रणवीर सिंह की सास हैं बेहद खूबसूरत, बेटी दीपिका पादुकोण को देती हैं कड़ी टक्कर, देखें तस्वीरें
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‘रणवीर सिंह’ की ‘सास’ की 10 तस्वीरें, खूबसूरती में बेटी ‘दीपिका पादुकोण’ से चार कदम हैं आगे
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‘रणवीर सिंह’ की ‘सास’ की 10 तस्वीरें, खूबसूरती में बेटी ‘दीपिका पादुकोण’ से चार कदम हैं आगे
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हाल ही में राष्ट्रीय शिक्षा अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् (NCERT) ने दो विशेष शैक्षिक मॉड्यूल प्रकाशित किए हैं, जिनका उद्देश्य ‘स्वदेशी’ की यात्रा को आज की आत्मनिर्भर भारत की दिशा से जोड़ना है. ये मॉड्यूल क्रमशः ‘स्वदेशी: वोकल फॉर लोकल’ (मध्यम कक्षा के लिए) और ‘स्वदेशी: आत्मनिर्भर भारत के लिए’ (माध्यमिक स्कूल के लिए) नाम से जारी किए गए हैं.
इसमें भारत के 1905 के बंगाल विभाजन विरोध आंदोलन से लेकर आज के समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत विचार तक की कहानी को पढ़ने वालों के सामने रखा गया है. मॉड्यूल में स्वतंत्रता संघर्ष की वह परिणीति दिखाई गई है, जिसमें स्वदेशी आंदोलन विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार ही नहीं, बल्कि भारतीय विकल्प तैयार करने की लहर भी था. उदाहरण के लिए, बंगाल के रसायन उद्योग और तारापुर के इस्पात उद्यम को इस संदर्भ में दिखाया किया गया है.
मॉड्यूल में प्रधानमंत्री मोदी के इस वर्ष के स्वतंत्रता दिवस भाषण का अंश भी शामिल है, जिसमें उन्होंने आत्मनिर्भर भारत को “विकसित भारत की आधारशिला” बताया. इसके साथ ही उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे “एक होमवर्क” लें वह होमवर्क है छात्रों के साथ मिलकर स्वदेशी उत्पादों और वोकल फॉर लोकल की पहल का प्रचार.इतिहास के पन्नों में यह भी याद दिलाया गया है कि महात्मा गांधी ने शिक्षा क्षेत्र में स्वदेशी को महत्व दिया और रबीन्द्रनाथ टैगोर ने इसे स्वतंत्रता का सच्चा मानदंड कहा.
नई मॉड्यूल इस बात पर भी जोर देती हैं कि आज की तारीख में स्वदेशी केवल एक इतिहास नहीं है, बल्कि एक सामरिक सोच है. भारत ने हाल ही में अंतरिक्ष, रक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता पाई है, जो आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़े कदम माने जा सकते हैं. इन मॉड्यूल्स में स्वदेशी को आधुनिक योजनाओं जैसे मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत से जोड़ा गया है. स्वदेशी का मतलब केवल “देशी वस्तुएँ खरीदना” नहीं, उस विश्वास को मजबूत करना भी है, जो भारतीय ब्रांडों पर हो. उदाहरण के लिए अमूल (डेयरी), ISRO(अंतरिक्ष) और आयुर्वेद (स्वास्थ्य) को ऐसे ब्रांडों के रूप में बताया गया है, जिनका भरोसा दोनों घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता है.
स्वदेशी को डिजिटल रूप
आधुनिक युग में स्वदेशी को डिजिटल रूप भी दिया गया है. मॉड्यूल्स में “स्वदेशी Ai ” की अवधारणा पेश की गई है, जिसमें यह कहा गया है कि हमें विदेशी तकनीकों जैसे ChatGPT या Google Gemini पर निर्भरता कम कर, अपनी एआई क्षमताएं विकसित करना चाहिए. इस तरह भारत अपनी डेटा संप्रभुता बनाए रख सकेगा और स्थानीय जरूरतों – भाषा, कृषि, प्रशासन के अनुरूप समाधान दे सकेगा.
क्या है उद्देश्य?
