पेट्रोल पंप पर ट्रैक्टर में बज रहा था चुनरी-चुनरी, डांस करने से खुद को रोक नहीं पाए अंग्रेज

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आजकल सोशल मीडिया पर ऐसा-वैसा कुछ भी वायरल हो जाता है. कभी कोई मजेदार हरकत, कभी किसी की बेफिक्र मस्ती तो कभी कोई ऐसा वीडियो जो अचानक सभी का ध्यान खींच ले. इस बार जो वीडियो इंटरनेट पर तहलका मचा रहा है, वह बिल्कुल अलग है. यह वीडियो न किसी पार्टी का है, न किसी बड़े आयोजन का, बल्कि राजस्थान के बूंदी जिले के एक साधारण पेट्रोल पंप पर हुई एक ऐसी घटना का है जिसने लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला दी. 

रोजमर्रा की भागदौड़ में जहां पेट्रोल पंप पर लोग जल्दी-जल्दी ईंधन भरवा कर आगे बढ़ जाते हैं, वहीं इस वीडियो में माहौल कुछ और ही नजर आता है. जैसे ही किसान के ट्रैक्टर में चुनरी-चुनरी गाना बजा, वहां खड़े कुछ विदेशी मेहमान खुद को रोक नहीं पाए और गाने की धुन पर थिरकने लगे. उनकी खुशी और बेफिक्र मस्ती देखकर हर कोई हैरान भी है और खुश भी. 

क्या है वायरल वीडियो में?

वीडियो में देखा जा सकता है कि बूंदी जिले के एक पेट्रोल पंप पर एक किसान अपना ट्रैक्टर खड़ा किए हुए है. ट्रैक्टर में तेज आवाज में गाना चुनरी-चुनरी बज रहा है. तभी वहां मौजूद कुछ विदेशी मेहमान गाने की बीट सुनते ही झूमने लगते हैं. वे गाने की लय पकड़कर ऐसे नाचते हैं जैसे उन्हें इस गाने का मतलब भले न पता हो, लेकिन उसकी खुशी साफ समझ में आ रही हो. उनकी इस मस्ती ने पेट्रोल पंप पर मौजूद लोगों को भी चौंका दिया. कई लोग यह नजारा देखते ही वीडियो बनाने लगे और देखते ही देखते यह वीडियो इंटरनेट पर पहुंच गया. 

सोशल मीडिया पर मचा धमाल

जैसे ही यह वीडियो ऑनलाइन आया, सोशल मीडिया पर धमाका हो गया. लोगों ने इसे खूब शेयर किया, लाइक किया और मजेदार कमेंट भी किए. यह वीडियो @saten_08 नाम के अकाउंट से पोस्ट किया गया है और अब तक लाखों लोग इसे देख चुके हैं. कई यूजर्स ने कमेंट करके लिखा कि गाने की कोई भाषा नहीं होती, बस दिल खुश होना चाहिए. तो वहीं कुछ ने हंसते हुए कहा, अंग्रेज भी चुनरी-चुनरी पर डांस कर रहे हैं, यह तो इंडिया की असली पावर है. 

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बैंक से लोन ना मिले तो क्या करें? खराब सिबिल स्कोर पर भी इन जगहों से मिलेगा लोन

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Low Cibil Score Loan Options: शादी-विवाह, मकान, बच्चों की उच्च शिक्षा या किसी गंभीर बीमारी के वक्त अक्सर लोगों को पैसों की जरूरत पड़ जाती है. ऐसे वक्त में अगर उन्होंने इमरजेंसी फंड बना रखा हैं तब तो, उनका काम आसानी से हो जाता है. वे अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा कर लेते हैं, पर अगर आपके पास किसी तरह का फंड ना हो तो, लोग बैंक से लोन लेने का विचार बनाते हैं. 

