क्या बाजार में बड़ी हलचल होने वाली है? ग्रहों की चाल से जुड़ा वो संकेत जिसे आप अनदेखा नहीं कर स

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भारत के शेयर बाजार की स्थिति इस वक्त किसी शांत समुद्र की तरह नजर आ रही है. ऊपर से स्थिर, भीतर से बेचैन. तेल की कीमतें 65-66 डॉलर पर थमी हैं, रुपया 88 के आसपास टिका है, ब्याज दरें भी स्थिर हैं, लेकिन निवेशक अब भी असमंजस में हैं.

ज्योतिष की गणना से कारण जानने की कोशिश करते हैं तो ग्रहों की चाल में बाजार में बड़ी हलचल शुरू होने के संकेत दिखाई देते हैं. अब प्रश्न उठता है कि क्या आने वाले हफ्तों में बाजार की पूरी तस्वीर बदल सकती है? आइए जानते हैं

भीतर ही भीतर उठ रहा है कोई तुफान!

मैदिनी ज्योतिष यानी वह विद्या जो देश, जनता और अर्थव्यवस्था की चाल को ग्रहों के संकेतों से जोड़ती है, इसके अनुसार जब शुक्र नीच, गुरु उच्च और शनि वक्री हों तो बाजार में अस्थिरता और अवसर दोनों साथ जन्म लेते हैं. अक्टूबर 2025 में ठीक यही स्थिति बन रही है. ऊपर से सब कुछ ठीक, पर अंदर से बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं.

शुक्रे नीचस्थे व्यये वृध्दिः

9 से 12 अक्टूबर 2025 के बीच शुक्र कन्या राशि में नीचस्थ हो रहा है. यह वही ग्रह है जो सौंदर्य, वैभव और खर्च का प्रतीक है. जब शुक्र अपनी कमजोर स्थिति में आता है, तो उपभोक्ता की स्थिति कमजोर पड़ने लगती है. फलदीपिका में कहा गया है कि शुक्रे नीचस्थे व्यये वृध्दिः, अर्थक्षये नृपानाम्. यानी जब शुक्र नीच होता है, तब खर्च बढ़ता है, पर लाभ घटता है. इस समय लक्ज़री, ऑटो और फैशन सेक्टर पर दबाव देखने को मिल सकता है. वहीं स्वास्थ्य, फार्मा और एफएमसीजी जैसे डिफेंसिव सेक्टर निवेशकों को राहत मिल सकती है.

भरोसा और जोखिम साथ-साथ

18 से 22 अक्टूबर 2025 के बीच गुरु कर्क राशि में उच्च होगा. यह वही ग्रह है जो समृद्धि, ज्ञान और विस्तार का स्वामी माना गया है. बृहद् पराशर होरा शास्त्र में लिखा है कि गुरुः स्वोच्चस्थे वित्तं वर्धयेत्. यानी जब गुरु उच्च होता है, तो धन का प्रवाह बढ़ता है और आत्मविश्वास लौटता है.

बैंकिंग, कैपिटल गुड्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और फाइनेंस सेक्टर में यह ग्रह नई जान फूंक सकता है. पर याद रखें, जब भरोसा लौटता है, तब लालच भी बढ़ता है और यही वह बिंदु है जहां निवेशक गलती करते हैं.

अफवाहों और उलटफेर का समय

24 से 29 अक्टूबर के बीच बुध तुला से निकलकर वृश्चिक में प्रवेश करेगा. यह ग्रह संवाद और निर्णय का स्वामी है. भविष्य पुराण कहता है – “बुधो वृश्चिके भ्रमो व्यापारे.” इसका मतलब है कि जब बुध वृश्चिक में होता है, तो व्यापार भ्रम और अफवाहों से प्रभावित होता है. इस दौरान IT, टेक और मीडिया सेक्टर में तीखी प्रतिक्रियाएं दिख सकती हैं. एक छोटी-सी खबर या मैनेजमेंट का बयान भी शेयरों को झुला सकता है. जो लोग बिना सोचे रिएक्ट करेंगे, वे फँसेंगे.

मंगल वृश्चिक में आते ही बाजार में तेजी, टकराव एक साथ!

27 अक्टूबर से मंगल अपनी ही राशि वृश्चिक में आ रहा है. यह ग्रह ऊर्जा, साहस और क्रियाशीलता का प्रतीक है. बृहत्त संहिता में लिखा है कि मंगलो धात्वादिषु मूल्यवृद्धिकरः. यानी जब मंगल प्रबल हो, तब धातु, तेल और युद्ध-संबंधी वस्तुओं की कीमतें बढ़ती हैं.