इस पहल से यह स्पष्ट हो जाता है कि एनसीईआरटी का उद्देश्य सिर्फ इतिहास पढ़ाना नहीं है बल्कि आज के समय में विद्यार्थियों को आत्मनिर्भरता की समझ देना है. यह एक ऐसा शैक्षिक प्रयोग है, जो भारत के अतीत को उसके वर्तमान और भविष्य से जोड़ता है.इस तरह, शिक्षा की इस नई दिशा में ‘स्वदेशी’ केवल एक विचार नहीं बल्कि छात्रों को आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार करने की रणनीति बन गया है.
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा पीस प्लान की दुनिया के सभी बड़े देशों ने सराहना की है, यहां तक कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने भी पहले इस पर सहमति दे दी, लेकिन जब देश में इसका विरोध हुआ तो इस प्लान को डिप्टी पीएम इशाक डार ने इसे ट्रंप का प्लान करार दिया. इस बीच आसिम मुनीर ने एक और चाल चली है. पाक आर्मी चीफ के सलाहकारों ने अमेरिका जाकर अधिकारियों के सामने एक बड़ा ऑफर पेश किया है.
आसिम मुनीर के सलाहकारों ने यूएस अधिकारियों के सामने अरब सागर में एक बंदरगाह बनाने और उसे संचालित करने का प्रस्ताव रखा है. फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना में अमेरिकी निवेशकों द्वारा पासनी शहर में महत्वपूर्ण खनिजों तक पहुंचने के लिए एक टर्मिनल बनाने और संचालन करना शामिल है. बता दें कि पासनी, बलूचिस्तान के ग्वादर जिले में एक बंदरगाह शहर है, जिसकी सीमा अफगानिस्तान और ईरान से लगती है.
ट्रंप से मिले थे मुनीर-शहबाज
पाकिस्तान की ओर से यह कदम आसिम मुनीर और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सितंबर में व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई बैठक के बाद उठाया गया है. इस बैठक में शहबाज शरीफ ने कृषि, प्रौद्योगिकी, खनन और ऊर्जा क्षेत्रों में अमेरिकी कंपनियों से निवेश की अपील की थी.
अमेरिकी अधिकारियों के सामने रखा गया प्रस्ताव
एफटी के अनुसार, यह प्रस्ताव कुछ अमेरिकी अधिकारियों के सामने रखा गया था और पिछले महीने के अंत में व्हाइट हाउस में ट्रंप के साथ बैठक से पहले मुनीर के साथ साझा किया गया था. इस ब्लूप्रिंट में बंदरगाह का इस्तेमाल अमेरिकी सैन्य ठिकानों के लिए नहीं बल्कि इसका बंदरगाह को खनिज-समृद्ध पश्चिमी प्रांतों से जोड़ने वाले रेल नेटवर्क के लिए विकास निधि आकर्षित करना है. अमेरिकी विदेश विभाग, व्हाइट हाउस और पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से फिलहाल इस पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है.
क्या था ट्रंप का गाजा प्लान?
प्रस्ताव के मुताबिक गाजा में सैन्य कार्रवाई तुरंत रोकनी होगी. ये भी कहा गया है कि जब तक जीवित और मृत बंधकों के शवों की वापसी की शर्तें पूरी नहीं हो जातीं मौजूदा स्थिति बहाल रहेगी. योजना के मुताबिक, हमास अपने हथियार त्याग देगा, इसके साथ ही उसकी सुरंगें और हथियार बनाने के ठिकाने नष्ट कर दिए जाएंगे. हर इजराइली बंधक के शव की रिहाई पर इजराइल 15 गाजावासियों के शव लौटाएगा. जैसे ही दोनों पक्ष पर सहमत होंगे, गाजा में तुरंत पूरी सहायता भेजी जाएगी.
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अब किसी अच्छे कॉलेज से डिग्री ले लेना नौकरी पाने के लिए पर्याप्त नहीं है. LinkedIn के सीईओ Ryan Roslansky का मानना है कि सिर्फ अच्छे कॉलेज से डिग्री के कारण नौकरी मिलने वाले दिन चले गए. उन्होंने कहा कि अब ग्लोबल जॉब मार्केट में डिग्री और डिप्लोमा काफी नहीं रह गए हैं. अब प्रैक्टिकल स्किल्स खासकर, AI से जुड़ी स्किल होना जरूरी हो गया है. इस तेजी से बदलते समय में उन्होंने छात्रों को सिर्फ डिग्री की बजाय प्रैक्टिकल नॉलेज हासिल करने की सलाह दी है.
