सऊदी को 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट देगा US, ट्रंप ने कर ली डील; इजरायल-भारत की क्यों बढ़ी टेंशन?

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की है कि अमेरिका सऊदी अरब को F-35 लड़ाकू विमान बेचेगा. उन्होंने कहा कि ये जेट उन विमानों की तरह ही होंगे जो इजरायल को दिए गए हैं. सऊदी अरब ने औपचारिक रूप से 48 F-35 जेट खरीदने का अनुरोध किया है. यह सौदा पूरा होने पर मध्य पूर्व में इजरायल का F-35 का ‘एकमात्र ऑपरेटर’ होने का दर्जा समाप्त हो जाएगा. वहीं, सऊदी अरब को F-35 लड़ाकू विमान मिलने की खबर से भारत के लिए भी चिंता बढ़ सकती है. इसकी वजह वह रक्षा समझौता है, जिस पर पाकिस्तान और सऊदी अरब ने पहले सहमति बनाई थी और जो वैश्विक स्तर पर काफी चर्चा में रहा.

क्या सऊदी के F-35 से पाकिस्तान को फायदा मिलेगा?
यह बड़ा सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि उस रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तान पर हमला, सऊदी पर हमला माना जाएगा. ऐसे में चिंता यह है कि क्या सऊदी के एडवांस हथियारों, जैसे F-35, का इनडायरेक्ट लाभ पाकिस्तान को मिल सकता है? अमेरिका F-35 जैसे अत्याधुनिक विमानों का निर्यात बहुत सख्त नियंत्रण के साथ करता है. वह इन्हें केवल भरोसेमंद देशों को ही देता है और इसके लिए अन्य साझेदार देशों की सहमति, सुरक्षा गारंटी, ट्रेनिंग और रखरखाव से जुड़े कड़े नियम शामिल होते हैं. इसलिए विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका सऊदी को F-35 देने के बाद उन्हें किसी और देश, खासकर पाकिस्तान को साझा करने की अनुमति देना बहुत बड़ा जोखिम मानेगा.

ट्रंप बोले-दोनों हमारे करीबी साझेदार
व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ बैठे ट्रंप से पूछा गया कि जब अमेरिका इजरायल की सैन्य बढ़त बनाए रखने की नीति का पालन करता है, तो सऊदी को भी F-35 देने का फैसला कैसे लिया गया?

ट्रंप ने जवाब दिया कि इजरायल और सऊदी दोनों ही अमेरिका के ‘करीबी साझेदार’ हैं. उन्होंने मजाक में क्राउन प्रिंस से कहा कि इजरायल चाहता था कि सऊदी को ‘कम क्षमता वाले जेट’ दिए जाएं, ‘लेकिन मुझे नहीं लगता इससे आप खुश होते.’ ट्रंप ने आगे कहा- ‘मेरे हिसाब से दोनों देशों को सबसे बेहतरीन तकनीक मिलनी चाहिए. हम डील करने जा रहे हैं. सऊदी F-35 खरीदेगा.’

क्या F-35 डील का संबंध इजरायल-सऊदी सामान्यीकरण से जुड़ा?
मीडिया ने ट्रंप से पूछा कि क्या यह हथियार सौदा सऊदी अरब और इजरायल के बीच संबंध सामान्य करने की संभावित प्रक्रिया से जुड़ा है? ट्रंप ने सीधा जवाब देने से बचते हुए सिर्फ इतना कहा- ‘इजरायल को डील के बारे में पता है और वे इससे बहुत खुश होंगे.’

सात साल बाद व्हाइट हाउस पहुंचे MBS, हुआ भव्य स्वागत
यह क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की पिछले सात वर्षों में व्हाइट हाउस की पहली यात्रा थी. दक्षिण लॉन पर उनका सैन्य गार्ड ऑफ ऑनर, तोपों की सलामी और अमेरिकी लड़ाकू विमानों की फ्लाईओवर के साथ शानदार स्वागत किया गया.

सऊदी निवेश बढ़ाकर 1 ट्रिलियन डॉलर करने की घोषणा
मुलाकात के दौरान MBS ने बताया कि सऊदी अरब अमेरिका में अपने नियोजित निवेश को 600 अरब डॉलर से बढ़ाकर 1 ट्रिलियन डॉलर कर देगा. ट्रंप ने तुरंत जवाब दिया- ‘अच्छा है, मुझे यह बहुत पसंद आया.’ जब क्राउन प्रिंस से पूछा गया कि कम तेल कीमतों के बावजूद इतने बड़े निवेश को कैसे बनाए रखा जाएगा, तो उन्होंने कहा कि ये सौदे-खासकर सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़े निवेश-सऊदी अरब की दीर्घकालिक विकास योजनाओं का हिस्सा हैं. ट्रंप ने बैठक के दौरान दोहराया कि उनकी व्यापारिक नीतियां और कूटनीति के मिश्रण से साल के अंत तक 21 ट्रिलियन डॉलर के निवेश प्रतिबद्धताएं आ जाएंगी.

