थान बनाया और 1970 के दशक में कोरियोग्राफर के रूप में काम शुरू किया. हालांकि असली पहचान उन्हें 1980 के दशक में मिली.

‘हवा हवाई’, ‘मैं तेरी दुश्मन’, ‘मेरे हाथों में’ जैसे श्रीदेवी के लिए कोरियोग्राफ किए गए गानों ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया. इसके बाद माधुरी दीक्षित के साथ उनका काम इतिहास बना. ‘एक दो तीन’, ‘धक-धक करने लगा’, ‘तम्मा तम्मा’ समेत कई गाने आज भी लोगों को झूमने पर मजबूर करते हैं.
Birth Anniversary: जिंदगी ने दिए बहुत दुख लेकिन डांस बना सबसे बड़ी ताकत, जानें सरोज खान की कहानी

कई प्रेस्टीजियस अवार्ड भी किए अपने नाम 
अपने करियर में सरोज खान ने तीन नेशनल फिल्म अवॉर्ड और कई फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते. वहीं फिल्मफेयर ने बेस्ट कोरियोग्राफी का अवॉर्ड शुरू ही उनके गाने ‘एक दो तीन’ की सफलता के बाद किया था. उनकी दूसरी शादी सरदार रोशन खान से हुई थी. उनकी बेटी सुकैना खान दुबई में डांस इंस्टीट्यूट चलाती हैं.बॉलीवुड में लंबा सफर तय करने के बाद सरोज खान का 3 जुलाई 2020 को कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया, लेकिन डांस स्टेप्स और मेहनत ने उन्हें हमेशा के लिए अमर बना दिया.

 

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सरकार ने लागू किए 4 नए लेबर कोड, वेतन, ग्रैच्युटी और ओवरटाइम के नियम बदले, कामगारों की हुई बल्ल

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New Labour Codes India: केंद्र सरकार की ओर से शुक्रवार को श्रम कानूनों में बड़े बदलाव और सुधार की घोषणा की गई हैं. सरकार की ओर से पुराने श्रम कानूनों को बदलकर 4 नए लेबर कोड लागू किए गए हैं. केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए इस बात की जानकारी दी हैं.

उन्होंने इस कदम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कामगारों के लिए उठाया गया ऐतिहासिक कदम बताया हैं. जो श्रमिकों को सुरक्षा और आर्थिक मजबूती के साथ-साथ गरिमा से काम करने का अवसर भी देती है.

साथ ही, प्रधानमंत्री ने भी इस संबंध में एक्स पर लिखा कि,  आज हमारी सरकार ने चार लेबर कोड लागू कर दिए हैं. साथ ही उन्होंने इस लेबर कोड को आजादी के बाद से सबसे बड़ा और प्रगतिशील श्रमिक केंद्रित सुधार बताया हैं. जिससे कामगारों को और ज्यादा ताकत मिलेगी और बिजनेस करना पहले से ज्यादा आसान होगा.

कौन से हैं ये 4 लेबर कोड?

सरकार के द्वारा जो चार 4 लेबर कोड लागू किए गए हैं, वे वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा संहिता हैं. आजादी के बाद से देश में बने 29 पुराने श्रमिक कानूनों को अब इन चार नए कोड में समाहित कर दिया गया है.

सरकार का मानना है कि, अभी की अर्थव्यवस्था और काम करने के तरीकों के लिए पुराने कानून उपर्युक्त नहीं हो सकते. नियम भी आज की तरह ही आधुनिक होने चाहिए. इसलिए इस बदलाव का फैसला लिया गया है. 

कंपनी को देना होगा नियुक्ति पत्र

सरकार के ओर से फैसला लिया गया हैं कि, कंपनी अब हर कर्मचारी को नियुक्ति के समय अप्वाइंटमेंट लेटर अनिवार्य रुप से देगी. जिससे पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा और कंपनी की मनमानी पर रोक लगाई जा सकेगी. साथ ही देश के करीब 40 करोड़ अंसगठित क्षेत्र के कामगारों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया जाएगा. जिससे उन्हें पीएफ, ईएसआईसी (ESIC) और पेंशन जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी.

