क्या ट्रंप की धमकियों से डर गया भारत? सितंबर में रूस कम हुई तेल की खरीद
[ad_1]
Russian Crude Oil Import: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर रूस से कच्चे तेल की आयात को लेकर 25 परसेंट की पेनाल्टी लगाई है. इसी के साथ भारत पर टैरिफ बढ़कर 50 परसेंट तक पहुंच चुका है. अमेरिका का मानना है कि यूक्रेन पर रूसी हमले की सबसे बड़ी वजह भारत और चीन है. अगर ये रूस से तेल खरीदना बंद कर दे, तो यूक्रेन पर हमला तुरंत रूक जाएगा.
ट्रंप का कहना है कि ये रूस से तेल खरीदकर यूक्रेन में हमले को बढ़ावा दे रहा है. ट्रंप ने यह तक कहा है कि भारत रूस से तेल खरीदकर यूक्रेन में हमले के लिए रूस की फंडिंग कर रही है. इसे लेकर अमेरिकी सरकार लगातार भारत पर दबाव बना रही है कि वह रूस से तेल खरीदना बंद कर दे और अब लगता है कि कहीं का कहीं इस दबाव का असर भी दिखने लगा है.
रिपोर्ट में चौंकानेवाला खुलासा
सिंतबर के महीने में भारत ने रूस से अगस्त के मुकाबले कम तेल खरीदा. हालांकि, यह गिरावट बेहद मामूली है. ग्लोबल रियल टाइम डेटा और एनालिटिक्स प्रोवाइडर केप्लर की ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, सितंबर में भारत का रूस से तेल आयात 1.60 मिलियन बैरल प्रति दिन रहा, जो अगस्त के 5.4 परसेंट के लेवल से कम है. केप्लर की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में भारत की सरकारी कंपनियों का रूस से क्रूड ऑयल इम्पोर्ट औसतन 605,000 बैरल प्रति दिन (बीपीडी) रहा, जो अप्रैल-अगस्त के औसत से 32 परसेंट कम है.
क्या सच में ट्रंप के दबाव में आया भारत?
रूस से भारत के लिए कितने तेल की सप्लाई की जानी है इस पर कॉन्ट्रैक्ट डिलीवरी से छह-आठ हफ्ते पहले ही बन जाता है. यानी कि सितंबर में कितने बैरल तेल का एक्सपोर्ट किया जाना है यह जुलाई और अगस्त में हुए कॉन्ट्रैक्ट में ही तय हो जाता है. जुलाई में ट्रंप ने रूस से तेल की खरीद को लेकर भारत पर सार्वजनिक रूप से निशाना साधा शुरू किया था और अगस्त के पहले हफ्ते तक उन्होंने भारत पर पेनाल्टी लगाए जाने की भी घोषणा कर दी थी. अब अक्टूबर में रूस से तेल की सप्लाई होने के बाद ही यह साफ-साफ समझ में आएगा कि क्या वाकई में ट्रंप प्रशासन के दबाव का कुछ खास असर हुआ है कि नहीं?
क्या है इसके पीछे वजह?
केप्लर ने बताया कि इसकी एक बड़ी वजह रूस से भारत आने वाली माल ढुलाई की लागत हो सकती है, जिसमें कोई कमी नहीं आई है. सितंबर के अंत और अक्टूबर की शुरुआत तक रूस से भारत आने वाली माल ढुलाई की लागत में इजाफा हुआ. तेल की खरीद पर मिलने वाला डिस्काउंट भी पहले के मुकाबले कम हुआ है. इसके अलावा, रूस से तेल की खरीद को लेकर अमेरिका के दबाव के बढ़ते जोखिम और सरकारी कंपनियों के लिए सप्लाई में विविधता लाने की जरूरत भी इसकी एक वजह हो सकती है.
ये भी पढ़ें:
ट्रंप की सरकार को झटका, अमेरिका में शटडाउन; जानें क्या होगा इसका भारतीय शेयर बाजार पर असर?
[ad_2]