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घूंघट की आढ़ में दुल्हन के सामने दूल्हे के दोस्तों ने लौंडा डांस कर उड़ाया गर्दा- वीडियो वायरल

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सोशल मीडिया की दुनिया में हर दिन कुछ न कुछ ऐसा देखने को मिल जाता है, जो लोगों को या तो हंसा-हंसा कर लोटपोट कर देता है या फिर अपनी क्रिएटिविटी से चौंका देता है. लेकिन इस बार जो वीडियो वायरल हो रहा है, उसने शादी-ब्याह की रस्मों में मस्ती, दोस्ती और अनोखे अंदाज का ऐसा तड़का लगाया कि लोग देखते ही दीवाने हो गए. आमतौर पर संगीत सेरमनी में दूल्हा-दुल्हन की परफॉर्मेंस या परिवारजन का डांस चर्चाओं में रहता है, लेकिन यहां स्पॉटलाइट किसी और ने चुरा ली.

संगीत में दूल्हे के दोस्तों ने जमाया रंग

शादी के संगीत समारोह का माहौल हमेशा से ही रंगीन. मस्तीभरा और यादगार बनाने वाला होता है. लेकिन इस बार एक शादी से ऐसा वीडियो वायरल हुआ है जिसने सभी को चौंका दिया है और लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है. वीडियो एक शानदार और रोशनी से जगमगाते संगीत फंक्शन का है जहां दूल्हे के दोस्तों ने सेटेज पर आकर ऐसी परफॉर्मेंस दी कि देखने वाले बस देखते रह गए.

लाल दुपट्टा लेकर डाला घूंघट और जमकर उड़ाया गर्दा

वीडियो में साफ दिखता है कि दूल्हे के चार से पांच दोस्त काली शर्ट पहनकर मंच पर आते हैं. सबके हाथ में एक-एक लाल दुपट्टा है जिसे उन्होंने घूंघट की तरह ओढ़ रखा है. जैसे ही डीजे पर गाना बजता है. ये सभी दोस्त ताल से ताल मिलाते हुए थोड़ी नाजुक अंदाज में. थोड़ी मजाकिया स्टाइल में गजब का डांस शुरू कर देते हैं. शुरुआत में मेहमानों को समझ ही नहीं आता कि घूंघट के पीछे कौन है. लेकिन जैसे ही दोस्तों की हरकतें और डांस मूव्स सामने आते हैं. दर्शकों के बीच जोरदार ठहाके गूंजने लगते हैं.

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यूजर्स ने की तारीफ

वीडियो को kathiyawadiboyz नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट से शेयर किया गया है जिसे अब तक लाखों लोगों ने देखा है तो वहीं कई लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है. ऐसे में सोशल मीडिया यूजर्स वीडियो को लेकर तरह तरह के रिएक्शन दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा…दूल्हे के दोस्तों ने तो रंग जमा दिया. एक और यूजर ने लिखा…महिला संगीत में परिवार होता है तो दोस्तों का क्या काम. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा…क्या बात है, माहौल जमा दिया.

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कौन सा बैंक दे रहा है सबसे सस्ता कार लोन? जानिए टॉप बैंकों की लेटेस्ट ब्याज दरें

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Car Loan Interest Rates India: लगभग हर व्यक्ति की यह इच्छा होती है कि, वो अपनी लाइफ में खुद की कार खरीद सके. लोगों का सपना होता है कि, उनके पास अपना घर और एक कार हो. लेकिन कार की कीमत लाखों रुपए से अधिक होती है. ऐसे में अक्सर देखा जाता है कि, लोग कार खरीदने के लिए बैंक से लोन लेने के ऑप्शन का चुनाव करते हैं. 

बैंक से लिए लोन राशि को लोग ईएमआई के माध्यम से चुकाते हैं. देश के अलग-अलग बैंक विभिन्न ब्याज दरों पर कार लोन उपलब्ध करवाती है. अगर आप भी अपने सपनों की कार खरीदने का विचार करें रहे हैं तो, आपको देश के विभिन्न बैंकों के कार लोन ब्याज दर की जानकारी जरूर लेनी चाहिए. ताकि, आपको किसी तरह का आर्थिक नुकसान ना हो. साथ ही आप एक बेस्ट कार लोन का चुनाव कर सकें. आइए जानते है, बैंकों के लोन रेट के बारे में… 

1. कार लोन के मामले में विभिन्न बैंकों की ब्याज दरें अलग-अलग होती है. आईसीआईसीआई बैंक अपने ग्राहकों को 8.5 प्रतिशत की दर पर कार लोन उपलब्ध करवा रहा है. भारत की सबसे बड़ी सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की कार लोन ब्याज दर 8.75 फीसदी है.  एक्सिस बैंक अपने ग्राहकों को 8.8 प्रतिशत पर कार लोन ऑफर कर रही है. 