हालांकि, बैंक लोन देने से पहले आपसे संबंधित बहुत सी चीजों की खोजबीन करते हैं. बैंक आपके सिबिल स्कोर के आधार पर ही आपका लोन पास करती है. अगर आपका सिबिल स्कोर कम है और बैंक आपको लोन देने से मना कर देता है. ऐसी स्थिति में भी आपको पास कुछ ऑप्शन होते हैं, जिनमें आप लो सिबिल स्कोर के बावजूद भी लोन पा सकते है. आइए जानते हैं, ऐसे ही कुछ विकल्पों के बार में……

1. नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) लोन

बैंक अगर आपको लोन देने से मना कर रहा हैं तो, आप एनबीएफसी कंपनी से लोन ले सकते हैं. कम सिबिल स्कोर पर भी एनबीएफसी कंपनियां लोन पास कर देती हैं. हालांकि, इनकी ब्याज दरें बैंकों की तुलना में ज्यादा हो सकती है. इसलिए लोन लेने से पहले इसकी जानकारी जरूर लेनी चाहिए. 

2. गोल्ड लोन

अगर पास गोल्ड या गोल्ड ज्वेलरी है तो, आप गोल्ड लोन भी ले सकते हैं. गोल्ड लोन की ब्याज दरें भी काफी कम होती है. साथ ही, इसके लिए आपका सिबिल स्कोर नहीं देखा जाता है. 

3. एफडी लोन

अगर आपने बैंक में एफडी करवा रखा है तो, आप एफडी लोन के लिए अप्लाई कर सकते हैं. एफडी लोन के लिए आपका सिबिल स्कोर नहीं देखा जाता है. आपकी एफडी राशि पर आपको लगभग 90 प्रतिशत तक लोन बहुत आसानी से मिल सकता है.   

4. जॉइंट लोन

अपने परिचित किसी व्यक्ति जिनका सिबिल स्कोर बहुत अच्छा है. उनके साथ मिलकर आप जॉइंट लोन ले सकते है. हालांकि, इसके लिए सामने वाले व्यक्ति की सहमति जरूरी है.  

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Video: रोड किनारे खड़ी कार से टकराया बाइक सवार, ट्रक के नीचे आया, एक सेकंड में हुई मौत

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Road Accident Viral Video: सड़क पर होने वाली छोटी-सी लापरवाही कैसे कुछ ही सेकंड में बड़ी त्रासदी में बदल जाती है, इसका एक दिल दहला देने वाला वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में दिख रहा है कि सड़क के किनारे एक कार खड़ी थी और वहां ट्रैफिक सामान्य रूप से चल रहा था. तभी तेज रफ्तार से आती एक बाइक अचानक उसी खड़ी कार से जा टकराती है. टक्कर इतनी तेज होती है कि बाइक सवार सड़क पर जोर से गिर जाता है. 

बाइक सवार को ट्रक ने कुचला

वीडियो की शुरुआत में साफ दिखता है कि कार सड़क किनारे पार्क की गई थी. कुछ ही सेकंड बाद एक तेज रफ्तार बाइक अचानक कार से सीधी भिड़ जाती है. बाइक सवार टक्कर लगते ही उछलकर सड़क पर गिर जाता है. वह गिरा ही होता है कि पीछे से तेज गति में एक बड़ा ट्रक आता दिखाई देता है. ट्रक ड्राइवर को शायद यह अंदाजा ही नहीं हो पाया कि उसके सामने कोई इंसान गिरा हुआ है, और वह बाइक सवार को कुचलकर आगे बढ़ जाता है.

घटना इतनी तेजी से होती है कि आसपास मौजूद लोग कुछ कर ही नहीं पाते. वीडियो को देखकर कई लोग शॉक में आ गए हैं क्योंकि बाइक सवार के पास खुद को बचाने के लिए एक पल का भी समय नहीं था.

हादसे के बाद  लोगों ने दुख किया जाहिर

हादसे के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने नाराजगी और दुख दोनों व्यक्त किए हैं. कई यूजर्स ने लिखा कि सड़क पर तेज रफ्तार और लापरवाही का नतीजा हमेशा जानलेवा ही साबित होता है. वहीं कुछ लोगों ने सड़क किनारे गलत तरीके से गाड़ी खड़ी करने को भी हादसे की वजह बताया. पुलिस ने घटना का संज्ञान ले लिया है और CCTV फुटेज की मदद से पूरी जांच शुरू कर दी है.


मां कामाख्या के दर्शन करने पहुंचे गौतम गंभीर, दूसरे टेस्ट में जीत की मांगी दुआ!