AI के कारण बदल गई जरूरतें
जॉब मार्केट में AI के रोल पर बात करते हुए Ryan ने कहा कि लोगों को AI अपनाने के साथ-साथ दूसरी स्किल्स भी सीखनी चाहिए. अब भविष्य उन लोगों का नहीं है, जिनके पास बड़े कॉलेज से डिग्री है या जो बेस्ट कॉलेज में पढ़े हैं. अब समय के साथ बदलाव के लिए सहज, आगे की सोचने वाले, सीखने को तैयार और AI टूल्स अपनाने वाले लोगों का समय है. उन्होंने कहा कि AI के कारण अब कंपनियों की जरूरतें बदल गई हैं. यह कुछ कंपनियों की बात नहीं है. हर इंडस्ट्री में अब ऐसे लोगों को नौकरी मिल रही है, जो नई स्किल सीख सकते हैं और तेजी से बदल रही टेक्नोलॉजी को अपनाने में सहज हैं.
AI स्किल्स की बढ़ी मांग
AI की जरूरत पर जोर डालने वाले लिंक्डइन सीईओ अकेले व्यक्ति नहीं है. हाल ही में माइक्रोसॉफ्ट ने एक सर्वे किया था. इसमें पता चला कि 71 प्रतिशत कंपनियां उन लोगों को नौकरी देने के लिए तैयार हैं, जिनके पास अनुभव कम हैं, लेकिन AI स्किल्स हैं. इन कंपनियों को अब अनुभव की ज्यादा चिंता नहीं है. 66 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि वो ऐसे किसी भी व्यक्ति को नौकरी पर नहीं रखेंगी, जिन्हें AI की बिल्कुल भी जानकारी नहीं है.
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Deadly Cough Syrup: हाल ही में मध्यप्रदेश और राजस्थान से आई खबर ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. इन दोनों राज्यों में अब तक 11 मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है. और शुरुआती जांच में सामने आया है कि इन मौतों की वजह दो ब्रांड के खांसी के सिरप हो सकते हैं. जैसे ही यह मामला सामने आया. इन दोनों राज्यों के स्वास्थ्य विभाग ने फौरन इन सिरप की बिक्री और वितरण पर रोक लगा दी है.
जांच के लिए सैंपल लैब में भेजे जा चुके हैं और केंद्र से लेकर राज्य स्तर तक मेडिकल टीमें एक्टिव हो गई हैं. फिलहाल डॉक्टरों और फार्मेसी स्टोर्स को निर्देश जारी किए गए हैं कि किसी भी बच्चे को इन सिरप्स का इस्तेमाल न कराया जाए. भले ही खांसी-जुकाम के लक्षण मामूली ही क्यों न लगें. जांच टीमें यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर सिरप में ऐसी कौन सी चीज मिली थी. जिसने बच्चों की जान ले ली.
प्राथमिक जांच में स्वास्थ्य विभाग को सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल जैसे जहरीले केमिकल की मौजूदगी का शक है. यह वही केमिकल है जो पहले भी कई देशों में बच्चों की मौत का कारण बन चुका है. इन सिरप्स के नाम कोल्ड्रिफ कफ सिरप और नेक्सा डीएस कफ सिरप बताए जा रहे हैं. अधिकारियों के मुताबिक सिरप बनाने वाली कंपनी ने सेफ्टी टेस्टिंग के सभी मानकों का पालन नहीं किया था.
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और बिना पूरी जांच के दवा को बाजार में उतार दिया गया. अब एफएसएसएआई और ड्रग कंट्रोल विभाग ने तुरंत उस बैच की हर बोतल को बाजार से वापस मंगाने का आदेश दिया है. फार्मासिस्ट्स को भी अलर्ट पर रखा गया है ताकि कोई भी गलती से इन दवाओं की बिक्री न कर दे.