इसका सीधा अर्थ है मेटल, डिफेन्स और एनर्जी सेक्टर में भारी हलचल देखने को मिल सकती है. तेज़ी के साथ-साथ अचानक गिरावटें भी होंगी. यह वह दौर है जहां लाभ और नुकसान दोनों पलक झपकते तय होंगे.

बाजार में बदलाव की बयार

27 नवंबर 2025 तक शनि मीन राशि में वक्री रहेंगे. शनि देव व्यवस्था और अनुशासन के प्रतीक हैं. वाराह संहिता कहती है कि वक्री शनि नृणां कर्मविलम्बं ददाति. यानी जब शनि वक्री होता है, तब कामों में देरी और भ्रम बढ़ता है. इसका असर सरकारी, PSU और पॉलिसी-ड्रिवन सेक्टर में दिखेगा. कोई बड़ा सुधार फिलहाल नहीं, लेकिन जब 27 नवंबर को शनि मार्गी होंगे, तो नीति-निर्णयों में स्पष्टता लौटेगी और बाजार को नया संतुलन मिलेगा.

ग्रहों की भाषा से समझें बाजार का मनोविज्ञान

बृहत्त संहिता के मूल्याध्याय में वराहमिहिर ने लिखा कि धन और वस्तुओं के मूल्य ग्रहों की गति से घटते-बढ़ते हैं. सरावली ग्रंथ में बुध को व्यापार और बुद्धि का कारक बताया गया है, जबकि भविष्य पुराण में गुरु को विस्तार और शुक्र को विलासिता का प्रतीक कहा गया है. आज की तारीख में ये तीनों ही मुख्य ग्रह असंतुलन की स्थिति में हैं शुक्र नीच है, गुरु उच्च है और बुध संक्रमण में, यानी बाजार की चाल एक ही दिशा में नहीं, बल्कि दो विपरीत धाराओं में बंटी हुई है.

बाजार में कौन टिका रहेगा?

इस समय निवेशक वही गलती कर सकते हैं जो इतिहास में कई बार हुई – भरोसे को लालच समझ लेना. गुरु के उच्च होने से विश्वास लौटेगा, लेकिन शुक्र की कमजोरी और बुध की उलझन यह दिखाएगी कि हर उछाल स्थायी नहीं है. केवल वही टिकेगा जिसने ठहराव और धैर्य को चुना.

आशा और भ्रम साथ-साथ

गुरुः स्वोच्चे धनवृद्धिं, शुक्रे नीचस्थे व्ययः. बुधे वृश्चिके भ्रमो व्यापारे, वक्री शनि देरीः निर्णयेषु.

इन पंक्तियों में बाजार के इस पूरे मौसम का सत्य छिपा है, धन बढ़ेगा पर विवेक घटेगा. बाजार उठेगा, पर संतुलन खो सकता है. नीति रुकेगी, पर बदलाव भी तय है.

अब क्या करें निवेशक?

जो शांति दिख रही है, वह स्थायी नहीं है. भारत और विश्व दोनों बदलाव के दौर में हैं. ज्योतिष की मानें तो गुरु भरोसा दिला रहा है, पर शुक्र संयम मांग रहा है. शनि देरी ला रहा है, पर मंगल गति देने को तैयार है. यानी अगले कुछ हफ्तों में बाजार एक ऐसी लहर से गुजरेगा जो अवसर और जोखिम दोनों साथ लाएगी.

लेकिन मैदिनी ज्योतिष के सिद्धांत के अनुसार अनुसार जब तीन ग्रह गुरु, शुक्र और शनि एक साथ परस्पर विरोधी स्थिति में हों, तब अर्थव्यवस्था दिशा बदलती है. अक्टूबर-नवंबर 2025 उसी मोड़ पर खड़ा है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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मिल गया 10 लाख डॉलर का खजाना, सालों पहले समंदर में समा गया था जहाज

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अमेरिका के फ्लोरिडा तट पर गोताखोरों की एक टीम ने समुद्र की गहराइयों में करीब 10 लाख डॉलर (लगभग ₹8.3 करोड़) मूल्य का पुराना स्पेनिश खजाना खोज निकाला है. इस टीम ने ट्रेजर कोस्ट नाम से मशहूर जल क्षेत्र में 1,000 से अधिक सोने और चांदी के सिक्के बरामद किए हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार, ये सिक्के 1715 में डूबे एक स्पेनिश बेड़े से जुड़े हैं, जो रत्नों और कीमती सामान से भरे जहाजों को लेकर स्पेन जा रहा था, लेकिन रास्ते में आए भीषण तूफान ने पूरा बेड़ा तबाह कर दिया था और खजाना समुद्र की लहरों में समा गया था.