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भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर मां कामाख्या के दर्शन करने पहुंचे हैं. 22 नवंबर से भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका दूसरा टेस्ट असम के गुवाहाटी में खेला जाना है, लेकिन उससे पहले गंभीर ने कामाख्या मंदिर में माथा टेका. बताया जा रहा है कि टीम इंडिया के सपोर्ट स्टाफ के कुछ सदस्य भी गौतम गंभीर के साथ मंदिर पहुंचे थे.

किसी बड़ी सीरीज या मैच से पहले अक्सर गौतम गंभीर मंदिरों में प्रार्थना करते जाते रहे हैं. जब भारत-दक्षिण अफ्रीका टेस्ट सीरीज शुरू होने वाली थी, तब उससे पहले गंभीर कोलकाता स्थित कालीघाट मंदिर में मां काली के दर्शन करने गए थे. दूसरा टेस्ट टीम इंडिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि इसे जीतकर वो दक्षिण अफ्रीका के साथ सीरीज को एक-एक से ड्रॉ करवा सकती है.

दोनों टीम बुधवार को गुवाहाटी पहुंची थीं. टीम इंडिया के लिए दुर्भाग्यवपूर्ण खबर यह है कि शुभमन गिल चोट के कारण दूसरा टेस्ट नहीं खेल पाएंगे. उन्हें कोलकाता में खेले गए पहले टेस्ट मैच में गर्दन में खिंचाव आ गया था. उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जिससे उन्हें छुट्टी तो मिल गई लेकिन अभी तक पूरी तरह फिट नहीं हो पाए हैं.

 

शुभमन गिल की गैरमौजूदगी में ऋषभ पंत दूसरे टेस्ट में भारतीय टीम की कप्तानी करते नजर आ सकते हैं, जो अभी टेस्ट टीम के उपकप्तान भी हैं. वहीं साई सुदर्शन को भी प्लेइंग इलेवन में मौका मिल सकता है, जिनकी जगह पहले टेस्ट में नंबर-3 पर वाशिंगटन सुंदर खेले थे.

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इन स्टूडेंट्स को मिलता है यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद में रिजर्वेशन, जानें किस कैटेगरी को मिलता है

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यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद देश की टॉप यूनिवर्सिटीज में से एक है, जहां हर साल देशभर से हजारों छात्र पढ़ाई करने आते हैं. यहां एडमिशन को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा जिस बात की होती है, वह है रिजर्वेशन सिस्टम यानी आरक्षण की सुविधा.

केंद्रीय सरकारी नियमों के आधार पर यह यूनिवर्सिटी कई कैटेगरी के छात्रों को सीटों में रिजर्वेशन देती है, ताकि हर वर्ग के छात्रों को उच्च शिक्षा पाने का बराबर मौका मिल सके. लेकिन ज्यादातर छात्रों को यह नहीं पता होता कि किस कैटेगरी के लिए कितनी सीटें रिजर्व रहती हैं और किस आधार पर यह फायदा मिलता है. आज हम आपको पूरी जानकारी आसान भाषा में बताएंगे.

सबसे पहले बात करते हैं SC और ST कैटेगरी की. यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद अपने हर कोर्स में 15% सीटें अनुसूचित जाति (SC) और 7.5% सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों के लिए आरक्षित रखती है. जरूरत पड़ने पर SC और ST सीटों में आपस में बदलाव भी किया जाता है, ताकि कोई सीट खाली न रहे. इन कैटेगरी के उम्मीदवारों को इंटरव्यू या काउंसलिंग के समय अपना जाति प्रमाण पत्र दिखाना होता है, जो तहसीलदार या मंडल राजस्व अधिकारी द्वारा जारी किया जाता है. अगर किसी छात्र को पढ़ाई में परेशानी होती है, तो ऐसे छात्रों के लिए यूनिवर्सिटी रेमेडियल क्लास भी चलाती है.

PG और Integrated कोर्स में SC/ST छात्रों को अतिरिक्त राहत

PG कोर्स यानी MA, MSc, MCA, MBA, MPA, MFA और 5-Year Integrated Programmes में SC/ST उम्मीदवारों को बड़ी राहत दी गई है. जनरल, EWS और OBC की तुलना में इन छात्रों के लिए न्यूनतम अंक की जरूरत 5% कम होती है. इतना ही नहीं, अगर सीटें खाली रह जाती हैं तो SC/ST छात्रों के लिए सिर्फ पास होना भी पर्याप्त माना जाता है. यानी अगर आप SC/ST कैटेगरी से हैं, तो आपके पास एडमिशन पाने का ज्यादा मौका रहेगा.