यह पहली बार नहीं है जब कफ सिरप के कारण बच्चों की जान गई हो. साल 2022 में अफ्रीकी देश गाम्बिया में भी ऐसी ही घटना हुई थी. जहां जहरीले सिरप के कारण करीब 70 बच्चों की मौत हो गई थी. उस मामले में भी सिरप भारत में बनी दवा थी और उसमें डाइएथिलीन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल जैसे रसायन पाए गए थे. इसके बाद उज्बेकिस्तान में भी एक और भारतीय कंपनी के कफ सिरप से 19 बच्चों की मौत हुई थी.
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इन दोनों घटनाओं के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय फार्मा कंपनियों की दवा निर्माण प्रक्रिया पर सवाल उठे थे. अब जब मध्यप्रदेश और राजस्थान में ऐसी ही घटनाएं सामने आई हैं. तो केंद्र सरकार ने सभी राज्यों के ड्रग विभागों को जांच के आदेश दिए हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी और राज्य में ऐसी लापरवाही न दोहराई जाए.
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World Para Athletics Championships 2025: दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में चल रही वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 के दौरान शुक्रवार (3 अक्टूबर) को एक चौंकाने वाली घटना सामने आई. स्टेडियम के अंदर घुसे कुछ आवारा कुत्तों ने जापान और केन्या के कोचों पर हमला कर दिया, जिससे पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई. दोनों कोचों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें ट्रीटमेंट और एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाए गए.
कैसे घटी ये घटना?
जानकारी के मुताबिक, सुबह करीब 9 बजे के आसपास जब खिलाड़ी और कोच अपने-अपने सत्र की तैयारी में जुटे थे, तभी स्टेडियम परिसर में दो आवारा कुत्ते दाखिल हो गए. केन्या के कोच डेनिस माराजिया उस वक्त कॉल रूम के पास अपने खिलाड़ी से बातचीत कर रहे थे. अचानक पीछे से आए कुत्ते ने उनके पैर पर काट लिया. खून निकलने लगा और आसपास मौजूद स्टाफ ने तुरंत उन्हें बाहर निकाला.
कुछ ही मिनट बाद जापान की महिला कोच मेइको ओकुमत्सु भी इसी तरह की घटना का शिकार हुईं. वह प्रैक्टिस ट्रैक पर खिलाड़ियों की निगरानी कर रही थीं, तभी एक और कुत्ता उनके पास आया और काट लिया. दोनों घटनाएं आधे घंटे के भीतर हुईं, जिससे विदेशी टीमों में डर और नाराजगी फैल गई.
आयोजकों ने दी सफाई
इस घटना के बाद वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप की आयोजन समिति ने तुरंत प्रतिक्रिया दी. उन्होंने बताया कि दोनों कोचों को तुरंत सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद वे सुरक्षित अपने होटल लौट गए. आयोजकों के मुताबिक, सुरक्षा व्यवस्था की पूरी समीक्षा की जा रही है और अब स्टेडियम में कुत्ता पकड़ने वाली दो टीमें स्थायी रूप से तैनात कर दी गई हैं.
समिति ने यह भी बताया कि 21 अगस्त 2025 को ही नगर निगम (MCD) को पत्र लिखकर स्टेडियम परिसर से कुत्तों को हटाने के लिए कहा गया था. उस समय परिसर खाली भी कराया गया था, लेकिन खाने की तलाश में कुत्ते दोबारा घुस आए. अब क्षेत्र को फिर से सैनिटाइज कर दिया गया है और सुरक्षा बढ़ा दी गई है.
दिल्ली में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या
यह कोई पहली घटना नहीं है जब राष्ट्रीय राजधानी में आवारा कुत्तों का आतंक सामने आया हो. सुप्रीम कोर्ट तक इस मुद्दे पर सख्त निर्देश दे चुका है, लेकिन हालात अब भी नहीं सुधरे हैं. अंतरराष्ट्रीय आयोजन के दौरान ऐसी घटनाएं न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं, बल्कि भारत की ग्लोबल इमेज को भी नुकसान पहुंचाती हैं.