2. IDBI बैंक अपने ग्राहकों को 7.95 फीसदी की ब्याज दर पर कार लोन उपलब्ध करवा रहा है. बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) में कार लोन ब्याज दर 8.15 प्रतिशत है. वहीं, केनरा बैंक के कार लोन पर 8.20 प्रतिशत की ब्याज दर लागू है.

3. देश का दिग्गज सरकारी बैंक पंजाब नेशनल बैंक PNB अपने ग्राहकों को 7.85 प्रतिशत की ब्याज दर से कार लोन ऑफर करता है. वहीं, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया अपने ग्राहकों को 7.90 प्रतिशत की ब्याज दर से कार लोन ऑफर कर रही है.

कार लोन लेन से पहले आपको इन सभी बैंकों की ब्याज दरों की तुलना करनी चाहिए. इसके बाद ही फैसला करना चाहिए. कार लोन लेते समय कुछ प्रतिशत की ब्याज दरों में कमी, आपका हजारों रुपए सेव कर सकती है.  

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Gemini 3 हुआ लॉन्च, गूगल ने बताया अपना सबसे इंटेलीजेंट AI मॉडल, कैपेबिलिटीज कर देंगी हैरान

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Google ने आखिरकार Gemini 3 को लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने इसे अपना अब तक का सबसे इंटेलीजेंट AI बताया है और यह ChatGPT 5 और Grok 4 को टक्कर देगा. गूगल का कहना है कि यह इंसानी दिमाग के बराबर गहराई में उतरकर इंफोर्मेशन को इंटरप्रेट कर सकता है. इसे सर्च समेत गूगल के सभी प्लेटफॉर्म पर रोलआउट किया जाएगा. साथ ही यह जेमिनी ऐप में भी सभी यूजर्स के लिए अवेलेबल होगा. हालांकि, यूजर के सब्सक्रिप्शन प्लान के हिसाब से यूज लिमिट अलग-अलग हो सकती है. 

रीजनिंग में जेमिनी 3 की अच्छी पकड़

Gemini 3 की लॉन्चिंग पर गूगल के सीईओ सुंदर पिचई ने कहा कि यह कंपनी के मल्टीमॉडल अंडरस्टैंडिंग, लॉन्ग कॉन्टेक्स्ट एनालिसिस और एजेंटिक बिहेवियर को एक ही सिस्टम में ला रहा है. यह रीजनिंग में माहिर है और इंसानों की तरह गहराई और बातों के नाजुक फर्क को समझ सकता है. उन्होंने बताया कि यह मॉडल आपकी रिक्वेस्ट के पीछे के कॉन्टेक्स्ट के साथ-साथ इंटेन्शन को भी समझ लेगा, जिससे इसे लंबे प्रॉम्प्ट की जरूरत नहीं पड़ेगी. 

ये हैं Gemini 3 की कैपेबिलिटी

गूगल ने बताया कि उसका नया मॉडल अलग-अलग टाइप के कंटेट को एनालाइज कर समझ सकता है. फिर चाहे वह हाथ से लिखे नोट्स हों, लंबे रिसर्च पेपर हों या लंबे वीडियो लेक्चर. जेमिनी को इनमें से किसी को भी समझने में दिक्कत नहीं होगी. इसका फायदा उठाकर यूजर अपने घर में लिखी किसी रेसिपी को डिजिटल फॉर्मेट में बदल सकेंगे. वहीं स्टूडेंट्स भी लंबे एकेडेमिक रिसर्च पेपर से अपनी सहूलियत के हिसाब से नोट्स तैयार कर सकेंगे. गूगल ने यह भी बताया कि AI मॉडल की एनालिटिकल डेप्थ मेजर करने वाले कई एकेडेमिक और सिंथेटिक टेस्ट पर Gemini 3 ने शानदार परफॉर्म किया है. इस मॉडल की वजह से गूगल सर्च का AI मोड और दमदार होने वाला है. यह मॉडल AI मोड में डायनामिक विजुअल लेआउट, सिम्युलेशन और इंटरेक्टिव टूल-बेस्ड रिजल्ट शो करेगा.

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अपनी अंदर की शक्ति पहचानो, दुनिया खुद बदल जाएगी, जानें विवेकानंद का जीवन बदलने वाला संदेश

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Swami Vivekananda: स्वामी विवेकानंद कहते थे जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते, तब तक आप भगवान पर विश्वास नहीं कर सकते. यह वचन हमें भीतर झांकने की प्रेरणा देता है. हममें से अधिकतर लोग ईश्वर को बाहर खोजते है. मंदिरों में, ग्रंथों में या कर्मकांडों में खोजते हैं.

विवेकानंद हमें बताते हैं कि ईश्वर कहीं बाहर नहीं, बल्कि हमारे भीतर है. हर आत्मा में ईश्वर का अंश है. जब हम इस सत्य को पहचान लेते हैं, तब आत्मविश्वास ही भक्ति का रूप बन जाता है.