OBC (Non-Creamy Layer) छात्रों के लिए 27% आरक्षण

अब बात करते हैं OBC कैटेगरी के छात्रों की. केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार यूनिवर्सिटी में 27% सीटें OBC (Non-Creamy Layer) उम्मीदवारों के लिए रिजर्व रहती हैं. ध्यान देने वाली बात यह है कि राज्य सरकार द्वारा जारी OBC सर्टिफिकेट मान्य नहीं होता. केवल वही OBC-NCL सर्टिफिकेट स्वीकार किया जाता है जो केंद्र सरकार के फॉर्मेट में और सक्षम अधिकारी द्वारा जारी किया गया हो. M.Phil और PhD के लिए SC/ST/OBC और PH उम्मीदवारों को 5% की छूट दी जाती है, ताकि वे आसानी से पात्रता पूरी कर सकें.

EWS कैटेगरी को 10% सीटों का फायदा

इसके बाद आता है EWS यानी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग. सरकार के मुताबिक यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद में 10% सीटें EWS कैटेगरी के छात्रों के लिए आरक्षित हैं. इस कैटेगरी में आने के लिए भी उम्मीदवारों को सरकारी फॉर्मेट में बनाया गया EWS प्रमाणपत्र जमा करना होता है. 2019–20 से यूनिवर्सिटी ने PG और Integrated कोर्स की सीटों में बढ़ोतरी की और EWS छात्रों के लिए भी आरक्षण लागू किया, जिससे हजारों छात्रों को फायदा मिला.

PWD छात्रों को 5% सुपरन्यूमरी सीटें

आरक्षण की लिस्ट में अगला है दिव्यांग (PWD) कैटेगरी. यूनिवर्सिटी 5% सीटें दिव्यांग छात्रों को देती है. यह सीटें सुपर न्यूमरो यानी अतिरिक्त होती हैं, पर M.Tech, M.Phil और PhD में इन्हें कोर्स की कुल सीटों में शामिल किया जाता है. यहां 40% या उससे अधिक विकलांगता वाले छात्रों को प्रवेश में राहत दी जाती है. ये सीटें विजुअली चैलेंज्ड, हियरिंग इंपेयर्ड और ऑर्थोपेडिकली हैंडिकैप्ड छात्रों के लिए होती हैं. ऐसे छात्र एंट्रेंस टेस्ट में भी हिस्सा लेते हैं, और जरूरत पड़ने पर उन्हें एक्स्ट्रा टाइम और स्क्राइब की सुविधा भी दी जाती है.

इसके अलावा, यूनिवर्सिटी डिफेंस पर्सनल (सेना, वायुसेना, नौसेना, कोस्ट गार्ड) के बच्चों को भी 5% सुपरन्यूमरी सीटें देती है. हालांकि यह सुविधा पैरामिलिट्री फोर्सेज के लिए नहीं है. इन सीटों के लिए भी स्टूडेंट्स को एंट्रेंस परीक्षा देनी होती है और सभी जरूरी प्रमाणपत्र जमा करने होते हैं.

यूनिवर्सिटी कश्मीरी माइग्रेंट्स और जम्मू-कश्मीर के छात्रों के लिए भी अलग से सीटें देती है. कश्मीरी माइग्रेंट्स के लिए Integrated और PG कोर्स में सुपरन्यूमरी सीटें होती हैं, जबकि J&K स्पेशल स्कॉलरशिप स्कीम के तहत AICTE द्वारा 2 अतिरिक्त सीटें दी जाती हैं.

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‘हमारा काम हो गया, मुझे फोन करके बोले थे पीएम मोदी’, भारत-पाकिस्तान युद्ध पर ट्रंप का नया दावा

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान की लड़ाई रुकवाने का क्रेडिट लेते हुए दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें फोन करके कहा था, ‘हम युद्ध नहीं करेंगे.’ ट्रंप का कहना है कि 7 से 10 मई के बीच भारत और पाकिस्तान की ओर से एक-दूसरे पर किए जा रहे हमलों को रुकवाने के लिए उन्होंने 350 प्रतिशत टैरिफ लगाने और ट्रेड खत्म करने की धमकी दी थी, जिसके बाद दोनों देश घबरा गए.