तीन शताब्दियों पुराना खजाना दोबारा सामने आया

इतिहासकारों का मानना है कि यह खजाना बोलीविया, मेक्सिको और पेरू जैसे स्पेनिश उपनिवेशों में ढाला गया था. ये सिक्के 18वीं सदी के शुरुआती वर्षों में स्पेनिश साम्राज्य के स्वर्ण युग के प्रतीक हैं. इस खोज को खास इसलिए माना जा रहा है, क्योंकि कई सिक्कों पर उस समय की तारीखें और टकसाल के निशान (mint marks) अभी भी स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं. इतिहासकारों के लिए ये निशान उस दौर के समुद्री व्यापार, औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था और शिल्प तकनीक को समझने में अहम भूमिका निभाएंगे.

गोताखोरों की टीम ने कैसे की खोज

खोज करने वाली कंपनी क्वीन ज्वेल्स (Queen Jewels) के प्रमुख सैल गुट्टोसो ने बताया कि यह अभियान महीनों की तैयारी के बाद शुरू किया गया था. टीम ने पानी के नीचे लगे मेटल डिटेक्टरों और हाथ से चलने वाले पंखों की मदद से रेत को सावधानीपूर्वक हटाया. सैल गुट्टोसो ने कहा, ”यह खोज सिर्फ खजाने के बारे में नहीं है, बल्कि उन कहानियों के बारे में है जो इससे जुड़ी हैं. प्रत्येक सिक्का इतिहास का एक अंश है और उन लोगों से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने स्पेनिश साम्राज्य के स्वर्ण युग में जीवन जिया और समुद्रों में नौकायन किया.” नउन्होंने आगे कहा कि एक बार में 1,000 सिक्के मिलना बेहद दुर्लभ है और यह खोज इतिहास की एक महत्वपूर्ण झलक पेश करती है.

फ्लोरिडा में पहले भी मिल चुके हैं करोड़ों के खजाने

फ्लोरिडा का यह तटीय इलाका ट्रेजर कोस्ट (Treasure Coast) के नाम से जाना जाता है, क्योंकि यहां पहले भी कई बार कीमती सोने-चांदी के सिक्के मिले हैं. पिछले कुछ वर्षों में गोताखोरों और शिकारियों ने लाखों डॉलर मूल्य के खजाने खोज निकाले हैं, जो 17वीं और 18वीं सदी के डूबे हुए स्पेनिश जहाजों से जुड़े थे. यह इलाका स्पेन और अमेरिका के बीच व्यापारिक समुद्री मार्गों का हिस्सा था, जहां जहाज कीमती रत्न, सोना, चांदी और मसाले लेकर यात्रा करते थे. हर बार मिलने वाला नया खजाना न केवल इतिहास के लिए महत्वपूर्ण होता है, बल्कि स्थानीय पर्यटन उद्योग को भी नई पहचान देता है.

खजाने का स्वामित्व किसे मिलेगा?

फ्लोरिडा के कानून के मुताबिक, समुद्र में मिलने वाले खजाने के भंडार (Treasure Trove) का स्वामित्व राज्य सरकार का होता है. हालांकि, खोज करने वाली कंपनियों को Recovery Services देने की अनुमति दी जाती है, जिसके बदले उन्हें मुआवजा या पुरस्कार राशि मिलती है. साथ ही, 20% ऐतिहासिक कलाकृतियां सार्वजनिक स्वामित्व में रहती हैं ताकि उन्हें संग्रहालयों में शोध और प्रदर्शन के लिए रखा जा सके. राज्य सरकार और पुरातत्व विभाग इन खजानों को ऐतिहासिक धरोहर के रूप में सुरक्षित रखने का प्रयास करते हैं.

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ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज से बाहर होने पर मोहम्मद शमी ने तोड़ी चुप्पी, कहा- ‘मैं फिट हूं लेकिन

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भारतीय क्रिकेट टीम के सीनियर तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ दी है. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए टीम इंडिया में जगह न मिलने के बाद शमी ने साफ कहा कि फिटनेस उनकी कोई समस्या नहीं है, बल्कि चयन पूरी तरह से टीम मैनेजमेंट का फैसला है. चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के बाद से इंटरनेशनल टीम से बाहर चल रहे शमी अब घरेलू क्रिकेट के जरिए दोबारा टीम इंडिया में वापसी करने की तैयारी में हैं.