अपनी ताकत पहचानों, डर को छोड़ो

स्वामी विवेकानंद के अनुसार खुद पर भरोसा करना ही ईश्वर की सच्ची आराधना है, क्योंकि जो अपने भीतर के बल को जानता है. वही सृजन और परिवर्तन का पात्र बनता है. वे कहते थे अपने  भीतर की शक्ति को पहचानो, डर को छोड़ो. खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है.

कमज़ोरी मनुष्य को पीछे धकेलती है, जबकि आत्मविश्वास उसे आगे बढ़ाता है. उनके अनुसार जीवन में सफलता पाने का मार्ग तभी खुलता है जब हम अपनी भीतरी शक्ति को पहचानते हैं. जब मनुष्य को यह अनुभव होता है कि उसके भीतर असीम सामर्थ्य है, तो भय, संदेह और असफलता स्वतः समाप्त हो जाते हैं.

स्वामी विवेकानंद का प्रेरक संदेश

विवेकानंद का मानना था कि  शक्ति जीवन है, निर्बलता मृत्यु है. प्रेम जीवन है, द्वेष मृत्यु है. ईश्वर उन्हीं के साथ है जो अपने कर्म और विचारों से आगे बढ़ने का साहस रखते हैं. उनका सबसे महत्वपूर्ण उपदेश जो आज भी युवाओं को प्रेरित करता है.

वे उस समय युवाओं को प्रेरित कर कहते थे कि उठो, जागो और अपने भाग्य के निर्माता बनो. स्वामी विवेकानंद ने कहा-उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए. यह संदेश केवल युवाओं के लिए नहीं, हर उस व्यक्ति के लिए है जो जीवन में ठहर गया है.

अंदरूनी ईश्वर और सच्ची भक्ति

उनके अनुसार हम जो बोते हैं, वही काटते हैं. इसलिए हमें कर्म, विश्वास और आत्मचिंतन के बीज बोने चाहिए. जो अपने भीतर के ईश्वर को पहचान लेता है. वह अपने जीवन का निर्माता बन जाता है. विवेकानंद का यह संदेश आज भी हर दिल को प्रेरित करता है.  यही सच्ची भक्ति है, यही जीवन का धर्म है, यही ईश्वर का साक्षात्कार है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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ASP या DCP पुलिस के दो बड़े अधिकारियों में किसके पास होती है ज्यादा पावर, जानें दोनों के अधिकार

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अक्सर लोगों के मन में ये सवाल जरूर उठता है कि पुलिस विभाग में ASP और DCP जैसे बड़े अधिकारी आखिर किस स्तर की ताकत रखते हैं और इन दोनों में कौन ज्यादा पावरफुल माना जाता है फिल्मों और न्यूज़ में हम अक्सर इन रैंक को देखते हैं, लेकिन असल ज़िंदगी में इनके अधिकार और जिम्मेदारियां क्या होती हैं, यह कम ही लोग जानते हैं आज हम आपको बताएंगे कि ASP और DCP के बीच क्या अंतर है, किसके पास ज्यादा अधिकार होते हैं.

DCP के अधिकार और जिम्मेदारियां

DCP अपने क्षेत्र में पुलिस की पूरी कमान संभालते हैं भीड़ नियंत्रित करना, अपराध रोकना, सुरक्षा बनाए रखना इन सबकी अंतिम जिम्मेदारी DCP पर होती है कमिश्नरी सिस्टम में पुलिस कमिश्नर सबसे बड़ा अधिकारी होता है, और DCP सीधे उन्हें रिपोर्ट करता है इसका मतलब है कि DCP का फैसला काफी मायने रखता है और उसके पास काफी स्वतंत्र अधिकार होते हैं.

जहां जनसंख्या ज्यादा होती है और अपराध का ग्राफ बड़ा होता है, वहां DCP का रोल और भी अहम हो जाता है वे अपने ज़ोन या जिले का पूरा नेतृत्व करते हैं, और ACP तथा इंस्पेक्टर जैसे अधिकारी उनके अधीन काम करते हैं.

ASP पर जिम्मा?

ASP की पदवी उन जिलों में होती है, जहां कमिश्नरी सिस्टम नहीं लागू है यह रैंक SP से नीचे लेकिन DSP से ऊपर होती है ASP का काम SP (Superintendent of Police) को उनके रोज़मर्रा के कार्यों में सहायता करना होता है वे कानून व्यवस्था, जांच और प्रशासनिक कार्य में SP को सपोर्ट करते हैं ASP हर काम की रिपोर्ट SP को ही देते हैं उनके द्वारा दिए गए आदेशों को लागू करना भी ASP की जिम्मेदारी होती है हालांकि ASP पूरे जिले का प्रमुख नहीं होता, लेकिन जिले की कई महत्वपूर्ण शाखाएं- जैसे क्राइम, ट्रैफिक, रूरल पुलिस उनकी देखरेख में होती हैं.