ट्रंप कई बार इस दावे को दोहरा चुके हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव शांत करने में मदद की थी, जबकि भारत किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के दावे को लगातार नकारता रहा है. उन्होंने बुधवार (19 नवंबर, 2025) को यूएस-सऊदी इन्वेस्टमेंट फोरम को संबोधित करते हुए कहा, ‘…मैं झगड़े सुलझाने में अच्छा हूं और हमेशा से ऐसा रहा हूं. मैंने पिछले कुछ साल में यहां तक कि इससे पहले भी इस दिशा में बहुत अच्छा काम किया है. मैं अलग-अलग लड़ाइयों के बारे में बात कर रहा हूं… भारत, पाकिस्तान… वे परमाणु हथियारों से हमले करने वाले थे.’

ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने परमाणु हथियार रखने वाले दोनों पड़ोसी देशों से कहा था कि वे युद्ध जारी रख सकते हैं लेकिन मैं दोनों देशों पर 350 प्रतिशत शुल्क लगा रहा हूं. वे अमेरिका के साथ अब व्यापार नहीं कर पाएंगे. ट्रंप ने दावा किया कि भारत और पाकिस्तान दोनों ने उनसे ऐसा नहीं करने के लिए कहा था.

अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि उन्होंने दोनों देशों से कहा था, ‘मैं यह करने (शुल्क लगाने) जा रहा हूं…मैं नहीं चाहता कि आप लोग एक-दूसरे के खिलाफ परमाणु हथियार का इस्तेमाल करें, लाखों लोगों को मारें और लॉस एंजिलिस पर परमाणु धूल उड़े.’

ट्रंप ने कहा कि दोनों देश पूरी तरह तैयार थे और उन्होंने अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट से कहा था कि वह (संघर्ष को) समाप्त करने के लिए 350 प्रतिशत शुल्क लगाएंगे और अगर दोनों देश युद्ध रोक देते हैं, तो हम एक अच्छा व्यापार समझौता करेंगे. ट्रंप ने कहा, ‘कोई और राष्ट्रपति ऐसा नहीं करता… आठ में से पांच युद्ध, व्यापार और शुल्क की वजह से सुलझे. मैंने यह किया.’

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उन्हें फोन किया और लाखों लोगों की जान बचाने के लिए व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सूसी विल्स के सामने उन्हें धन्यवाद दिया.  ट्रंप ने इसके बाद दावा किया कि उन्हें प्रधानमंत्री मोदी ने फोन करके कहा, ‘हमारा काम हो गया.’ मैंने कहा, ‘आपका क्या काम हो गया?’ ट्रंप ने दावा किया कि मोदी ने जवाब दिया, ‘हम युद्ध नहीं करेंगे.’

उन्होंने कहा कि फिर उन्होंने मोदी को धन्यवाद दिया और कहा, ‘चलिए, एक डील करते हैं.’ ट्रंप ने यह भी दावा किया कि उन्होंने कई अन्य युद्धों में लाखों लोगों-करोड़ों लोगों को बचाया. भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था जिसके तहत पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया गया था. पहलगाम हमले में 26 लोग मारे गए थे.

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चुनाव खत्म, चलो वापस… खचाखच भरी ट्रेनों से वापस लौट रहे बिहारी मजदूर, पलायन पर भड़के यूजर्स

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बिहार में हुए विधानसभा चुनावों की हलचल अब थम चुकी है. हफ्तों तक चले प्रचार, रैलियों, नारों और बहसों का शोर अब धीरे-धीरे शांत हो गया है. नेताओं की गाड़ियां लौट चुकी हैं, भाषणों की गूंज थम चुकी है और सड़कों पर चुनावी उत्साह की जगह फिर वही रोजमर्रा की भागदौड़ लौट आई है. लेकिन जैसे ही चुनाव नतीजे आए, एक कड़वी, पुरानी और हर बार दोहराई जाने वाली तस्वीर फिर सामने आ गई. चुनाव खत्म होते ही अचानक रेलवे स्टेशनों पर भीड़ उमड़ने लगी. ट्रेनों के दरवाजों, गेट पर, प्लेटफॉर्म पर हर जगह सिर्फ एक ही नजारा, सैकड़ों नहीं, हजारों की संख्या में बिहारी मजदूर अपने काम की जगहों पर वापस लौट रहे हैं.