शमी ने कहा- मै तैयार हूं

अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो में शमी ने कहा,  “कई लोग पूछ रहे हैं कि मुझे ऑस्ट्रेलिया सीरीज में क्यों नहीं चुना गया. मैं बस इतना कहूंगा कि चयन मेरे हाथ में नहीं है. यह चयनकर्ताओं, कोच गौतम गंभीर और कप्तान शुभमन गिल का फैसला है. अगर उन्हें लगेगा कि मैं टीम के लिए तैयार हूं तो वे बुला लेंगे, लेकिन मैं लगातार अभ्यास कर रहा हूं और पूरी तरह तैयार हूं.”

शमी ने कहा कि सोशल मीडिया पर उनके फिटनेस को लेकर जो अफवाहें उड़ाई जा रही हैं, वो निराधार हैं. उन्होंने कहा, “कई अफवाहें और मीम्स चल रहे हैं, लेकिन मेरी फिटनेस पूरी तरह ठीक है. मैं हर दिन मेहनत कर रहा हूं और अपने शरीर पर काम कर रहा हूं.”

खराब फॉर्म और फिटनेस पर उठे सवाल

साल 2025 की शुरुआत में इंटरनेशनल क्रिकेट में वापसी के बाद से मोहम्मद शमी का प्रदर्शन खास नहीं रहा है. उन्होंने इस साल 11 वनडे मैचों में 11 विकेट लिए, जिसमें उनका औसत 30.63 का रहा. इन मैचों में उनके सर्वश्रेष्ठ आंकड़े 3/37 रहे. इसके अलावा, आईपीएल 2025 सीजन में भी शमी का प्रदर्शन फीका रहा. सनराइजर्स हैदराबाद के लिए खेलते हुए उन्होंने 9 मैचों में सिर्फ 6 विकेट ही लिए. यही वजह रही कि चयनकर्ताओं ने उन्हें इंग्लैंड टेस्ट और ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ मैचों से भी बाहर कर दिया.

वापसी के लिए तैयार है शमी

शमी ने बताया कि वह हाल ही में दलीप ट्रॉफी में पूर्वी क्षेत्र से खेले थे और उन्होंने लगभग 35 ओवर गेंदबाजी की थी. उन्होंने बताया,  “मेरी लय अच्छी थी और फिटनेस भी. मुझे नहीं लगता कि मैं किसी चीज में पीछे हूं. मैदान से दूर रहना हर खिलाड़ी के लिए कठिन होता है, लेकिन मैं मोटिवेटेड हूं और वापसी के लिए मेहनत जारी रखूंगा.”

टीम इंडिया में कब होगी वापसी?

हालांकि बीसीसीआई की मौजूदा चयन नीति में शमी का नाम फिलहाल “स्कीम ऑफ थिंग्स” से बाहर नजर आ रहा है. टीम मैनेजमेंट फिलहाल युवा तेज गेंदबाजों पर भरोसा जता रहा है, लेकिन अगर शमी घरेलू क्रिकेट में लगातार प्रदर्शन करते हैं, तो आने वाले महीनों में उनकी टी20 या टेस्ट टीम में वापसी संभव हो सकती है.

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Video: पहले कार में मारी टक्कर, फिर स्कूटी को रौंदा, गोवा में BMW कार का कहर, सामने आया वीडियो

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Goa Accident News: गोवा के मापुसा में स्थित सेंट जेवियर कॉलेज के पास एक भीषण सड़क हादसे का वीडियो सामने आया है,  जिसमें एक बीएमडब्ल्यू कार का बैलेंस बिगड़ गया और वो एक टोयोटा एटियॉस और एक यामाहा स्कूटर से टकरा गई. दावा किया जा रहा है कि इस दुर्घटना में स्कूटर सवार व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया. ये पूरी घटना सड़क पर लगे सीसीटीवी में रिकॉर्ड हो गई, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

हादसे में स्कूटर सवार व्यक्ति गंभीर रूप से घायल

बता दें कि यह हादसा मापुसा रोड पर हुआ है. वीडियो में देखा जा सकता है कि सड़क पर गाड़ियों का लगातार आना-जाना लगा हुआ है, तभी अचानक एक बीएमडब्लयू की बैलेंस बिगड़ जाता है और वो पहले टोयोटा एटियॉस कार से टकरा जाती है. फिर यामाहा स्कूटर से कार का टकराव हो जाता है और हादसे में स्कूटर सवार व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो जाता है और उसे तुरंत अस्पताल ले जाया जाता है. ये भयावह हादसा सीसीटीवी में रिकॉर्ड हो गया, जिसमें हादसे की गंभीरता को साफ देखा जा सकता है.

हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ लगी

हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो जाती है. सोशल मीडिया पर वीडियो के वायरल होने के बाद लोगों ने तरह-तरह के कमेंट्स किए है. लोगों ने हादसे को गंभीर बताया और गाड़ियों को सावधानी बरतने की सलाह दी है. दावा किया जा रहा है कि पुलिस मामले की जांच कर रही है. इस घटना ने एक बार सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

 


घर में यूज के लिए लेना है वाई-फाई कनेक्शन? जानिये कितनी होनी चाहिए स्पीड

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अगर आप घर के लिए वाई-फाई कनेक्शन लेना चाहते हैं और स्पीड को लेकर कंफ्यूज हैं तो हम इस कंफ्यूजन को दूर करने का प्रयास करेंगे. वाई-फाई कनेक्शन लेने से पहले आपको यह देख लेना जरूरी है कि इस पर कितने डिवाइस कनेक्ट होने वाले हैं. कई बार ज्यादा डिवाइस के चलते पर्याप्त इंटरनेट स्पीड नहीं मिल पाती. बता दें कि सिर्फ गेमिंग और हैवी टास्क के लिए ही हाई स्पीड होना जरूरी नहीं है. रेगुलर कामों के लिए भी हाई-स्पीड इंटरनेट की जरूरत पड़ी है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि किस काम के लिए कितनी इंटरनेट स्पीड पर्याप्त रहेगी.

होम कनेक्शन के लिए कितनी स्पीड पर्याप्त?

अगर आप मैसेजिंग, वेब ब्राउजिंग, ईमेल, वीडियो कॉलिंग और ऑनलाइन क्लासेस आदि के लिए कनेक्शन ले रहे हैं तो 10Mbps की स्पीड वाले कनेक्शन से आपका काम चल जाएगा. वहीं अगर आपको OTT पर फिल्में और वेब सीरीज आदि का मजा लेना है तो इंटरनेट स्पीड कम से कम 30Mbps तक होनी चाहिए. इसलिए होम कनेक्शन में कम से कम 30Mbps वाला प्लान लिया जा सकता है. इसके अलावा अगर आप ऑनलाइन गेमिंग या 4K स्ट्रीमिंग करते हैं तो 50Mbps तक की स्पीड की जरूरत पड़ सकती है. इस बात का भी ध्यान रखें कि 5 से ज्यादा डिवाइस पर हाई-क्वालिटी स्ट्रीमिंग के लिए यह स्पीड काफी नहीं होगी और आप 100Mbps वाला कनेक्शन ले सकते हैं.

ये होता है डाउनलोड और अपलोड स्पीड का अंतर

वाई-फाई कनेक्शन लेने से पहले आपको डाउनलोड और अपलोड स्पीड का भी पता होना चाहिए. डाउनलोड स्पीड का मतलब है कि कोई डेटा आपके डिवाइस तक कितनी स्पीड से पहुंच रहा है. डाउनलोड स्पीड कम होगी तो आपको स्ट्रीमिंग, ब्राउजिंग और डाउनलोडिंग में दिक्कत आएगी. वहीं अपलोड स्पीड का मतलब है कि आपके डिवाइस से सर्वर पर डेटा किस स्पीड में पहुंच रहा है. इसके कम होने पर वीडियो कॉल और ऑनलाइन गेमिंग की क्वालिटी खराब हो जाएगी.

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100 करोड़ का बंगला, लग्जरी गाड़ियां, इतनी अमीर हैं एवरग्रीन ब्यूटी रेखा, बिना एक्टिंग ऐसे करती

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एवरग्रीन ब्यूटी रेखा आज भी फैंस के दिलों पर राज करती हैं. रेखा ने अपने चार्म, एलिगेंस और खूबसूरती से लोगों के दिलों में जगह बनाई. उनकी एक्टिंग और फिल्में आज भी लोग देखना पसंद करते हैं. रेखा का फैशन सेंस तो हर कोई फॉलो करना चाहता है. रेखा ठाठ-बाठ से जिंदगी जीती हैं. आइए जानते हैं रेखा कितनी अमीर हैं.

रेखा की नेटवर्थ और लग्जरी गाड़ियां

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रेखा की नेटवर्थ 300 करोड़ से ज्यादा है. रेखा को लग्जरी गाड़ियों का शौक है. वो ऑडी A8, मर्सिडीज बेंज S क्लास, रोल्स रॉयस घोस्ट और BMW जैसी गाड़ियों में घूमती हैं. 

