रूस ने मिसाइल और ड्रोन से यूक्रेन पर किया घातक अटैक, परमाणु ठिकानों को बनाया निशाना

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रूस और यूक्रेन के बीच बीते 3 सालों से युद्ध चल रहा है. इस बीच दोनों देश की सेना एक-दूसरे पर हमला करती रहती है. रूस ने शुक्रवार (7 नवंबर 2025) रात से शनिवार (8 नवंबर 2025) की सुबह तक ड्रोन और मिसाइलों से भीषण हमला किया. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक रूसी हमले में दो परमाणु ऊर्जा संयंत्रों खमेलनित्सकी और रिव्ने को बिजली देने वाले सबस्टेशनों को निशाना बनाया गया.

मामले पर यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा ने कहा, ”ये हमले गलती से नहीं किए गए थे. रूस ने जानबूझकर यूरोप में परमाणु सुरक्षा को खतरे में डाला है.” हमलों में कम से कम सात लोगों की मौत और कई घायल हुए हैं. नीपर शहर में एक ड्रोन के आवासीय इमारत पर गिरने से तीन लोगों की मौत हुई, जबकि ज़ापोरिज्जिया में तीन और खार्किव में एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है.

प्रधानमंत्री यूलिया स्विरीडेंको ने बताया कि हमलों के कारण कीव, पोल्टावा और खार्किव क्षेत्रों में ऊर्जा अवसंरचना को भारी नुकसान पहुंचा है. हज़ारों घरों में बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित हुई है. पोल्टावा के अधिकारियों ने कहा कि पानी उपलब्ध कराने के लिए बिजली जनरेटरों का सहारा लिया जा रहा है. सरकारी ऊर्जा कंपनी त्सेंट्रेनेर्गो ने इसे फरवरी 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से सबसे बड़ा हमला बताया. कंपनी ने कहा कि दुश्मन देश ने एक ही समय में हमारी सभी उत्पादन क्षमताओं पर हमला किया है. हमारे संयंत्रों में आग लगी है. बिजली उत्पादन जीरो हो गया है. त्सेंट्रेनेर्गो यूक्रेन की कुल बिजली का लगभग 8% उत्पादन करती है, इसलिए इन हमलों से राष्ट्रीय पावर ग्रिड पर भारी असर पड़ा है.

परमाणु सुरक्षा को लेकर चिंता, IAEA की बैठक की मांग

विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा ने अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की तत्काल बैठक बुलाने की मांग की. उन्होंने चीन और भारत से अपील की कि वे रूस पर दबाव डालें ताकि वह ऐसे हमले बंद करें, जो किसी भी समय विनाशकारी परमाणु दुर्घटना का कारण बन सकते हैं. याद रहे कि रूस ने पहले भी ज़ापोरिज्जिया परमाणु संयंत्र के पास गोलाबारी की थी, जिससे यूरोप में रेडिएशन खतरे की स्थिति बन गई थी.

रूस ने दी सफाई ये जवाबी हमले थे

रूस के रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि यह हमला कीव की तरफ से रूस के अंदर किए गए ड्रोन हमलों के जवाब में किया गया है. मंत्रालय ने कहा कि रूस ने हथियार उत्पादन इकाइयों, गैस और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर उच्च-सटीक लंबी दूरी के हवाई, जमीनी और समुद्री हथियारों से हमला किया. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर और कठोर प्रतिबंध लगाए जाएं. ज़ेलेंस्की ने यह भी कहा कि रूस ने केवल एक रात में 450 ड्रोन और 45 मिसाइलें दागीं. यूक्रेनी वायुसेना ने दावा किया कि उसने इनमें से 406 ड्रोन और 9 मिसाइलें मार गिराई, लेकिन 26 मिसाइल और 52 ड्रोन 25 ठिकानों पर गिरे.