सोशल मीडिया पर ऐसे तमाम वीडियो जमकर वायरल हो रहे हैं, जो बिहार में पलायन के दर्द को रह-रहकर कुरेद रहे हैं. इस चुनाव में बिहारी मजलूमों का पलायन भी एक बड़ा मुद्दा था, लेकिन जो वीडियो सामने आए हैं उन्हें देखकर लगता है बड़ी-बड़ी बातें चुनाव तक ही सीमित होती हैं. ऐसा ही एक वीडियो बहुत तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा सकता है कि बाहर नौकरी-रोजगार करने वाले मजदूर, जो चुनाव में वोट डालने के लिए बिहार आए थे, अब खचाखच भरी ट्रेनों में सवार होकर अपने-अपने शहरों की तरफ लौट रहे हैं. 

क्या है वायरल वीडियो में?

वीडियो में ट्रेनों की हालत देखकर अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं कि भीड़ कितनी ज्यादा है. डिब्बों में बैठे लोगों के लिए जगह नहीं, कई लोग दरवाजों पर खड़े हैं, कोई छत पर चढ़ने की कोशिश कर रहा है. हर किसी के चेहरे पर बस एक ही भाव चुनाव हो गया, अब वापस काम पर लौटना है. यह वीडियो बिहार के उस सच को फिर याद दिलाता है कि आज भी लाखों लोगों को रोजगार के लिए अपने घरों से दूर जाना पड़ता है. चुनाव में चाहे जितने वादे किए जाएं, असल जीवन में उनकी मजबूरी वहीं की वहीं रहती है. 

सोशल मीडिया पर लोगों के कमेंट्स

जैसे ही वीडियो वायरल हुआ, लोगों ने तरह-तरह के कमेंट करने शुरू कर दिए. कई यूजर्स ने इस पलायन पर नाराजगी जताई और लिखा, हर चुनाव में यही हाल होता है, रोजगार की बात कोई नेता नहीं करता, बिहार में काम होता तो मजदूरों को वापसी की इतनी जल्दी नहीं होती है. चुनाव में भी मजदूर सबसे ज्यादा जरूरी और चुनाव के बाद भी सबसे ज्यादा मजबूर है. कुछ लोगों ने यह भी कहा कि यह सीन सिर्फ वीडियो नहीं बल्कि एक बड़ा सवाल है. क्या बिहार कभी ऐसी जगह बनेगा जहां लोग बाहर न जाकर घर में ही रोजगार पा सकें. 

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Earbuds या Neckband में से कौन-सा खरीदें? ये बातें पढ़कर दूर हो जाएगी कंफ्यूजन

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आजकल ब्लूटूथ इयरफोन काफी ट्रेंड में हैं. बस-ट्रेन से लेकर ऑफिस और जिम तक लोग नेकबैंड या इयरबड्स पहने दिख जाएंगे. बहुत कम लोग ऐसे बचे हैं, जो वायर्ड इयरफोन यूज करते हैं. ब्लूटूथ इयरफोन के अपने कई फायदे हैं. ट्रेंड में होने के साथ-साथ यूज करना भी आसान है और एक्सरसाइज वगैरह करते समय आपको फोन भी साथ नहीं रखना पड़ता. ब्लूटूथ इयरफोन खरीदते समय कई लोग यह तय नहीं कर पाते कि उन्हें इयरबड्स लेने चाहिए या नेकबैंड. अगर आपको भी ये कंफ्यूजन है तो यह खबर आपके लिए है.

नेकबैंड के हैं ज्यादा फायदे

आजकल नेकबैंड को लोग ज्यादा पसंद नहीं कर रहे हैं, लेकिन कुछ समय पहले तक इसका खूब क्रेज था. बाजार से लेकर जिम तक लोग अपने गले में नेकबैंड डाले दिख जाते थे. हालांकि, पिछले कुछ समय से इयरबड्स ज्यादा ट्रेंड में आ गए हैं, लेकिन यूटिलटी के मामले में ये नेकबैंड से पिछड़ जाते हैं. नेकबैंड कई मामलों में इयरबड्स से आगे हैं.