100 करोड़ का बंगला, लग्जरी गाड़ियां, इतनी अमीर हैं एवरग्रीन ब्यूटी रेखा, बिना एक्टिंग ऐसे करती हैं कमाई

रेखा का 100 करोड़ का बंगला

इसके अलावा रेखा के पास कई खूबसूरत कांजीवरम साड़ियां हैं और एक्सपेंसिव जूलरी है. रेखा अपने दौर की हाइएस्ट पेड़ एक्ट्रेसेस में से एक थी. रिपोर्ट्स थीं कि वो एक फिल्म के लिए 14 करोड़ चार्ज करती थी. इसके अलावा वो ब्रांड एंडोर्समेंट के लिए 6 करोड़ तक चार्ज करती हैं.

रेखा का मुंबई में बांद्रा में आलीशान बंगला है. इस बंगले की कीमत 100 करोड़ रुपये बताई जाती है. रेखा फिल्मों में भले ही काम नहीं करती हैं, लेकिन ब्रांड एंडोर्समेंट, शोज प्रमोशन, ओपनिंग सेरेमनी जैसी चीजों से अभी भी 65 लाख रुपये साल का कमाती हैं.

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रेखा की चर्चित फिल्में

रेखा ने इंडस्ट्री में कई शानदार फिल्में की हैं. उनकी बोल्ड अंदाज, क्लासिकल डांस और इंटेंस एक्टिंग सभी चर्चा में रही है. उनकी चर्चित फिल्मों की बात करें तो इस लिस्ट में खून भरी मांग, सिलसिला,कोई मिल गया, जुवैदा, घर, बीवी हो तो ऐसी, खिलाड़ियों का खिलाड़ी, लज्जा, मिस्टर नटवरलाल, अपना बना लो, आंचल, उमराव जान जैसी फिल्में की हैं.

बता दें कि रेखा पर्सनल लाइफ को लेकर भी खबरों में रही हैं. वो सिंगल हैं, लेकिन फिर भी सिंदूर लगाती हैं. रेखा का अफेयर अमिताभ बच्चन संग रहा था. दोनों के रिलेशनशिप की खबरें सुर्खियों में थीं. 

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Video: फोन चलाते वक्त बीच सड़क खड़ा हो गया शख्स, कार वाले ने कराए यमराज के दर्शन, देखें वीडियो

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Road Accident: सोशल मीडिया पर एक बेहद खतरनाक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसे देखकर हर कोई दंग रह गया है. यह वीडियो सड़क सुरक्षा और मोबाइल फोन की लत को लेकर एक बड़ी सीख देता है. वीडियो में देखा जा सकता है कि एक शख्स मोबाइल में इतना खोया हुआ था कि उसे अपने आस-पास की कोई परवाह नहीं थी. वह सड़क पार करते हुए भी फोन में व्यस्त रहा और बीच सड़क पर जाकर रुक गया.

टक्कर लगने से कुछ फीट ऊपर उछला शख्स

शख्स वहीं खड़े होकर मोबाइल चलाने लगा, मानो सड़क उसके लिए कोई खतरा ही नहीं हो. तभी सामने से तेज रफ्तार में एक कार आती है और उसे जोरदार टक्कर मार देती है. टक्कर इतनी भयानक थी कि शख्स उछलकर हवा में कुछ फीट ऊपर चला गया और फिर जोर से सड़क पर आ गिरा. वहां मौजूद लोग यह दृश्य देखकर सन्न रह गए.

टक्कर के बाद कार वहीं रुक गई और आस-पास के लोग तुरंत घायल व्यक्ति की मदद के लिए दौड़ पड़े. बताया जा रहा है कि शख्स को सिर और पैर में गंभीर चोटें आई हैं और उसे नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

शख्स को अस्पताल में कराया भर्ती  

बताया जा रहा है कि शख्स को सिर और पैर में गंभीर चोटें आई हैं और उसे नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. वीडियो देखने के बाद लोग सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. कोई कह रहा है कि मोबाइल ने इंसान की सोच छीन ली है, तो कोई लिख रहा है, थोड़ी सी लापरवाही, जानलेवा साबित हो सकती है. 


व्हाइट हाउस में एक से बढ़कर एक कमाने वाले, जानें राष्ट्रपति ट्रंप को मिलती है कितनी सैलरी?

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Donald Trump Salary: अमेरिकी टैरिफ को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों चर्चा में है. उन्होंने भारतीय सामानों के आयात पर 50 परसेंट टैरिफ लगाया है. इसमें से 25 परसेंट रूस से तेल की खरीद को लेकर पेनाल्टी के तौर पर लगाई गई है. ट्रंप के इन्हीं फैसलों ने दुनियाभर के शेयर बाजारों में हलचल मचा दी है.