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‘तेरा करियर बिगाड़ दूंगा…’, जब अमिताभ बच्चन ने दे दी थी संगीतकार शंकर महादेवन को धमकी

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बॉलीवुड के ‘शहंशाह’ अमिताभ बच्चन करीब 6 दशकों से अपनी एक्टिंग के जरिए लोगों का दिल जीत रहे हैं. उनकी ना सिर्फ अदाकारी फैंस को पसंद आती है बल्कि उनका शांत स्वभाव और रौबिली आवाज के भी करोड़ों लोग दीवाने हैं. लेकिन हाल ही में नेशनल अवॉर्ड विनर संगीतकार शंकर महादेवन ने एक्टर को लेकर ऐसा खुलासा किया है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह गया है. जानिए पूरा मामला क्या है.

शंकर महादेवन ने सुनाया कजरा रेगाने का किस्सा

दरअसल ये किस्सा साल 2005 का है. जब अमिताभ बच्चन, अभिषेक बच्चन और रानी मुखर्जी की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘बंटी और बबली’ आई थी. इस फिल्म में बिग ने बेटे अभिषेक और ऐश्वर्या राय संग एक आइकॉनिक गाना ‘कजरा रे’ भी किया था. इसी का किस्सा शंकर महादेवन ने हाल ही में शेयर किया. संगीतकार ने ‘ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे’ के पॉडकास्ट में इसको लेकर बात की और कहा कि उस वक्त बिग बी ने उन्हें करियर बिगाड़ने की धमकी दी थी.

जानिए क्यों गुस्सा हुए थे बिग बी?

शंकर महादेवन ने बताया कि, ‘मैंने अमिताभ बच्चन के लिए इस गाने का एक रफ वर्जन डब किया था ताकि वो आकर अपनी आवाज रिकॉर्ड कर सकें, क्योंकि जावेद अली ने अभिषेक के लिए गाया था और उनके हिस्से मैंने किए थे. ऐसे में मैंने उनको डबिंग के लिए कहा था. तो उन्होंने कहा, ‘मैं उसमें क्या डब करूं?’ मैंने कहा, ‘सर, मैंने आपके हिस्से डब करने के लिए रख लिए हैं.’ फिर बिग बी ने कहा, ‘नहीं, ये ऐसे ही होगा. तू उसको हाथ लगाया तो देखना, मैं तेरा करियर बिगाड़ दूंगा.’

बिग बी को पसंद आया था रफ वर्जन

दरअसल बिग बी ने शंकर महादेवन को ये सिर्फ मजाक में कहा था. उन्होंने कहा अमिताभ सर को उनका रफ डब किया गया वर्जन इतना पसंद आया था, कि वो उसे बिल्कुल नहीं बदलना चाहते थे. इसलिए रफ वर्जन ही गाने का फाइनल पार्ट बन गया था. बता दें कि गाने को वैभवी मर्चेंट द्वारा कोरियोग्राफ किया गया था.

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टॉप 5 क्रिकेटर जिन्होंने जीते सबसे ज्यादा ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ अवॉर्ड्स, भारत के दो दिग्गज पर

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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में किसी खिलाड़ी की निरंतरता और मैच पर पकड़ का सबसे बड़ा सबूत होता है, ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज़’ अवॉर्ड. यह सम्मान उस खिलाड़ी को दिया जाता है जो पूरी सीरीज में टीम के लिए सबसे ज्यादा प्रभावी प्रदर्शन करे. आइए जानते हैं उन टॉप 5 क्रिकेटरों के बारे में जिन्होंने तीनों फॉर्मेट (टेस्ट, ODI, T20I) में सबसे ज्यादा बार यह अवॉर्ड अपने नाम किया है.

विराट कोहली – भारत

भारतीय रन मशीन विराट कोहली इस लिस्ट में सबसे ऊपर हैं. साल 2008 से अब तक खेले गए 553 मैचों और 167 सीरीज में उन्होंने 21 बार ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ अवॉर्ड अपने नाम किया है. टेस्ट में 3, वनडे में 11 और टी20 में 7 बार उन्हें यह सम्मान मिला. कोहली का निरंतर प्रदर्शन और जीत की भूख उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है.