क्यों इयरबड्स के मुकाबले नेकबैंड है फायदेमंद

नेकबैंड का एक बड़ा फायदा इनकी आसान हैंडलिंग है. यूज करने के बाद आपको इन्हें सिर्फ कान से निकालना है और ये आपके गले में लटकते रहेंगे. दूसरी तरफ इयरबड्स की संभाल करना बहुत जरूरी हो जाता है. यूज करने के बाद वापस से इन्हें केस में डालना पड़ता है. इसके अलावा नेकबैंड के गिरने का भी डर नहीं है. अगर इयरप्लग कान से निकल जाते हैं तो भी वो नीचे नहीं गिरते, लेकिन इयबड्स के मामले में ऐसा नहीं है. इयरबड्स के नीचे गिरने और गुम हो जाने का भी खतरा रहता है. 

कीमत में भी बड़ा अंतर

नेकबैंड और इयरबड्स में एक और बड़ा अंतर कीमत को लेकर है. इयरबड्स के मुकाबले नेकबैंड सस्ते आ जाते हैं. अच्छे इयरबड्स लेने के लिए आपको अच्छे नेकबैंड की कीमत से ज्यादा पैसा चुकाना होगा. इसके अलावा बैटरी लाइफ के मामले में भी नेकबैंड इयरबड्स से बहुत आगे है और इनकी बैटरी ज्यादा चलती है.

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इंडिया का सबसे पॉपुलर एक्टर कौन? टॉप 10 की लिस्ट में साउथ का कब्जा, बॉलीवुड से सिर्फ दो नाम

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बॉलीवुड से शाहरुख से सलमान खान और आमिर खान तक और साउथ से प्रभास से लेकर अल्लू अर्जुन तक तमाम ऐसे सितारे हैं जो दर्शकों के दिलों पर राज करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं अक्टूबर के महीने में भारत में सबसे ज्यादा पॉपुलर स्टार कौन रहा.ओरमैक्स ने अक्टूबर के महीने की टॉप 10 मोस्ट पॉपुलर मेल स्टार्स की लिस्ट जारी की है जिसके मुताबिक साउथ के एक्टर्स ने लिस्ट में बाजी मारी है जबकि बॉलीवुड से सिर्फ दो सितारे ही लिस्ट में जगह बना पाए हैं.

टॉप 10 मोस्ट पॉपुलर मेल स्टार्स में कौन बना नंबर 1
ओरमैक्स ने गुरुवार, 20 नवंबर को औरमैक्स स्टार्स इंडिया लव्स: मोस्ट पॉपुलप मेल स्टार्स इन इंडिया ( अक्टूबर 2025) जारी की है. इस लिस्ट में बॉलीवुड से लेकर साउथ तक के तमाम सितारों को पीछे छोड़ते हुए प्रभास ने नंबर 1 की पोजिशन हासिल की है. यानी अक्टूबर के महीने में दर्शकों के दिलों पर प्रभास का कब्जा रहा. दिलचस्प बात है कि इस लिस्ट में 8 पोजिशन पर साउथ के सितारों का दबदबा रहा है. जबकि बॉलीवुड से शाहरुख खान और सलमान खान ही लिस्ट में जगह बना पाए हैं.

किस सितारे को मिली कौन सी पोजिशन
बता दें कि लिस्ट में दूसरे नंबर पर वजय ने बाजी मारी है. वहीं तीसरे नंबर पर अल्लू अर्जुन हैं. वही बॉलीवुड के किंग खान यानी शाहरुख खान को लिस्ट में चौथे नंबर पर जगह मिल पाई है. पांचवें नंबर पर अजीत कुमार हैं. जबकि छठे नंबर पर जूनियर एनटीआर और सातवें नंबर पर महेश बाबू हैं. आठवीं पोजिशन राम चरण को मिली है और लिस्ट में 9वें पायदान पर पवन कल्याण हैं. वहीं टॉप 10 मेल स्टार्स की लिस्ट में बॉलीवुड के भाईजान यानी सलमान खान को दसवीं पोजिशन हासिल हुई है.

 

बता दे कि ये लिस्ट एक्स (जिसे पहले ट्विटर के नाम से जाना जाता था) पर पोस्ट की गई है.  विभिन्न क्षेत्रों और भाषाओं में फैले इन सितारों के फैंस अब लिस्ट को देखकर खुश हैं और कमेंट सेक्शन में रिएक्शन भी दे रहे हैं.

 

 



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