अमेरिका दुनिया के सबसे ताकतवर देशों में से एक है इसलिए इसके फैसले का असर पूरी दुनिया की इकोनॉमी पर दिखाई देता है. ट्रंप का एक बयान दुनिया के तमाम देशों में खलबली मचाने के लिए काफी है. ऐसे में क्या आपने कभी सोचा है, जो इंसान अपने फैसले से पूरी दुनिया को हिला सकता है उसको उसके इस पावरफुल पोस्ट पर बने रहने के लिए कितनी पगार मिलती है? आइए आज हम आपको इस खबर के जरिए बताने जा रहे हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कितनी सैलरी मिलती है? 

किसे मिलती है सबसे ज्यादा तनख्वाह? 

बीते जुलाई के महीने में ट्रंप प्रशासन ने व्हाइट हाउस की एनुअल सैलरी रिपोर्ट जारी की. इसमें मौजूदा समय में व्हाइट हाउस में काम करने वाले 400 से अधिक कर्मचारियों को मिलने वाली सैलरी का जिक्र था. इस रिपोर्ट के जरिए बताया गया कि व्हाइट हाउस में किसे सबसे ज्यादा सैलरी मिलती है. रिपोर्ट में ट्रंप को मिलने वाली सैलरी की तुलना राष्ट्रपति जो बाइडेन सहित पिछले प्रशासनों के वेतन से भी की गई.

इस लिस्ट में सबसे ऊपर सीनियर एडवाइजर जैकलीन बी. क्लॉप हैं. वह सालाना 225,700 डॉलर कमाती हैं. उनके बाद एसोसिएट काउंसिल एडगर मर्कटचियन को सबसे ज्यादा 203,645 डॉलर सैलरी मिलती है. इनके बाद चीफ ऑफ स्टाफ सूसी विल्स, प्रेस सेक्रेट्री कैरोलिन लेविट, बॉर्डर जार टॉम होमन, होमलैंड सिक्योरिटी एडवाइजर स्टीफन मिलर, राष्ट्रपति के कार्मिक कार्यालय के प्रमुख सर्जियो गोर और व्यापार सलाहकार पीटर नवारो सहित 33 सीनियर ऑफिशियल्स में से हर एक को 195,200 की सैलरी मिलती है. 

ट्रंप की कितनी है सैलरी?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सालाना 400,000 डॉलर (लगभग 3.3 करोड़ रुपये) वेतन के रूप में मिलते हैं. इसके अलावा, उन्हें खर्च करने के लिए एक्सपेंस अलाउंस के तौर पर 50,000 डॉलर (लगभग 41 लाख रुपये) दिए जाते हैं. देश और दुनिया की सैर करने के लिए उन्हें 1,00,000 डॉलर (लगभग 83 लाख रुपये) उन्हें ट्रैवल अलाउंस के मिलते हैं.

19,000 डॉलर (लगभग 15 लाख रुपये) का एंटरटेनमेंट फंड भी होता है. इसके अलावा, राष्ट्रपति के तौर पर पदभार संभालने के दौरान भी एकमुश्त 1,00,000 डॉलर (लगभग 83 लाख रुपये)  रीडेकोरेटिंग अलाउंस के तौर पर दिए जाने का भी नियम है. इन सभी को मिलाकर ट्रंप का सालाना वेतन पैकेज लगभग 569,000 डॉलर हो जाता है. अपने पहले कार्यकाल के दौरान ट्रंप ने अपनी पहली सैलरी कई दूसरे सरकारी विभागों में बांट दिए थे.

 

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अमेरिका से भारत के लिए आई अच्छी खबर! टैरिफ वाले फैसले पर ट्रंप का यू टर्न, मिली बड़ी राहत

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ बम के जरिए कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित कर चुके हैं. इसका असर भारत पर भी देखने को मिला है. हालांकि, फिलहाल एक राहत भरी खबर यह है कि ट्रंप प्रशासन ने जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाने की योजना को टाल दिया है. यह फैसला भारतीय फार्मास्यूटिकल उद्योग के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, क्योंकि अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली ज्यादातर सस्ती दवाएं भारत से निर्यात होती हैं. अगर टैरिफ लगाया जाता तो भारतीय दवाएं अमेरिकी बाजार में महंगी हो जातीं और उनकी मांग घट सकती थी.

मेडिकल डेटा एनालिटिक्स कंपनी IQVIA की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में उपयोग की जाने वाली करीब 47% जेनेरिक दवाएं भारत से आती हैं. भारत की हिस्सेदारी इतनी बड़ी है कि उसे अक्सर दुनिया का दवाखाना (Pharmacy of the World) कहा जाता है. भारत की दवाओं का अमेरिका के स्वास्थ्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान है. डायबिटीज़, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और एंटीबायोटिक जैसी जीवनरक्षक दवाएं भारत की कंपनियों से भारी मात्रा में आयात की जाती हैं. इन दवाओं की कीमत अमेरिका में स्थानीय उत्पादन की तुलना में काफी कम पड़ती है, जिससे वहां के नागरिकों को राहत मिलती है.