सचिन तेंदुलकर – भारत

‘क्रिकेट के भगवान’ सचिन तेंदुलकर भले ही अब खेल से दूर हों, लेकिन रिकॉर्ड्स की बात हो और उनका नाम न आए ऐसा हो ही नहीं सकता. उन्होंने 1989 से 2013 के बीच 20 बार ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ अवॉर्ड जीता, जिनमें 5 टेस्ट और 15 वनडे सीरीज शामिल हैं. यह दिखाता है कि दो दशकों तक उन्होंने किस तरह क्रिकेट पर राज किया है.

शाकिब अल हसन – बांग्लादेश

बांग्लादेश के स्टार ऑलराउंडर शाकिब अल हसन इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर हैं. उन्होंने 162 सीरीज में से 17 बार यह अवॉर्ड जीता है. शाकिब बल्ले और गेंद  दोनों से मैच बदलने की क्षमता रखते हैं. 5 टेस्ट, 7 वनडे और 5 टी20 सीरीज में उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की है.

जैक कैलिस – दक्षिण अफ्रीका

दुनिया के महानतम ऑलराउंडर्स में से एक जैक कैलिस का नाम भी इस लिस्ट में शुमार है. उन्होंने अपने करियर में 519 मैचों और 148 सीरीज में खेलते हुए 15 बार यह अवॉर्ड जीता. टेस्ट और वनडे दोनों में उन्होंने अपनी क्लास से मैचों का रुख पलट दिया.

डेविड वॉर्नर – ऑस्ट्रेलिया

इस लिस्ट में पांचवें नंबर पर हैं ऑस्ट्रेलिया के विस्फोटक ओपनर डेविड वॉर्नर.  उन्होंने अब तक 383 मैचों और 126 सीरीज में 13 बार ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ का सम्मान जीता है. उनकी आक्रामक बल्लेबाजी हर फॉर्मेट में ऑस्ट्रेलिया की ताकत रही है.

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हे भगवान! 69 हजार रुपये का सेफ्टी पिन, प्राडा ने अपने इस आइटम से सोशल मीडिया पर मचाया हंगामा

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सोशल मीडिया इन दिनों एक ऐसी चीज को लेकर गूंज रहा है, जिसे देखकर किसी को हंसी आ रही है, तो किसी को हैरानी. मशहूर लक्जरी ब्रांड Prada ने एक ऐसी चीज लॉन्च की है, जो हर घर में आसानी से मिल जाती है,सेफ्टी पिन. फर्क बस इतना है कि Prada की यह पिन किसी बाजार के पैकेट में नहीं, बल्कि लक्जरी प्रोडक्ट लिस्ट में शामिल है और इसकी कीमत रखी गई है 68,700 रुपये!

सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा 69000 रुपये का सेफ्टी पिन!

दरअसल, ब्रांड ने इसका नाम रखा है “Crochet Safety Pin Brooch”, जिसमें धातु की बनी एक पिन पर रंग-बिरंगे धागों की क्रोशे लपेटी गई है और उस पर प्राडा का छोटा-सा लोगो लगा है. बस, यही लोगो इस पिन को लक्जरी एक्सेसरी बना देता है. कंपनी के मुताबिक यह “फैशन का नया स्टाइल स्टेटमेंट” है, लेकिन इंटरनेट यूजर्स को ये बात हजम नहीं हो रही. जैसे ही इसकी कीमत और तस्वीरें ऑनलाइन आईं, एक्स और इंस्टाग्राम पर मजेदार रिएक्शन्स की बाढ़ आ गई. एक यूजर ने लिखा, “मुझे तो ये 5 रुपये में मिल जाएगी, बस Prada का टैग हटा दो!” वहीं एक और ने तंज कसा, “मेरी दादी इससे बेहतर बना देंगी, वो भी फ्री में!”

क्यों है इतना महंगा?

जब हम रोज-रोज इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं को लक्जरी ब्रांड नाम के साथ देखते हैं, तो कीमत सिर्फ उस वस्तु के मटेरियल या उपयोग पर नहीं बल्कि ब्रांड स्टोरी, रिडिम्बिलिटी, रेयरनेस पर भी निर्भर करती है.  इससे जुड़े लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक पिन नहीं यह एक फैशन एक्सेसरी है, एक कलाकृति है, एक लक्जरी आइकन है. लेकिन समाज इसे लेकर सवाल उठा रहा है “जब पांच रुपये में सेफ्टी पिन मिल जाती है, तो यह टैग क्यों 68,700 का है?”