दोनों के बीच अंतर?

DCP कमिश्नरी वाले शहरों में होता है, जहां पुलिस को अधिक अधिकार और स्वायत्तता मिली होती है। ASP उन जिलों में होता है जहां पारंपरिक पुलिस सिस्टम लागू है और प्रशासनिक फैसलों में जिला कलेक्टर की बड़ी भूमिका होती है

DCP, ASP से एक सीनियर रैंक माना जाता है ASP, SP के अधीन होता है, जबकि DCP के ऊपर सिर्फ पुलिस कमिश्नर होता है DCP एक बड़े शहरी क्षेत्र या पूरे जोन की कमान संभालता है ASP सिर्फ SP की सहायता करता है और कुछ खास क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभालता है.

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सुपर्ण एस. वर्मा का साक्षात्कार | ‘हक़’ फ़िल्म | जासूस से फ़िल्म निर्माता तक | निर्देशक का दृष्टिकोण और बहुत कुछ

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<p>Ent Live को दिए interview में Film director Suparn S Varma &nbsp;reviews के positive और negative होने के matter पर बोले की उनके पास इतना budget नहीं है की वो reviews के लिए spend करें।Suparn ने कहा कि वो critic रहे हैं और उनकी sister भी critic रहीं हैं उनकी पूरी family journalism से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि एक honesty हर critic में होती है अगर film अच्छी है तो वो कहेगा की अच्छी है अगर बुरी है तो कभी straight forwardly बुरी कहेगा या उसे balance करते हुए बता देगा but end of the day आपको judgement aurdience से ही पता लगता है। हमने इतना emotional outcome aurdience से expect नहीं किया था हम एक normal theatre visit पर गए थे और जब ये सब Yami ने देखा तो वो भी काफी emotional हो गईं और उन्हें time लगा to collect herself. और ये सिर्फ एक particular religion के लिए नहीं है हर religion में लगभग सेम conditions है ladies तब भी mens world में survive कर रहीं थीं आज भी कर रहीं हैं।suparn ने कहा की वो Yami और Emraan बहुत thanks करते हैं aurdience का film को इतना support करने के लिए.</p>

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Explained: शेख हसीना को वापस नहीं लौटाएगा भारत! आखिर क्यों जरूरी हैं बांग्लादेश की पूर्व PM?

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17 नवंबर को इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल (ICT) कोर्ट ने बांग्लादेश की पूर्व PM शेख हसीना को मौत की सजा सुनाई. वह 2024 से भारत में पनाह ली हुई हैं. बांग्लादेश लगातार भारत पर शेख हसीना को वापस करने का दबाव बनाता रहा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत हसीना को वापस नहीं करना चाहेगा, फिर चाहे मोहम्मद यूनुस से दुश्मनी हो जाए. इसके लिए भारत प्रत्यर्पण संधि का हवाला दे सकता है. ABP एक्सप्लेनर में समझते हैं कि यह ट्रीटी क्या है, भारत क्यों किसी भी कीमत पर शेख हसीना को नहीं लौटाएगा और इसके नतीजे क्या होंगे…

सवाल 1- भारत-बांग्लादेश के बीच 2013 में हुई संधि क्या है?
जवाब- 28 जनवरी 2013 को भारत और बांग्लादेश के बीच प्रत्यर्पण संधि हुई थी. फिर 2016 में इसमें संशोधन हुआ, जो आज भी पूरी तरह लागू है. इसके तहत-

  1. दोनों देश एक-दूसरे को अपराधी सौंपेंगे.
  2. आतंकवाद, हत्या, अपहरण, ड्रग तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर अपराधों में प्रत्यर्पण होगा.
  3. अगर कोई राजनीतिक अपराध करता है तो प्रत्यर्पण नहीं होगा.
  4. अगर अपराधी को उसके देश में मौत की सजा हो सकती है, तो सौंपने से पहले लिखित गारंटी लेनी होगी कि फांसी नहीं दी जाएगी.
  5. झूठे या राजनीतिक बदले की भावना से बनाए केस में प्रत्यर्पण से मना किया जा सकता है.

2016 में संधि में संशोधन किया गया, जिससे प्रक्रिया को बहुत आसान और तेज बनाया गया. यानी अब प्रत्यर्पण मांगने के लिए पूरे सबूत देने की जरूरत नहीं है. सिर्फ उस व्यक्ति के खिलाफ किसी सक्षम कोर्ट का गिरफ्तारी वारंट दिखाना काफी है.

इस संधि के तहत उल्फा नेता अनूप चेतिया को बांग्लादेश ने 17 साल बाद 2016 में भारत को सौंपा था. वहीं, 1975 में शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान की हत्या में शामिल 2 दोषियों को 2020 में भारत ने बांग्लादेश को सौंपा था.