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Gold-Silver Price Today: अमेरिका में जारी शटडाउन, अक्टूबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों में कटौती और टैरिफ को लेकर टेंशन की बीच शनिवार को सोने-चांदी की कीमत में गिरावट दर्ज की गई है. भले ही यह गिरावट बेहद मामूली है. शनिवार को 24 कैरेट सोना 65 रुपया सस्ता हुआ है. वहीं, चांदी की कीमत में शुक्रवार को 151 रुपये की गिरावट दर्ज की गई है. ऐसे में आने वाले फेस्टिव सीजन से पहले यह ग्राहकों के लिए खरीदारी का बढ़िया मौका है.
हाल ही में सोने की कीमतें अपने रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गई थीं. 30 सितंबर को सोने की कीमत करीब 1,175 रुपये उछलकर 1,17,516 रुपये के अपने ऑल टाइम हाई लेवल पर पहुंच गई थी. एक्सपर्ट्स का कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी, अमेरिका में शटडाउन से पैदा हुई अनिश्चितता और टैरिफ के चलते तनाव के माहौल में सोने की कीमतों में तेजी आई है. हालांकि, आने वाले महीनों में कीमत में कमी की भी उम्मीद जताई जा रही है.
गुडरिटर्न्स की वेबसाइट के मुताबिक, भारत में 24 कैरेट सोने की कीमत 65 रुपये घटकर 11,804 रुपये प्रति ग्राम रह गई. इसी तरह से 22 कैरेट सोने की कीमत भी 60 रुपये कम होकर अब 10,820 रुपये प्रति ग्राम रह गई है. 49 रुपये की गिरावट के साथ 18 कैरेट सोने की कीमत 8,853 रुपये प्रति ग्राम रह गई है.
हालांकि, शुक्रवार और शनिवार को कीमतों में आई इस गिरावट के बाद भी सोने की कीमतें रिकॉर्ड हाई लेवल के करीब बनी हुई हैं. दशहरे के एक दिन बाद शुक्रवार को भारत में चांदी की कीमतों में भी कुछ गिरावट देखी गई. शुक्रवार को भारत में चांदी की कीमत 151 रुपये प्रति ग्राम और 1,51,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक गिर गई. दिलचस्प बात यह है कि भारत में सोने की कीमत में गिरावट के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों में तेजी देखी जा रही है. इससे निवेशकों के बीच इसकी डिमांड सुरक्षित निवेश के रूप में और भी बढ़ गई है.
मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, केरल, बेंगलुरु और पुणे में आज 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति ग्राम 11,940 रुपये है. जबकि इन शहरों में 22 कैरेट सोने की कीमत 10,945 रुपये प्रति ग्राम है. चेन्नई में 24 कैरेट सोने की कीमत 11,946 रुपये है और यहां 22 कैरेट सोने की कीमत 10,950 रुपये है. दिल्ली में आज 24 कैरेट सोने की कीमत सबसे ज्यादा 11,955 रुपये प्रति ग्राम है और यहां 22 कैरेट सोना प्रति ग्राम 10,960 रुपये है.
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मोबाइल फोन का इस्तेमाल तो आज कल सभी करते हैं, मगर इस पर भगवान की तस्वीर का वॉलपेपर लगाना चाहिए या नहीं . वॉलपेपर सिर्फ एक सजावट का नहीं, बल्कि यह हमारे व्यक्तित्व और मानसिक स्थिति को भी दिखाता है. हम जो वॉलपेपर लगाते हैं, वह कभी न कभी हमारे जीवन पर असर डालता है.

मोबाइल फोन में आ रहे नोटिफिकेशन, कॉल और अन्य दुनियावी चीजों के बीच धार्मिक स्थलों की तस्वीर होना सही नहीं माना जाता है. क्योंकि बार-बार नोटिफिकेशन आने से तस्वीर के प्रति श्रद्धा और आदर नहीं रह पाता. जिससे भगवान के प्रति धीरे-धीरे भाव कम होता है.

मोबाइल फोन की स्क्रीन पर लोग अकसर धार्मिक स्थलों की तस्वीरें लगाते हैं, जैसे मंदिरों, मस्जिदों या चर्च की तस्वीरें. मगर ऐसी तस्वीरें नहीं लगानी चाहिए, क्योंकि धार्मिक दृष्टि के अनुसार मोबाइल फोन का इस्तेमाल हर जगह होता है, जैसे बाथरूम, सड़क, या कई बार अशुद्ध जगहों पर भी. इसलिए इसे उचित नहीं माना जाता.