क्यों लिया गया यह यू-टर्न?

द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाने की जांच शुरू की थी. इस जांच में न केवल तैयार दवाएं बल्कि उनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल (API) को भी शामिल किया गया था. हालांकि, जांच के बाद वाणिज्य विभाग ने इस दायरे को सीमित करने की सिफारिश की, क्योंकि कई विशेषज्ञों का मानना था कि जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाने से अमेरिका में दवाओं की कीमतें बढ़ेंगी और मार्केट में कमी (शॉर्टेज) भी हो सकती है. एक धड़ा चाहता था कि बाहरी देशों की दवाओं पर ऊंचा टैरिफ लगाकर उत्पादन अमेरिका में वापस लाया जाए, जबकि दूसरा समूह मानता था कि ऐसा कदम अमेरिकी जनता के लिए नुकसानदेह होगा.

टैरिफ वॉर और वैश्विक असर

डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति ने पिछले कुछ महीनों में वैश्विक स्तर पर सुर्खियां बटोरीं. पहले उन्होंने चीन पर आयात शुल्क लगाया, जिसके जवाब में चीन ने अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद बंद कर दी. इससे अमेरिकी किसानों को बड़ा झटका लगा और वहां के कृषि बाजार में संकट की स्थिति बन गई. इसी तरह अगर भारत पर दवाओं के टैरिफ लागू किए जाते तो इसका असर अमेरिकी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी पड़ता. भारत की सस्ती और विश्वसनीय दवाओं के बिना अमेरिकी मरीजों को वही इलाज कहीं ज्यादा महंगा पड़ता.

भारतीय फार्मा उद्योग की भूमिका

भारत का दवा उद्योग दुनियाभर में जेनेरिक दवाओं के क्षेत्र में अग्रणी है. भारत की कंपनियां न केवल अमेरिका बल्कि यूरोप, अफ्रीका और एशिया के देशों में भी सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं भेजती हैं. अमेरिकी बाजार भारत के लिए सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है, जहां अरबों डॉलर की दवाएं हर साल भेजी जाती हैं, इसलिए ट्रंप प्रशासन के फैसले को टालना भारतीय कंपनियों के लिए राहत की खबर है.

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Video: भारी पड़ गई छोटी सी लापरवाही! मां की करतूत से लिफ्ट में फंसा मासूम, वायरल वीडियो

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Social Media Viral Video: सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक महिला की छोटी सी लापरवाही के चलते एक मासूम बच्चा लिफ्ट में फंस जाता है. इस खतरनाक घटना को देखकर ये साफ होता है कि एक छोटी सी गलती कितनी भारी पड़ सकती है, जिसका हम अंदाजा भी नहीं लगा सकते हैं. ये पूरी घटना लिफ्ट में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

मासूम बच्चा लिफ्ट के अंदर अकेला फंसा

ये घटना कहां कि है इसकी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है. वीडियो में देखा जा सकता है कि एक महिला अपने छोटे बच्चे के साथ लिफ्ट में आती है और बच्चा लिफ्ट के अंदर जैसे ही आता है. महिला लिफ्ट से बाहर निकलकर कोई सामान उठाने लगती है और इस बीच वो लिफ्ट के गेट पर एक छोटी सी चीज रख देती है, ताकि लिफ्ट का गेट बंद न हो, लेकिन जैसे ही महिला लिफ्ट के बाहर जाकर कुछ सामान उठाकर अंदर लाने वाली होती है, वैसे ही लिफ्ट का गेट बंद हो जाता है और मासूम बच्चा लिफ्ट के अंदर अकेला फंस जाता है.

बच्चों के साथ लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए

सीसीटीवी फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि बच्चा अकेला लिफ्ट में फंस जाता है. ये पूरा दृश्य काफी खतरनाक और डरावना नजर आ रहा है, लेकिन अभी तक ये साफ नहीं हुआ कि बच्चे को लिफ्ट के अंदर से सही-सलामत निकाला गया या नहीं. सोशल मीडिया पर वीडियो के वायरल होने के बाद लोगों ने कहा कि बच्चों के साथ लापरवाही बिल्कुल नहीं बरतनी चाहिए, खासकर ऐसी जगहों पर जहां खतरा हो सकता है, वहीं दूसरे ने कहा कि ऐसी जगहों पर बच्चे को अकेला न छोड़े.