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यूजर्स बोले, इतना तो हमारे ऊपर कर्ज है

सोशल मीडिया पर अब इस पिन को लेकर लोग तरह तरह के रिएक्शन दे रहे हैं. कोई इसे फैशन का नया आयाम बता रहा है तो कोई इस पिन की खरीद को फिजूल खर्च बता रहा है. एक यूजर ने लिखा…इस पिन को खरीदने से अच्छा मैं 69 हजार रुपये की एफडी करा लूंगा. एक और यूजर ने लिखा…जितनी इस पिन की कीमत है उतना तो मुझ पर कर्ज है. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा…इसे खरीदकर बर्बाद नहीं होना है.

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मौत होने की टॉप-10 वजहों में से एक हैं किडनी की बीमारियां, इन्हें वक्त पर कैसे पहचानें?

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Kidney Disease: दुनिया भर में क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) एक बड़ी स्वास्थ्य चिंता बन चुकी है. लैंसेट की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, बीते तीन दशकों में किडनी रोग के मामलों में दोगुनी बढ़ोतरी हुई है. 1990 की तुलना में अब लगभग 80 करोड़ लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं.

रिपोर्ट में बताया गया है कि ज्यादातर मरीजों में बीमारी के शुरुआती स्टेज यानी स्टेज 1 से 3 CKD पाई गई, जिसकी कुल दर करीब 13.9 प्रतिशत है. साल 2023 में CKD दुनिया भर में मौत का नौवां सबसे बड़ा कारण बना, जिसने करीब 14.8 लाख लोगों की जान ली. यही नहीं, किडनी की काम करने की क्षमता में कमी को हार्ट की बीमारियों से जुड़ी मौतों के 11.5 प्रतिशत मामलों में एक बड़ा जोखिम बताया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्लड शुगर का बढ़ा स्तर, मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर किडनी रोग के सबसे प्रमुख कारण हैं.

भारत में भी बड़ी संख्या में लोग प्रभावित

रिपोर्ट के अनुसार, किडनी रोग से प्रभावित लोगों की संख्या के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल है. 2023 में चीन 15.2 करोड़ और भारत 13.8 करोड़ में CKD के सबसे ज्यादा मरीज पाए गए. वहीं अमेरिका, इंडोनेशिया, जापान, ब्राजील, रूस, मेक्सिको, नाइजीरिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश, ईरान, फिलीपींस, वियतनाम, थाईलैंड और तुर्किये जैसे देशों में भी 1 करोड़ से ज्यादा वयस्क इस बीमारी से जूझ रहे हैं.

किडनी रोग के मुख्य कारण

रिपोर्ट में कहा गया है कि हाई ब्लड प्रेशर, ज्यादा बॉडी मास इंडेक्स और मौसमी तापमान का असंतुलन किडनी को नुकसान पहुंचाने वाले सबसे बड़े कारण हैं. उम्र बढ़ने के साथ ये खतरे और बढ़ जाते हैं. 20 से 69 वर्ष की आयु में ये सभी फैक्टर धीरे-धीरे बढ़ते हैं, जबकि 70 साल के बाद हाई ब्लड प्रेशर, BMI से भी बड़ा खतरा बन जाता है. वहीं, ब्लड शुगर का बढ़ा स्तर हर उम्र में CKD का सबसे बड़ा योगदानकर्ता पाया गया है.

शुरुआती स्टेज में नहीं दिखते लक्षण

CKD की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते. जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, कुछ सामान्य संकेत सामने आने लगते हैं. इसके प्रमुख लक्षणों में कुछ इस प्रकार हैं-

  • थकान और ऊर्जा की कमी
  • पैरों, टखनों या हाथों में सूजन
  • पेशाब की मात्रा या रंग में बदलाव
  • भूख न लगना, मतली या उल्टी
  • खुजली या सूखी त्वचा
  • मांसपेशियों में ऐंठन या दर्द
  • नींद में परेशानी या ध्यान न लगना
  • बिना वजह वजन घटना
  • सांस लेने में तकलीफ