ग्रैच्युटी के नियम भी बदले

नए नियमों के लागू होने से निजी कंपनियों में काम करने वालों के लिए बड़ा फायदा हो सकता हैं. पहले ग्रैच्युटी पाने के लिए 5 साल एक ही कंपनी में काम करना जरूरी था, लेकिन अब फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉइज (FTE) सिर्फ 1 साल नौकरी करने पर भी ग्रैच्युटी के हकदार होंगे. इससे उन कर्मचारियों को भी लाभ मिलेगा जो कम अवधि के कॉन्ट्रैक्ट पर काम करते हैं और पहले उन्हें यह सुविधा नहीं मिल पाती थी. 

ओवरटाइम से जुड़े नियम भी बदलाव किए गए है. इन बदलावों के तहत अगर कोई कर्मचारी तय समय से ज्यादा काम करता है, तो कंपनी को उसे दोगुना वेतन देना होगा. साथ ही सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि कर्मचारियों का वेतन समय पर मिले, ताकि महीने के आखिर में किसी को आर्थिक परेशानी न उठानी पड़े.

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तेजस के पायलट ने अपनी जान देकर दुबई एयर शो के दर्शकों बचाया, चश्‍मदीद ने बताई आंखों देखी

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दुबई के एयरशो में शुक्रवार (21 नवंबर, 2025) को एलसीए तेजस एयरक्राफ्ट क्रैश की घटना को लेकर एक चश्मदीद ने आंखों देखी बताई है. चार दिन से तेजस एयरक्राफ्ट दुबई एयरशो में उड़ रहा था और आज उसका आखिरी दिन था. जिस वक्त यह हादसा हुआ तब बड़ी संख्या में एयरशो देखने के लिए लोग वहां मौजूद थे. चश्मदीदों ने बताया कि पायलट ने कोशिश की कि एयरक्राफ्ट दर्शकों की तरफ ने जाए और उसने दर्शकों को बचाने के लिए एयरक्राफ्ट को दूसरी तरफ मोड़ दिया.

एयरशो में कई भारतीय प्रवासी भी मौजूद थे. एक भारतीय दर्शक शाजुद्दीन जब्बार ने बताया कि जैसे ही एयरक्राफ्ट नीचे जाने वाला था तो पायलट ने उसे दूसरी तरफ मोड़ दिया. उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकर और ज्यादा दुख हुआ कि पायलट इंडियन था.

शाजुद्दीन जब्बार ने कहा, ‘जब तक ये हादसा नहीं हुआ तब तक शो बहुत अच्छा जा रहा था. इस हादसे ने हम सब को हैरान और दुखी कर दिया है. जिस तरह नीचे गिरने से पहले एयरक्राफ्ट दूसरी तरफ मुड़ा, मुझे पूरा विश्वास है कि पायलट दर्शकों को बचाने की कोशिश कर रहा था. यह बहुत ही दुर्भाग्य की बात है कि पायलट खुद को नहीं बचा सका. हम बहुत दुखी हैं कि किसी की हमारी आंखों के सामने इस तरह मौत हो गई और तब और ज्यादा दुख हुआ जब पता चला कि वह इंडियन पायलट था.’

शाजुद्दीन जब्बार अपनी पत्नी शाइनी और बेटी एशले के साथ एयरशो देखने पहुंचे थे. तेजस एयरक्राफ्ट के जो वीडियो सामने आए हैं, उनमें देखा जा सकता है कि दूर से विमान हवा में उड़ता हुआ आ रहा है, लेकिन अचानक से वह हवा में मुड़ता है और फिर बहुत तेजी से नीचे की तरफ आता है और आग के गोले में तब्दील हो जाता है.

जब एयरक्राफ्ट मुड़ा और तेजी से नीचे की तरफ गया उन कुछ सेकेंड्स देखा जा सकता है कि उसके विंग्स पैरेलल थे और पायलट बार-बार स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहा था, लेकिन विमान की स्पीड इतनी तेज थी और सबकुछ इतनी जल्दी हुआ कि स्थिति संभल नहीं सकी. हालांकि, एक बार के लिए ऐसा लगा कि पायलट ने स्थिति संभाल ली है. विमान जब नीचे आया तो क्रैश होने से बिल्कुल पहले उसने फिर ऊपर की तरफ उड़ने की कोशिश की, लेकिन उसकी स्पीड बहुत ज्यादा थी और ऊंचाई बहुत कम थी, जिसकी वजह से वह क्रैश हो गया.

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