वास्तु शास्त्र में मोबाइल फोन पर देवी-देवताओं की तस्वीर लगाना भी अशुभ माना जाता है. इसे लगाने से पूजा स्थलों की गरिमा नहीं रहती और ग्रहों के प्रभाव से जीवन में अशुभ परिणाम आ सकते हैं.

मोबाइल फोन पर भगवान की तस्वीर लगाना बिल्कुल बुरा माना जाता है, क्योंकि इसे हम अशुद्ध जगहों पर लेकर जाते हैं, जिससे इसकी मर्यादा का पालन नहीं होता. इसलिए बेहतर है कि इन तस्वीर को मंदिर या घर के पवित्र स्थानों पर ही रखें.
Published at : 04 Oct 2025 10:41 AM (IST)
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डिश TV की छतरी का मुख्य काम है सैटेलाइट से आने वाले सिग्नल को पकड़ना. टीवी चैनल्स का प्रसारण पहले जमीन से हजारों किलोमीटर ऊपर मौजूद जियोस्टेशनरी सैटेलाइट्स तक भेजा जाता है. ये सैटेलाइट्स उसी गति से पृथ्वी के साथ घूमते रहते हैं जिससे वे हमेशा एक ही जगह पर दिखाई देते हैं. डिश एंटीना इस सैटेलाइट से आने वाली रेडियो तरंगों (microwave frequency) को कैप्चर करता है.

क्या आपने गौर किया है कि डिश एंटीना गोल और गहराई वाला होता है? इसे पैरबोलिक शेप कहते हैं. इस शेप की खासियत यह है कि यह दूर-दराज से आने वाले कमजोर सिग्नल्स को एक ही बिंदु पर केंद्रित कर देता है. इस बिंदु को फोकल प्वाइंट कहते हैं, और यहीं पर डिश में लगा हुआ LNB (Low Noise Block Converter) सिग्नल को रिसीव करता है.

LNB डिश का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसका काम है सैटेलाइट से आने वाली हाई-फ्रीक्वेंसी तरंगों को पकड़ना. इन सिग्नल्स को कम शोर (noise) और कम फ्रीक्वेंसी वाले सिग्नल्स में बदलना. बदले हुए सिग्नल्स को कोएक्सियल केबल के जरिए आपके सेट-टॉप बॉक्स तक भेजना.

जब सिग्नल्स सेट-टॉप बॉक्स तक पहुंचते हैं तब भी वे डिजिटल कोड के रूप में होते हैं. सेट-टॉप बॉक्स इन्हें डिकोड करता है और आपके टीवी को समझ आने वाले ऑडियो-वीडियो सिग्नल में बदल देता है. यानी डिश की छतरी + LNB + सेट-टॉप बॉक्स यही है टीवी पर आने वाली हर तस्वीर और आवाज का असली कारण.

आपने कई बार देखा होगा कि बारिश या तूफान के समय टीवी सिग्नल गायब हो जाते हैं. इसकी वजह है कि पानी की बूंदें और बादल माइक्रोवेव सिग्नल्स को अवशोषित (absorb) कर लेते हैं. इससे सैटेलाइट से आने वाले सिग्नल्स कमजोर पड़ जाते हैं और डिश उन्हें ठीक से पकड़ नहीं पाती.

आज Dish TV में HD और 4K ब्रॉडकास्टिंग भी इसी टेक्नोलॉजी के जरिए संभव है. आने वाले समय में और एडवांस सैटेलाइट्स और IPTV (Internet Protocol TV) तकनीक मिलकर इसे और तेज, स्थिर और बेहतर बनाएंगे. Dish TV की छतरी सिर्फ एक गोल प्लेट नहीं है, बल्कि यह अत्याधुनिक सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम का हिस्सा है. इसके पैरबोलिक डिज़ाइन, LNB और सेट-टॉप बॉक्स मिलकर सैकड़ों चैनल्स को हमारे टीवी तक लाते हैं.
Published at : 04 Oct 2025 10:33 AM (IST)
Tags :
Dish TV TECH NEWS HINDI
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