जल्दी पहचान और बचाव ही है उपाय

ज्यादातर लोग तब तक लक्षण नहीं पहचान पाते जब तक बीमारी काफी आगे नहीं बढ़ जाती. ऐसे में समय-समय पर मूत्र परीक्षण, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की जांच, और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना बेहद जरूरी है. एक्सपर्ट के मुताबिक, शुरुआती स्टेज में दवाओं और खानपान में सुधार से बीमारी की रफ्तार को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है और गंभीर दिक्कतों से बचाव संभव है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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इंटरनेट नहीं? कोई बात नहीं! अब बिना इंटरनेट के ऐसे भेजें UPI से पैसे, जानिए क्या है पूरा तरीका

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UPI Without Internet: भारत में UPI (Unified Payments Interface) ने पैसों के लेन-देन को बेहद आसान बना दिया है. आज ज़्यादातर लोग नकद पैसे रखने के बजाय मोबाइल से ही पेमेंट करना पसंद करते हैं. लेकिन कभी-कभी नेटवर्क समस्या या बैंक सर्वर डाउन होने से UPI ट्रांजैक्शन फेल हो जाता है. ऐसे में सवाल उठता है क्या इंटरनेट के बिना भी UPI से पैसे भेजे जा सकते हैं? जवाब है हां! अब आप बिना इंटरनेट के भी USSD सेवा की मदद से ऑफलाइन पेमेंट कर सकते हैं.

ऑफलाइन UPI पेमेंट शुरू करने से पहले ये करें

ऑफलाइन पेमेंट करने के लिए आपका मोबाइल नंबर बैंक अकाउंट से लिंक होना ज़रूरी है. इसके बाद अपने बैंक की ऐप या वेबसाइट से UPI PIN सेट करें. एक बार यह प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद आप आसानी से ऑफलाइन ट्रांजैक्शन कर सकते हैं.

ऐसे करें बिना इंटरनेट के पैसे ट्रांसफर

  • अपने मोबाइल के *डायलर में 99# टाइप करें और कॉल बटन दबाएं.
  • स्क्रीन पर एक मेन्यू खुलेगा जिसमें Send Money, Check Balance, Request Money जैसे विकल्प दिखेंगे.
  • अब उस बैंक अकाउंट को चुनें जिससे आप भुगतान करना चाहते हैं.
  • इसके बाद प्राप्तकर्ता का मोबाइल नंबर, UPI ID या बैंक अकाउंट नंबर और IFSC कोड दर्ज करें.
  • जितनी राशि भेजनी है वह टाइप करें और अंत में अपना UPI PIN डालें.

कुछ ही सेकंड में आपका भुगतान सफल हो जाएगा वो भी बिना इंटरनेट कनेक्शन के.

लिमिट और चार्जेज

इस सेवा के ज़रिए आप अधिकतम ₹5,000 तक का ट्रांजैक्शन कर सकते हैं. हर ट्रांजैक्शन पर ₹0.50 का मामूली शुल्क लिया जाता है. यह सुविधा 24×7 उपलब्ध है छुट्टियों में भी काम करती है और सभी मोबाइल नेटवर्क व हैंडसेट्स पर सपोर्टेड है.

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क्या हाई-वॉट चार्जर से उड़ जाएगा आपके फोन का फ्यूज? जानिए क्या सच में लो-वॉट मोबाइल को होता है नुकसान

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8वां वेतन आयोग लागू होने के बाद इतनी बढ़ेगी सैलरी, जान लें इस पर कितना लगेगा टैक्स?

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हालांकि, इसके साथ ही टैक्स का असर भी बढ़ेगा. आइए जानते हैं कि इस बदलाव के बाद आपकी जेब में कितना पैसा आएगा और कितना टैक्स में जाएगा.

हालांकि, इसके साथ ही टैक्स का असर भी बढ़ेगा. आइए जानते हैं कि इस बदलाव के बाद आपकी जेब में कितना पैसा आएगा और कितना टैक्स में जाएगा.