9 जुलाई 2025 को युनुस सरकार ने भारत से शेख हसीना को वापस भेजने की मांग की लेकिन भारत ने ऑफिशियली कोई जवाब नहीं दिया. अब शेख हसीना को मौत की सजा मिलने के बाद बांग्लादेश प्रत्यर्ण के लिए फिर दबाव बनाएगा.

सवाल 2- इस संधि में ऐसा क्या है, जिससे भारत शेख हसीना की वापसी से इनकार सकता है?

जवाब- इस संधि में प्रत्यर्पण को अनिवार्य नहीं बनाया गया है. संधि साफतौर पर कई अपवादों की इजाजत देती है, जिनके तहत भारत शेख हसीना के प्रत्यर्पण से इनकार कर सकता है…

1. आर्टिक 6- राजनीतिक अपराध का आधार

  • संधि कहती है कि प्रत्यर्पण से मना किया जा सकता है अगर अपराध ‘राजनीति के लिए’ किया गया हो. शेख हसीना के केस में ICT के ट्रायल को भारत ‘राजनीतिक बदला’ मान सकता है, जिसमें हसीना को ‘मास्टरमाइंड’ कहा गया था. हसीना ने खुद इसे बायस्ड और पॉलिटिकली मोटिवेटेड बताया है.
  • बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने हसीने के विरोधियों के साथ मिलकर यह ट्रायल चलाया, जो राजनीतिक लगता है. संधि में हत्या और टॉर्चर जैसी कुछ गंभीर अपराधों को राजनीतिक नहीं माना जाता, लेकिन अगर पूरा केस राजनीतिक संदर्भ में हो, तो भारत इनकार कर सकता है. जैसे हसीना को हटाकर सत्ता परिवर्तन किया गया. भारत का एक्स्ट्राडिशन एक्ट 1962 की धारा 29 भी इसकी इजाजत देती है.

2. आर्टिकल 8- न्याय के हित में न होने का आधार

  • संधि के आर्टिकल 8 के तहत अगर आरोपी की जान को खतरा हो, उसे निष्पक्ष ट्रायल नहीं मिला हो या ट्रिब्यूनल का उद्देश्य न्याय नहीं, बल्कि राजनीतिक हो, तो भारत प्रत्यर्पण से मना कर सकता है. भारत यह सब आसानी से दिखा सकता है.
  • शेख हसीना के केस में उनके बिना ही ट्रायल हुआ, जो जल्दबाजी में पूरा किया गया. हसीना को वकील नहीं मिला, 1400 मौतों पर अंतर्राष्ट्रीय संगठन चिंता जता चुके हैं, हसीना खुद इसे राजनीतिक साजिश बता रही हैं और कई रिपोर्ट्स के मुताबिक जजों पर सरकारी दबाव भी बना, जो कंगारू कोर्ट जैसा लगता है. भारत इसे अन्यायपूर्ण या दमनकारी मान सकता है. अगर भारत को लगे कि यह ट्रायल सत्ता हथियाने या भारत-विरोधी ताकतों का हिस्सा है, तो इनकार वैध होगा.

सवाल 3- भारत किसी भी कीमत पर शेख हसीना को वापस क्यों नहीं करेगा?

जवाब- 17 नवंबर को भारत के विदेश मंत्रालय ने सिर्फ इतना कहा कि वह किसी प्रत्यर्पण के वादे के ‘बांग्लादेश के लोगों के सर्वोत्तम हित’ में काम करेगा. यानी भारत किसी भी कीमत पर शेख हसीना को वापस सौंपना नहीं चाहता है. इसकी 3 बड़ी वजहें हैं…

  1. विदेश मामलों के जानकार और JNU के प्रो. राजन कुमार कहते हैं, ‘बांग्लादेश में सत्तापलट के बाद से वहां कट्टरपंथी ताकतों का प्रभाव बढ़ गया है, जो पाकिस्तान से हमदर्दी रखते हैं. शेख हसीना को पनाह देने की वजह से वहां एंटी इंडिया सेंटिमेंट बढ़ेगा, जिसका सीधा असर भारत के बॉर्डर इलाकों की शांति और स्थिरता पर पडे़गा.’
  2. शेख हसीना की 15 साल की सरकार ने भारत के साथ गहरे रिश्ते बनाए. नॉर्थ-ईस्ट में उग्रवादियों (उल्फा और NSCN) का प्रत्यर्पण, तस्करी रोना और चीन के प्रभाव को सीमित रखना. अगर भारत उन्हें सौंपता है, तो बांग्लादेश में अस्थिरता बढ़ेगी. इससे भारत को सीमा सुरक्षा का नुकसान हो सकता है.
  3. भारत में सत्ता और विपक्ष दोनों हसीना को समर्थन देते हैं. अगर प्रत्यर्पण हुआ तो बांग्लादेश के साथ संबंध तनावपूर्ण हो जाएंगे. लेकिन इनकार से संबंध टूटेंगे नहीं, क्योंकि भारत आर्थिक रूप से मजबूत है.

