शेयर, म्यूचुअल फंड या डिमैट… मिलेगा सबका हिसाब एक जगह पर! जानिए कैसे काम करता है CAS

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Consolidated Account Statement: पिछले कुछ सालों में भारतीय निवेश बाजार में गजब की तेजी देखने को मिली है. आज भारतीय निवेशक परंपरागत निवेश विकल्पों के साथ-साथ शेयर बाजार पर भी अपना दांव लगा रह हैं. आज पूरे देश में लगभग 20 करोड़ से ज्यादा डिमैट अकाउंट और करीब 25 करोड़ म्यूचुअल फंड अकाउंट सक्रिय हैं.

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और नए ब्रोकरेज हाउसेस ने लोगों को निवेश के कई आसान रास्ते उपलब्ध करवाए हैं. लेकिन विभिन्न जगहों पर किए गए निवेश को ट्रैक करना और इनकी जानकारी लेना अब कई निवेशकों के लिए मुश्किल हो गया है. ऐसे में कंसॉलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट (CAS) एक ऐसा विकल्प बन कर सामने आया है. जिसके इस्तेमाल से आप अपनी इंवेस्टमेंट से संबंधित सारी जानकारी एक ही जगह पर देख सकते है. इससे निवेशकों को काफी ज्यादा सुविधा हो रही हैं. 

क्या है कंसॉलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट (CAS)?

कंसॉलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट के तहत निवेशकों को अपने डिमैट और म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट्स से संबंधित सारी जानकारी एक ही जगह पर दिखाई जाती है. निवेशक के पैन नंबर को आधार बनाकर उसके द्वारा किए गए निवेशों की जानकारी एक साथ देती है.

कंसॉलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट की शुरुआत मार्च 2015 में की गई थी.  इसकी सहायता से निवेशक अपने निवेश के प्रर्दशन, वित्तीय लेन- देन और निवेश से संबंधित अन्य जानकारी ले सकते है. 

कौन जारी करता है कंसॉलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट?

निवेशकों को कंसॉलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट उनके डिफॉल्ट डिपॉजिटरी की तरफ से भेजा जाता है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि, निवेशक ने अपना पहला डिमैट अकाउंट किस प्लेटफॉर्म पर खोला था. डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट को सूचित कर निवेशक इसे बदल भी सकते हैं.

वहीं जिन लोगों ने सिर्फ म्यूचुअल फंड में निवेश किया है, उन्हें कंसॉलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट म्यूचुअल फंड के रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंट की ओर से जारी किया जाता हैं. 

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