मान लीजिए आप लेवल-8 पर काम कर रहे हैं. इस समय आपकी बेसिक सैलरी 47,600 है. 8वें वेतन आयोग के बाद इस पर 1.92 फिटमेंट फैक्टर लागू होगा. यानी आपकी नई बेसिक सैलरी बढ़कर 91,392 हो जाएगी.

मान लीजिए आप लेवल-8 पर काम कर रहे हैं. इस समय आपकी बेसिक सैलरी 47,600 है. 8वें वेतन आयोग के बाद इस पर 1.92 फिटमेंट फैक्टर लागू होगा. यानी आपकी नई बेसिक सैलरी बढ़कर 91,392 हो जाएगी.

नई बेसिक सैलरी के साथ आपके भत्ते भी बढ़ेंगे. अगर आप दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु में काम करते हैं, तो आपको 30% HRA मिलेगा. यानी 91,392 का 30% यानी 27,418. इसके अलावा, यात्रा भत्ता (TA) के रूप में करीब 3,600 मिलेंगे.

नई बेसिक सैलरी के साथ आपके भत्ते भी बढ़ेंगे. अगर आप दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु में काम करते हैं, तो आपको 30% HRA मिलेगा. यानी 91,392 का 30% यानी 27,418. इसके अलावा, यात्रा भत्ता (TA) के रूप में करीब 3,600 मिलेंगे.

रिपोर्ट्स के अनुसार इन सभी को जोड़ने के बाद आपकी ग्रॉस सैलरी 1,22,410 प्रति माह तक पहुंच जाएगी. यानी हर महीने आपकी कुल सैलरी में करीब 75,000 तक की बढ़ोतरी हो सकती है.

रिपोर्ट्स के अनुसार इन सभी को जोड़ने के बाद आपकी ग्रॉस सैलरी 1,22,410 प्रति माह तक पहुंच जाएगी. यानी हर महीने आपकी कुल सैलरी में करीब 75,000 तक की बढ़ोतरी हो सकती है.

ग्रॉस सैलरी भले ही 1.22 लाख हो जाए, लेकिन इसमें से कुछ कटौतियां भी होती हैं. इनमें शामिल हैं नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) लगभग 9,139.

ग्रॉस सैलरी भले ही 1.22 लाख हो जाए, लेकिन इसमें से कुछ कटौतियां भी होती हैं. इनमें शामिल हैं नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) लगभग 9,139.

सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) 650 और इनकम टैक्स लगभग 7,700 (टैक्स स्लैब के अनुसार). इन कटौतियों के बाद आपकी नेट इन-हैंड सैलरी करीब 1,04,900 प्रति माह रह जाएगी.

सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) 650 और इनकम टैक्स लगभग 7,700 (टैक्स स्लैब के अनुसार). इन कटौतियों के बाद आपकी नेट इन-हैंड सैलरी करीब 1,04,900 प्रति माह रह जाएगी.

Published at : 08 Nov 2025 07:53 AM (IST)

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विदेशी कंपनियों का भारत पर भरोसा बरकरार, बढ़ती मांग से तेज होगी निवेश की रफ्तार

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India Consumer Market Growth: देश में स्थिर मांग को देखते हुए दुनिया की बड़ी उपभोक्ता कंपनियां भारत पर भरोसा दिखा रही हैं. विदेशी कंपनियां का मानना है कि, भारत में उनके उत्पादों की मांग बढ़ सकती है. इसलिए वे लगातार भारत में निवेश करने की योजना बना रहे है.

हालांकि, दूसरी तिमाही में हुई भारी बारिश, जीएसटी रिफॉर्म के बाद कंपनियों का प्रदर्शन स्थिर रहा है. जिसके कारण उम्मीद जताई जा रही है कि, आने वाले दिनों में बाजार में तेजी देखने को मिल सकती है. ईटी की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक दर्जन से भी अधिक कंपनियों के प्रमुख अधिकारियों ने इस बात को स्वीकार किया है कि, वे भारत में निवेश जारी रखने वाले हैं. 

क्या कहती है रिपोर्ट?