फिलहाल शेख हसीना भारत में ही रहेंगी. भारत सरकार ने उनका वीजा बढ़ा दिया है और सुप्रीम कोर्ट में आर्टिकल 21 (जीवन का अधिकार) के तहत सुरक्षा मांग सकती है. प्रत्यर्पण संधि भारत को ‘डिप्लोमैटिक टाइटरोप’ पर चलने की आजादी देती है. यानी प्रत्यर्पण से फायदा कम और नुकसान ज्यादा है.

सवाल 4- शेख हसीना को वापस न करने पर भारत-बांग्लादेश में तनाव बढ़ेगा, नतीजे क्या होंगे?

जवाब- डॉ. राजन कुमार के मुताबिक, भारत का हसीना को वापस न करना द्विपक्षीय संबंधों को कमजोर कर सकता है, लेकिन भारत की रणनीतिक मजबूती के कारण कोई बड़ा युद्ध जैसा संकट नहीं है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, तनाव बढ़ने के 4 बड़े नतीजे होंगे…

1. राजनीतिक रिश्तों में गहरी दरार और कूटनीतिक अलगाव

  • बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पहले से ही भारत विरोधी रुख अपना रही है. प्रत्यर्पण से इनकार को वह ‘एक्स्ट्रीमली अनफ्रेंडली एक्ट’ और ‘न्याय की अवहेलना’ बताएंगे. इसमें द्विपक्षीय मीटिंग्स रद्द हो सकती है और बांग्लादेश भारत को ‘प्रभुत्ववादी शक्ति’ के रूप में प्रेजेंट करेगा.
  • इससे भारत और बांग्लादेश के रिश्ते नाजुक हो जाएंगे, जो पहले से ही 2024 के बाद से टूटने की कगार पर हैं. फरवरी 2026 के बांग्लादेश चुनावों के बाद नई सरकार और ज्यादा भारत विरोधी हो सकती है. भारत को SAARC या BIMSTEC जैसे क्षेत्रीय मंचों पर अलग-थलग महसूस हो सकता है.

2. सीमा सुरक्षा और अवैध प्रवास में इजाफा

  • भारत और बांग्लादेश के बीच 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा पहले ही तस्करी और घुसपैठ का केंद्र है. तनाव से बॉर्डर पर तैनाती बढ़ेगी, लेकिन सहयोग कम होगा. जॉइंट पेट्रोलिंग भी रुक सकती है. बांग्लादेश हसीना समर्थकों को ‘भारतीय एजेंट’ बताकर सीमा पर हिंसा भड़का सकता है.
  • भारत के असम, त्रिपुरा और मेघालय जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ बढ़ सकती है, जो स्थानीय असंतोष को भड़काएगी. 2024 के बाद से ही बॉर्डर पर हिंसा 30% बढ़ चुकी है.

3. आर्थिक सहयोग और व्यापार में कमी

  • बांग्लादेश भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. 2024 में दोनों देशों के बीच 14 बिलियन डॉलर का व्यापार हुआ. तनाव से गारमेंट्स दवाइयां और बिजली निर्यात प्रभावित होंगे. बांग्लादेश ऊर्जा और कनेक्टिविटी के लिए भारत पर निर्भर है. फिर वह ‘बॉयकॉट इंडिया’ कैंपेन चला सकते हैं.
  • भारत के पूर्वोत्तर में बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स रुक सकते हैं, जिनमें अखौरा-अगरतला रेल प्रोजेक्ट भी शामिल है. बांग्लादेश की पहले से बिगड़ी हुई अर्थव्यवस्था ज्यादा बिगड़ेगी. भारत को भी करीब 2 से 3 बिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है.

4. क्षेत्रीय और वैश्विक कूटनीति पर असर

  • बांग्लादेश पहले ही पाकिस्तान और चीन के साथ करीब हो रहा है, जो भारत को घेरने की फिराक में हैं. तनाव बढ़ने से क्वाड या IORA जैसे फोरम प्रभावित होंगे. भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ पॉलिसी कमजोर पड़ेगी.
  • कूटनीतिक बयानबाजी बढ़ेगी और तनाव बढ़कर चीन-पाकिस्तान के पाले में ‘स्ट्रैटजिक शिफ्ट’ की तरफ जा सकता है. यह भारत के लिए सबसे खतरनाक स्थिति होगी.
  • इसी महीने पाकिस्तान का युद्धपोत बांग्लादेश पहुंचा था. चीन के साथ भी रिश्ते मजबूत होने से भारत को पूर्वोत्तर से लेकर बंगाल की खाड़ी तक असुरक्षा बनी रहेगी.
  • अमेरिका और यूरोप हसीना के मानवाधिकार रिकॉर्ड पर दबाव डाल सकते हैं, लेकिन भारत को समर्थन मिलेगा क्योंकि बांग्लादेश का ट्रायल ‘वेंडेटा पॉलिटिक्स’ माना जा रहा है. बांग्लादेश की अस्थिरता भारत के लिए शरणार्थी संकट पैदा कर सकती है.