ईटी की एक रिपोर्ट में इस बात की जानकारी मिली कि, दुनिया की बड़ी दिग्गज उपभोक्ता कंपनी भविष्य में भारत में निवेश जारी रखने की योजना बना रहे हैं. ऐसा इसलिए कि, देश में इन उत्पादों की खपत स्थिर बनी हुई है. साथ ही इनकी मांग भी तेजी से बढ़ रही है.

मोंडेलेज, यूनिलीवर, कार्ल्सबर्ग, कोलगेट-पामोलिव, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स, कोका-कोला, पेप्सिको, एप्पल, पापा जॉन्स और डियाजियो जैसी कंपनियों की प्रमुख ने इस बात को स्वीकारा कि, भारत तेजी से बढ़ते हुए बाजार के रुप में आज भी अपना स्थान बनाए हुए है. 

ग्रामीण इलाकों में हो रही बिक्री

भारत में इन उत्पादों की बिक्री शहरी इलाकों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र में भी होती है. ग्रामीण इलाकों में इन उत्पादों की बिक्री शहरों की तुलना में ज्यादा तेज बनी हुई है. कंपनियां जहां शहरी उपभोक्ताओं के लिए प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर ध्यान दे रही हैं, वहीं ग्रामीण हिस्सों में बिक्री स्थिर बनी हुई है.

कोलगेट-पामोलिव के सीईओ नोएल वालेस के मुताबिक, शहरों में मांग थोड़ी सुस्त है, लेकिन गांवों में स्थिति उम्मीद से बेहतर है. साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की कंपनियां भी भारत में लगातार अपना निवेश बढ़ा रही हैं. एपल के सीईओ टिम कुक के अनुसार, सितंबर तिमाही में कंपनी ने भारत में अपना अब तक का सबसे ज्यादा राजस्व हासिल किया है और देश में कई नए स्टोर भी खोले गए हैं.

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हमको मीठा दीजिये भईया… जब पटना में ठेले वाले से बोलीं स्मृति ईरानी, चखा गोलगप्पे का स्वाद

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Smriti Irani Viral Video: बिहार विधानसभा चुनाव का माहौल गर्म है. हर पार्टी अपनी पूरी ताकत झोंक रही है. इस भागदौड़ और तनाव के बीच स्मृति ईरानी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर एक अलग ही तरह सामने आया है. चुनावी माहौल में नेताओं को अक्सर मंचों पर भाषण देते, रोड शो करते या प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते देखा जाता है, लेकिन कभी-कभी ये नेता भी आम लोगों की तरह अपने व्यस्त कार्यक्रमों से कुछ पल निकालकर जिदगी के छोटे-छोटे पलों का मजा लेते हैं.

ऐसा ही नजारा बिहार की राजधानी पटना में देखने को मिल. जब पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी की फायरब्रांड नेता स्मृति ईरानी ने बिहार चुनाव प्रचार के बाद अपनी थकान मिटाने के लिए गोलगप्पे का टेस्ट चखा. आमतौर पर कड़ी सुरक्षा और भारी भीड़ के बीच दिखाई देने वाली स्मृति ईरानी उस दिन बिना किसी औपचारिकता के एक आम नागरिक की तरह सड़क किनारे लगे गोलगप्पे के ठेले पर पहुंचीं. आर-ब्लॉक चौक के पास का यह नजारा देखकर लोग हैरान रह गए. 

जब स्मृति ईरानी बोलीं भैया, मीठा दीजिए…

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिख रहा है कि स्मृति ईरानी मुस्कुराते हुए गोलगप्पे वाले से कहती हैं भैया, तीखा है या मीठा, हमको मीठा दीजिए भईया. इसके बाद वो में पास खड़े एक नेता से कहती हैं बघेल जी, मीठा दीजिएगा नेता जी को. यह छोटा-सा पल लोगों को बहुत पसंद आया क्योंकि यह दिखाता है कि एक बड़ी नेता भी आम लोगों की तरह जमीन से जुड़ी हुई हैं. प्रचार की थकान के बाद उन्होंने बिहार के फेमस स्ट्रीट फूड का मजा लिया और हर किसी से बात की. 

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो

जैसे ही यह वीडियो इंटरनेट पर आया, X, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर लोगों ने इसे खूब शेयर किया. कुछ ही घंटों में वीडियो पर हजारों व्यूज और कमेंट्स आ गए. लोगों ने लिखा वाह नेता ऐसे हों जो जनता के बीच घुल-मिल जाएं, तो किसी ने कहा स्मृति जी का ये अंदाज बहुत प्यारा लगा. एक यूजर ने लिखा पटना का फुचका और स्मृति जी की मुस्कान दोनों का जवाब नहीं. कई लोगों ने मजाक में लिखा कि अब पटना का गोलगप्पा भी नेशनल स्टार बन गया. 

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क्या धोखे से न्यूयॉर्क सिटी के मेयर बन गए जोहरान ममदानी, किसने लगाया गंभीर आरोप? जानें मामला

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जोहरान ममदानी ने न्यूयॉर्क शहर का पहला मुस्लिम मेयर और 1917 के बाद सबसे कम उम्र का मेयर बनकर इतिहास रच दिया है. हालांकि आलोचक उनकी जीत को लेकर सवाल उठा रहे हैं. एक एक्स यूजर ने दावा किया कि वे न्यूयॉर्क शहर आए और वहां का नागरिक न होने के बावजूद ममदानी को अवैध रूप से वोट दिया. इसे लेकर अमेरिकी सीनेट के लिए चुनाव लड़ रहे टेक्सास के एक रिपब्लिकन नेता ने जोहरान ममदानी पर निशाना साधा है.

यजान नाम के एक एक्स यूजर ने एक बैलेट की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, ” मैं दो दिन पहले न्यूयॉर्क शहर पहुंचा. मैं न तो अमेरिकी नागरिक हूं और न ही वहां का निवासी. इसके बावजूद मैं जल्दी पहुंचकर वोट देने में कामयाब रहा. उन्हें बस एक पते की जरूरत थी, तो वो मैंने बता दिया और ममदानी को वोट दिया. चलो न्यूयॉर्क चलते हैं.”

रिपब्लिकन नेता अलेक्जेंडर डंकन ने साधा निशाना
बता दें कि ये पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. कई लोगों ने ममदानी की कड़ी आलोचना की, जिनमें अलेक्जेंडर डंकन भी शामिल हैं. वो 2026 में टेक्सास से अमेरिकी सीनेट के लिए चुनाव लड़ेंगे. डंकन ने लिखा, “यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे चुनाव चुराए जाते हैं. उनका आदमी खुलेआम शेखी बघार रहा है कि वह दो दिन पहले ही न्यूयॉर्क शहर में आया है और वह वहां का निवासी या नागरिक नहीं है, फिर भी वह जिहादी ममदानी के लिए वोट डालने में सक्षम है.”

लोगों ने बताया धोखाधड़ी
यजान की पोस्ट को लेकर कमेंट सेक्शन में एक व्यक्ति ने लिखा, “यह वोटिंग धोखाधड़ी है”. एक अन्य ने लिखा, “लगता है आपने क़ानून तोड़ा है. मुझे यकीन है कि अधिकारियों को इसकी सूचना ज़रूर दी जाएगी.” एक यूज़र ने पूछा, “एक गैर-नागरिक को वोट देने की इजाज़त क्यों दी जाएगी?” जबकि एक अन्य ने कहा, “आपको देश से निकाल देना चाहिए.”

क्या है पूरा सच
हालांकि यजान ने एक दूसरी पोस्ट में बताया कि वोट देने की उनकी पोस्ट सिर्फ मजाक थी. 29 अक्टूबर को एक अन्य यूजर की पोस्ट शेयर करते हुए यजान ने लिखा, “वैसे यह एक मज़ाक है. मैंने यहीं से यह तस्वीर ली है. चुनावों की वैधता पर संदेह करने वाला कोई भी व्यक्ति मूर्ख है.” वोट देने की सुविधा पर यजान की पिछली पोस्ट के साथ एक कम्युनिटी नोट भी है जो एक्स यूजर्स को उनकी पोस्ट पर रीडायरेक्ट करता है और स्पष्ट करता है कि यह एक मज़ाक था. नोट में लिखा है, “यजान ने यहां जो बताया है, वह पोस्ट एक मज़ाक है.”

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