सवाल 5- शेख हसीना को किन आरोपों में सजा मिली और आगे क्या रास्ता बचा है?
जवाब- ICT कोर्ट में शेख हसीना पर 5 आरोप लगाए गए…

  • भड़काऊ भाषण देना.
  • प्रदर्शनकारियों को दबाने और खत्म करने के लिए घातक हथियारों के इस्तेमाल का आदेश देना.
  • रंगपुर में बेगम रोकेया विश्वविद्यालय के छात्र अबू सईद की गोली मारकर हत्या.
  • ढाका के चंखरपुल क्षेत्र में छह प्रदर्शनकारियों की गोली मारकर हत्या.
  • अशुलिया में छह लोगों को जलाकर मार डाला गया.

डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, शेख हसीना को सभी आरोपों में दोषी ठहराया गया है. उन्हें पिछले साल 5 अगस्त को चंखरपुल में छह निहत्थे प्रदर्शनकारियों की गोली मारकर हत्या करने के मामले में धारा 4 के तहत मृत्युदंड दिया गया.

शेख हसीना ट्रिब्यूनल के फैसले को बांग्लादेश की ऊपरी अदालत में चुनौती दे सकती हैं. वह सबूतों की दोबारा जांच और अनफेयर ट्रायल का हवाला देकर रिव्यू करने की मांग कर सकती हैं. इसके अलावा हसीना भारत या किसी और देश में ‘उनके जान को खतरा है’ का हवाला देकर शरण या सुरक्षा मांग सकती हैं.

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टर्निंग पिच को लेकर सवाल उठाने वालों पर बरसे भुवनेश्वर कुमार, बोले- जब भारत जीत रहा था तब पिच..

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भारतीय तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार का मानना ​​है कि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट मैच के लिए ईडन गार्डन्स में स्पिन के अनुकूल पिच तैयार करने पर बहस बेमानी है, क्योंकि देश लंबे समय से ऐसे विकेट तैयार करता आ रहा है. भारत को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीन दिन के अंदर 30 रन से हार का सामना करना पड़ा जब टीम 124 रन के मामूली लक्ष्य का पीछा करने में नाकाम रही. 

कोलकाता में दक्षिण अफ्रीका से मिली हार पिछले साल न्यूजीलैंड के हाथों 0-3 से मिली हार की याद दिलाती है जहां मेहमान टीम के स्पिनरों ने रोहित शर्मा की टीम के खिलाफ ऐतिहासिक क्लीन स्वीप में अहम भूमिका निभाई थी. हालाकि भुवनेश्वर ने इस हार को अधिक तवज्जो नहीं दी.

‘क्रिकगिरी’ के सह-संस्थापक भुवनेश्वर ने इस ऐप के लॉन्च कार्यक्रम के दौरान कहा, “यह पहली बार नहीं है जब स्पिनरों के लिए मददगार पिच तैयार की गई है. इससे पहले किसी ने यह सवाल नहीं उठाया, क्योंकि भारत जीत रहा था और हार-जीत खेल का हिस्सा है. ऐसा नहीं है कि टीम पहले नहीं हारी है या पहली बार हारी है. मुझे नहीं लगता कि यह (हार) मेरे लिए कोई बड़ी चिंता का विषय है.”

यह पूछे जाने पर कि क्या भारत के लिए ईडन पर चार स्पिनरों के साथ खेलना जरूरी था तो भुवनेश्वर ने कहा कि पिच की स्थिति के आधार पर चयन किया जाता है. कप्तान शुभमन गिल को गर्दन में ऐंठन के कारण कोलकाता टेस्ट के बीच से हटना पड़ा जो भारत के लिए एक बड़ा झटका था लेकिन भुवनेश्वर ने युवा कप्तान के कार्यभार प्रबंधन पर बात करने से इनकार कर दिया.

आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) की ओर से खेलने वाले भुवनेश्वर से जब यह पूछा गया कि क्या इस साल एम चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर मची भगदड़ में कई प्रशंसकों की मौत के बाद खिलाड़ी सकारात्मक सोच के साथ मैदान पर उतर पाएंगे तो उन्होंने कहा, “आईपीएल से पहले कई टूर्नामेंट होने हैं, इसलिए जब आईपीएल कैम्प शुरू होगा तो कई बातों पर चर्चा होगी और टीम किस मानसिक स्थिति में है और क्या चल रहा है. बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि खिलाड़ी आईपीएल से पहले के टूर्नामेंटों में कैसा प्रदर्शन करते हैं और आईपीएल में कैसे प्रवेश करते हैं इसलिए ये सभी बातें मायने रखती हैं.”

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